- बीमित पशु की मृत्यु होने पर बीमा सुरक्षा मिलती है।
- सरकार बीमा प्रीमियम का 85% हिस्सा देती है।
- पात्र दुधारू पशु, भार ढोने वाले पशु और अन्य पशुओं का बीमा किया जाता है।
- बीमा की सुविधा पशुधन बीमा योजना पोर्टल के माध्यम से मिलती है।
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना |
| लाभ | पशुधन बीमा प्रीमियम पर 85% सहायता, लाभार्थी को केवल 15% राशि देनी होगी। |
| लाभार्थी | पात्र पशु रखने वाले किसान और पशुपालक। |
| नोडल विभाग | भारत सरकार का पशुपालन और डेयरी विभाग |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे। |
| आवेदन का तरीका | पशुधन बीमा योजना पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन |
योजना के बारे में
राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना किसानों और पशुपालकों को बीमित पशुओं की मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए बीमा सुरक्षा देती है। यह योजना राष्ट्रीय पशुधन मिशन के पशुधन बीमा कार्य के तहत चलती है। इसके तहत देशी और संकर दुधारू पशु, घोड़े, गधे, खच्चर, ऊंट, टट्टू, नर मवेशी और भैंस, बकरी, भेड़, सूअर, खरगोश, याक और मिथुन जैसे पात्र पशुओं को बीमा कवर दिया जाता है।
योजना सरकारी प्रीमियम सहायता के माध्यम से पशुधन बीमा को सस्ता बनाती है। लाभार्थी को लागू बीमा प्रीमियम का 15% देना होता है, जबकि बाकी 85% राशि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर देती हैं। यह सहायता प्रत्येक लाभार्थी परिवार के अधिकतम 10 पशु इकाइयों तक उपलब्ध है।
बीमा कवर शुरू होने से पहले किसानों और पशुपालकों को पशु की पहचान, टैग लगाने, पशु चिकित्सक से जांच और पशु का मूल्य तय कराने जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। बीमा राशि पशु के मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर तय की जाती है। दिशा-निर्देशों में गाय और भैंस का मूल्य उनके दूध उत्पादन या लागू स्थानीय बाजार मूल्य के आधार पर तय करने के नियम भी दिए गए हैं, जबकि अन्य पात्र पशुओं का मूल्य तय प्रक्रिया के अनुसार आकलन करके निर्धारित किया जाता है।
लागू प्रीमियम की दर बीमा अवधि और क्षेत्र के आधार पर अलग होती है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 1 वर्ष की बीमा पॉलिसी के लिए अधिकतम प्रीमियम दर सामान्य क्षेत्रों में 4.5% और पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्यों में 5.5% है। 2 वर्ष की पॉलिसी के लिए अधिकतम दरें क्रमशः 8% और 9% हैं, जबकि 3 वर्ष की पॉलिसी के लिए अधिकतम दरें क्रमशः 11% और 11.5% हैं।
पशुपालन और डेयरी विभाग ने पशुधन बीमा सेवाओं को आसान बनाने के लिए राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना पोर्टल भी शुरू किया है। इस पोर्टल पर बीमा पॉलिसी जारी करने, प्रीमियम का प्रबंधन, लाभार्थी की जांच, दावे की प्रक्रिया, निगरानी और रिपोर्ट से जुड़ी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध हैं। किसान पशुधन बीमा योजना पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध बीमा सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। बीमा कवर के साथ पशुपालन के लिए कार्यशील पूंजी की जरूरत वाले पशुपालक किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी भी देख सकते हैं, जिसके तहत पशुपालन गतिविधियों के लिए अल्पकालिक ऋण दिया जाता है।
अगर बीमा अवधि के दौरान बीमित पशु की मृत्यु हो जाती है, तो लाभार्थी तय प्रक्रिया के अनुसार बीमा दावा जमा कर सकता है। दावे के लिए जरूरी दस्तावेजों में बीमा कंपनी को दी गई सूचना, बीमा पॉलिसी के कागजात, दावा पत्र और पशु की मृत्यु के बाद की गई जांच की रिपोर्ट शामिल हैं। इस तरह योजना पात्र किसानों और पशुपालकों को पशु की मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने और सरकारी सहायता से कम लागत पर पशुधन बीमा लेने में मदद करती है।
योजना के लाभ
राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना बीमित पशुओं की मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान से पशुपालकों को बीमा सुरक्षा देती है। सरकार बीमा प्रीमियम का बड़ा हिस्सा वहन करती है, जिससे लाभार्थियों पर आर्थिक बोझ कम होता है।
- बीमित पशु की मृत्यु होने पर बीमा सुरक्षा मिलती है।
- केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बीमा प्रीमियम का 85% देती हैं।
- लाभार्थी को प्रीमियम का केवल 15% हिस्सा देना होता है।
- बीमित पशु की मृत्यु होने पर लाभार्थी को बीमा की पूरी राशि मिलती है।
- प्रत्येक लाभार्थी परिवार के अधिकतम 10 पशु इकाइयों तक सब्सिडी वाला बीमा उपलब्ध है।
- 1 पशु इकाई से कम पशु रखने वाला लाभार्थी भी प्रीमियम सहायता का लाभ ले सकता है।
- पंजीकरण, बीमा और दावा जमा करने की प्रक्रिया पशुधन बीमा योजना पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पूरी की जा सकती है।
- लाभार्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए 4 स्तर की व्यवस्था उपलब्ध है।
प्रीमियम और बीमा राशि
बीमा कंपनी पशु के मौजूदा बाजार मूल्य का आकलन लाभार्थी की सहमति से और पशु चिकित्सक की मौजूदगी में करती है। लागू प्रीमियम की दर बीमा की अवधि और लाभार्थी के क्षेत्र के आधार पर तय होती है।
- गाय के लिए न्यूनतम मूल्य दूध की प्रतिदिन 1 लीटर उपज के लिए ₹3,000 या सरकार द्वारा घोषित स्थानीय बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाता है।
- भैंस के लिए न्यूनतम मूल्य दूध की प्रतिदिन 1 लीटर उपज के लिए ₹4,000 या सरकार द्वारा घोषित स्थानीय बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाता है।
- भार ढोने वाले पशुओं और अन्य पात्र पशुओं का बाजार मूल्य पशु के मालिक और बीमा कंपनी के बीच बातचीत से, पशु चिकित्सक की मौजूदगी में तय किया जाता है।
- मूल्य को लेकर विवाद होने पर ग्राम पंचायत या खंड विकास अधिकारी द्वारा कीमत तय की जाती है।
- सामान्य क्षेत्रों में अधिकतम प्रीमियम दर 1 वर्ष के लिए 4.5%, 2 वर्ष के लिए 8% और 3 वर्ष के लिए 11% है।
- पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में अधिकतम प्रीमियम दर 1 वर्ष के लिए 5.5%, 2 वर्ष के लिए 9% और 3 वर्ष के लिए 11.5% है।
- सरकार द्वारा दिए जाने वाले 85% हिस्से का खर्च सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90:10 के अनुपात में और केंद्र शासित प्रदेशों में 100% केंद्र सरकार द्वारा उठाया जाता है।
दावे का निपटारा
पशुधन बीमा के दिशा-निर्देशों में दावे का निपटारा आसान रखने के लिए जरूरी दस्तावेजों की संख्या सीमित की गई है और भुगतान के लिए समय सीमा तय की गई है। बीमा कंपनी दावा निपटाने के लिए केवल 4 दस्तावेज मांग सकती है।
- बीमा कंपनी को दी गई सूचना
- बीमा पॉलिसी के कागजात
- दावा पत्र
- पशु की मृत्यु के बाद की गई जांच की रिपोर्ट
- पॉलिसी जारी होने की तारीख से 21 दिन पूरे होने से पहले किसी दावे पर विचार नहीं किया जा सकता।
- सभी जरूरी दस्तावेज जमा होने के 21 से 25 दिनों के भीतर दावे का निपटारा किया जाता है।
- अगर बीमा कंपनी तय समय के भीतर दावे का निपटारा नहीं करती है, तो उसे लाभार्थी को 12% वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज के रूप में जुर्माना देना होगा।
- पशुओं का बीमा कराने और दावे का निपटारा करने से जुड़े सभी दस्तावेज और आवेदन पत्र स्थानीय भाषा या अंग्रेजी में उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
- अगर लाभार्थी अपनी बीमा पॉलिसी के कागजात की प्रति खो देता है, तो बीमा कंपनी को तुरंत उसकी दूसरी प्रति जारी करनी होगी।
- अगर किसी दावे में देरी होती है या उसे खारिज किया जाता है, तो बीमा कंपनी को दावेदार को इसका पूरा कारण बताना होगा और इसकी जानकारी जिला निगरानी समिति तथा राज्य कार्यान्वयन एजेंसी को भी देनी होगी।
पात्रताएं
किसान और पशुपालक राष्ट्रीय पशुधन मिशन के पशुधन बीमा घटक के तहत पशुधन बीमा का लाभ ले सकते हैं। यह योजना तय पहचान, मूल्यांकन और बीमा से जुड़ी शर्तों के आधार पर विभिन्न प्रकार के पशुओं को कवर करती है।
- आवेदक ऐसा किसान या पशुपालक होना चाहिए जो पात्र पशुओं का बीमा कराना चाहता है।
- पशु पशुधन बीमा घटक के तहत शामिल किसी पात्र पशु श्रेणी का होना चाहिए।
- पशु की सही पहचान होनी चाहिए और उसे एक अलग पहचान संख्या वाला टैग लगाया गया होना चाहिए।
- बीमा पॉलिसी जारी होने से पहले पशु की पशु चिकित्सक से जांच करानी जरूरी है।
- बीमा राशि तय करने के लिए पशु के मौजूदा बाजार मूल्य का आकलन किया जाना चाहिए।
- बीमा कवर शुरू होने से पहले पशु की पहचान, टैग लगाने, जांच और मूल्यांकन से जुड़ी सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
- लाभार्थी को बीमा प्रीमियम का लागू हिस्सा देना होगा।
- सूअर और खरगोश को छोड़कर अन्य पात्र पशुओं के लिए प्रत्येक लाभार्थी परिवार के अधिकतम 10 पशु इकाइयों तक प्रीमियम सहायता उपलब्ध है।
- सूअर और खरगोश के लिए प्रत्येक लाभार्थी परिवार को अधिकतम 5 पशु इकाइयों तक प्रीमियम सहायता दी जाती है।
- 10 से कम पशु रखने वाला लाभार्थी भी लागू प्रीमियम सहायता का लाभ ले सकता है।
पशु इकाई की गणना
पशुधन बीमा योजना के तहत सब्सिडी वाले बीमा के लिए पात्र पशुओं की संख्या पशु इकाई के आधार पर गिनी जाती है, जो इस प्रकार है:
- 1 पशु इकाई = 1 बड़ा पशु, जैसे गाय या भैंस
- 1 पशु इकाई = 10 भेड़ या बकरियां
- 1 पशु इकाई = 5 खरगोश या सूअर
योजना के तहत शामिल पशु
पशुधन बीमा घटक के तहत राष्ट्रीय पशुधन मिशन में बताए गए देशी और संकर दुधारू पशु, भार ढोने वाले पशु और अन्य पात्र पशुओं को बीमा कवर दिया जाता है।
- देशी और संकर दुधारू पशु
- घोड़े
- गधे
- खच्चर
- ऊंट
- टट्टू
- नर मवेशी और भैंस
- बकरियां
- भेड़
- सूअर
- खरगोश
- याक
- मिथुन
आवश्यक दस्तावेज
पशुधन बीमा योजना के तहत पशुओं का बीमा कराते समय आवेदकों को पशु की पहचान, फोटो, पशु चिकित्सक की जांच और बीमा से जुड़ी जरूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। पशुधन बीमा के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आवेदन के लिए नीचे दिए गए दस्तावेज और जानकारी जरूरी हो सकती है:
पशुधन बीमा के लिए जरूरी दस्तावेज
- जरूरत पड़ने पर पशुपालक का आधार कार्ड या पहचान से जुड़ी जानकारी, जैसा कि पोर्टल या बीमा कंपनी द्वारा मांगा जाए।
- पशु की 12 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या या कान का टैग नंबर।
- पशु और उसके मालिक की साथ में फोटो।
- पशु की ऐसी फोटो जिसमें उसके कान का टैग साफ दिखाई दे।
- पशु चिकित्सक की जांच और पशु की पहचान से जुड़ी जानकारी।
- पशु के मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी।
- बीमा प्रीमियम भुगतान से जुड़ी जानकारी।
- बीमा पॉलिसी के कागजात।
बीमा दावा करने के लिए जरूरी दस्तावेज
- बीमा कंपनी को दी गई सूचना
- बीमा पॉलिसी के कागजात
- दावा पत्र
- पशु की मृत्यु के बाद की गई जांच की रिपोर्ट
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बीमा कंपनी दावा निपटाने के लिए केवल ये 4 दस्तावेज मांग सकती है। सभी आवेदन पत्र और दस्तावेज स्थानीय भाषा या अंग्रेजी में उपलब्ध कराए जाने चाहिए। अगर लाभार्थी अपनी बीमा पॉलिसी के कागजात की प्रति खो देता है, तो बीमा कंपनी को तुरंत उसकी दूसरी प्रति जारी करनी होगी।
आवेदन प्रक्रिया
आवेदक अक्सर यह जानना चाहते हैं कि पशुधन बीमा योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें। इस योजना के तहत पशुधन बीमा के लिए पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा शुरू किए गए पशुधन बीमा योजना पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जाता है।
आवेदन करने से पहले पशु पर 12 अंकों वाली विशिष्ट पशु पहचान संख्या का टैग लगा होना चाहिए और उसका पंजीकरण राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के आंकड़ों में होना चाहिए। आवेदक का मोबाइल नंबर भी इसमें पंजीकृत होना जरूरी है। जिन पशुओं पर अभी टैग नहीं लगा है, उनके पशुपालकों को पहले टैग लगाने और पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अपने नजदीकी पशु चिकित्सक या पशुपालन कार्यालय से संपर्क करना चाहिए।
पशुधन बीमा के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
- पशुधन बीमा योजना पोर्टल rashtriyapashubima.dahd.gov.in पर जाएं और "Insure Now" पर क्लिक करें।

- अपने राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन में पंजीकृत मोबाइल नंबर और पशु के किसी एक वैध कान के टैग नंबर का उपयोग करके पोर्टल पर पंजीकरण करें।

- अपना संपर्क पता जांचें और उसकी पुष्टि करें।
- टैग नंबर के आधार पर उस पशु या पशुओं को चुनें जिनका बीमा कराना है।
- आवेदन पत्र जमा करें और जांच की अगली प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ें।
- आवेदन की स्थिति देखने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन में पंजीकृत मोबाइल नंबर से पोर्टल पर प्रवेश करें।
आवेदन जमा करने के बाद भारतीय पशु चिकित्सा परिषद में पंजीकृत पशु चिकित्सक पशु की जांच करता है। इसके बाद पशु चिकित्सक की मौजूदगी में लाभार्थी और बीमा कंपनी मिलकर पशु के बाजार मूल्य का आकलन करते हैं। बीमा प्रस्ताव के साथ 2 फोटो लगाई जाती हैं। इनमें से एक फोटो में पशु और उसका मालिक साथ दिखाई देते हैं और दूसरी फोटो में पशु के कान का टैग साफ दिखाई देना चाहिए। ये सभी प्रक्रियाएं पूरी होने और लाभार्थी द्वारा प्रीमियम का 15% हिस्सा जमा करने के बाद बीमा पॉलिसी जारी की जाती है।
बीमा राशि का दावा कैसे करें?
अगर बीमा अवधि के दौरान बीमित पशु की मृत्यु हो जाती है, तो लाभार्थी को बीमा कंपनी को इसकी जानकारी देनी चाहिए और तय प्रक्रिया के अनुसार जरूरी दावा दस्तावेज जमा करने चाहिए।
- राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन में पंजीकृत मोबाइल नंबर का उपयोग करके पशुधन बीमा योजना पोर्टल पर प्रवेश करें।
- "My Claims" विकल्प पर क्लिक करें।
- दावा पत्र में मांगी गई जरूरी जानकारी दर्ज करें।
- जरूरत होने पर जरूरी सहायक दस्तावेज अपलोड करें।
महत्वपूर्ण लिंक
- राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना पंजीकरण
- राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना प्रवेश
- राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना पोर्टल
- पशुपालन और डेयरी विभाग
- पशुधन बीमा योजना पोर्टल - अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- राज्यवार सूची - सूचीबद्ध बीमा कंपनियां
संपर्क जानकारी
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना राष्ट्रीय पशुधन मिशन के पशुधन बीमा कार्य के तहत किसानों और पशुपालकों को बीमित पशु की मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए बीमा सुरक्षा देती है।
पात्र पशु रखने वाले किसान और पशुपालक इस योजना के तहत बीमा के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए पशु की पहचान, टैग लगाने, पशु चिकित्सक से जांच और मूल्यांकन से जुड़ी तय शर्तें पूरी करनी होंगी।
केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बीमा प्रीमियम का 85% हिस्सा देती हैं, जबकि लाभार्थी को बाकी 15% राशि देनी होती है।
इस योजना के तहत देशी और संकर दुधारू पशु, घोड़े, गधे, खच्चर, ऊंट, टट्टू, नर मवेशी और भैंस, बकरी, भेड़, सूअर, खरगोश, याक और मिथुन का बीमा किया जाता है। इसके लिए लागू शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
सूअर और खरगोश को छोड़कर अन्य पात्र पशुओं के लिए प्रत्येक लाभार्थी परिवार को अधिकतम 10 पशु इकाइयों तक प्रीमियम सहायता मिल सकती है। सूअर और खरगोश के लिए यह सहायता अधिकतम 5 पशु इकाइयों तक सीमित है।
बीमा कंपनी पशु चिकित्सक की मौजूदगी में लाभार्थी के साथ मिलकर पशु के मौजूदा बाजार मूल्य का आकलन करती है। अलग-अलग पशु श्रेणियों के लिए तय मूल्यांकन नियम लागू होते हैं।
किसान राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना पोर्टल के माध्यम से पशुधन बीमा की सुविधा ले सकते हैं।
लाभार्थी तय प्रक्रिया के अनुसार बीमा कंपनी के पास दावा जमा कर सकता है। दिशा-निर्देशों के अनुसार, बीमित पशु की मृत्यु होने पर लागू दावा शर्तों को पूरा करने पर बीमा की पूरी राशि का भुगतान किया जाता है।
नहीं। पशु पर पहले 12 अंकों वाली विशिष्ट पशु पहचान संख्या का टैग लगाना और उसे राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के आंकड़ों में दर्ज करना जरूरी है। जिन पशुओं पर अभी टैग नहीं लगा है, उनके पशुपालकों को अपने नजदीकी पशु चिकित्सक या पशुपालन कार्यालय से संपर्क करना चाहिए।
यह बीमा उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध है, जहां योजना के तहत किसी बीमा कंपनी को सूचीबद्ध किया गया है। सूचीबद्ध बीमा कंपनियों की राज्यवार सूची पशुधन बीमा योजना पोर्टल पर उपलब्ध है।
पॉलिसी जारी होने की तारीख से 21 दिन पूरे होने से पहले किसी दावे पर विचार नहीं किया जा सकता।
अगर पॉलिसी की अवधि खत्म होने से पहले पशु को बेच दिया जाता है या किसी दूसरे व्यक्ति को दे दिया जाता है, तो बची हुई बीमा अवधि के लिए लाभार्थी के अधिकार नए मालिक को देने होंगे।
नहीं। अगर पशु पर किसी अन्य सरकारी योजना के तहत पहले से टैग लगा है, तो दोबारा टैग लगाने की जरूरत नहीं है। बीमा के लिए पहले से मिली विशिष्ट पहचान संख्या का ही उपयोग किया जाएगा।
नहीं। यह राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत लागू केंद्र सरकार की योजना है। कई राज्य अपनी अलग पशुधन बीमा योजनाएं चलाते हैं, जिनके नाम, प्रीमियम की दर और बीमा की सीमा अलग हो सकती है। उन्हें इस योजना से अलग समझना चाहिए।
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| लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | योजना का प्रकार | सरकार |
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