मैं एक समर्पित विधार्थी हु और वर्तमान में अपनी शिक्षा और के सपनों को जीवित रखने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही हूँ। अपनी और पढ़ाई के लिए मैं प्रतिदिन 80 किलोमीटर का सफर तय करती हूँ, जो न केवल शारीरिक बल्कि आर्थिक रूप से भी अब मेरी क्षमता से बाहर होता जा रहा है।
मेरे पास प्रतिभा और जुनून है, लेकिन संसाधनों के अभाव में अब मेरी पढ़ाई छूटने की कगार पर है। रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार मेरे लिए केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि मेरी शिक्षा को जारी रखने की आखिरी उम्मीद है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि मेरी मेहनत और आर्थिक स्थिति पर विचार करते हुए मुझे इस योजना के माध्यम से प्रोत्साहित करें, ताकि उत्तर प्रदेश की एक बेटी का भविष्य अंधकार में जाने से बच सके।
"आदरणीय मुख्यमंत्री जी (उत्तर प्रदेश),
मैं एक समर्पित विधार्थी हु और वर्तमान में अपनी शिक्षा और के सपनों को जीवित रखने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही हूँ। अपनी और पढ़ाई के लिए मैं प्रतिदिन 80 किलोमीटर का सफर तय करती हूँ, जो न केवल शारीरिक बल्कि आर्थिक रूप से भी अब मेरी क्षमता से बाहर होता जा रहा है।
मेरे पास प्रतिभा और जुनून है, लेकिन संसाधनों के अभाव में अब मेरी पढ़ाई छूटने की कगार पर है। रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार मेरे लिए केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि मेरी शिक्षा को जारी रखने की आखिरी उम्मीद है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि मेरी मेहनत और आर्थिक स्थिति पर विचार करते हुए मुझे इस योजना के माध्यम से प्रोत्साहित करें, ताकि उत्तर प्रदेश की एक बेटी का भविष्य अंधकार में जाने से बच सके।
सादर,
नाम : पूनम
जिला : एटा