- दुर्घटना में मृत्यु पर पात्र व्यापारियों के आश्रितों को ₹10 लाख का बीमा कवर मिलता है।
- योजना के अंतर्गत GST-पंजीकृत एकल स्वामित्व फर्म के मालिक, साझेदार और HUF के कर्ता पात्र हैं।
- राज्य कर विभाग निविदा प्रक्रिया के माध्यम से पात्र बीमा कंपनी का चयन करता है।
- राज्य कर विभाग, उत्तराखंड हेल्पलाइन नंबर: 1800120122277
- GST, उत्तराखंड टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800 889 7177
- GST, उत्तराखंड हेल्पडेस्क ईमेल: [email protected]
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | उत्तराखण्ड व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना |
| लाभ | दुर्घटना में मृत्यु होने पर ₹10 लाख का बीमा कवर |
| लाभार्थी | GST-पंजीकृत व्यापारियों के आश्रित |
| नोडल विभाग | राज्य कर विभाग, उत्तराखंड |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे। |
| आवेदन का तरीका | ऑफलाइन |
योजना के बारे में
उत्तराखण्ड व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना उत्तराखंड सरकार के राज्य कर विभाग द्वारा संचालित एक बीमा योजना है। इसका उद्देश्य राज्य में GST-पंजीकृत व्यापारियों के परिवारों को दुर्घटना के कारण होने वाली आर्थिक कठिनाइयों से राहत प्रदान करना है। यदि योजना के अंतर्गत आने वाले किसी व्यापारी की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, तो उसके पात्र आश्रितों को एकमुश्त बीमा राशि दी जाती है।
राज्य सरकार की व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत राज्य कर विभाग निविदा प्रक्रिया के माध्यम से उत्तराखंड में शाखा रखने वाली IRDA-पंजीकृत बीमा कंपनी का चयन करता है। चयनित बीमा कंपनी दावों का निपटारा करती है। पात्र व्यापारियों को योजना में शामिल होने के लिए कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता और न ही अलग से नामांकन आवेदन करना होता है। वैध GST पंजीकरण के आधार पर पात्र व्यापारियों को योजना के प्रावधानों के अनुसार बीमा सुरक्षा प्रदान की जाती है।
इस योजना को शुरू करने का प्रमुख उद्देश्य व्यापारियों के परिवारों को आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। छोटे दुकानदारों और पारिवारिक व्यवसायों में अक्सर परिवार की आजीविका एक ही कमाने वाले व्यक्ति पर निर्भर होती है। ऐसे में दुर्घटना के कारण उसकी मृत्यु होने पर परिवार को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। यह योजना ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने और व्यापारियों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उत्तराखण्ड व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत दुर्घटना में व्यापारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को ₹10 लाख का बीमा कवर दिया जाता है। इसमें GST-पंजीकृत एकल स्वामित्व फर्म के मालिक, साझेदारी फर्म के साझेदार और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के व्यवसाय के कर्ता शामिल हैं। सीमित कंपनियाँ, सोसायटी, क्लब, एसोसिएशन तथा सरकारी विभाग या सरकारी उपक्रम इस योजना के दायरे में शामिल नहीं हैं।
योजना की व्यवस्था के अनुसार, योजना की अवधि शुरू होने की तारीख पर GST-पंजीकृत पात्र व्यापारी स्वतः बीमा कवर के अंतर्गत आ जाते हैं। योजना की अवधि के दौरान नया GST पंजीकरण कराने वाले पात्र व्यापारियों को उनके पंजीकरण की प्रभावी तारीख से बीमा सुरक्षा मिलती है। यदि GST पंजीकरण रद्द हो जाता है, तो पंजीकरण रद्द होने की तारीख से बीमा कवर समाप्त हो जाता है।
व्यापारी की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके आश्रित या कानूनी वारिस को मृत्यु की तारीख से 90 दिनों के भीतर संबंधित क्षेत्र के संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर कार्यालय के माध्यम से बीमा क्लेम प्रस्तुत करना होता है। बीमा कंपनी को क्लेम प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करना होता है। भुगतान चेक के माध्यम से संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर कार्यालय के जरिए किया जाता है।
उत्तराखंड सरकार की इस योजना के अतिरिक्त केंद्र सरकार भी बीमा सुरक्षा प्रदान करने वाली योजनाएँ संचालित करती है, जैसे प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)। PMJJBY के अंतर्गत 18 से 50 वर्ष की आयु के पात्र व्यक्तियों को किसी भी कारण से मृत्यु होने पर ₹2 लाख का जीवन बीमा कवर मिलता है, जिसका वार्षिक प्रीमियम ₹436 है। वहीं, PMSBY के अंतर्गत 18 से 70 वर्ष की आयु के पात्र व्यक्तियों को दुर्घटना में मृत्यु या निर्धारित स्थायी विकलांगता की स्थिति में अधिकतम ₹2 लाख का बीमा कवर मिलता है, जिसका वार्षिक प्रीमियम ₹20 है। इन योजनाओं की विस्तृत जानकारी संबंधित लिंक पर प्राप्त की जा सकती है।
नवीनतम अपडेट
उत्तराखण्ड सरकार ने व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना को 19 नवंबर 2026 से 18 नवंबर 2027 तक जारी रखने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। यह जानकारी सचिव श्री रणवीर सिंह चौहान द्वारा राज्य कर आयुक्त को भेजे गए पत्र के माध्यम से दी गई है। इससे पहले, 9 अक्टूबर 2026 को हल्द्वानी में आयोजित प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने GST-पंजीकृत व्यापारियों के लिए दुर्घटना बीमा योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की घोषणा की थी, ताकि दुर्घटना में व्यापारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित समय पर बीमा क्लेम कर सकें।
योजना के लाभ
उत्तराखण्ड व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत पात्र व्यापारी की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके परिवार को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
- बीमा राशि: व्यापारी की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके पात्र आश्रितों को ₹10 लाख दिए जाते हैं।
- कोई प्रीमियम नहीं: व्यापारी को बीमा के लिए कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता। राज्य कर विभाग चयनित बीमा कंपनी के माध्यम से बीमा कवर की व्यवस्था करता है।
- स्वतः बीमा कवर: योजना में शामिल होने के लिए अलग से पंजीकरण या आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती।
- समयबद्ध क्लेम निपटान: बीमा कंपनी को क्लेम प्रस्तुत किए जाने के तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करना होता है।
- देरी होने पर ब्याज: तीन महीने के भीतर भुगतान नहीं होने पर बीमा कंपनी को देरी की अवधि के लिए 10% वार्षिक दर से ब्याज देना होता है।
- भुगतान का तरीका: बीमा राशि का भुगतान लाभार्थी को चेक के माध्यम से संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर कार्यालय के जरिए किया जाता है।
- बीमा अवधि समाप्त होने के बाद क्लेम: यदि दुर्घटना बीमा अवधि के दौरान हुई है, लेकिन क्लेम योजना की अवधि समाप्त होने के बाद प्रस्तुत किया जाता है, तो भी बीमा कंपनी को क्लेम प्रस्तुत किए जाने के तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करना होता है।
पात्रता संबंधी शर्तें
व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित पात्रता शर्तें निर्धारित हैं।
कौन पात्र है?
- व्यापारी उत्तराखण्ड का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- व्यवसाय एकल स्वामित्व फर्म, साझेदारी फर्म या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के अंतर्गत होना चाहिए।
- आवेदक संबंधित व्यवसाय का एकल स्वामित्व फर्म का मालिक, साझेदारी फर्म का साझेदार या HUF व्यवसाय का कर्ता होना चाहिए।
- योजना की अवधि शुरू होने की तारीख पर पंजीकृत पात्र व्यापारियों को स्वतः बीमा कवर मिलता है। योजना की अवधि के दौरान पंजीकरण कराने वाले पात्र व्यापारियों को पंजीकरण की प्रभावी तारीख से कवर मिलता है।
- व्यापारी की मृत्यु दुर्घटना के कारण और योजना की निर्धारित अवधि के दौरान हुई होनी चाहिए।
कौन पात्र नहीं है?
निम्नलिखित संस्थाएँ और परिस्थितियाँ योजना के दायरे में शामिल नहीं हैं:
- सीमित कंपनियाँ।
- सोसायटी, क्लब और एसोसिएशन।
- केंद्र या राज्य सरकार के विभाग तथा वाणिज्यिक सरकारी उपक्रम।
- अन्य प्राधिकरण या निकाय।
- ऐसे व्यापारी जिनका GST पंजीकरण रद्द हो चुका है। ऐसे मामलों में पंजीकरण रद्द होने की तारीख से बीमा कवर समाप्त हो जाता है।
बीमा क्लेम की राशि किसे मिलती है?
व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत बीमा राशि का भुगतान करने के लिए प्राथमिकता का एक निर्धारित क्रम है:
- कानूनी रूप से विवाहित पति या पत्नी: सबसे पहले मृत व्यापारी के कानूनी रूप से विवाहित पति या पत्नी को बीमा राशि दी जाती है। यदि दो या अधिक कानूनी पत्नियाँ जीवित हैं, तो उनके बीच राशि समान रूप से बाँटी जाती है।
- नामांकित व्यक्ति (Nominee): यदि मृत व्यापारी का कोई जीवित पति या पत्नी नहीं है, तो उसके द्वारा इस बीमा के लिए नामांकित व्यक्ति को राशि दी जाती है।
- कानूनी वारिस: यदि पति या पत्नी जीवित नहीं हैं और कोई नामांकन भी नहीं किया गया है, तो सक्षम न्यायालय द्वारा जारी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र में उल्लिखित कानूनी वारिस को बीमा राशि दी जाती है।
नोट: प्रत्येक मामले में भुगतान संबंधित संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर की संस्तुति पर किया जाता है। बीमा कंपनी की यह जिम्मेदारी भी है कि वह पंजीकृत व्यापारियों से प्रस्ताव फॉर्म और नामांकन फॉर्म भरवाने की व्यवस्था करे।
योजना के अंतर्गत आवेदन या नामांकन कैसे करें?
उत्तराखण्ड व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना में शामिल होने के लिए अलग से आवेदन या नामांकन करने की आवश्यकता नहीं है।
- राज्य कर विभाग के अंतर्गत GST-पंजीकृत पात्र एकल स्वामित्व फर्मों, साझेदारी फर्मों और HUF व्यवसायों को योजना के नियमों के अनुसार स्वतः बीमा कवर मिलता है।
- योजना की अवधि शुरू होने की तारीख पर पात्र पंजीकृत व्यापारियों का बीमा कवर स्वतः प्रभावी होता है।
- योजना की अवधि के दौरान नया GST पंजीकरण कराने वाले पात्र व्यापारियों को पंजीकरण की प्रभावी तारीख से बीमा कवर मिलता है।
- GST पंजीकरण सक्रिय रहने तक, अन्य निर्धारित शर्तों के अधीन, बीमा कवर जारी रहता है।
- GST पंजीकरण रद्द होने पर उसी तारीख से बीमा कवर समाप्त हो जाता है।
बीमा क्लेम कैसे करें?
- यदि योजना के अंतर्गत आने वाले किसी पंजीकृत व्यापारी की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रित, कानूनी वारिस या नामांकित व्यक्ति को बीमा क्लेम प्रस्तुत करना होगा।
- इसके लिए सबसे पहले व्यापारी के पंजीकरण वाले भौगोलिक क्षेत्र के संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर कार्यालय से संपर्क करें।
- संबंधित कार्यालय से क्लेम फॉर्म और बीमा कंपनी द्वारा माँगे जाने वाले दस्तावेजों की सूची प्राप्त करें।
- आवश्यक दस्तावेजों के साथ विधिवत भरा हुआ क्लेम फॉर्म संबंधित कार्यालय में जमा करें।
- दुर्घटना में मृत्यु की तारीख से 90 दिनों के भीतर क्लेम प्रस्तुत करें।
- संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर क्लेम की जाँच करके उसे आवश्यक संस्तुति के साथ बीमा कंपनी को भेजते हैं।
- बीमा कंपनी को क्लेम प्रस्तुत किए जाने के तीन महीने के भीतर भुगतान करना होता है। देरी होने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार 10% वार्षिक दर से ब्याज देय होता है।
- स्वीकृत बीमा राशि का भुगतान लाभार्थी को चेक के माध्यम से संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर कार्यालय के जरिए किया जाता है।
नोट: इस योजना के लिए कोई एक साझा वार्षिक क्लेम की अंतिम तारीख निर्धारित नहीं है। प्रत्येक मामले में दुर्घटना में मृत्यु की तारीख से 90 दिनों के भीतर क्लेम जमा करना आवश्यक है।
क्लेम प्रक्रिया
- मृत व्यापारी का आश्रित, कानूनी वारिस या नामांकित व्यक्ति संबंधित संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर कार्यालय में क्लेम प्रस्तुत करता है।
- संयुक्त आयुक्त (कार्य) दावे की जाँच करते हैं और उसे बीमा कंपनी को संस्तुति के लिए भेजते हैं।
- बीमा कंपनी दावे की प्रक्रिया पूरी करके भुगतान करती है।
- भुगतान में प्राथमिकता कानूनी रूप से विवाहित पति या पत्नी को दी जाती है। उनके जीवित न होने पर नामांकित व्यक्ति को और नामांकन न होने की स्थिति में सक्षम न्यायालय के उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के आधार पर कानूनी वारिस को भुगतान किया जाता है।
- बीमा राशि का भुगतान लाभार्थी के नाम चेक के माध्यम से संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर कार्यालय के जरिए किया जाता है।
बीमा क्लेम के लिए आवश्यक दस्तावेज
व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत क्लेम के निपटारे के लिए निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं:
- दावेदार द्वारा विधिवत भरा और हस्ताक्षरित क्लेम फॉर्म।
- दावेदार का छह महीने से अधिक पुराना न होने वाला प्रमाणित फोटो।
- बीमित व्यापारी का मृत्यु प्रमाणपत्र, जिसकी प्रमाणित प्रति आवश्यक है।
- बीमित व्यापारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति।
- दुर्घटना रिपोर्ट या FIR की प्रमाणित प्रति।
- बीमित व्यापारी के वाणिज्यिक कर पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति।
- व्यापारी, दावेदार या कानूनी वारिस के राष्ट्रीयकृत बैंक खाते का पूरा विवरण, जिसमें खाता संख्या और IFSC कोड शामिल हों।
- व्यापारी, दावेदार या कानूनी वारिस के पहचान प्रमाण और PAN कार्ड की प्रतियाँ।
महत्वपूर्ण शर्तें
- साझेदारी फर्म या HUF में एक से अधिक व्यक्ति का हित हो सकता है, लेकिन योजना की एक अवधि में एक ही डीलर (फर्म) के लिए एक बार ही लाभ देय होता है। भुगतान मृत व्यापारी के पात्र आश्रितों को किया जाता है।
- यदि एक ही दुर्घटना में एक साझेदारी फर्म के एक से अधिक साझेदारों की मृत्यु हो जाती है, तो बीमा कंपनी निर्धारित बीमा राशि को सभी मृत साझेदारों के आश्रितों के बीच समान रूप से बाँटती है।
- व्यापारी अपने GST पंजीकरण की स्थिति आधिकारिक GST पोर्टल पर जाँच सकते हैं।
- यदि अपरिहार्य कारणों से नया या रद्द किया गया पंजीकरण पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं होता है, तो संबंधित विभाग या CBIC का निर्णय अंतिम माना जाएगा।
महत्त्वपूर्ण लिंक
- उत्तराखण्ड राज्य कर विभाग आधिकारिक वेबसाइट
- उत्तराखण्ड GST पोर्टल
- उत्तराखण्ड व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना दिशा-निर्देश
संपर्क जानकारी
- राज्य कर विभाग, उत्तराखंड हेल्पलाइन नंबर: 1800120122277
- GST, उत्तराखण्ड टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800 889 7177
- GST, उत्तराखण्ड हेल्पडेस्क ईमेल: [email protected]
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह राज्य कर विभाग द्वारा संचालित एक योजना है, जिसके अंतर्गत उत्तराखण्ड में GST-पंजीकृत व्यापारी की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को ₹10 लाख की बीमा राशि दी जाती है।
उत्तराखण्ड में GST-पंजीकृत एकल स्वामित्व फर्म के मालिक, साझेदारी फर्म के साझेदार और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के कर्ता इस योजना के लिए पात्र हैं।
नहीं। सीमित कंपनियाँ, सोसायटी, क्लब, एसोसिएशन तथा सरकारी विभाग या सरकारी उपक्रम इस योजना के दायरे में शामिल नहीं हैं।
नहीं। पात्र श्रेणी में सक्रिय GST पंजीकरण होने पर व्यापारी को योजना के अंतर्गत स्वतः बीमा कवर मिलता है।
नहीं। राज्य कर विभाग चयनित बीमा कंपनी के माध्यम से इस योजना का संचालन करता है। व्यापारी को कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता।
सरकार ने योजना को 19 नवंबर 2026 से 18 नवंबर 2027 तक जारी रखने की स्वीकृति दी है।
बीमा क्लेम की प्रक्रिया ऑफलाइन है। मृत व्यापारी के आश्रितों को संबंधित क्षेत्र के संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर कार्यालय के माध्यम से क्लेम प्रस्तुत करना होता है।
आश्रित को दुर्घटना में व्यापारी की मृत्यु की तारीख से 90 दिनों के भीतर क्लेम जमा करना होता है।
बीमा कंपनी उत्तराधिकारी के नाम पर चेक जारी करती है। यह राशि संयुक्त आयुक्त (कार्य), राज्य कर कार्यालय के माध्यम से लाभार्थी को दी जाती है।
GST पंजीकरण रद्द होने की तारीख से व्यापारी का बीमा कवर स्वतः समाप्त हो जाता है।
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| जाति | योजना का प्रकार | सरकार |
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टिप्पणियाँ
is there any insurance for…
is there any insurance for our goods?
which insurance company is…
which insurance company is responsible for claims for 2023 2024??
सिर्फ व्यापारी जिसके नाम…
सिर्फ व्यापारी जिसके नाम फर्म है वही पात्र होगा या उसके परिवार के लोग भी ????
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