अटल भूजल योजना

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द्वारा प्रस्तुत Minakshi on Fri, 18/09/2026 - 17:35
केन्द्रीय सरकार CM
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अटल भूजल योजना (अटल जल)
हाइलाइट
  • अटल भूजल योजना (अटल जल) को 25 दिसंबर 2019 को शुरू किया गया था और 1 अप्रैल 2020 से लागू किया गया।
  • योजना का उद्देश्य भूजल का सही प्रबंधन, संरक्षण और बेहतर उपयोग करना था।
  • यह योजना 7 राज्यों के 80 जिलों, 229 ब्लॉकों और 8,203 ग्राम पंचायतों में लागू की गई।
  • योजना के तहत जल बजट, जल सुरक्षा योजना, भूजल की निगरानी और पानी की बचत वाली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया गया।
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  • अटल भूजल योजना (अटल जल)
योजना का अवलोकन
योजना का नामअटल भूजल योजना (अटल जल)
लॉन्च वर्ष2019
लाभ8,203 ग्राम पंचायतों में समुदाय की भागीदारी से भूजल प्रबंधन, जिसमें जल बजट तैयार करना, जल सुरक्षा योजना बनाना, भूजल की निगरानी और पानी के सही उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
लाभार्थी7 राज्यों की चुनी गई जल-संकट वाले क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों में रहने वाले समुदाय, किसान और भूजल का उपयोग करने वाले लोग।
नोडल एजेंसीजल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग
सब्सक्रिप्शनयोजना से जुड़े अपडेट पाने के लिए सब्सक्राइब करें
आवेदन का तरीकाव्यक्तिगत आवेदन की सुविधा नहीं है। योजना को चुनी गई ग्राम पंचायतों और समुदाय स्तर पर भूजल प्रबंधन की प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया गया।

योजना के बारे में

खेती, पीने के पानी और गांव के लोगों की जरूरतों के लिए भूजल बहुत जरूरी है। कई जगहों पर भूजल का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पानी को बचाने और सही तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने अटल भूजल योजना (अटल जल) शुरू की। यह योजना 25 दिसंबर 2019 को शुरू हुई और 1 अप्रैल 2020 से लागू हुई। इसका उद्देश्य पानी की कमी वाले इलाकों में लोगों की भागीदारी से भूजल को बचाना और उसका सही इस्तेमाल करना था। योजना के तहत 7 राज्यों के 80 जिलों, 229 ब्लॉकों और 8,203 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया। यहां जल बजट बनाने, जल सुरक्षा योजना तैयार करने, भूजल की निगरानी करने और पानी बचाने के तरीकों को बढ़ावा दिया गया। इस काम को केंद्र और राज्य सरकार की दूसरी योजनाओं के साथ मिलकर किया गया। यह किसी व्यक्ति को सीधे पैसे देने वाली योजना नहीं थी, बल्कि गांव के स्तर पर भूजल को बचाने और उसका बेहतर इस्तेमाल करने पर ध्यान दिया गया।

इस योजना को जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग (DoWR, RD & GR) ने लागू किया। अटल जल में लोगों की भागीदारी और पानी की मांग कम करने पर खास ध्यान दिया गया। ग्राम पंचायतों और स्थानीय लोगों ने भूजल से जुड़े आंकड़ों की मदद से जल बजट और जल सुरक्षा योजनाएं तैयार कीं। इन योजनाओं में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई तकनीक, फसल बदलना, वर्षा जल को जमा करना और भूजल को रिचार्ज करने जैसे काम शामिल थे। इन कामों को केंद्र और राज्य सरकार की पहले से चल रही योजनाओं के साथ मिलकर लागू किया गया।

अटल भूजल योजना का कुल बजट ₹6,000 करोड़ था। इसमें ₹1,400 करोड़ संस्थागत मजबूती और क्षमता बढ़ाने के लिए और ₹4,600 करोड़ प्रोत्साहन राशि के लिए रखे गए थे। यह प्रोत्साहन राशि कुछ तय कामों और नतीजों से जुड़ी थी। इनमें भूजल से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करना, जल सुरक्षा योजना बनाना, स्वीकृत योजनाओं के लिए पैसा उपलब्ध कराना, पानी बचाने वाले तरीकों को अपनाना और भूजल की स्थिति में सुधार करना शामिल था।

अटल भूजल योजना में ऐसा नहीं था कि कोई व्यक्ति सीधे ऑनलाइन आवेदन करके सब्सिडी या पैसे ले सके। हालांकि, योजना में शामिल इलाकों के किसानों को पानी बचाने वाली कुछ कृषि पद्धतियों के लिए दूसरी सरकारी योजनाओं के साथ मिलकर सहायता दी गई। सरकार के अनुसार, अक्टूबर 2021 से दिसंबर 2024 के बीच ऐसी पद्धतियों के लिए 9,78,709 प्रत्यक्ष लाभार्थियों को सहायता या सब्सिडी मिली।

अटल भूजल योजना का पायलट कार्यक्रम 1 अप्रैल 2020 से 15 अक्टूबर 2025 तक चला। इसलिए अब इसके तहत नए व्यक्तिगत आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। सरकार के आकलन के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच किए गए आकलन में योजना में शामिल 229 में से 180 ब्लॉकों में भूजल स्तर में सुधार देखा गया।

सिंचाई और पानी से जुड़ी दूसरी सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए पाठक बिहार मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के बारे में भी पढ़ सकते हैं। यह योजना बिहार के पात्र किसानों को निजी नलकूप और मोटर पंप लगाने के लिए आर्थिक सहायता देती है। यह अटल भूजल योजना से अलग योजना है और इसकी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया भी अलग है।

अटल भूजल योजना (अटल जल) की मुख्य विशेषताएं

योजना के लाभ

  • अटल भूजल योजना का पांच वर्षों के लिए कुल वित्तीय प्रावधान ₹60,000 करोड़ है। इसमें ₹30,000 करोड़ विश्व बैंक की सहायता और इतनी ही ₹30,000 करोड़ की राशि भारत सरकार द्वारा दी जाती है।
  • संस्थागत मजबूती और क्षमता निर्माण के लिए लगभग ₹14,000 करोड़ रखे गए हैं। इसका उपयोग प्रशिक्षण, समुदाय को योजना से जोड़ने और डिजिटल भूजल स्तर रिकॉर्डर, वर्षा मापक यंत्र तथा पानी की गुणवत्ता जांचने वाली किट जैसे उपकरणों के लिए किया जाता है।
  • योजना में ₹46,000 करोड़ का प्रोत्साहन घटक है। यह राशि राज्यों और ग्राम पंचायतों द्वारा तय भूजल प्रबंधन लक्ष्यों को पूरा करने से जुड़ी है।
  • भूजल की मांग कम करने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, उपचारित या दोबारा इस्तेमाल किए गए पानी का उपयोग, भूमिगत पाइपलाइन और उपयुक्त फसल विविधीकरण जैसे उपायों को बढ़ावा दिया जाता है।
  • भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण के लिए चेक डैम, परकोलेशन तालाब, कंटूर ट्रेंच, सब-सर्फेस डाइक और खेत तालाब जैसी संरचनाओं को सहायता दी जाती है।
  • राज्य स्तर की भूजल गुणवत्ता प्रयोगशालाओं को मजबूत और बेहतर बनाया जा सकता है, ताकि वे परीक्षण और कैलिब्रेशन के लिए NABL मान्यता प्राप्त कर सकें।

शर्तें

  • भाग लेने वाली ग्राम पंचायत को भूजल प्रबंधन में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) का गठन या उसे मजबूत करना होगा।
  • जल बजट नियमित रूप से तैयार किया जाना चाहिए। इसे हर मौसम के अनुसार या कम से कम साल में एक बार तैयार करना बेहतर है।
  • जल सुरक्षा योजना को स्थानीय पानी की जरूरत और प्रस्तावित कार्यों में बदलाव के अनुसार हर साल देखा और अपडेट किया जाना चाहिए।
  • सोशल ऑडिट किया जाना चाहिए, ताकि समुदाय से सुझाव लिए जा सकें और योजना से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे।
  • योजना से मिले धन का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी है। ग्राम पंचायतों को ऑडिट की गई वित्तीय रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाण पत्र भी जमा करना होता है।

अटल भूजल योजना कैसे काम करती है?

अटल भूजल योजना में समुदाय की भागीदारी से योजना तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें भूजल से जुड़े आंकड़ों को स्थानीय जानकारी और पानी की जरूरत के साथ जोड़ा गया। मुख्य रूप से भूजल की मांग को नियंत्रित करने के साथ-साथ जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज के उचित उपायों पर ध्यान दिया गया।

  • भूजल स्तर, वर्षा और पानी के उपयोग से जुड़े आंकड़े एकत्र किए गए और स्थानीय समुदायों को उपलब्ध कराए गए।
  • इन आंकड़ों की मदद से समुदाय ने उपलब्ध भूजल और स्थानीय पानी की जरूरत के बीच अंतर को समझा।
  • ग्राम पंचायतों ने स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर जल बजट और समुदाय की भागीदारी से जल सुरक्षा योजनाएं तैयार कीं।
  • इन योजनाओं में भूजल की मांग कम करने और पानी की उपलब्धता बेहतर करने के उपाय तय किए गए।
  • स्वीकृत कार्यों को संबंधित केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के साथ मिलकर लागू किया गया।
  • भूजल स्तर और योजना के तहत किए जा रहे कार्यों की नियमित निगरानी की गई, ताकि बदलावों को समझकर स्थानीय योजना में सुधार किया जा सके।
  • प्रोत्साहन घटक के लिए राज्यों के प्रदर्शन का आकलन तय किए गए Disbursement Linked Indicators (DLI) के आधार पर किया गया।

इस प्रक्रिया में भूजल की निगरानी, समुदाय की योजना और सरकारी योजनाओं के तहत किए जाने वाले कार्यों को एक साथ जोड़ा गया। इससे भूजल संरक्षण को अलग-अलग गतिविधियों के बजाय एक साथ काम करने वाली प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाया गया।

जल सुरक्षा योजना (WSP) अटल जल के तहत स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली मुख्य योजना थी। इसे ग्राम पंचायत स्तर पर समुदाय की भागीदारी से तैयार किया गया। इसमें क्षेत्र की वास्तविक भूजल स्थिति और पानी की जरूरत को ध्यान में रखा गया।

  • ग्राम पंचायत के उपलब्ध भूजल, वर्षा और पानी के उपयोग से जुड़े आंकड़ों के आधार पर योजना तैयार की गई।
  • इसमें भूजल पर पड़ रहे दबाव के मुख्य कारणों और पानी की मांग कम करने वाले क्षेत्रों की पहचान की गई।
  • मांग कम करने वाले उपायों में ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई, फसल विविधीकरण, मल्चिंग और पानी के सही उपयोग की अन्य पद्धतियां शामिल हो सकती थीं।
  • जल उपलब्धता बढ़ाने और भूजल रिचार्ज के लिए तालाब, चेक डैम, रिचार्ज शाफ्ट, रिचार्ज पिट, वर्षा जल संचयन और अन्य जल संरक्षण कार्य किए जा सकते थे।
  • प्रस्तावित कार्यों को संबंधित सरकारी योजनाओं और विभागों के साथ मिलकर आगे बढ़ाया गया।
  • भूजल की स्थिति और स्थानीय पानी की जरूरत में बदलाव के अनुसार जल सुरक्षा योजनाओं को हर साल अपडेट किया गया।

सरकार के अनुसार, योजना में शामिल सभी 8,203 ग्राम पंचायतों में समुदाय की भागीदारी से जल सुरक्षा योजनाएं तैयार की गईं और उन्हें हर साल अपडेट किया गया।

किन राज्यों और क्षेत्रों में योजना लागू हुई?

अटल भूजल योजना को पूरे देश में लागू करने के बजाय भूजल की समस्या वाले चुने हुए क्षेत्रों में पायलट कार्यक्रम के रूप में लागू किया गया। इसके तहत 7 राज्यों के 80 जिलों और 229 ब्लॉकों की 8,203 जल-संकट वाली ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया।

  • गुजरात – 6 जिले, 36 ब्लॉक और 1,873 ग्राम पंचायतें
  • हरियाणा – 14 जिले, 36 ब्लॉक और 1,647 ग्राम पंचायतें
  • कर्नाटक – 14 जिले, 41 ब्लॉक और 1,199 ग्राम पंचायतें
  • मध्य प्रदेश – 6 जिले, 9 ब्लॉक और 670 ग्राम पंचायतें
  • महाराष्ट्र – 13 जिले, 43 ब्लॉक और 1,133 ग्राम पंचायतें
  • राजस्थान – 17 जिले, 38 ब्लॉक और 1,132 ग्राम पंचायतें
  • उत्तर प्रदेश – 10 जिले, 26 ब्लॉक और 549 ग्राम पंचायतें

इन क्षेत्रों का चयन भूजल में गिरावट और पानी की कमी, संस्थागत तैयारी, पहले से मौजूद जल प्रबंधन व्यवस्था, भूजल संरक्षण के पिछले अनुभव और संबंधित क्षेत्रों की भागीदारी की इच्छा जैसे आधारों को ध्यान में रखकर किया गया। ग्राम पंचायतों का अंतिम चयन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा किया गया।

पात्रताएं

अटल भूजल योजना के लिए व्यक्तिगत आवेदन की सुविधा नहीं थी। यह योजना चुने गए जल-संकट वाले क्षेत्रों में लागू की गई, जहां ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों ने भूजल की योजना और प्रबंधन में भाग लिया। योजना में भाग लेने की मुख्य शर्तें इस प्रकार थीं:

  • ग्राम पंचायत इन 7 राज्यों में से किसी एक में होनी चाहिए: गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान या उत्तर प्रदेश
  • ग्राम पंचायत योजना के तहत चुने गए 80 जिलों और 229 ब्लॉकों में होनी चाहिए।
  • कार्यक्रम के तहत चुनी गई 8,203 जल-संकट वाली ग्राम पंचायतों में शामिल होना जरूरी था।
  • ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदायों को जल बजट तैयार करने और जल सुरक्षा योजना बनाने जैसी भूजल प्रबंधन गतिविधियों में भाग लेना था।
  • शामिल ग्राम पंचायतों के स्थानीय समुदाय, किसान और भूजल का उपयोग करने वाले लोग भूजल संरक्षण और पानी के सही उपयोग से जुड़ी गतिविधियों में भाग ले सकते थे।
  • भूजल प्रबंधन से जुड़ी सामुदायिक संस्थाओं को योजना बनाने, निगरानी करने और कार्यों को लागू करने में सहयोग करना था।
  • समुदाय के निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई थी। संबंधित निर्णय लेने वाली व्यवस्थाओं में कम से कम 33% भागीदारी की आवश्यकता थी।
  • कोई भी व्यक्ति देशभर में उपलब्ध किसी ऑनलाइन आवेदन फॉर्म के माध्यम से अटल भूजल योजना के लिए अलग से आवेदन नहीं कर सकता था।
  • पानी के सही उपयोग वाली पात्र गतिविधियों के लिए मिलने वाली सहायता, जहां उपलब्ध थी, योजना में शामिल क्षेत्रों से जुड़ी थी और संबंधित सरकारी योजनाओं के साथ मिलकर लागू की गई।

आवश्यक दस्तावेज

अटल भूजल योजना में व्यक्तिगत आवेदकों के लिए दस्तावेजों की कोई सामान्य सूची नहीं थी, क्योंकि यह योजना व्यक्तिगत आवेदन या सीधे नकद लाभ देने के लिए नहीं बनाई गई थी। इसमें भागीदारी चुनी गई ग्राम पंचायतों और समुदाय स्तर पर भूजल प्रबंधन की प्रक्रिया के माध्यम से हुई।

  • योजना में भाग लेने के लिए किसी व्यक्तिगत आवेदन फॉर्म की जरूरत नहीं थी।
  • सामान्य अटल जल आवेदन के लिए आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र या बैंक खाते जैसे किसी निश्चित व्यक्तिगत दस्तावेज की जरूरत नहीं थी।
  • ग्राम पंचायतों और सामुदायिक संस्थाओं ने जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार करने के लिए भूजल, वर्षा, पानी के उपयोग और स्थानीय संसाधनों से जुड़े आंकड़ों का उपयोग किया।
  • योजना के कार्यों के लिए जरूरी रिकॉर्ड और अन्य जानकारी संबंधित ग्राम पंचायत, जिला और राज्य स्तर की व्यवस्था के माध्यम से रखी गई।
  • जो किसान सरकारी योजनाओं के साथ मिलकर पानी के सही उपयोग वाली किसी विशेष गतिविधि के लिए सहायता प्राप्त करते थे, उन्हें उस संबंधित सरकारी योजना की पात्रता और दस्तावेज संबंधी शर्तें पूरी करनी होती थीं।

आवेदन प्रक्रिया

अटल भूजल योजना को चुनी गई ग्राम पंचायतों और समुदाय स्तर की भूजल प्रबंधन संस्थाओं के माध्यम से लागू किया गया था। इसलिए लाभ पाने के लिए लोगों को अलग से कोई आवेदन फॉर्म जमा नहीं करना था। इसमें भागीदारी चयनित स्थानीय निकायों और उनकी जल सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से हुई, न कि व्यक्तिगत ऑनलाइन पंजीकरण के जरिए।

  • सबसे पहले ग्राम पंचायत का अटल भूजल योजना के लिए चुने गए क्षेत्र में होना जरूरी था। पायलट कार्यक्रम में 7 राज्यों के 80 जिलों और 229 ब्लॉकों की 8,203 ग्राम पंचायतें शामिल थीं।
  • स्थानीय समुदायों ने भूजल स्तर, वर्षा और पानी के उपयोग से जुड़े आंकड़े जुटाने और उनका उपयोग करने में भाग लिया। इन आंकड़ों से स्थानीय जल योजना तैयार करने में मदद मिली।
  • ग्राम पंचायत ने स्थानीय क्षेत्र में पानी की उपलब्धता और उसकी जरूरत को समझने के लिए समुदाय की भागीदारी से जल बजट तैयार किया।
  • जल बजट के आधार पर समुदाय ने भूजल संरक्षण, रिचार्ज और पानी के सही उपयोग के लिए उपयुक्त उपायों वाली जल सुरक्षा योजना तैयार की। योजना के दौरान जल सुरक्षा योजनाओं को हर साल अपडेट किया गया।
  • स्वीकृत कार्यों को संबंधित राज्य सरकार द्वारा केंद्र और राज्य सरकार की उचित योजनाओं के साथ मिलकर लागू किया गया। इनमें पानी बचाने वाली सिंचाई, फसल विविधीकरण और भूजल रिचार्ज या जल संरक्षण के कार्य शामिल हो सकते थे।
  • अटल भूजल योजना में ऐसा कोई अलग ऑनलाइन आवेदन माध्यम नहीं था, जिसके जरिए कोई व्यक्ति निश्चित नकद लाभ का दावा कर सके। सरकार के अनुसार, योजना के प्रोत्साहन की राशि तय Disbursement Linked Indicators को पूरा करने के आधार पर भाग लेने वाले राज्यों को जारी की गई।
  • पानी के सही उपयोग वाली पात्र गतिविधियों के लिए सहायता पाने वाले किसानों को संबंधित स्थानीय व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के माध्यम से भाग लेना होता था। सहायता पाने की शर्तें उस योजना या गतिविधि पर निर्भर करती थीं जिसके तहत सहायता दी गई।
  • अटल भूजल योजना का पायलट कार्यक्रम 1 अप्रैल 2020 से 15 अक्टूबर 2025 तक लागू रहा। इसलिए अब इसके तहत नए व्यक्तिगत आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं।

पूरी हो चुकी योजना, इसके कवरेज, कार्यान्वयन और भूजल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी के लिए पाठक जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। सरकार के नवीनतम आकलन के अनुसार, यह एक तय अवधि के लिए चलाया गया पायलट कार्यक्रम था और अब व्यक्तिगत लाभ के लिए इसकी आवेदन प्रक्रिया चालू नहीं है।

ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों की भूमिका

अटल जल योजना में ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। केवल सरकारी विभागों द्वारा योजना बनाने के बजाय, स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र की भूजल स्थिति समझने और उसके अनुसार जरूरी उपाय तय करने में शामिल किया गया।

  • ग्राम पंचायतों ने भूजल से जुड़े आंकड़े जुटाने, उनकी निगरानी करने और उन्हें सार्वजनिक करने में भाग लिया।
  • स्थानीय समुदायों ने जल बजट और जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने में हिस्सा लिया।
  • समुदायों ने स्थानीय भूजल स्थिति के आधार पर पानी की मांग कम करने और पानी की उपलब्धता बढ़ाने वाले उपायों की पहचान करने में मदद की।
  • ग्राम पंचायतों ने टिकाऊ भूजल उपयोग से जुड़े जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यों में सहयोग किया।
  • स्थानीय लोगों की भागीदारी से बेहतर सिंचाई, फसल विविधीकरण और पानी बचाने वाली अन्य पद्धतियों को बढ़ावा मिला।
  • समुदाय स्तर पर निगरानी से भूजल की स्थिति और तय किए गए कार्यों की प्रगति पर नजर रखने में मदद मिली।
  • समुदाय की भागीदारी और योजना के कार्यान्वयन में सहयोग के लिए जिला स्तर के कार्यान्वयन भागीदारों, जिनमें गैर-सरकारी संगठन (NGOs) भी शामिल थे, को जोड़ा गया।

इस समुदाय आधारित मॉडल का उद्देश्य भूजल प्रबंधन को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी न रखकर स्थानीय स्तर पर सभी की साझा जिम्मेदारी बनाना था।

महत्वपूर्ण लिंक

संपर्क जानकारी

अटल भूजल योजना से जुड़े सवालों के लिए जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग की आधिकारिक डायरेक्टरी में अटल जल कार्यालय की जानकारी दी गई है। चूंकि योजना का पायलट कार्यक्रम पूरा हो चुका है, इसलिए व्यक्तिगत आवेदन हेल्पलाइन के बजाय यह कार्यालय योजना से जुड़ी जानकारी के लिए अधिक उपयुक्त संपर्क है।

अटल भूजल योजना (अटल जल)
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग

  • फोन: 011-24320293
  • ईमेल: [email protected]
  • पता: अटल भूजल योजना, छठी मंजिल, MDSS (MTNL) बिल्डिंग, CGO कॉम्प्लेक्स, प्रगति विहार, नई दिल्ली - 110003

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अटल भूजल योजना, जिसे अटल जल भी कहा जाता है, भारत सरकार की एक योजना थी। इसका उद्देश्य लोगों की भागीदारी से भूजल का बेहतर और टिकाऊ प्रबंधन करना था।
 

योजना 25 दिसंबर 2019 को शुरू हुई थी और 1 अप्रैल 2020 से लागू की गई थी।
 

इसका मुख्य उद्देश्य भूजल का संरक्षण, सही उपयोग और बेहतर प्रबंधन करना था। इसके लिए जल बजट, जल सुरक्षा योजना, भूजल निगरानी और पानी बचाने वाली तकनीकों को बढ़ावा दिया गया।
 

यह योजना गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लागू की गई थी।
 

इस योजना के तहत 80 जिलों, 229 ब्लॉकों और 8,203 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया था।
 

नहीं। यह सामान्य व्यक्तिगत आवेदन या सीधे पैसे देने वाली योजना नहीं थी। इसे चयनित ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों के माध्यम से लागू किया गया था। हालांकि, कुछ किसानों को पानी की बचत वाली कृषि पद्धतियों के लिए सहायता मिली थी।
 

जल सुरक्षा योजना ग्राम पंचायत स्तर पर बनाई जाने वाली योजना थी। इसमें भूजल की स्थिति, पानी की जरूरत और उपलब्धता को ध्यान में रखकर भूजल संरक्षण, रिचार्ज और पानी के बेहतर उपयोग के उपाय तय किए जाते थे।
 

योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, फसल विविधीकरण, मल्चिंग और पानी बचाने वाली अन्य कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया गया। अक्टूबर 2021 से दिसंबर 2024 के बीच 9,78,709 प्रत्यक्ष लाभार्थियों को ऐसी पद्धतियों के लिए सहायता या सब्सिडी मिलने की जानकारी सरकार ने दी थी।
 

योजना का कुल बजट ₹6,000 करोड़ था। इसमें ₹1,400 करोड़ संस्थागत मजबूती और क्षमता निर्माण तथा ₹4,600 करोड़ प्रोत्साहन घटक के लिए रखे गए थे।
 

नहीं। योजना का पायलट कार्यक्रम 1 अप्रैल 2020 से 15 अक्टूबर 2025 तक चला था। इसलिए अब इस योजना के तहत नए व्यक्तिगत आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं।
 

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