- पात्र लाभार्थियों को विवाह के लिए ₹50,000 का एकमुश्त प्रोत्साहन अनुदान।
- सामान्य व्यक्ति द्वारा दिव्यांग व्यक्ति से विवाह करने तथा पात्र दिव्यांग दंपति दोनों योजना के लिए पात्र हैं।
- कम से कम 40% दिव्यांगता वाले पात्र आवेदकों को योजना का लाभ दिया जाता है।
- उत्तराखण्ड समाज कल्याण विभाग हेल्पलाइन नंबर :- 05946-297051.
- उत्तराखण्ड समाज कल्याण विभाग हेल्पडेस्क ईमेल :- [email protected].
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | उत्तराखण्ड दिव्यांग युवक/युवती विवाह प्रोत्साहन योजना |
| शुरू होने का वर्ष | 2014 |
| लाभ | विवाह के लिए ₹50,000 का एकमुश्त प्रोत्साहन अनुदान |
| लाभार्थी | दिव्यांग युवक/युवती |
| नोडल विभाग | समाज कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड सरकार |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करें। |
| आवेदन का तरीका | ऑफलाइन (समाज कल्याण विभाग के माध्यम से) |
योजना के बारे में
उत्तराखण्ड दिव्यांग युवक/युवती विवाह प्रोत्साहन योजना समाज कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह को प्रोत्साहित करना, उनके सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना तथा विवाह के बाद आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित जोड़ों को एकमुश्त ₹50,000 का वैवाहिक प्रोत्साहन अनुदान प्रदान किया जाता है, जिससे वे अपने नए वैवाहिक जीवन की शुरुआत आर्थिक रूप से अधिक सशक्त तरीके से कर सकें। राज्य में इस योजना को "दिव्यांग वैवाहिक प्रोत्साहन अनुदान योजना" और "दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना" के नाम से भी पहचाना जाता है।
पहले इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को विवाह के लिए ₹25,000 की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती थी। दिव्यांग व्यक्तियों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अब इस योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया है। यह सहायता दिव्यांग युवक से सामान्य युवती अथवा दिव्यांग युवती से सामान्य युवक के विवाह पर उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त यदि वर एवं वधु दोनों दिव्यांग हैं, तो निर्धारित पात्रता की सभी शर्तें पूरी होने पर वे भी योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह को प्रोत्साहित करना, आर्थिक सहयोग प्रदान करना तथा समाज में समान अवसर सुनिश्चित करना है। इस योजना के अतिरिक्त राज्य सरकार निर्माण श्रमिक विवाह सहायता योजना के माध्यम से प्रदेश की निर्माण श्रमिकों की बेटियों को भी विवाह हेतु आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।
दिव्यांग वैवाहिक प्रोत्साहन अनुदान योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक का उत्तराखण्ड का मूल निवासी अथवा निर्धारित अवधि से राज्य का निवासी होना आवश्यक है। दिव्यांग व्यक्ति के पास कम से कम 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता का सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र होना चाहिए। विवाह विधिसम्मत होना चाहिए, वर की न्यूनतम आयु 21 वर्ष तथा वधु की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त आवेदक आयकरदाता नहीं होना चाहिए तथा योजना की अन्य निर्धारित पात्रता शर्तों का पालन करना आवश्यक है।
आवेदन के समय विवाह प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक खाते का विवरण, पासपोर्ट आकार का फोटो तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद समाज कल्याण विभाग द्वारा पात्रता एवं दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। आवेदन स्वीकृत होने पर प्रोत्साहन अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है, जिससे लाभ वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी बनी रहती है।
यदि आप उत्तराखण्ड दिव्यांग युवक/युवती विवाह प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो इस लेख में योजना की नवीनतम सहायता राशि, पात्रता, लाभ, आवश्यक दस्तावेज, आवेदन प्रक्रिया, महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश, आधिकारिक जानकारी तथा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों की विस्तृत जानकारी दी गई है, जिससे आप आवेदन करने से पहले योजना की सभी आवश्यक शर्तों को आसानी से समझ सकें।
योजना के लाभ
- पात्र लाभार्थियों को विवाह के लिए ₹50,000 का एकमुश्त वैवाहिक प्रोत्साहन अनुदान प्रदान किया जाता है।
- स्वीकृत अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है।
- योजना दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह को प्रोत्साहित करने तथा उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में सहायक है।
- यह योजना विवाह के बाद लाभार्थियों को आर्थिक सहयोग प्रदान कर उनके नए वैवाहिक जीवन की शुरुआत को अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायता करती है।
पात्रताएं
- आवेदक उत्तराखण्ड का मूल निवासी होना चाहिए या राज्य में कम से कम 5 वर्ष से निवास कर रहा होना चाहिए।
- विवाह में दिव्यांग युवक अथवा दिव्यांग युवती में से किसी एक के पास कम से कम 40% या उससे अधिक दिव्यांगता का वैध प्रमाण पत्र होना चाहिए।
- योजना का लाभ निम्नलिखित विवाहित जोड़ों को दिया जाता है:
- दोनों में से किसी एक के दिव्यांग होने पर या
- दोनों के दिव्यांग होने पर।
- विवाह के समय वर की आयु कम से कम 21 वर्ष तथा वधु की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- आवेदन के समय वर एवं वधु की आयु 45 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- विवाह विधिक रूप से वैध या प्रचलित रीति-रिवाजों के अनुसार सम्पन्न होना चाहिए।
- आवेदन के समय किसी भी आवेदक का जीवित पति या पत्नी नहीं होना चाहिए।
- आवेदक आयकरदाता नहीं होना चाहिए।
- विवाहित जोड़े में से कोई भी व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्ध नहीं होना चाहिए।
- दिव्यांग व्यक्ति के पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
आवश्यक दस्तावेज
- उत्तराखण्ड का स्थायी निवास प्रमाण पत्र अथवा राज्य में कम से कम 5 वर्ष के निवास का प्रमाण।
- वर एवं वधु का आधार कार्ड।
- दिव्यांग व्यक्ति का 40% या उससे अधिक दिव्यांगता प्रमाण पत्र।
- यू.डी.आई.डी. कार्ड (यदि उपलब्ध हो)।
- विवाह प्रमाण पत्र अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी विवाह का प्रमाण।
- संयुक्त अथवा संबंधित लाभार्थी के बैंक खाते का विवरण (पासबुक की प्रति)।
- दोनों आवेदकों के पासपोर्ट आकार के नवीनतम फोटो।
- मोबाइल नंबर।
- आयकरदाता न होने का स्व-घोषणा पत्र (यदि विभाग द्वारा मांगा जाए)।
- अन्य दस्तावेज, जो समाज कल्याण विभाग या जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा आवेदन के सत्यापन के समय मांगे जाएं।
नोट: आवेदन के सत्यापन के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी अतिरिक्त दस्तावेज या मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए कह सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने वाले आवेदकों को दस्तावेजों की स्पष्ट स्कैन प्रतियां अपलोड करनी होती हैं।
आवेदन प्रक्रिया
उत्तराखण्ड दिव्यांग युवक/युवती विवाह प्रोत्साहन योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र आवेदक को निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना होगा:
- आवेदन पत्र समाज कल्याण विभाग अथवा सहायक समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय से प्राप्त करना होगा।
- आवेदन पत्र में वर एवं वधु से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी सही-सही भरनी होगी।
- आवेदन पत्र के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने होंगे।
- पूर्ण रूप से भरा हुआ आवेदन पत्र संबंधित सहायक समाज कल्याण अधिकारी या जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में जमा करना होगा।
- विभाग द्वारा आवेदन एवं दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।
- सत्यापन के बाद आवेदन को जिला स्तरीय समिति के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
- आवेदन स्वीकृत होने पर प्रोत्साहन अनुदान राशि लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित कर दी जाएगी।
महत्वपूर्ण पत्र
महत्वपूर्ण लिंक
- उत्तराखण्ड समाज कल्याण विभाग पोर्टल।
- उत्तराखण्ड दिव्यांग युवक/युवती विवाह प्रोत्साहन योजना दिशानिर्देश।
संपर्क जानकारी
- उत्तराखण्ड समाज कल्याण विभाग हेल्पलाइन नंबर :- 05946-297051.
- उत्तराखण्ड समाज कल्याण विभाग हेल्पडेस्क ईमेल :- [email protected].
- समाज कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड
मानपुर पुरब, रामपुर रोड हल्द्वानी,
नियर दैनिक जागरण/अमर उजाला प्रैस हल्द्वानी,
जनपद-नैनीताल उत्तराखण्ड.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह उत्तराखण्ड सरकार की एक कल्याणकारी योजना है, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को विवाह के लिए ₹50,000 का एकमुश्त प्रोत्साहन अनुदान प्रदान किया जाता है।
सामान्य (गैर-दिव्यांग) व्यक्ति द्वारा दिव्यांग व्यक्ति से विवाह करने पर तथा पात्र दिव्यांग दंपति को योजना का लाभ दिया जाता है।
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए दिव्यांग व्यक्ति के पास कम से कम 40% या उससे अधिक दिव्यांगता का वैध प्रमाण पत्र होना चाहिए।
पात्र लाभार्थियों को ₹50,000 का एकमुश्त वैवाहिक प्रोत्साहन अनुदान प्रदान किया जाता है।
नहीं। योजना का लाभ केवल निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने वाले उत्तराखण्ड के पात्र निवासियों को ही दिया जाता है।
आवेदन स्वीकृत होने के बाद प्रोत्साहन अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है।
नहीं, दोनों दम्पति से एक के दिव्यांग होने की स्थिति पर भी इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते है।
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| लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | योजना का प्रकार | सरकार |
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