उत्तराखंड दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना

द्वारा प्रस्तुत Rishabh on Fri, 03/07/2026 - 16:49
Pushkar Singh Dhami CM Uttarakhand
Scheme Open
Uttarakhand Deen Dayal Upadhyay Grah Aawas Vikas Yojana Image
हाइलाइट
  • अधिकतम ₹10 लाख तक की पूंजीगत सब्सिडी।
  • अधिकतम 5 वर्षों तक ब्याज अनुदान।
  • नए एवं मौजूदा होम स्टे के लिए वित्तीय सहायता।
  • 3 वर्षों तक एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति एवं प्रशिक्षण सहायता।
ग्राहक देखभाल फ़ोन नंबर
  • उत्तराखंड स्वरोजगार योजनाएं टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर: 7617576909
  • उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड हेल्पलाइन
    • 1364
    • 91-135-1364 (अन्य राज्यों के लिए)
    • दूरभाष नंबर: 0135-2552626
योजना का अवलोकन
योजना का नामउत्तराखंड दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना
लाभ
  • अधिकतम ₹10 लाख तक की पूंजीगत सब्सिडी।
  • अधिकतम 5 वर्षों तक ब्याज अनुदान।
  • नए एवं मौजूदा होम स्टे के लिए वित्तीय सहायता।
  • पहले 3 वर्षों तक एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति।
  • प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार एवं विपणन सहायता।
लाभार्थीउत्तराखंड के स्थायी निवासी।
नोडल विभागउत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (यूटीडीबी)
सब्सक्रिप्शनयोजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे।
आवेदन का तरीकाऑनलाइन माध्यम से।

योजना के बारे में

उत्तराखंड दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना उत्तराखंड सरकार द्वारा शुरू की गई एक स्वरोजगार एवं पर्यटन प्रोत्साहन योजना है। इस योजना का संचालन उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (UTDB) द्वारा किया जाता है। योजना का उद्देश्य राज्य के स्थायी निवासियों को अपने घर में होम स्टे स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे पर्यटकों को आवास सुविधा प्रदान करके अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। यह योजना ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने तथा पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन को कम करने में भी मदद करती है। साथ ही, पर्यटकों को उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति, स्थानीय खान-पान, आतिथ्य और जीवनशैली का अनुभव भी मिलता है।

उत्तराखंड होम स्टे योजना के तहत पात्र आवेदकों को नया होम स्टे स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा, पुराने भवन के विस्तार, मरम्मत, आधुनिकीकरण, पुनर्निर्माण तथा होम स्टे के लिए शौचालय निर्माण हेतु भी सहायता उपलब्ध है। पर्वतीय क्षेत्रों के लाभार्थियों को परियोजना लागत का अधिकतम 33% या ₹10 लाख (जो भी कम हो) तक पूंजीगत सब्सिडी दी जाती है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों के लाभार्थियों को परियोजना लागत का अधिकतम 25% या ₹7.50 लाख (जो भी कम हो) तक पूंजीगत सब्सिडी मिलती है।

योजना के तहत बैंक ऋण पर देय वार्षिक ब्याज का 50% तक ब्याज अनुदान अधिकतम 5 वर्षों के लिए निर्धारित सीमा के अनुसार दिया जाता है। बैंक ऋण प्राप्त करने के लिए आवेदक को परियोजना लागत का 12.50% स्वयं के अंशदान के रूप में जमा करना होता है। इसके अतिरिक्त, पंजीकृत होम स्टे संचालकों को आतिथ्य प्रशिक्षण, विपणन (मार्केटिंग) सहायता, आधिकारिक होम स्टे पोर्टल के माध्यम से प्रचार-प्रसार तथा योजना के प्रावधानों के अनुसार पहले 3 वर्षों तक होम स्टे से होने वाली आय पर देय राज्य जीएसटी (SGST) की प्रतिपूर्ति का लाभ भी दिया जाता है।

उत्तराखंड के स्थायी निवासी, जो योजना की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदक एवं उसका परिवार प्रस्तावित होम स्टे में निवास करता हो तथा होम स्टे पंजीकरण की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक है। वित्तीय सहायता सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवेदन का सत्यापन एवं अनुमोदन होने के बाद ही प्रदान की जाती है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, पूर्व सैनिक एवं दिव्यांग श्रेणी के पात्र आवेदकों को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षण का लाभ भी दिया जाता है।

पात्र आवेदक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले पात्रता, सब्सिडी, आवश्यक दस्तावेज तथा आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी अवश्य पढ़ लें। इस योजना के अलावा राज्य सरकार वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना, वीर उद्यमी योजना तथा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना जैसी अन्य योजनाओं के माध्यम से भी स्वरोजगार एवं वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

योजना के लाभ

  • योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को होम स्टे स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • योजना के तहत पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाती है।
    • पर्वतीय क्षेत्र: परियोजना लागत का अधिकतम 33%, अधिकतम ₹10 लाख तक।
    • मैदानी क्षेत्र: परियोजना लागत का अधिकतम 25%, अधिकतम ₹7.50 लाख तक।
  • योजना के तहत बैंक ऋण पर देय वार्षिक ब्याज का 50% तक ब्याज अनुदान अधिकतम 5 वर्षों के लिए उपलब्ध है।
    • पर्वतीय क्षेत्र: अधिकतम ₹1.50 लाख प्रति वर्ष।
    • मैदानी क्षेत्र: अधिकतम ₹1 लाख प्रति वर्ष।
  • नए होम स्टे के निर्माण तथा मौजूदा भवन के विस्तार, मरम्मत, आधुनिकीकरण, पुनर्निर्माण एवं शौचालय निर्माण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
  • योजना के प्रावधानों के अनुसार पंजीकृत होम स्टे से होने वाली आय पर देय राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की पहले 3 वर्षों तक प्रतिपूर्ति की जाती है।
  • होम स्टे स्थापित करने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती है।
  • पंजीकृत होम स्टे संचालकों को अतिथि सत्कार संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  • पंजीकृत होम स्टे का प्रचार-प्रसार आधिकारिक होम स्टे पोर्टल एवं अन्य पर्यटन प्रचार गतिविधियों के माध्यम से किया जाता है।
  • योजना के तहत बैंक ऋण प्राप्त करते समय आवेदक को परियोजना लागत का 12.50% स्वयं के अंशदान के रूप में जमा करना होता है।

पात्रताएं

  • आवेदक उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • आवेदक एवं उसका परिवार प्रस्तावित होम स्टे में निवास करता हो।
  • जिस भूमि या भवन में होम स्टे स्थापित किया जाना है, उसका स्वामित्व आवेदक के पास होना चाहिए।
  • वर्ष 2021 के संशोधन के अनुसार, यदि भूमि निकट संबंधी के नाम पर है और वह सह-उधारकर्ता या गारंटर बनता है अथवा संपत्ति वैध पट्टे (लीज) पर है, जिसकी अवधि ऋण चुकौती अवधि से अधिक है, तो भी योजना का लाभ लिया जा सकता है।
  • आवेदक किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था का ऋण चूककर्ता (डिफॉल्टर) नहीं होना चाहिए।
  • योजना के तहत नया होम स्टे स्थापित करने अथवा मौजूदा भवन के विस्तार, मरम्मत, आधुनिकीकरण, पुनर्निर्माण एवं शौचालय निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त की जा सकती है।
  • पारंपरिक उत्तराखंडी (पहाड़ी) वास्तुकला शैली में निर्मित या विकसित होम स्टे को प्राथमिकता दी जाती है।
  • अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, पूर्व सैनिक एवं दिव्यांग श्रेणी के आवेदकों को राज्य सरकार के नियमानुसार आरक्षण का लाभ मिलता है।
  • वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए होम स्टे का उत्तराखंड होम स्टे नियमों के अंतर्गत पंजीकृत होना आवश्यक है।
  • होम स्टे में न्यूनतम 1 तथा अधिकतम 6 अतिथि कक्ष होने चाहिए, जिनमें अधिकतम 12 बिस्तरों की व्यवस्था हो।

आवश्यक दस्तावेज

  • उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाण पत्र।
  • प्रस्तावित होम स्टे की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) या परियोजना लागत का विवरण।
  • सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत भवन का नक्शा।
  • वित्तपोषण करने वाले बैंक द्वारा जारी सहमति पत्र या ऋण स्वीकृति पत्र।
  • भूमि स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज, जैसे खतौनी, खसरा या अन्य वैध स्वामित्व प्रमाण।
  • आवेदक का शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र।
  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।
  • पूर्व सैनिक प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।
  • दिव्यांगता प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।
  • आवेदक का नवीनतम पासपोर्ट आकार का फोटो।

नोट: आवेदन के सत्यापन या ऋण स्वीकृति के दौरान संबंधित प्राधिकारी अथवा बैंक परियोजना की आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकता है।

आवेदन प्रक्रिया

उत्तराखंड के पात्र निवासी मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना पोर्टल के माध्यम से उत्तराखंड दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

  • मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  • होम पेज पर उपलब्ध योजनाओं की सूची में से "दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना" का चयन करें।
  • योजना से संबंधित जानकारी आपकी स्क्रीन पर प्रदर्शित होगी। सभी जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ें और "योजना हेतु आवेदन करें" बटन पर क्लिक करें।
  • अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और प्राप्त ओटीपी के माध्यम से उसका सत्यापन करें।
  • मोबाइल नंबर सत्यापित होने के बाद आवेदन फॉर्म आपकी स्क्रीन पर खुल जाएगा।
  • आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरें तथा आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करें।
  • आवेदन फॉर्म की सभी जानकारियों की जांच करने के बाद उसे ऑनलाइन जमा करें।
  • आवेदन जमा करने के बाद आवेदन संख्या अथवा पावती सुरक्षित रखें, ताकि भविष्य में उसका उपयोग किया जा सके।
  • संबंधित विभाग द्वारा आवेदन एवं दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। आवश्यकता होने पर स्थल निरीक्षण भी किया जा सकता है।
  • जिला स्तरीय चयन समिति आवेदन की जांच करेगी तथा पात्र आवेदकों का साक्षात्कार लेकर प्रस्ताव की अनुशंसा करेगी।
  • स्वीकृति मिलने के बाद आवश्यकता अनुसार प्रस्ताव संबंधित बैंक को ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा।
  • बैंक द्वारा ऋण स्वीकृत होने एवं आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पर्यटन विभाग योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र पूंजीगत सब्सिडी जारी करेगा।
  • योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्यटन विभाग द्वारा सत्यापन के बाद ब्याज अनुदान संबंधित बैंक के माध्यम से प्रदान किया जाएगा।

महत्वपूर्ण लिंक

संपर्क जानकारी

  • उत्तराखंड स्वरोजगार योजनाएं टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर: 7617576909
  • उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड हेल्पलाइन
    • 1364
    • 91-135-1364 (अन्य राज्यों के लिए)
    • दूरभाष नंबर: 0135-2552626
  • उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड ईमेल: [email protected]

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह उत्तराखंड सरकार की स्वरोजगार एवं पर्यटन प्रोत्साहन योजना है। इस योजना के तहत पात्र निवासियों को होम स्टे स्थापित करने या उसका उन्नयन करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

उत्तराखंड के स्थायी निवासी, जो योजना की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों के पात्र आवेदकों को परियोजना लागत का अधिकतम 33% (अधिकतम ₹10 लाख) तथा मैदानी क्षेत्रों के आवेदकों को परियोजना लागत का अधिकतम 25% (अधिकतम ₹7.50 लाख) तक पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाती है।

हाँ। योजना के तहत बैंक ऋण पर देय वार्षिक ब्याज का 50% तक ब्याज अनुदान अधिकतम 5 वर्षों के लिए निर्धारित सीमा के अनुसार प्रदान किया जाता है।

हाँ। योजना के तहत मौजूदा भवन के विस्तार, मरम्मत, आधुनिकीकरण, पुनर्निर्माण तथा शौचालय निर्माण के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध है।

हाँ। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक एवं उसका परिवार प्रस्तावित होम स्टे में निवास करता होना चाहिए।

होम स्टे में न्यूनतम 1 तथा अधिकतम 6 अतिथि कक्ष होने चाहिए, जिनमें अधिकतम 12 बिस्तरों की व्यवस्था हो सकती है।

पात्र आवेदक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर सकते हैं, आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं तथा आवेदन जमा कर सकते हैं।

हाँ। योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए होम स्टे का उत्तराखंड होम स्टे नियमों के अंतर्गत पंजीकृत होना आवश्यक है।

नहीं। इस योजना के तहत होम स्टे स्थापित करने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन कराने की आवश्यकता नहीं होती है।

हाँ। योजना के प्रावधानों के अनुसार पंजीकृत होम स्टे से होने वाली आय पर देय राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की पहले तीन वर्षों तक प्रतिपूर्ति की जाती है।

पात्र आवेदक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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