- गैर-मोटर चालित लकड़ी की मछली पकड़ने वाली नाव या एफआरपी नाव की स्वीकृत परियोजना लागत पर 40% तक सब्सिडी प्रदान की जाती है
- मछली पकड़ने के जाल, लाइफ जैकेट, आइस बॉक्स तथा अन्य स्वीकृत मत्स्य उपकरणों की खरीद के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
- योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में स्वीकृत परियोजना लागत बढ़ाकर ₹70,350 कर दी गई है।
- मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश फोन: 05222740067
- ईमेल: [email protected]
- उत्तर प्रदेश मत्स्य जीवी सहकारी संघ: फोन: 05224568521
योजना का सारांश | |
|---|---|
| योजना का नाम | उत्तर प्रदेश निषादराज बोट सब्सिडी योजना |
| लाभ | बिना मोटर वाली लकड़ी की मछली पकड़ने वाली नाव या एफआरपी (FRP) नाव तथा उससे संबंधित उपकरणों की खरीद पर 40% सब्सिडी |
| लाभार्थी | उत्तर प्रदेश के मछुआरे, मत्स्य पालक तथा पारंपरिक नौकायन समुदाय के सदस्य |
| सब्सक्रिप्शन | योजना से जुड़ी अपडेट प्राप्त करने के लिए यहाँ सब्सक्राइब करें . |
| आवेदन का माध्यम | मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट |
योजना के बारे में
उत्तर प्रदेश निषादराज बोट सब्सिडी योजना, मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित एक वित्तीय सहायता योजना है, जिसका उद्देश्य मछुआरों, मत्स्य पालकों और पारंपरिक नौकायन समुदायों को उनकी आजीविका के लिए आवश्यक नावों और मत्स्य उपकरणों की खरीद में सहायता प्रदान करना है। यह योजना उन लोगों के लिए बनाई गई है जो मछली पालन, मत्स्याखेट तथा उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए नदियों, जलाशयों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों पर निर्भर हैं।
इस योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को बिना मोटर वाली लकड़ी की मछली पकड़ने वाली नाव या फाइबर रिइनफोर्स्ड प्लास्टिक (FRP) नाव खरीदने के लिए स्वीकृत परियोजना लागत का 40% अनुदान प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही मछली पकड़ने और सुरक्षा से जुड़े आवश्यक उपकरण जैसे मछली पकड़ने के जाल, लाइफ जैकेट, आइस बॉक्स तथा अन्य स्वीकृत सहायक उपकरणों पर भी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इन परिसंपत्तियों की लागत कम करके यह योजना राज्य के मछुआरा समुदायों की आय और कार्य परिस्थितियों में सुधार लाने का प्रयास करती है।
यह योजना 40:60 के वित्तीय भागीदारी मॉडल पर आधारित है, जिसके तहत स्वीकृत परियोजना लागत का 40% हिस्सा राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है तथा शेष 60% राशि लाभार्थी को स्वयं वहन करनी होती है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में स्वीकृत इकाई लागत ₹67,000 थी, जिसे वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़ाकर ₹70,350 कर दिया गया। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार नावों और मत्स्य उपकरणों की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए इकाई लागत में हर वर्ष संशोधन किया जाता है।
निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, कश्यप, धीमर, बाथम, रैकवार, मांझी, गोडिया, कहार, तुरैहा और तुराहा जैसे पारंपरिक मछुआरा समुदायों से संबंधित लाभार्थियों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा अंत्योदय राशन कार्ड धारकों तथा ऐसे पात्र परिवारों को भी प्राथमिकता प्रदान की जाती है जिनके पास स्थायी आवास नहीं है। इस सहायता के माध्यम से सरकार का उद्देश्य आजीविका के अवसरों को मजबूत करना, सुरक्षित मत्स्याखेट को बढ़ावा देना तथा उत्तर प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। निषादराज बोट सब्सिडी योजना के लाभार्थियों को मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, उत्तर प्रदेश हस्तशिल्प कौशल विकास प्रशिक्षण योजना तथा उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना जैसी योजनाओं में भी अवसर मिल सकते हैं। ये सभी योजनाएं मिलकर उद्यमिता, कौशल विकास और आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं तथा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में आर्थिक विकास और वित्तीय सुरक्षा के लिए व्यापक आधार तैयार करती हैं।
योजना के लाभ
- स्वीकृत परियोजना लागत पर 40% सब्सिडी।
- बिना मोटर वाली लकड़ी की मछली पकड़ने वाली नाव या एफआरपी (FRP) नाव खरीदने के लिए वित्तीय सहायता।
- आवश्यक मत्स्याखेट एवं सुरक्षा उपकरणों पर सब्सिडी।
निम्नलिखित मदों के लिए सहायता उपलब्ध है:
- लकड़ी की मछली पकड़ने वाली नाव।
- एफआरपी नाव (फाइबर रिइनफोर्स्ड प्लास्टिक नाव)।
- मछली पकड़ने के जाल।
- लाइफ जैकेट।
- आइस बॉक्स।
- अन्य स्वीकृत मत्स्य उपकरण एवं सहायक सामग्री।
- वित्तीय वर्ष 2022-23 में स्वीकृत इकाई लागत ₹67,000 थी।
- योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार इकाई लागत में प्रतिवर्ष 5% की वृद्धि की जाती है।
- वित्तीय वर्ष 2026-27 तक इकाई लागत में कुल 20% की वृद्धि हो जाएगी।
- लाभार्थी को मत्स्य उपकरणों की खरीद लागत कम करने के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
- यह योजना मछुआरों और नौकायन समुदायों की आय बढ़ाने के अवसर प्रदान करती है।
पात्रताएँ
- आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- आवेदक मत्स्य पालन, मछली पकड़ने या नौकायन से संबंधित गतिविधियों में संलग्न होना चाहिए।
- कम से कम 0.4 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले पट्टे के तालाब पर अधिकार रखने वाले मत्स्य पालक पात्र हैं।
- निजी तालाब के मालिक पात्र हैं।
- मत्स्याखेट एवं नौकायन गतिविधियों में संलग्न मछुआरा समुदाय के सदस्य पात्र हैं।
- आवेदक के पास पहले से कोई नाव नहीं होनी चाहिए।
- जिन आवेदकों को किसी अन्य सरकारी योजना के अंतर्गत नाव खरीदने के लिए पहले सहायता प्राप्त हो चुकी है, वे पात्र नहीं होंगे।
- जहां लागू हो, आवेदक का संबंध किसी पारंपरिक मछुआरा या नौकायन समुदाय से होना चाहिए।
प्राथमिकता श्रेणियां
लाभार्थियों के चयन में निम्नलिखित क्रम में प्राथमिकता दी जाती है:
- पारंपरिक मछुआरा समुदायों से संबंधित अंत्योदय राशन कार्ड धारक।
- पारंपरिक मछुआरा समुदायों के ऐसे पात्र आवेदक जिनके पास स्थायी आवास नहीं है।
- पारंपरिक मछुआरा समुदायों से संबंधित अन्य पात्र आवेदक।
- मत्स्य पालन एवं मछली पकड़ने से जुड़े पारंपरिक व्यवसाय करने वाले अन्य व्यक्ति।
पात्र समुदाय
निम्नलिखित पारंपरिक मछुआरा समुदायों से संबंधित आवेदकों को प्राथमिकता दी जाती है:
- निषाद
- मल्लाह
- केवट
- बिंद
- कश्यप
- धीमर
- बाथम
- रैकवार
- मांझी
- गोडिया
- कहार
- तुरैहा
- तुराहा
आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड।
- उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र / अधिवास प्रमाण पत्र।
- परिवार आईडी (जहां लागू हो)।
- बैंक खाते की पासबुक।
- मोबाइल नंबर।
- पासपोर्ट आकार का फोटो।
- जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।
- तालाब पट्टा दस्तावेज (पट्टाधारकों के लिए)।
- विभाग द्वारा मांगे जाने पर मत्स्य पालन से संबंधित अन्य आवश्यक दस्तावेज।
चयन प्रक्रिया
- लाभार्थियों का चयन जिला स्तरीय समिति (DLC) द्वारा किया जाता है।
- समिति की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी (CDO) करते हैं।
- संबंधित अधिकारियों द्वारा आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।
- निर्धारित प्राथमिकता श्रेणियों के अनुसार पात्र आवेदकों की सूची तैयार की जाती है।
- अंतिम लाभार्थी सूची मत्स्य विभाग द्वारा प्रकाशित की जाती है।
- विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार सब्सिडी सीधे पात्र लाभार्थियों के खाते में हस्तांतरित की जाती है।
आवेदन प्रक्रिया
पात्र मछुआरे, मत्स्य पालक और नौकायन समुदाय से जुड़े व्यक्ति उत्तर प्रदेश निषादराज बोट सब्सिडी योजना के लिए मत्स्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:
- सबसे पहले मत्स्य विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं और उपलब्ध योजनाओं की सूची में से निषादराज बोट सब्सिडी योजना का चयन करें।
- योजना से संबंधित दिशा-निर्देश, पात्रता और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ें। इसके बाद"आवेदन करें" विकल्प पर क्लिक करें।
- यदि आपने पहले से प्रोफाइल नहीं बनाई है, तो आधार संख्या, नाम, जन्मतिथि, श्रेणी, मोबाइल नंबर तथा अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करके अपनी प्रोफाइल पूरी करें।
- प्रोफाइल सफलतापूर्वक तैयार होने के बाद दोबारा योजनाओं की सूची में जाएं और निषादराज बोट सब्सिडी योजना को चुनें।
- अब आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें। आवेदन करते समय यह सुनिश्चित करें कि दी गई जानकारी आपके दस्तावेजों से मेल खाती हो।
- इसके बाद आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), तालाब पट्टा दस्तावेज तथा अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्र अपलोड करें।
- सभी जानकारी और दस्तावेजों की एक बार अच्छी तरह जांच कर लें। किसी प्रकार की त्रुटि न होने पर आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा कर दें।
- आवेदन जमा होने के बाद मत्स्य विभाग द्वारा आपके आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।
- सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र आवेदकों का चयन विभाग द्वारा निर्धारित नियमों और प्राथमिकता श्रेणियों के अनुसार किया जाएगा।
- चयनित लाभार्थियों को योजना के तहत स्वीकृत सब्सिडी का लाभ विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रदान किया जाएगा।
महत्वपूर्ण बिंदु
- इस योजना के अंतर्गत केवल बिना मोटर वाली नावें ही शामिल हैं।
- स्वीकृत नाव की लंबाई सामान्यतः 15 से 18 फीट के बीच होती है।
- यदि वास्तविक लागत स्वीकृत इकाई लागत से अधिक होती है, तो अतिरिक्त राशि का भुगतान लाभार्थी को स्वयं करना होगा।
- नाव और उपकरणों की आपूर्ति के लिए मत्स्य विभाग द्वारा स्वीकृत विक्रेताओं (Empanelled Vendors) का चयन किया जाता है।
- चयन बजट की उपलब्धता और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति पर निर्भर करता है।
महत्वपूर्ण लिंक
- मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट।
- आधिकारिक पोर्टल पर निषादराज बोट सब्सिडी योजना का विवरण।
- उत्तर प्रदेश निषादराज बोट सब्सिडी योजना दिशा-निर्देश।
- उत्तर प्रदेश निषादराज बोट सब्सिडी योजना का संक्षिप्त विवरण एवं जानकारी।
संपर्क विवरण
मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश
- पता: 7, अयोध्या रोड, बाबूगंज, हसनगंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226007
- फोन: 5222740067
- ईमेल: [email protected]
उत्तर प्रदेश मत्स्यजीवी सहकारी संघ
- पता: विकल्प खंड-2, गोमती नगर, मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान के निकट, कठौता झील के पास, लखनऊ – 226010
- फोन: 5224568521
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह योजना उत्तर प्रदेश के मछुआरों और नाविकों को नाव खरीदने तथा मत्स्य उपकरणों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है।
योजना के अंतर्गत गैर-मोटर चालित लकड़ी की नाव या एफआरपी (FRP) नाव की स्वीकृत परियोजना लागत पर 40% तक सब्सिडी दी जाती है।
उत्तर प्रदेश के पात्र मछुआरे, नाविक, निषाद, मल्लाह तथा मत्स्य व्यवसाय से जुड़े अन्य लाभार्थी इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
वित्तीय वर्ष 2023-24 के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्वीकृत परियोजना लागत ₹70,350 निर्धारित की गई है।
नहीं, योजना के तहत मछली पकड़ने के जाल, लाइफ जैकेट, आइस बॉक्स तथा अन्य स्वीकृत मत्स्य उपकरणों के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
नहीं, इस योजना में केवल गैर-मोटर चालित लकड़ी की नाव और एफआरपी नाव पर ही सब्सिडी का प्रावधान है।
पात्र आवेदक मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करके आवेदन कर सकते हैं।
आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, पासपोर्ट आकार फोटो, मोबाइल नंबर तथा विभाग द्वारा मांगे गए अन्य दस्तावेज़ आवश्यक हो सकते हैं।
इस योजना का संचालन मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है।
योजना की अधिक जानकारी के लिए आवेदक मत्स्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर 0522-2740067 या उत्तर प्रदेश मत्स्य जीवी सहकारी संघ के नंबर 0522-4568521 पर संपर्क कर सकते हैं।
अगर योजनाओं के बारे में आपका कोई सवाल है, तो उसे योजना के फोरम में सबमिट करें और जवाब पाएँ:
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- सवाल पूछें: अगर आपके मन में योजना से जुड़ा कोई सवाल है या आप इस विषय के किसी पहलू के बारे में और जानकारी चाहते हैं।
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| जाति | लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | सरकार |
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