- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वर्ष 2015-16 में शुरू हुई।
- इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई सुविधा और जल उपयोग की दक्षता बढ़ाना है।
- योजना “हर खेत को पानी” और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” की सोच पर आधारित है।
- इसके प्रमुख घटकों में AIBP, HKKP और WDC-PMKSY शामिल हैं।
- किसान कॉल सेंटर: 18001801551
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) |
| शुरुआत का वर्ष | 2015-16 |
| लाभ | सिंचाई का विस्तार, पानी के बेहतर उपयोग, जल संरक्षण, वाटरशेड विकास और खेतों तक सिंचाई के पानी की बेहतर पहुंच |
| लाभार्थी | पात्र सिंचाई, वाटरशेड और जल प्रबंधन परियोजनाओं के तहत आने वाले किसान और ग्रामीण समुदाय |
| नोडल एजेंसी | जल शक्ति मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय |
| सब्सक्रिप्शन | योजना से जुड़े अपडेट पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें |
| आवेदन का तरीका | योजना के घटक के अनुसार संबंधित राज्य के कृषि, बागवानी, सिंचाई या अन्य संबंधित विभाग के माध्यम से |
योजना के बारे में
खेती के लिए अच्छी सिंचाई व्यवस्था बहुत जरूरी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां किसान बारिश पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। लेकिन केवल पानी उपलब्ध होना ही काफी नहीं है। किसानों को भरोसेमंद जल स्रोत, खेतों तक पानी पहुंचाने की बेहतर व्यवस्था और उपलब्ध पानी का सही उपयोग करने के तरीके भी चाहिए। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) की शुरुआत 2015-16 में की। इस योजना का उद्देश्य सिंचाई का विस्तार करना, खेतों तक पानी की बेहतर पहुंच बनाना, पानी की बर्बादी कम करना और पानी के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना है। योजना "हर खेत को पानी" और "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" के लक्ष्यों पर काम करती है। जून 2026 की सरकारी समीक्षा के अनुसार, PMKSY से जुड़े प्रयासों से 2.7 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला है और 2.46 करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बनाई या बहाल की गई है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एक ऐसी योजना है जिसमें सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े कई कार्यक्रम शामिल हैं। यह केवल किसानों को सीधे नकद राशि देने वाली योजना नहीं है। इसके तहत बड़े और मध्यम सिंचाई प्रोजेक्ट, छोटी सिंचाई योजनाएं, जल स्रोतों का विकास, सिंचाई के पानी की वितरण व्यवस्था, जल निकायों का सुधार, वाटरशेड विकास और जल संरक्षण जैसे काम किए जाते हैं। योजना को राज्य और जिला स्तर पर लागू किया जाता है, जहां स्थानीय जरूरतों के आधार पर योग्य परियोजनाओं का चयन किया जाता है।
जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) और हर खेत को पानी (HKKP) जैसे प्रमुख घटकों को लागू करता है। वहीं वाटरशेड विकास घटक (WDC-PMKSY) को भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय लागू करता है। पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC) पहले प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का हिस्सा था, लेकिन 2022-23 से इसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत लागू किया जा रहा है।
किसानों और ग्रामीण समुदायों को मिलने वाले लाभ, संबंधित घटक और परियोजना पर निर्भर करते हैं। इनमें सिंचाई के पानी की बेहतर उपलब्धता, पानी के वितरण की बेहतर व्यवस्था, जल निकायों का सुधार, वर्षा जल संचयन, मिट्टी और नमी संरक्षण, भूजल रिचार्ज और वाटरशेड विकास शामिल हैं। अलग से लागू किए जा रहे PDMC के तहत पात्र किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन प्रणालियों के लिए छोटे और सीमांत किसानों को 55% और अन्य किसानों को 45% तक सहायता मिल सकती है। यह सहायता प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर क्षेत्र तक लागू है और संबंधित दिशा-निर्देशों के अधीन है। इसे PMKSY के तहत मिलने वाली वर्तमान प्रत्यक्ष सब्सिडी नहीं माना जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के सभी लाभों के लिए एक ही आवेदन प्रक्रिया नहीं है। आवेदन का तरीका योजना के घटक, परियोजना और राज्य के अनुसार अलग हो सकता है। जिला सिंचाई योजना (DIP) और राज्य सिंचाई योजना (SIP) के माध्यम से सिंचाई की जरूरतों और उपयुक्त परियोजनाओं की पहचान की जाती है। माइक्रो-इरिगेशन सहायता के लिए किसानों को अपने राज्य के कृषि या बागवानी विभाग द्वारा बताई गई प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। योजना से जुड़ी जानकारी, पात्रता या आवेदन में सहायता के लिए किसान संबंधित जिला या राज्य कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
सिंचाई से जुड़ी अन्य सहायता के लिए किसान GovtSchemes.in पर उपलब्ध माइक्रो इरिगेशन फंड के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। यह माइक्रो-इरिगेशन को बढ़ाने से जुड़े राज्य स्तर के प्रोजेक्ट्स के लिए उपयोगी है। इसके अलावा, खेती में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी जानकारी के लिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना भी देखी जा सकती है।
योजना के लाभ
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत मिलने वाले लाभ संबंधित घटक और लाभार्थी क्षेत्र में लागू परियोजना पर निर्भर करते हैं। योजना और इससे जुड़े घटकों के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- AIBP और हर खेत को पानी के तहत पात्र सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को सिंचाई के पानी की बेहतर उपलब्धता मिल सकती है।
- कमांड एरिया में पात्र किसानों को पानी के बेहतर वितरण और खेतों तक पहुंच की सुविधा मिल सकती है।
- WDC-PMKSY 2.0 के तहत वाटरशेड परियोजनाओं में जल संचयन संरचनाएं, खेत तालाब, चेक डैम, मिट्टी और नमी संरक्षण तथा भूजल रिचार्ज जैसे काम किए जा सकते हैं।
- WDC-PMKSY 2.0 में सामान्य क्षेत्रों के लिए परियोजना लागत का मानक ₹22,000 प्रति हेक्टेयर और पहाड़ी, कठिन तथा निर्धारित LWE क्षेत्रों के लिए ₹28,000 प्रति हेक्टेयर तक है। यह परियोजना के लिए फंडिंग का मानक है, हर किसान को ₹22,000 या ₹28,000 की सीधी नकद राशि नहीं मिलती।
- वाटरशेड परियोजनाओं में परियोजना क्षेत्र के 20% तक हिस्से में बागवानी सहित पौधरोपण किया जा सकता है।
- WDC-PMKSY 2.0 के तहत 15% तक फंड का उपयोग पात्र भूमिहीन लोगों, माइक्रो-एंटरप्राइज और व्यवसाय से जुड़ी आजीविका गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
- Per Drop More Crop के तहत पात्र किसानों को ड्रिप या स्प्रिंकलर माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम लगाने के लिए छोटे और सीमांत किसानों को 55% और अन्य किसानों को 45% तक वित्तीय सहायता मिल सकती है।
- Per Drop More Crop के तहत माइक्रो-इरिगेशन सहायता प्रति लाभार्थी 5 हेक्टेयर तक उपलब्ध है, जो लागू दिशा-निर्देशों के अधीन है।
- कुछ राज्य सरकारें अपने बजट से निर्धारित माइक्रो-इरिगेशन सहायता के ऊपर अतिरिक्त सहायता भी दे सकती हैं।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के प्रमुख घटक क्या हैं?
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, एक ऐसी योजना है जिसमें सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों को शामिल किया गया है। वर्तमान सरकारी जानकारी के अनुसार इसके प्रमुख घटकों में त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), हर खेत को पानी (HKKP) और वाटरशेड विकास घटक (WDC) शामिल हैं।
घटक | उद्देश्य | मुख्य लाभार्थी |
|---|---|---|
त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) | बड़े और मध्यम सिंचाई प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करना और सिंचाई क्षमता बढ़ाना। | स्वीकृत सिंचाई परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाले किसान और कृषि क्षेत्र। |
हर खेत को पानी (HKKP) | जल स्रोत, सिंचाई नेटवर्क, छोटी सिंचाई योजनाओं और जल निकायों के सुधार के जरिए सिंचाई की सुविधा बढ़ाना। | स्वीकृत सिंचाई और जल प्रबंधन क्षेत्रों के किसान और समुदाय। |
वाटरशेड विकास घटक (WDC) | वर्षा जल संचयन, मिट्टी और नमी संरक्षण, वाटरशेड विकास और वर्षा आधारित क्षेत्रों के टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना। | स्वीकृत वाटरशेड क्षेत्रों के किसान, ग्रामीण परिवार और समुदाय। |
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, पोर्टल पर पहले PMKSY के अंतर्गत लागू किए गए कुछ घटकों और गतिविधियों, जैसे Per Drop More Crop और MGNREGA के साथ कन्वर्जेंस, की जानकारी भी उपलब्ध है। हालांकि, वर्तमान स्थिति को समझना जरूरी है। Per Drop More Crop (PDMC) पहले PMKSY के तहत लागू किया जाता था, लेकिन अब इसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत लागू किया जा रहा है। इसलिए PDMC को वर्तमान में PMKSY के एक अलग मौजूदा घटक के रूप में नहीं बताया जाना चाहिए।
1. त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP)
त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) का उद्देश्य चल रही बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना है। इसके तहत सिंचाई क्षमता बनाने या बहाल करने और अधिक कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई के दायरे में लाने पर ध्यान दिया जाता है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत AIBP को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है। लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र सिंचाई परियोजनाओं के लिए राज्यों को केंद्रीय सहायता दी जाती है।
AIBP की मुख्य विशेषताएं
- पात्र बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर ध्यान देता है।
- अतिरिक्त सिंचाई क्षमता बनाने में मदद करता है।
- लागू नियमों के तहत पात्र राष्ट्रीय और विशेष परियोजनाओं को शामिल करता है।
- ऐसी सिंचाई सुविधाओं को बढ़ावा देता है जिनसे कृषि क्षेत्रों तक सुनिश्चित पानी पहुंच सके।
- इसका क्रियान्वयन संबंधित राज्य सरकारों और एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है।
2. हर खेत को पानी (HKKP)
हर खेत को पानी (HKKP) का उद्देश्य सिंचाई के पानी तक पहुंच बढ़ाना और उपलब्ध जल संसाधनों की बेहतर वितरण व्यवस्था तैयार करना है। इसके तहत जल स्रोत, सिंचाई वितरण और जल प्रबंधन से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियां की जाती हैं।
HKKP के तहत छोटी सिंचाई योजनाओं के माध्यम से नए जल स्रोत बनाना, जल निकायों की मरम्मत और सुधार, भूजल से जुड़ी सिंचाई, कमांड एरिया विकास और सिंचाई वितरण नेटवर्क को मजबूत करना जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।
हर खेत को पानी (HKKP) के तहत प्रमुख क्षेत्र
- सतही छोटी सिंचाई (SMI): सतही जल स्रोतों पर आधारित पात्र छोटी सिंचाई योजनाओं को सहायता।
- मरम्मत, नवीनीकरण और बहाली (RRR): पात्र पारंपरिक जल निकायों को सुधारने और उनकी सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर ध्यान।
- कमांड एरिया विकास और जल प्रबंधन: कमांड एरिया में सिंचाई वितरण व्यवस्था को विकसित और बेहतर करने में सहायता।
- भूजल से जुड़ी गतिविधियां: लागू घटक और दिशा-निर्देशों के तहत पात्र भूजल सिंचाई परियोजनाओं को सहायता।
हर खेत को पानी (HKKP) के लाभ
- सिंचाई के पानी तक पहुंच बढ़ाने में मदद करता है।
- सिंचाई क्षमता बनाने और सुधारने में सहायता करता है।
- पारंपरिक जल निकायों और उनकी सिंचाई क्षमता को बहाल करने में मदद करता है।
- जल स्रोत से कृषि खेतों तक पानी के बेहतर वितरण में सहायता करता है।
- उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देता है।
3. वाटरशेड विकास घटक (WDC-PMKSY)
PMKSY का वाटरशेड विकास घटक वर्षा आधारित और खराब हो चुके क्षेत्रों के विकास पर ध्यान देता है। इसमें वैज्ञानिक तरीके से वाटरशेड विकास और जल संरक्षण की गतिविधियां की जाती हैं।
इस घटक को भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है। WDC-PMKSY के तहत मिट्टी और पानी का संरक्षण, नमी की उपलब्धता बढ़ाना, जल संचयन संरचनाएं बनाना और वाटरशेड क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देना शामिल है।
WDC-PMKSY के तहत प्रमुख गतिविधियां
- चेक डैम, खेत तालाब और टैंक जैसी जल संचयन संरचनाएं।
- रिज क्षेत्र और जल निकासी लाइन का विकास।
- मिट्टी और नमी का संरक्षण।
- भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां।
- पौधरोपण, बागवानी और चारागाह विकास।
- पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका से जुड़ी सहायता।
- प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुदाय की भागीदारी।
- वाटरशेड की योजना और निगरानी के लिए GIS और रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग।
4. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत Per Drop More Crop
Per Drop More Crop (PDMC) को PMKSY से लंबे समय तक जोड़ा गया क्योंकि इसका उद्देश्य ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों के माध्यम से पानी का बेहतर उपयोग करना है।
हालांकि, इसकी वर्तमान स्थिति को समझना जरूरी है। PDMC को 2021-22 तक PMKSY के एक घटक के रूप में लागू किया गया था। 2022-23 से इसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत लागू किया जा रहा है।
इसलिए ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए वर्तमान सहायता चाहने वाले किसानों को नवीनतम PDMC दिशा-निर्देश और अपने राज्य के कृषि या बागवानी विभाग द्वारा बताई गई आवेदन प्रक्रिया देखनी चाहिए। यह मानकर आवेदन नहीं करना चाहिए कि सहायता सीधे PMKSY के माध्यम से दी जा रही है।
माइक्रो-इरिगेशन के लिए सहायता
- ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई PDMC के तहत प्रमुख माइक्रो-इरिगेशन प्रणालियां हैं।
- लागू PDMC दिशा-निर्देशों के अनुसार छोटे और सीमांत किसानों को 55% तक और अन्य किसानों को 45% तक सहायता मिल सकती है।
- राज्य सरकारें अपने नियमों के अनुसार अतिरिक्त सहायता दे सकती हैं।
- किसानों को राज्य स्तर पर बताई गई आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के समग्र लाभ
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना मुख्य रूप से सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़ी योजना है, न कि सभी किसानों को सीधे नकद राशि देने वाली योजना। किसानों और ग्रामीण समुदायों को मिलने वाले लाभ संबंधित घटक और उसके तहत लागू परियोजना पर निर्भर करते हैं।
- सिंचाई का विस्तार: कृषि क्षेत्रों में सिंचाई क्षमता बनाने और बढ़ाने में मदद।
- पानी की बेहतर उपलब्धता: स्वीकृत जल स्रोत और वितरण परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई के पानी तक बेहतर पहुंच।
- जल संरक्षण: वर्षा जल संचयन, जल भंडारण, मिट्टी की नमी बचाने और वाटरशेड विकास को बढ़ावा।
- पानी के बेहतर उपयोग: सिंचाई के बेहतर तरीकों और उपलब्ध जल संसाधनों के सही उपयोग को बढ़ावा।
- जल निकायों का सुधार: पात्र पारंपरिक जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण और बहाली।
- वाटरशेड विकास: वर्षा आधारित और खराब क्षेत्रों के विकास तथा संबंधित आजीविका गतिविधियों को सहायता।
कमांड एरिया विकास और जल प्रबंधन का आधुनिकीकरण (M-CADWM)
सरकार ने कमांड एरिया विकास और जल प्रबंधन का आधुनिकीकरण (M-CADWM) को PMKSY की एक उप-योजना के रूप में शुरू किया है। इसका उद्देश्य सिंचाई के पानी की वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाना और खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था को बेहतर करना है।
M-CADWM की मुख्य विशेषताएं
- भूमिगत दबाव वाली सिंचाई जल वितरण प्रणाली।
- खेत के स्तर तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की व्यवस्था।
- माइक्रो-इरिगेशन के अनुकूल बुनियादी ढांचा।
- SCADA और IoT आधारित तकनीकों का उपयोग।
- पानी की मात्रा का हिसाब और बेहतर निगरानी।
- जल उपयोगकर्ता समितियों की अधिक भागीदारी।
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत पायलट परियोजना का कुल बजट ₹1,600 करोड़ है, जिसमें ₹1,100 करोड़ केंद्रीय हिस्सा और ₹500 करोड़ राज्य का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से किसे लाभ मिल सकता है?
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में अलग-अलग घटक और परियोजनाएं शामिल हैं, इसलिए सभी लाभार्थियों के लिए एक जैसी पात्रता तय नहीं है।
- स्वीकृत सिंचाई परियोजनाओं के तहत आने वाले किसान AIBP और HKKP से बनाई गई सिंचाई सुविधाओं से लाभ ले सकते हैं।
- स्वीकृत वाटरशेड क्षेत्रों में रहने वाले किसान और ग्रामीण समुदाय WDC-PMKSY की गतिविधियों से लाभ ले सकते हैं।
- राज्य स्तर की सिंचाई और जल प्रबंधन योजनाओं के लाभार्थियों को संबंधित विभाग द्वारा तय शर्तें पूरी करनी होती हैं।
- PDMC के तहत माइक्रो-इरिगेशन सहायता लेने वाले किसानों को वर्तमान PDMC और राज्य स्तर की पात्रता शर्तें पूरी करनी होती हैं।
किसानों को यह नहीं मानना चाहिए कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के हर घटक की पात्रता एक जैसी है। पात्रता संबंधित घटक, परियोजना और राज्य में लागू नियमों के अनुसार तय होती है।
पात्रताएं
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, में कई अलग-अलग घटक शामिल हैं, इसलिए हर गतिविधि के लिए एक जैसी पात्रता लागू नहीं होती। सामान्य रूप से पात्रता स्वीकृत परियोजना, संबंधित घटक के दिशा-निर्देश और राज्य के नियमों के आधार पर तय की जाती है।
- आवेदक या लाभार्थी संबंधित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना गतिविधि के क्षेत्र या श्रेणी में शामिल होना चाहिए।
- भूमि, सिंचाई परियोजना या वाटरशेड क्षेत्र को संबंधित घटक की निर्धारित शर्तें पूरी करनी चाहिए।
- राज्य स्तर की सहायता लेने वाले किसानों को संबंधित कृषि, बागवानी, सिंचाई या अन्य लागू विभाग द्वारा तय शर्तें पूरी करनी होती हैं।
- कुछ विशेष गतिविधियों के लिए अतिरिक्त पात्रता शर्तें लागू हो सकती हैं।
- आवेदकों को निर्धारित सत्यापन और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
आवेदन करने से पहले किसानों को अपने राज्य के संबंधित विभाग द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देश जरूर देख लेने चाहिए, क्योंकि पात्रता और आवेदन प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों और घटकों में अलग हो सकती है।
आवश्यक दस्तावेज
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के सभी घटकों के लिए दस्तावेजों की एक जैसी सूची नहीं है। जरूरी दस्तावेज संबंधित गतिविधि और राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं। योजना के अनुसार आवेदक से इनमें से कुछ दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:
- आधार कार्ड या निर्धारित पहचान प्रमाण।
- भूमि के स्वामित्व या भूमि से जुड़े दस्तावेज, जहां लागू हों।
- किसान पंजीकरण से जुड़ी जानकारी, जहां लागू हो।
- वित्तीय सहायता या DBT भुगतान के लिए बैंक खाते की जानकारी।
- मोबाइल नंबर और अन्य संपर्क जानकारी।
- संबंधित विभाग द्वारा मांगी गई फोटो या अन्य दस्तावेज।
- संबंधित घटक या राज्य योजना के तहत मांगे गए अन्य दस्तावेज।
आवेदन जमा करने से पहले किसानों को संबंधित राज्य या जिला कार्यालय से जरूरी दस्तावेजों की सही जानकारी ले लेनी चाहिए।
आवेदन प्रक्रिया
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के सभी घटकों के लिए एक जैसी आवेदन प्रक्रिया नहीं है। आवेदन का तरीका मिलने वाली सहायता और संबंधित राज्य या एजेंसी पर निर्भर करता है।
सामान्य आवेदन प्रक्रिया
- अपनी जरूरत के अनुसार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के संबंधित घटक या गतिविधि की पहचान करें।
- जांच करें कि संबंधित गतिविधि आपके क्षेत्र में लागू है या नहीं।
- संबंधित राज्य के कृषि, बागवानी, सिंचाई, ग्रामीण विकास या अन्य लागू विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- नवीनतम पात्रता शर्तें और आवेदन से जुड़े निर्देश पढ़ें।
- जहां जरूरी हो, निर्धारित पंजीकरण या आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
- जरूरी दस्तावेज और भूमि या लाभार्थी से जुड़ी जानकारी जमा करें।
- जरूरत पड़ने पर स्थल निरीक्षण या विभागीय सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करें।
- संबंधित राज्य या विभागीय सिस्टम के माध्यम से आवेदन, परियोजना या लाभ की स्थिति देखें।
योजना का लाभ लेने की जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय, जिला कृषि अधिकारी या जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
क्या प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सीधे नकद सहायता मिलती है?
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, को सभी किसानों को सीधे नकद राशि देने वाली योजना के रूप में नहीं समझना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित और बेहतर करना, जल संरक्षण, वाटरशेड विकास और संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
यदि किसी विशेष घटक के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध है, तो उसकी राशि, पात्रता और भुगतान का तरीका उस घटक के दिशा-निर्देशों तथा संबंधित राज्य या लागू करने वाली एजेंसी के नियमों के अनुसार तय होता है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और Per Drop More Crop में क्या अंतर है?
विवरण | प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना | Per Drop More Crop (PDMC) |
|---|---|---|
मुख्य उद्देश्य | सिंचाई विस्तार, जल प्रबंधन, वाटरशेड विकास और संबंधित गतिविधियां। | माइक्रो-इरिगेशन और सिंचाई के पानी के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना। |
मुख्य तकनीक/गतिविधियां | सिंचाई परियोजनाएं, पानी का वितरण, जल निकायों का सुधार, वाटरशेड विकास और जल संरक्षण। | मुख्य रूप से ड्रिप और स्प्रिंकलर माइक्रो-इरिगेशन। |
वर्तमान स्थिति | वर्तमान सिंचाई और जल प्रबंधन कार्यक्रम। | 2022-23 से PM-RKVY के तहत लागू किया जा रहा है। इससे पहले PMKSY के तहत लागू था। |
आवेदन | संबंधित परियोजना/घटक और लागू करने वाली एजेंसी पर निर्भर करता है। | आमतौर पर संबंधित राज्य के कृषि या बागवानी विभाग के माध्यम से। |
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और MGNREGA का कन्वर्जेंस
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के मूल ढांचे में MGNREGA जैसी योजनाओं के साथ मिलकर जल संरक्षण और जल से जुड़ी संपत्तियां बनाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया था। इस तरह के कन्वर्जेंस से वर्षा जल संचयन, खेत तालाब, जल संरक्षण संरचनाओं और अन्य पात्र कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है। यह संबंधित दिशा-निर्देशों और राज्य में लागू व्यवस्था के अनुसार किया जाता है।
महत्वपूर्ण बातें
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत 2015-16 में सिंचाई की पहुंच और पानी के बेहतर उपयोग को बढ़ाने के लिए की गई थी।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एक सिंचाई और जल प्रबंधन कार्यक्रम है, न कि सभी किसानों को एक निश्चित नकद राशि देने वाली योजना।
- इसके वर्तमान प्रमुख घटकों में AIBP, HKKP और WDC शामिल हैं।
- AIBP का मुख्य फोकस पात्र बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं तथा सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर है।
- HKKP का उद्देश्य सिंचाई के पानी तक पहुंच और पानी के वितरण से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर करना है।
- WDC-PMKSY का फोकस वाटरशेड विकास, मिट्टी और नमी संरक्षण, जल संचयन और वर्षा आधारित क्षेत्रों के टिकाऊ विकास पर है।
- PMKSY के सभी घटकों के लिए एक जैसी आवेदन प्रक्रिया नहीं है।
- आवेदन करने से पहले किसानों को अपने राज्य के संबंधित विभाग के नवीनतम निर्देश जरूर जांचने चाहिए।
महत्वपूर्ण लिंक
- कृषि एवं किसान कल्याण विभाग
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना – आधिकारिक पोर्टल
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना डैशबोर्ड
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश
- WDC-PMKSY – भूमि संसाधन विभाग
संपर्क जानकारी
माइक्रो-इरिगेशन से जुड़ी सहायता के लिए किसानों को अपने राज्य के कृषि या बागवानी विभाग से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि लाभार्थी पंजीकरण, सत्यापन और सहायता की प्रक्रिया राज्य स्तर पर संबंधित विभाग द्वारा की जाती है।
- फोन: संबंधित राज्य कृषि/बागवानी विभाग या किसान कॉल सेंटर 18001801551
- ईमेल: संबंधित राज्य और लागू करने वाले विभाग के अनुसार संपर्क विवरण अलग हो सकते हैं।
- पता: संबंधित राज्य कृषि/बागवानी विभाग या निर्धारित PMKSY/PDMC कार्यान्वयन कार्यालय
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) भारत सरकार की एक योजना है, जिसका उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाना, पानी का सही उपयोग बढ़ाना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वर्ष 2015-16 में शुरू की गई थी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों तक सिंचाई की बेहतर सुविधा पहुंचाना और कृषि में पानी का कुशल उपयोग बढ़ाना है। योजना “हर खेत को पानी” और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” की सोच पर आधारित है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों तक सिंचाई की बेहतर सुविधा पहुंचाना और कृषि में पानी का कुशल उपयोग बढ़ाना है। योजना “हर खेत को पानी” और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” की सोच पर आधारित है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के प्रमुख घटकों में त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), हर खेत को पानी (HKKP) और वाटरशेड विकास (WDC-PMKSY) शामिल हैं।
इस योजना से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सिंचाई, जल संरक्षण और वाटरशेड विकास से जुड़े कार्यों के माध्यम से लाभ मिल सकता है। लाभ संबंधित घटक और स्वीकृत परियोजना पर निर्भर करता है।
नहीं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) सभी किसानों को एक समान नकद सहायता देने वाली योजना नहीं है। मिलने वाला लाभ संबंधित घटक, परियोजना, क्षेत्र और लागू नियमों पर निर्भर करता है।
हां। पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC) के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन प्रणालियों को सहायता दी गई थी। हालांकि, वर्ष 2022-23 से PDMC को PM-RKVY के तहत लागू किया जा रहा है, इसलिए वर्तमान सहायता के लिए संबंधित राज्य के नियमों को देखना जरूरी है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के सभी घटकों के लिए एक समान आवेदन प्रक्रिया नहीं है। आवेदन की प्रक्रिया संबंधित घटक और राज्य की कार्यान्वयन एजेंसी के अनुसार अलग हो सकती है। किसान संबंधित कृषि, बागवानी, सिंचाई या अन्य विभाग से जानकारी ले सकते हैं।
“हर खेत को पानी” PMKSY की प्रमुख सोच है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्रों में सिंचाई की पहुंच बढ़ाना और किसानों को बेहतर जल उपलब्धता में सहायता करना है।
किसान PMKSY के आधिकारिक पोर्टल और संबंधित राज्य या कार्यान्वयन विभाग से योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और लाभ की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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- दूसरों से जुड़ें: कम्युनिटी से जुड़ें और दूसरों से सीखें।
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| जाति | लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | योजना का प्रकार | सरकार |
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टिप्पणियाँ
Modi Yogi zindabad
Modi Yogi zindabad
Jharkhand rajya me pradhanmantri krisi sinchai yojna garib kisan ko kyo nahi mil raha hain
Boring
Boring
Mujhe sichai ke lie boring ka jarurat hai
Mujhe boring ka jarurat hai pani ka bahut kami hai
Muje sichai favvara ki avashyakta hai
Panipat ka mein is Karan favvara ya drip sinchai vidhi ka prayog karna hai
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