- प्रति गोवंश ₹1,500 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता।
- सहायता राशि DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में।
- एक व्यक्ति अधिकतम 4 गोवंश पाल सकता है, यानी ₹6,000 प्रतिमाह तक कमाई।
- गाय का दूध बेचकर अतिरिक्त आय का अवसर।
- बेसहारा पशुओं द्वारा फसल नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं में कमी।
- पशुपालन विभाग हेल्पलाइन नंबर:
- 0522-2740482
- टोल फ्री नंबर : 1800-180-5141
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना |
| शुरू होने का वर्ष | 2019 |
| लाभार्थी | उत्तर प्रदेश के किसान, पशुपालक, कुपोषित परिवार एवं इच्छुक नागरिक |
| लाभ | प्रति गोवंश ₹1,500 प्रतिमाह DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे। |
| आवेदन का तरीका | ऑफलाइन आवेदन पत्र के माध्यम से। |
योजना के बारे में
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2019 में मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना की शुरुआत की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना को प्रदेश में सड़कों पर आवारा घूमने वाले गोवंश की समस्या से निपटने के उद्देश्य से लागू किया। योजना का मूल विचार बेहद सरल है, जो व्यक्ति बेसहारा गाय या बैल को अपने घर पर रखकर उसका पालन-पोषण करे, सरकार उस व्यक्ति को हर महीने आर्थिक सहायता दे।
2012 की पशुगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 205.66 लाख गोवंश हैं, जिनमें से लगभग 10 से 12 लाख गोवंश निराश्रित और बेसहारा अवस्था में थे। ये पशु खेतों में घुसकर फसलों को नष्ट करते थे और सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते थे। किसानों की इसी पीड़ा को देखते हुए योगी सरकार ने यह योजना तैयार की।
योजना के पहले चरण में सरकार ने एक लाख बेसहारा पशुओं को इच्छुक किसानों और पशुपालकों को सौंपने का लक्ष्य रखा। इस पूरी योजना पर सरकार ने 109 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान किया। योजना के तहत गोवंश पालने वाले व्यक्ति को हर महीने ₹1,500 प्रति गोवंश की दर से DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भुगतान किया जाता है। यदि कोई लाभार्थी 4 गोवंश पालता है, तो उसे हर महीने ₹6,000 की सहायता राशि मिलती है। इसके अलावा यदि वह गाय का दूध बेचता है तो उसकी अतिरिक्त आमदनी भी होती है।
योजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे पोषण मिशन से भी जोड़ा गया है। जिन परिवारों में कुपोषित बच्चे हैं, उन्हें दुधारू गाय सुपुर्द की जाती है ताकि बच्चों को पौष्टिक दूध मिल सके। गोपाष्टमी के अवसर पर 22 नवंबर 2020 को स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना के तहत 11 कुपोषित परिवारों को गायें सौंपीं थीं।
प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी (DM) और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CMVO) को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने जिले में ऐसे इच्छुक किसानों, पशुपालकों और स्वयंसेवकों की पहचान करें जो निराश्रित गोवंश पालने के लिए तैयार हों। गोवंश सुपुर्दगी से पहले प्रत्येक पशु की कान में टैगिंग (Ear Tagging) की जाती है ताकि योजना में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी न हो और गोवंश की सही पहचान बनी रहे।
अब तक इस योजना के अंतर्गत सरकार ₹1875.51 करोड़ से अधिक की राशि लाभार्थियों को जारी कर चुकी है, जो यह दर्शाता है कि यह योजना जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से चल रही है।
योजना के लाभ
- प्रति गोवंश ₹1,500 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता।
- सहायता राशि DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में।
- एक व्यक्ति अधिकतम 4 गोवंश पाल सकता है, यानी ₹6,000 प्रतिमाह तक कमाई।
- गाय का दूध बेचकर अतिरिक्त आय का अवसर।
- कुपोषित परिवारों को दुधारू गाय मिलने से बच्चों को पोषण।
- बेसहारा पशुओं द्वारा फसल नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं में कमी।
- पशु पालन का अनुभव रखने वाले लोगों को आजीविका का साधन।
पात्रताएं
- उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य।
- आवेदक किसान, पशुपालक या इच्छुक नागरिक हो सकते हैं।
- पोषण मिशन के अंतर्गत कुपोषित परिवार भी पात्र हैं।
- आवेदक के पास पशु रखने का पर्याप्त स्थान होना चाहिए।
- गोवंश पालन का अनुभव होना आवश्यक है।
- दूध समिति (Milk Committee) से जुड़े व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाती है।
- एक व्यक्ति को अधिकतम 4 गोवंश ही दिए जाएंगे (नवजात बछड़े की गणना नहीं होगी)।
- बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक होना अनिवार्य।
आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड
- निवास प्रमाण पत्र
- बैंक पासबुक (आधार लिंक्ड खाता)
- पासपोर्ट साइज फोटो
- भूमि/स्थान संबंधी दस्तावेज (जहाँ गोवंश रखा जाएगा)
- मोबाइल नंबर
आवेदन प्रक्रिया
इस योजना में आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑफलाइन है। कोई केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध नहीं है। इस योजना में चयन जिला प्रशासन के स्तर पर होता है। नीचे दी गई प्रक्रिया को ध्यान से पढ़ें।
- संबंधित अधिकारी से संपर्क करें: सबसे पहले अपने ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (BDO) या नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जाएं और योजना के बारे में जानकारी लें। इसके अलावा आप जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CMVO) से भी संपर्क कर सकते हैं।
- आवेदन पत्र प्राप्त करें और भरें: संबंधित कार्यालय से "बेसहारा गोवंश के भरण-पोषण हेतु इच्छुक किसान/पशुपालक/अन्य व्यक्तियों के चयन का आवेदन पत्र" प्राप्त करें। इसमें अपना नाम, पता, आधार संख्या, बैंक खाता विवरण, पशु रखने के स्थान का विवरण और इच्छित गोवंश संख्या सही-सही भरें।
- दस्तावेज संलग्न करें: भरे हुए आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड की फोटोकॉपी, बैंक पासबुक की कॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और निवास प्रमाण पत्र संलग्न करें।
- कार्यालय में जमा करें: पूरा आवेदन अपने ब्लॉक के पशु चिकित्सा अधिकारी या जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CMVO) कार्यालय में जमा करें। आवेदन और दस्तावेजों की तुरंत जांच की जाती है और आवेदक को दूरभाष पर भी सूचित किया जाता है।
- सत्यापन एवं चयन: जिलाधिकारी के निर्देश पर पशु चिकित्सा अधिकारी यह सत्यापित करते हैं कि आवेदक के पास पशु रखने की पर्याप्त जगह है और उसे गोपालन का अनुभव है। दूध समिति से जुड़े व्यक्तियों और प्रशिक्षित पशुमित्रों को प्राथमिकता दी जाती है।
- गो-आश्रय स्थल से गोवंश की सुपुर्दगी: चयन के बाद आवेदक को जिले में स्थापित स्थाई/अस्थाई गो-आश्रय स्थल (गौशाला) से गोवंश सुपुर्द किए जाते हैं। गौशाला संचालक भी आवेदक की योग्यता जाँचता है। गोवंश की कान में Ear Tagging होने के बाद सुपुर्दगी प्रमाण पत्र तैयार किया जाता है। ध्यान रहे, सुपुर्द किए गए गोवंश को किसी भी परिस्थिति में बेचा नहीं जाएगा और न ही खुला छोड़ा जाएगा। बीमार होने पर तुरंत पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचित करना अनिवार्य है, उपचार जिला पशुपालन विभाग द्वारा निःशुल्क दिया जाएगा।
- सहायता राशि का भुगतान: सुपुर्दगी के बाद हर महीने ₹1,500 प्रति गोवंश की दर से DBT के जरिए आपके आधार लिंक्ड बैंक खाते में राशि सीधे ट्रांसफर होती है।
नोट: इस योजना में आवेदन के लिए कोई ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध नहीं है। आवेदन के लिए केवल अपने ब्लॉक के BDO / पशु चिकित्सा अधिकारी या जिले के CMVO कार्यालय में ही सम्पर्क करें।
महत्वपूर्ण लिंक
संपर्क जानकारी
- पशुपालन विभाग हेल्पलाइन नंबर:
- 0522-2740482
- टोल फ्री नंबर : 1800-180-5141
- पशुपालन विभाग ईमेल: [email protected]
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक योजना है जिसके तहत सड़कों पर आवारा घूमने वाले बेसहारा गोवंश को इच्छुक किसानों और पशुपालकों को सुपुर्द किया जाता है। गोवंश पालने वाले व्यक्ति को सरकार प्रति गोवंश ₹900 प्रतिमाह की सहायता राशि देती है।
इस योजना में ₹1,500 प्रतिमाह प्रति गोवंश की दर से DBT के जरिए बैंक खाते में राशि भेजी जाती है। एक व्यक्ति अधिकतम 4 गोवंश पाल सकता है, जिससे ₹6,000 प्रतिमाह तक मिल सकते हैं।
एक व्यक्ति को अधिकतम 4 गोवंश ही दिए जाएंगे। नवजात बछड़े या बछड़ी की इस गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
इस योजना में आवेदन ऑफलाइन होता है। अपने ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (BDO) या नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जाकर आवेदन पत्र प्राप्त करें, भरकर जमा करें। कोई केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध नहीं है।
हाँ, बैंक खाता अनिवार्य है और वह आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए, क्योंकि सहायता राशि DBT के जरिए सीधे खाते में भेजी जाती है।
सुपुर्दगी से पहले प्रत्येक गोवंश के कान में Ear Tagging की जाती है। यह टैग प्रत्येक पशु की अलग पहचान सुनिश्चित करता है और धोखाधड़ी को रोकता है।
अगर योजनाओं के बारे में आपका कोई सवाल है, तो उसे योजना के फोरम में सबमिट करें और जवाब पाएँ:
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यह फोरम निम्न कामों के लिए एक बेहतरीन जगह है:
- सवाल पूछें: अगर आपके मन में योजना से जुड़ा कोई सवाल है या आप इस विषय के किसी पहलू के बारे में और जानकारी चाहते हैं।
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हम आपको इस फ़ोरम में सक्रिय रूप से भाग लेने और इस बेहतरीन रिसोर्स का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते है।
| लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | सरकार |
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टिप्पणियाँ
Govansh
gavansh
gavansh sarkari yojna
Hi govtschemes.in…
Kisan
हिंदी
Oke
Bharat sarkar se prathna hai ki kam ho jay
प्रार्थी। के पास तीन गाय है। इसी कारण वह परेशान है तीन के नीचे आज छपरा के नीचे बनते हैं उसे हम और हमें एक सरिया भी दिलाया जाए
यही हमारी आपसे यही गुजारिश है कि हमारा सुनो हमारी सुनवाई हो जाए
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