कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम

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द्वारा प्रस्तुत Minakshi on Thu, 29/10/2026 - 15:28
Narendra Modi PM of India
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 कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम
हाइलाइट
  • कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम को वर्ष 2009–10 में पायलट योजना के रूप में शुरू किया गया था।
  • 2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, पात्र नारियल के पेड़ों पर ₹1,900 से ₹3,700 तक का बीमा कवर मिलता है।
  • योजना के तहत टॉल, ड्वार्फ और हाइब्रिड किस्मों के पात्र नारियल के पेड़ों का बीमा कराया जा सकता है।
  • संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, नारियल विकास बोर्ड प्रीमियम का 85% और किसान 15% भुगतान करता है।
ग्राहक देखभाल फ़ोन नंबर
योजना का अवलोकन
योजना का नामकोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम (CPIS)
शुरू होने का वर्ष2009–10 (शुरुआत में पायलट योजना के रूप में शुरू की गई थी)
लाभ2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, योजना की शर्तों के अधीन प्रत्येक नारियल के पेड़ पर ₹3,700 तक का बीमा कवर मिलता है।
लाभार्थीपात्र, स्वस्थ और फल देने वाले नारियल के पेड़ों वाले किसान और नारियल उत्पादक।
नोडल एजेंसीनारियल विकास बोर्ड (CDB)
सब्सक्रिप्शनयोजना से जुड़े अपडेट पाने के लिए यहाँ सब्सक्राइब करें
आवेदन का तरीकाक्षेत्र में योजना उपलब्ध होने पर एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) या संबंधित कृषि/बागवानी विभाग के माध्यम से ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है।

योजना के बारे में

भारत में कई किसानों की आजीविका नारियल की खेती पर निर्भर करती है। लेकिन नारियल के पेड़ उगाने में कई तरह के जोखिम भी होते हैं। चक्रवात, बाढ़, भारी बारिश, सूखा, कीट और बीमारियाँ स्वस्थ नारियल के पेड़ों को नुकसान पहुँचा सकती हैं। इनके कारण पेड़ मर सकते हैं या फल देना बंद कर सकते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है। इन जोखिमों से किसानों को बचाने में मदद करने के लिए कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम (Coconut Palm Insurance Scheme - CPIS) शुरू की गई है। इस योजना के तहत पात्र नारियल के पेड़ों को तय प्राकृतिक आपदाओं और अन्य कवर किए गए जोखिमों के खिलाफ बीमा सुरक्षा दी जाती है। 2026 के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार, 4–15 साल पुराने पेड़ों पर ₹1,900 प्रति पेड़ और 16–60 साल पुराने पेड़ों पर ₹3,700 प्रति पेड़ का बीमा कवर मिलता है। संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, आम तौर पर एक ही जुड़े हुए क्षेत्र में कम से कम 10 स्वस्थ और फल देने वाले नारियल के पेड़ होने चाहिए, जबकि पुराने दिशा-निर्देशों में कम से कम 5 पेड़ों की शर्त दी गई है। आवेदन करने से पहले किसानों को लागू बीमा कवर और पात्रता की शर्तों की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम को 2009–10 में पायलट योजना के रूप में शुरू किया गया था। इसे भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत नारियल विकास बोर्ड (CDB), एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) और संबंधित राज्य के कृषि या बागवानी विभागों के सहयोग से लागू करता है। इस योजना में तय आयु और स्वास्थ्य संबंधी शर्तें पूरी करने वाले टॉल, ड्वार्फ और हाइब्रिड नारियल के पेड़ शामिल हैं। प्रकाशित दिशा-निर्देशों के अनुसार, ड्वार्फ और हाइब्रिड पेड़ों की उम्र 4–60 साल तथा टॉल पेड़ों की उम्र 7–60 साल होनी चाहिए। 2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों में नारियल विकास बोर्ड द्वारा बीमा प्रीमियम का 85% और किसान द्वारा बाकी 15% भुगतान करने का प्रावधान है। हालांकि, संशोधित दस्तावेज में रुपये में देय प्रीमियम की सही राशि नहीं दी गई है और पुराने सरकारी विवरणों में प्रीमियम बाँटने की अलग व्यवस्था बताई गई है। इसलिए पॉलिसी लेने से पहले किसानों को मौजूदा प्रीमियम, बीमा कवर और नामांकन की शर्तों की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम में आवेदन करने के लिए पात्र किसान AIC, नारियल विकास बोर्ड के नजदीकी कार्यालय या अपने स्थानीय कृषि अथवा बागवानी विभाग से संपर्क कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया आम तौर पर ऑफलाइन होती है। इसके लिए भरा हुआ बीमा प्रस्ताव फॉर्म, नारियल के पेड़ों का विवरण, जमीन या बागान से जुड़े रिकॉर्ड, पहचान प्रमाण और किसान के हिस्से के प्रीमियम का भुगतान करना होता है। संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, आवेदन करने वाले किसानों को बागान में प्रत्येक पेड़ को नंबर देना होगा। आम तौर पर बीमा कवर नामांकन के अगले महीने की पहली तारीख से शुरू होता है। किसानों को बीमा नुकसान की सूचना तय समय सीमा के भीतर देनी चाहिए और बीमा कंपनी की जाँच प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। आवेदन फॉर्म, मौजूदा प्रीमियम और क्लेम से जुड़ी जानकारी के लिए नारियल विकास बोर्ड या संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी से संपर्क करें।

नारियल की खेती करने वाले किसानों और इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए केरा सुरक्षा इंश्योरेंस स्कीम भी उपयोगी हो सकती है। CPIS योजना में पात्र नारियल के पेड़ों का बीमा किया जाता है, जबकि केरा सुरक्षा इंश्योरेंस स्कीम नारियल के पेड़ों पर चढ़ने वाले श्रमिकों, नारियल तोड़ने वाले कामगारों, नीरा तकनीशियनों और नारियल क्षेत्र से जुड़े अन्य पात्र श्रमिकों को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा देती है। इन दोनों योजनाओं की जानकारी लेने से किसान और श्रमिक समझ सकते हैं कि नारियल की खेती और उससे जुड़े कामों के लिए किस तरह की बीमा सुरक्षा उपलब्ध है।

योजना के लाभ

कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम (CPIS) किसानों को तय प्राकृतिक आपदाओं और अन्य कवर किए गए जोखिमों से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद करती है। इस योजना के मुख्य लाभ नीचे दिए गए हैं:

  • 2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, 4–15 साल पुराने नारियल के पेड़ों पर ₹1,900 प्रति पेड़ और 16–60 साल पुराने पेड़ों पर ₹3,700 प्रति पेड़ का बीमा कवर मिलता है।
  • इस योजना में तूफान, चक्रवात, बाढ़, भारी बारिश, बिजली गिरने, आग, भूकंप, भूस्खलन, कीट और बीमारियों जैसे तय जोखिमों से सुरक्षा मिलती है।
  • संशोधित दिशा-निर्देशों में जंगली जानवरों के हमले को भी कवर किए गए जोखिमों में शामिल किया गया है। हालांकि, दस्तावेज में जानवरों से होने वाले नुकसान को लेकर अलग-अलग और आपस में विरोधाभासी प्रावधान हैं। किसानों को बीमा कंपनी से इसकी पुष्टि करनी चाहिए।
  • कवर की गई घटना के कारण बीमित पेड़ मर जाने या हमेशा के लिए फल देने लायक न रहने पर, पॉलिसी की शर्तों के अनुसार मुआवजा मिल सकता है।
  • संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि सक्षम अधिकारी द्वारा सूखे की आधिकारिक घोषणा की जाती है, तो सूखे से उत्पादन में हुए नुकसान के लिए बीमित राशि का 25% मुआवजा दिया जा सकता है।
  • बीमा प्रीमियम में सब्सिडी मिलने से किसानों पर भुगतान का बोझ कम होता है। संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, नारियल विकास बोर्ड प्रीमियम का 85% और किसान बाकी 15% भुगतान करता है।
  • इस योजना में पात्र टॉल, ड्वार्फ और हाइब्रिड नारियल के पेड़ों का बीमा किया जा सकता है। ये पेड़ अकेले उगाए गए हों, दूसरी फसलों के साथ हों, खेत की मेड़ पर हों या घर के आसपास लगे हों, सभी शामिल हो सकते हैं।
  • संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, अधिकतम तीन साल तक की बीमा पॉलिसी ली जा सकती है। दो साल की पॉलिसी पर 7% और तीन साल की पॉलिसी पर 12% की प्रीमियम छूट दी जाती है।
  • यह योजना किसानों को अचानक होने वाले नुकसान से निपटने और नारियल की खेती में लगाए गए अपने पैसे को सुरक्षित रखने में मदद करती है।

ध्यान दें: 2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों में रुपये में देय प्रीमियम की सही राशि नहीं दी गई है। आवेदन करने से पहले मौजूदा प्रीमियम, बीमा कवर और लागू शर्तों की पुष्टि नारियल विकास बोर्ड या संबंधित बीमा एजेंसी से करें।

बीमित राशि और प्रीमियम की दरें

कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम (CPIS) के तहत मिलने वाली बीमा राशि नारियल के पेड़ की उम्र पर निर्भर करती है। नारियल विकास बोर्ड के 2026 के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देशों में पुराने दिशा-निर्देशों की तुलना में बीमा राशि और प्रीमियम बाँटने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। योजना में नामांकन करने से पहले किसानों को यह पता कर लेना चाहिए कि उनके क्षेत्र में कौन-सी दरें लागू हैं।

विवरण

पुराने दिशा-निर्देश

2026 के संशोधित दिशा-निर्देश

4–15 साल पुराने पेड़ की बीमित राशि

₹900 प्रति पेड़

₹1,900 प्रति पेड़

16–60 साल पुराने पेड़ की बीमित राशि

₹1,750 प्रति पेड़

₹3,700 प्रति पेड़

नारियल विकास बोर्ड का प्रीमियम में योगदान

50%

85%

राज्य सरकार का प्रीमियम में योगदान

25%

अलग से योगदान का उल्लेख नहीं है

किसान का प्रीमियम में योगदान

25% (यदि राज्य सरकार योगदान नहीं देती है, तो यह 50% तक हो सकता है)

15%

प्रति पेड़ सालाना प्रीमियम

4–15 साल के पेड़ों के लिए ₹9 और 16–60 साल के पेड़ों के लिए ₹14

संशोधित दिशा-निर्देशों में राशि नहीं बताई गई है

दो साल की पॉलिसी पर छूट

7.5%

7%

तीन साल की पॉलिसी पर छूट

12.5%

12%

पुरानी प्रीमियम व्यवस्था के अनुसार, यदि 50:25:25 के अनुपात में प्रीमियम बाँटने की सामान्य व्यवस्था लागू होती है, तो 4–15 साल के प्रत्येक पेड़ के लिए किसान का सालाना हिस्सा ₹2.25 और 16–60 साल के प्रत्येक पेड़ के लिए ₹3.50 होता है। संशोधित दिशा-निर्देशों में नया प्रीमियम रुपये में नहीं बताया गया है। इसलिए मौजूदा प्रीमियम की पुष्टि किए बिना पुरानी दरों के आधार पर किसान के हिस्से की गणना नहीं करनी चाहिए।

बीमित राशि का मतलब उस रकम से है जिसके लिए पात्र पेड़ का बीमा किया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर नुकसान हुए पेड़ के लिए अपने आप पूरी राशि मिल जाएगी। मुआवजा इस बात पर निर्भर करता है कि नुकसान किस घटना से हुआ, नुकसान का आकलन क्या रहा और पॉलिसी की कौन-सी शर्तें लागू होती हैं।

कौन-से जोखिम कवर होते हैं और किन मामलों में बीमा नहीं मिलता?

खराब मौसम, प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों से नारियल के पेड़ों को गंभीर नुकसान हो सकता है। कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम उन तय जोखिमों से सुरक्षा देती है जिनके कारण बीमित पेड़ मर जाता है, उसे ऐसा नुकसान होता है जिससे वह दोबारा ठीक नहीं हो सकता या वह फल देने लायक नहीं रहता। हालांकि, हर तरह के नुकसान पर मुआवजा नहीं मिलता।

योजना के दिशा-निर्देशों में नीचे दिए गए जोखिम शामिल हैं, लेकिन इन पर लागू पॉलिसी की शर्तें भी देखनी जरूरी हैं:

  • तूफान, ओलावृष्टि, चक्रवात, टाइफून, बवंडर और भारी बारिश।
  • बाढ़ और पानी भरने से होने वाला नुकसान।
  • कीटों का बड़े स्तर पर हमला और ऐसी बीमारियाँ जिनसे नारियल के पेड़ों को गंभीर और स्थायी नुकसान होता है।
  • आकस्मिक आग, जिसमें जंगल या झाड़ियों में लगने वाली आग और बिजली गिरने से होने वाला नुकसान शामिल है।
  • भूकंप, भूस्खलन और सुनामी।
  • भीषण सूखा। 2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों में सक्षम अधिकारी द्वारा सूखे की आधिकारिक घोषणा होने पर उत्पादन में हुए नुकसान के लिए बीमित राशि का 25% मुआवजा देने का प्रावधान भी है।
  • 2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों में जंगली जानवरों के हमले को कवर किए गए जोखिमों में शामिल किया गया है। हालांकि, इसी दस्तावेज में जानवरों से होने वाले नुकसान को बाहर रखने वाला प्रावधान भी है। किसानों को अपनी पॉलिसी में लागू शर्तों की पुष्टि करनी चाहिए।

योजना के दिशा-निर्देशों में नीचे दिए गए नुकसान और परिस्थितियों को बीमा से बाहर रखा गया है:

  • चोरी, युद्ध, आक्रमण, गृहयुद्ध, दंगे, विद्रोह और जानबूझकर किया गया नुकसान।
  • परमाणु प्रतिक्रिया, विकिरण और रेडियोधर्मी पदार्थों से होने वाला प्रदूषण।
  • विमान या अन्य गिरने वाली वस्तुओं से होने वाला नुकसान।
  • बीमाधारक की जानबूझकर की गई लापरवाही से होने वाला नुकसान।
  • पेड़ों की ठीक से देखभाल न करने के कारण होने वाला नुकसान।
  • पेड़ की प्राकृतिक रूप से मृत्यु और अस्वस्थ या बहुत पुराने पेड़ों से जुड़ा नुकसान।
  • जड़ों की छँटाई या जड़ों को काटने से पेड़ उखड़ने के कारण होने वाला नुकसान।
  • ऐसे नुकसान जो पॉलिसी में तय फ्रैंचाइज़ी सीमा के भीतर आते हैं।
  • लागू बीमा पॉलिसी में बताए गए अन्य नुकसान या घटनाएँ।

यदि किसी पेड़ को ऐसा नुकसान होता है कि वह दोबारा ठीक नहीं हो सकता, तो जरूरी जाँच के बाद उस पर मुआवजा मिल सकता है। इसके लिए यह पुष्टि होना जरूरी है कि नुकसान बीमा में शामिल घटना के कारण हुआ है। शोध में बताए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसान ऐसे पेड़ को काटने के बजाय खड़ा रहने देता है, तो बची हुई लकड़ी या पेड़ के अवशेषों के मूल्य (साल्वेज वैल्यू) के रूप में बीमित राशि का 50% काटा जा सकता है।

कवर किए गए जोखिमों, बीमा से बाहर रखे गए मामलों और क्लेम की शर्तों की पूरी जानकारी के लिए CPIS के परिचालन दिशा-निर्देश देखें। संशोधित दिशा-निर्देशों में जानवरों से होने वाले नुकसान को लेकर विरोधाभास है, इसलिए इस कवर पर भरोसा करने से पहले बीमा कंपनी से इसकी पुष्टि कर लें।

पात्रताएं

कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम (CPIS) का लाभ लेने के लिए किसानों को नीचे दी गई शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • 2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक ही जुड़े हुए क्षेत्र में कम से कम 10 स्वस्थ और फल देने वाले नारियल के पेड़ होने चाहिए। पुराने दिशा-निर्देशों में कम से कम 5 पेड़ों की शर्त दी गई है।
  • ड्वार्फ और हाइब्रिड नारियल के पेड़ों की उम्र 4–60 साल तथा टॉल नारियल के पेड़ों की उम्र 7–60 साल होनी चाहिए।
  • केवल स्वस्थ और फल देने वाले पेड़ों का बीमा किया जा सकता है। अस्वस्थ, बहुत पुराने और फल न देने वाले पेड़ पात्र नहीं हैं।
  • एक ही जुड़े हुए बागान क्षेत्र में मौजूद सभी पात्र पेड़ों का बीमा कराना होगा। किसान अपनी पसंद के कुछ पेड़ों का ही बीमा नहीं करा सकते।
  • इस योजना में टॉल, ड्वार्फ और हाइब्रिड नारियल के पेड़ शामिल हैं। ये पेड़ अकेले उगाए गए हों या दूसरी फसलों के साथ, खेत की मेड़ पर या घर के आसपास लगे हों, पात्रता की अन्य शर्तें पूरी होने पर उनका बीमा कराया जा सकता है।
  • किसानों को पेड़ों की सही जानकारी देनी होगी और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। बीमा कंपनी पेड़ों की बताई गई उम्र की जाँच कर सकती है। गलत जानकारी देने पर पॉलिसी रद्द हो सकती है।
  • बागान ऐसे क्षेत्र में होना चाहिए जहाँ योजना लागू हो। इसके लिए संबंधित राज्य की मंजूरी और वहाँ लागू व्यवस्था का पालन करना होगा।

आवेदन करने से पहले किसानों को नारियल विकास बोर्ड, बीमा कंपनी या अपने नजदीकी कृषि अथवा बागवानी विभाग से लागू पात्रता शर्तों की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

आवश्यक दस्तावेज

कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम (CPIS) में आवेदन करने वाले किसानों को नीचे दिए गए दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है:

  • पहचान प्रमाण।
  • भरा हुआ बीमा प्रस्ताव फॉर्म और किसान के हिस्से के प्रीमियम का भुगतान।
  • जमीन के रिकॉर्ड या नारियल के बागान का प्रमाण।
  • बीमा कराए जाने वाले पेड़ों के स्वस्थ होने की स्वयं-घोषणा।
  • बागान का एक साधारण नक्शा, जिसमें खेत या प्लॉट की पहचान और नारियल के पेड़ों की संख्या दिखाई गई हो।
  • बीमा क्लेम की राशि पाने के लिए बैंक खाते का विवरण।
  • योजना लागू करने वाली एजेंसी द्वारा माँगे गए अन्य दस्तावेज।

आवेदन प्रक्रिया

किसान कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम (CPIS) में तय ऑफलाइन प्रक्रिया के जरिए आवेदन कर सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनके क्षेत्र में योजना उपलब्ध है या नहीं। आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

  • अपने क्षेत्र में योजना की उपलब्धता की जानकारी लेने के लिए नारियल विकास बोर्ड (CDB), एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) या अपने नजदीकी कृषि अथवा बागवानी विभाग से संपर्क करें।
  • संबंधित कार्यालय या अधिकृत बीमा प्रतिनिधि से CPIS का प्रस्ताव फॉर्म लें। यदि यह फॉर्म CDB के आवेदन फॉर्म वाले पेज पर उपलब्ध नहीं है, तो बोर्ड या AIC से सीधे संपर्क करें।
  • जाँच लें कि आपके नारियल के पेड़ पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं या नहीं। इसमें स्वस्थ और फल देने वाले पेड़ों की न्यूनतम संख्या तथा टॉल, ड्वार्फ और हाइब्रिड किस्मों के लिए तय उम्र शामिल है।
  • जरूरी दस्तावेज तैयार करें। इनमें पहचान प्रमाण, जमीन या बागान के रिकॉर्ड, पेड़ों के स्वस्थ होने की घोषणा, बागान का नक्शा और बैंक खाते का विवरण शामिल हो सकता है। लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक पेड़ को नंबर दें।
  • प्रस्ताव फॉर्म में सभी जानकारी सही-सही भरें और एक ही जुड़े हुए बागान क्षेत्र के सभी पात्र पेड़ों को शामिल करें। उस क्षेत्र के पात्र पेड़ों में से केवल कुछ पेड़ों का बीमा कराने की अनुमति नहीं है।
  • संबंधित एजेंसी से लागू प्रीमियम, किसान के हिस्से और सब्सिडी की व्यवस्था की पुष्टि करें, क्योंकि पुराने और संशोधित दिशा-निर्देशों में अंतर है। इसके बाद एजेंसी द्वारा स्वीकार किए जाने वाले तरीके से जरूरी प्रीमियम का भुगतान करें।
  • भरा हुआ फॉर्म और सभी जरूरी दस्तावेज अधिकृत बीमा प्रतिनिधि या तय कृषि अथवा बागवानी विभाग के कार्यालय में जमा करें। इस दौरान संबंधित एजेंसी के निर्देशों का पालन करें।
  • बीमा प्रमाणपत्र या कवर नोट प्राप्त करें। इसमें बीमा कराए गए पेड़ों, पॉलिसी की अवधि और बीमा शुरू होने की तारीख की जाँच करें। भविष्य में जरूरत पड़ने या क्लेम करने के लिए इस दस्तावेज को सुरक्षित रखें।

CPIS के तहत बीमा क्लेम कैसे करें?

यदि किसी बीमित नारियल के पेड़ की मृत्यु हो जाती है या किसी कवर की गई घटना के कारण उसे गंभीर नुकसान पहुँचता है, तो किसान को तुरंत इसकी सूचना देनी चाहिए और बीमा कंपनी की जाँच प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। नुकसान हुए पेड़ को जाँच के लिए उपलब्ध रखना और जरूरी दस्तावेज जमा करना क्लेम में होने वाली देरी को कम करने में मदद कर सकता है।

  1. नुकसान की सूचना तय समय सीमा के भीतर एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) या संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी को दें। 2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों में घटना के 10 दिनों के भीतर सूचना देने की बात कही गई है, जबकि पुराने दिशा-निर्देशों में 15 दिनों की अवधि दी गई है।
  2. अधिकृत नुकसान आकलन अधिकारी द्वारा जाँच किए जाने से पहले क्षतिग्रस्त पेड़ को हटाएँ या उसकी जगह न बदलें, जब तक संबंधित एजेंसी ऐसा करने का निर्देश न दे।
  3. अधिकृत अधिकारी या एजेंसी से नुकसान का आकलन करवाएँ। शोध में बताए गए संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, नुकसान की सूचना मिलने के 15 दिनों के भीतर आकलन पूरा किया जाना चाहिए।
  4. बीमित पेड़, घटना और उससे हुए नुकसान के बारे में जरूरी जानकारी और सहायक दस्तावेज जमा करें।
  5. यदि पेड़ मरा नहीं है, लेकिन फल देने लायक नहीं रहा है, तो संबंधित अधिकृत विभाग या एजेंसी से प्रमाणपत्र लें कि पेड़ दोबारा ठीक नहीं हो सकता। पेड़ को काटने या खड़ा रखने के संबंध में लागू निर्देशों का पालन करें।
  6. बीमा कंपनी द्वारा नुकसान के आकलन और जमा किए गए दस्तावेजों की जाँच पूरी होने का इंतजार करें। दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्वीकार किए गए क्लेम का भुगतान सभी प्रमाणित दस्तावेज मिलने के एक महीने के भीतर किया जाना चाहिए।

क्लेम के तहत मिलने वाली राशि लागू बीमित राशि, नुकसान के आकलन, फ्रैंचाइज़ी की शर्त और पॉलिसी के अन्य नियमों पर निर्भर करती है। यदि दस्तावेज अधूरे हैं या क्लेम स्वीकार नहीं किया जाता है, तो एक महीने की समय सीमा को भुगतान की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

क्लेम से जुड़ी मदद के लिए नारियल विकास बोर्ड, संबंधित बीमा कंपनी या अपने स्थानीय कृषि अथवा बागवानी विभाग से संपर्क करें। खासकर तब, जब पुराने दिशा-निर्देशों में दी गई अवधि और आपकी वास्तविक पॉलिसी में दी गई अवधि अलग हो, तो नुकसान की सूचना देने की समय सीमा अपनी पॉलिसी से जरूर जाँच लें।

महत्वपूर्ण लिंक

संपर्क जानकारी

कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम (CPIS) की पात्रता, मौजूदा प्रीमियम, आवेदन प्रक्रिया और क्लेम से जुड़ी जानकारी के लिए किसान नारियल विकास बोर्ड के कोच्चि, केरल स्थित मुख्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

नारियल विकास बोर्ड (CDB)

  • फोन: 0484-2376265, 0484-2377267, 0484-2377266
  • ईमेल: [email protected] / [email protected]
  • पता: नारियल विकास बोर्ड, केरा भवन, SRV रोड, पी.बी. नंबर 1012, कोच्चि – 682 011, केरल, भारत।

शिकायत या सामान्य जानकारी के लिए बोर्ड के सिटिजन चार्टर में दिए गए शिकायत संपर्क नंबर 0484-2376265 और 0484-2377267 पर भी संपर्क किया जा सकता है। किसानों को अपने क्षेत्र में CPIS के मौजूदा नामांकन और क्लेम की शर्तों की पुष्टि करने के लिए नजदीकी कृषि या बागवानी विभाग अथवा एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) से भी संपर्क करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोकोनट पाम इंश्योरेंस स्कीम (CPIS) नारियल के पेड़ों को बीमा सुरक्षा देने वाली योजना है। इसके तहत पात्र नारियल के पेड़ों को चक्रवात, बाढ़, भारी बारिश, कीटों और बीमारियों जैसे तय जोखिमों से होने वाले नुकसान के लिए बीमा कवर दिया जाता है।
 

इस योजना को वर्ष 2009–10 में पायलट योजना के रूप में शुरू किया गया था।
 

2026 के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार, 4 से 15 साल पुराने पात्र नारियल के पेड़ों पर ₹1,900 प्रति पेड़ और 16 से 60 साल पुराने पेड़ों पर ₹3,700 प्रति पेड़ का बीमा कवर मिलता है।
 

इस योजना को नारियल विकास बोर्ड (CDB), एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) और संबंधित राज्य के कृषि या बागवानी विभागों के सहयोग से लागू किया जाता है।
 

पात्र नारियल उत्पादक और किसान इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उनके पास तय उम्र वाले स्वस्थ और फल देने वाले नारियल के पेड़ होने चाहिए। बागान को योजना की अन्य लागू शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
 

2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक ही जुड़े हुए क्षेत्र में कम से कम 10 स्वस्थ और फल देने वाले नारियल के पेड़ होने चाहिए। पुराने दिशा-निर्देशों में कम से कम 5 पेड़ों की शर्त दी गई थी। आवेदन से पहले अपने क्षेत्र में लागू नियमों की पुष्टि करें।
 

इस योजना के तहत टॉल, ड्वार्फ और हाइब्रिड किस्मों के पात्र नारियल के पेड़ों का बीमा कराया जा सकता है। ड्वार्फ और हाइब्रिड पेड़ों की उम्र 4 से 60 साल तथा टॉल पेड़ों की उम्र 7 से 60 साल होनी चाहिए।
 

योजना में तूफान, चक्रवात, भारी बारिश, बाढ़, बिजली गिरने, आग, भूकंप, भूस्खलन, कीटों और बीमारियों जैसे तय जोखिम शामिल हैं। 2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों में जंगली जानवरों के हमले का भी उल्लेख है, लेकिन इस संबंध में दस्तावेज में विरोधाभासी शर्तें हैं। इसलिए बीमा कंपनी से पुष्टि करना जरूरी है।
 

2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि सक्षम अधिकारी सूखे की आधिकारिक घोषणा करता है, तो उत्पादन में हुए नुकसान के लिए बीमित राशि का 25% मुआवजा दिया जा सकता है। यह लागू नियमों और पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करेगा।
 

2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, नारियल विकास बोर्ड प्रीमियम का 85% और किसान बाकी 15% भुगतान करता है। हालांकि, संशोधित दस्तावेज में रुपये में देय प्रीमियम की सही राशि नहीं दी गई है। इसलिए आवेदन से पहले मौजूदा प्रीमियम की पुष्टि करें।
 

अगर योजनाओं के बारे में आपका कोई सवाल है, तो उसे योजना के फोरम में सबमिट करें और जवाब पाएँ:

बेझिझक लिंक पर क्लिक करें और चर्चा में शामिल हों!

यह फोरम निम्न कामों के लिए एक बेहतरीन जगह है:

  • सवाल पूछें: अगर आपके मन में योजना से जुड़ा कोई सवाल है या आप इस विषय के किसी पहलू के बारे में और जानकारी चाहते हैं।
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