उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम)

author
द्वारा प्रस्तुत Minakshi on Thu, 08/10/2026 - 17:48
केन्द्रीय सरकार CM
Scheme Open
उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम)
हाइलाइट
  • कृषि मशीनरी पर 40% से 50% तक सब्सिडी
  • छोटे, सीमांत, महिला और SC/ST किसानों के लिए विशेष सहायता
  • कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक की सुविधा
  • किसान ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता
  • फार्म मशीनरी DBT पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैक करने की सुविधा
ग्राहक देखभाल फ़ोन नंबर
  • कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार
योजना का अवलोकन
योजना का नामउप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम)
शुरू होने का वर्ष2014-15
लाभकृषि मशीनों पर 50% तक सब्सिडी; कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 40% तक सहायता; फार्म मशीनरी बैंक के लिए 80% तक सहायता
लाभार्थीकिसान, FPO, स्वयं सहायता समूह (SHG), सहकारी समितियां और ग्रामीण उद्यमी
नोडल एजेंसीकृषि एवं किसान कल्याण विभाग
सदस्यतायोजना से जुड़े अपडेट पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें
आवेदन का तरीकाराज्य कृषि विभाग के माध्यम से ऑनलाइन या फार्म मशीनरी DBT पोर्टल के माध्यम से

योजना के बारे में

आज के समय में कृषि मशीनों की मदद से खेती का काम जल्दी किया जा सकता है, मेहनत कम होती है और खेत से जुड़े जरूरी काम सही समय पर पूरे किए जा सकते हैं। लेकिन छोटी और सीमांत जोत वाले किसानों के लिए महंगी कृषि मशीन खरीदना आसान नहीं होता। इसी परेशानी को कम करने के लिए उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) शुरू किया गया। यह योजना किसानों तक कृषि मशीनें और मशीनीकरण की सुविधाएं पहुंचाने में मदद करती है। 2014-15 में शुरू हुई इस योजना के तहत पात्र कृषि मशीनों पर आम तौर पर 40% से 50% तक सहायता दी जाती है, जबकि कुछ किसान वर्गों और क्षेत्रों के लिए इससे अधिक सहायता का प्रावधान है। योजना के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) को ₹250 लाख तक की परियोजना लागत पर 40% तक सहायता और फार्म मशीनरी बैंक (FMB) को ₹30 लाख तक की परियोजना लागत पर 80% तक सहायता दी जाती है। इससे उन किसानों को भी कृषि मशीनों का इस्तेमाल करने का मौका मिलता है जो महंगी मशीनें खुद नहीं खरीद सकते और उन्हें किराये या साझा सुविधा के माध्यम से इस्तेमाल कर सकते हैं।

उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राज्य सरकारों और कृषि मशीनीकरण से जुड़े निर्धारित विभागों और एजेंसियों के माध्यम से लागू किया जाता है। यह योजना वर्तमान में PM-RKVY के एक हिस्से के रूप में लागू है। इसके तहत प्रशिक्षण, मशीनों का प्रदर्शन, मशीनों की जांच, फसल कटाई के बाद इस्तेमाल होने वाली मशीनें, फसल अवशेष प्रबंधन और किसान ड्रोन जैसी गतिविधियों को भी सहायता दी जाती है। योजना में सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच फंडिंग का अनुपात 60:40 है, जबकि उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए यह 90:10 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100% केंद्रीय फंडिंग है। कुछ विशेष केंद्रीय गतिविधियों के लिए अलग फंडिंग व्यवस्था लागू होती है।

इस योजना में छोटे और सीमांत किसानों, SC/ST किसानों, महिला किसानों तथा उत्तर-पूर्वी और हिमालयी क्षेत्रों के किसानों को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, अन्य पात्र किसान भी लागू नियमों के अनुसार सहायता ले सकते हैं। कृषि मशीन किराये पर देने या साझा मशीन सुविधा शुरू करने के लिए FPO, SHG, सहकारी समितियां, किसान समितियां, पंचायतें और ग्रामीण उद्यमी भी निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता ले सकते हैं। किसान अपने राज्य के कृषि विभाग के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। जिस राज्य में इसकी सुविधा उपलब्ध है, वहां सरकार के फार्म मशीनरी DBT पोर्टल के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है। राज्य और उपलब्ध लक्ष्य के अनुसार, अगर आवेदन की संख्या तय लक्ष्य से ज्यादा हो जाती है, तो लाभार्थियों का चयन ऑनलाइन लॉटरी जैसी पारदर्शी प्रक्रिया से किया जा सकता है।

जिन किसानों को पंजीकरण, पात्रता, मशीन चुनने या आवेदन करने में परेशानी हो, वे अपने राज्य या जिला कृषि विभाग से मदद ले सकते हैं। ऑनलाइन फार्म मशीनरी पोर्टल पर पंजीकरण, मशीनों, आवेदन और योजना को लागू करने से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध रहती है। किसी मशीन पर मिलने वाली सब्सिडी उसकी कीमत, मशीन के प्रकार, किसान की श्रेणी और लागू अधिकतम सीमा पर निर्भर करती है। इसलिए मशीन खरीदने से पहले किसान को अपने राज्य में लागू मौजूदा नियमों और सहायता की सीमा जरूर जांच लेनी चाहिए।

जो पाठक कृषि से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं और कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए वित्तीय सहायता की जानकारी चाहते हैं, वे कृषि अवसंरचना निधि (AIF) की जानकारी भी देख सकते हैं। इस योजना के तहत पात्र कृषि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, कस्टम हायरिंग सेंटर और खेती से जुड़ी अन्य सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। इसलिए जहां दोनों योजनाओं की पात्रता और नियम पूरे होते हैं, वहां SMAM के साथ AIF भी उपयोगी हो सकता है।

उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) के मुख्य क्षेत्र

योजना के लाभ

उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) किसानों को कम लागत में आधुनिक कृषि मशीनों तक पहुंच बनाने में मदद करता है। साथ ही, यह उन किसानों के लिए साझा मशीन सुविधाओं को भी बढ़ावा देता है जो महंगी मशीनें खुद खरीदने में सक्षम नहीं हैं।

  • पात्र किसानों को कृषि मशीनों पर 40% वित्तीय सहायता मिल सकती है, जबकि छोटे और सीमांत किसान, SC/ST किसान और महिला किसानों जैसी निर्धारित श्रेणियों को 50% तक सहायता मिल सकती है। यह सहायता मशीन के लिए तय अधिकतम सीमा के अधीन होती है।
  • पात्र वन अधिकार अधिनियम (FRA) के पट्टा धारकों को निर्धारित नियमों के तहत 90% तक सहायता मिल सकती है।
  • उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के किसान ₹1.25 लाख तक की पात्र मशीनों पर 100% तक सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जो लागू नियमों के अनुसार होगी।
  • कस्टम हायरिंग सेंटर को ₹250 लाख तक की पात्र परियोजना लागत पर 40% तक वित्तीय सहायता मिल सकती है।
  • फार्म मशीनरी बैंक को ₹30 लाख तक की पात्र परियोजना लागत पर 80% तक सहायता मिल सकती है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और FRA पट्टा धारक समूहों के लिए कुछ मामलों में इससे अधिक सहायता का प्रावधान है।
  • किसान महंगी कृषि मशीनें खुद खरीदने के बजाय कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक के माध्यम से किराये पर लेकर इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • योजना के तहत बुवाई, रोपाई, कटाई, मड़ाई, छिड़काव और फसल कटाई के बाद के काम जैसी गतिविधियों के लिए मशीनों को सहायता दी जाती है।
  • किसानों की आधुनिक कृषि तकनीक तक पहुंच बढ़ाने के लिए हाई-टेक हब और आधुनिक कृषि मशीनों को भी सहायता दी जाती है।
  • कृषि ड्रोन से जुड़ी पात्र गतिविधियों के लिए भी अलग-अलग प्रावधानों के तहत वित्तीय सहायता दी जाती है। इसमें ड्रोन प्रदर्शन और ड्रोन आधारित कस्टम हायरिंग सेंटर शामिल हैं।
  • योजना के तहत प्रशिक्षण और कौशल विकास को भी बढ़ावा दिया जाता है, ताकि किसान, मशीन ऑपरेटर और दूसरे संबंधित लोग कृषि मशीनों का सुरक्षित और सही तरीके से इस्तेमाल कर सकें।
  • कृषि मशीनों की जांच और मूल्यांकन निर्धारित परीक्षण संस्थानों के माध्यम से किया जाता है, ताकि किसानों को उपयुक्त और भरोसेमंद कृषि मशीनें उपलब्ध हो सकें।
  • उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) के तहत फसल अवशेष प्रबंधन और फसल कटाई के बाद की मशीनीकरण सुविधाओं को भी सहायता दी जाती है। इससे किसान कृषि उपज और फसल अवशेषों को बेहतर तरीके से संभालने वाली मशीनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, SMAM का उद्देश्य केवल कृषि मशीन खरीदने का शुरुआती खर्च कम करना नहीं है। इसका उद्देश्य साझा और किराये की मशीन सुविधाओं के माध्यम से महंगी कृषि मशीनों को किसानों तक पहुंचाना भी है, खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए।

कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन की सब्सिडी: कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?

उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) के तहत मिलने वाली सहायता आवेदक की श्रेणी, मशीन और गतिविधि के आधार पर अलग-अलग होती है। योजना में व्यक्तिगत किसानों के साथ-साथ साझा मशीन सुविधा शुरू करने वाली संस्थाओं और समूहों के लिए भी अलग-अलग सहायता का प्रावधान है। कुछ किसान श्रेणियों और क्षेत्रों को अधिक सहायता दी जाती है।

श्रेणी

वित्तीय सहायता

SC/ST, छोटे और सीमांत किसान, महिला किसान तथा उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के किसान
पात्र मशीन की लागत का 50%
अन्य पात्र किसान
पात्र मशीन की लागत का 40%
FRA पट्टा धारक
पात्र मशीन की लागत का 90%
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ₹1.25 लाख तक की व्यक्तिगत मशीनें
100% तक
कस्टम हायरिंग सेंटर
परियोजना लागत का 40%, अधिकतम ₹250 लाख तक
फार्म मशीनरी बैंक
परियोजना लागत का 80%, अधिकतम ₹30 लाख तक

व्यक्तिगत कृषि मशीन के लिए सब्सिडी की गणना लागू प्रतिशत और SMAM के तहत उस मशीन के लिए तय अधिकतम सीमा के आधार पर की जाती है। पात्र सहायता की राशि राज्य द्वारा तय कीमत के लागू प्रतिशत या निर्धारित अधिकतम सीमा में से जो कम हो, उसके आधार पर तय होती है और इसमें GST शामिल नहीं किया जाता है।

संशोधित दिशा-निर्देशों में महंगी कृषि मशीनों को साझा इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने पर भी अधिक ध्यान दिया गया है। 40 HP से अधिक के ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और गन्ना हार्वेस्टर जैसी महंगी मशीनों को मुख्य रूप से व्यक्तिगत खरीद के बजाय कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जाती है।

कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन के तहत मिलने वाली कृषि मशीनें

कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन के तहत खेती के अलग-अलग कामों में इस्तेमाल होने वाली कई तरह की कृषि मशीनों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों की शारीरिक मेहनत कम करना, खेती के काम समय पर पूरा करने में मदद करना और आधुनिक मशीनों तक किसानों की पहुंच बढ़ाना है।

  • ट्रैक्टर और ट्रैक्टर से चलने वाली अन्य कृषि मशीनें।
  • पावर टिलर और जमीन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें।
  • सीडर, प्लांटर और बुवाई तथा रोपाई के लिए इस्तेमाल होने वाली अन्य मशीनें।
  • धान रोपाई की मशीनें और अन्य फसल विशेष रोपाई मशीनें।
  • रीपर, रीपर-कम-बाइंडर और फसल कटाई की मशीनें।
  • कंबाइन हार्वेस्टर और फसल कटाई में इस्तेमाल होने वाली अन्य मशीनें।
  • फसल सुरक्षा और पौध संरक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण।
  • फसल कटाई के बाद इस्तेमाल होने वाली और प्रसंस्करण की मशीनें।
  • लागू प्रावधानों के तहत फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनें, जैसे हैप्पी सीडर, सुपर SMS, मल्चर, बेलर और स्ट्रॉ चॉपर।
  • कस्टम हायरिंग सेंटर और हाई-टेक हब के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली आधुनिक और महंगी कृषि मशीनें।
  • लागू किसान ड्रोन प्रावधानों के तहत कृषि ड्रोन और उनसे जुड़े उपकरण।

हर मशीन के लिए सब्सिडी की अधिकतम सीमा अलग हो सकती है। इसलिए मशीन खरीदने से पहले किसान को SMAM पोर्टल या अपने राज्य के कृषि विभाग से यह जरूर देख लेना चाहिए कि कौन-सी मशीन सूची में शामिल है और उस पर कितनी अधिकतम सहायता मिल सकती है।

कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर

कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) ऐसी सुविधा है जहां किसान कृषि मशीनें खरीदने के बजाय किराये पर लेकर इस्तेमाल कर सकते हैं। यह खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी है, जिन्हें आधुनिक मशीनों की जरूरत होती है लेकिन वे पूरी कीमत देकर महंगी मशीन खरीदने में सक्षम नहीं होते।

  • पात्र CHC परियोजनाओं को परियोजना लागत का 40% तक वित्तीय सहायता मिल सकती है।
  • सहायता के लिए अधिकतम पात्र परियोजना लागत ₹250 लाख (₹2.5 करोड़) है।
  • यह सहायता बैंक के माध्यम से दी जाने वाली क्रेडिट-लिंक्ड, बैक-एंडेड सब्सिडी के रूप में दी जाती है।
  • ₹50 लाख से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की जरूरत होती है।
  • पात्र आवेदकों में व्यक्तिगत किसान, ग्रामीण उद्यमी, सहकारी समितियां, पंजीकृत सोसायटी, FPO, SHG, पंचायत और अन्य निर्धारित संस्थाएं शामिल हो सकती हैं।
  • दिशा-निर्देशों के अनुसार FMTTI या किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से प्रशिक्षण लेना जरूरी होता है।
  • कम कृषि मशीनीकरण वाले क्षेत्रों और छोटे जोत वाले किसानों की अधिक संख्या वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है।
  • CHC का जियो-रेफरेंसिंग किया जाना जरूरी है और उसकी जानकारी निर्धारित डिजिटल सिस्टम पर अपलोड की जाती है।
  • CHC और हाई-टेक हब के फंड का एक हिस्सा DAY-NRLM के तहत पात्र स्वयं सहायता समूहों के लिए रखा जाता है।

CHC की सुविधा से गांव या स्थानीय क्षेत्र में कृषि मशीनों का एक ऐसा केंद्र बनता है जहां किसान जरूरत के समय मशीन किराये पर ले सकते हैं। इससे उन्हें हर मशीन खुद खरीदने के लिए बड़ी रकम खर्च नहीं करनी पड़ती।

कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन के तहत फार्म मशीनरी बैंक

फार्म मशीनरी बैंक (FMB) ऐसी साझा मशीन सुविधा है जिसके माध्यम से पात्र किसान समूह और स्थानीय संस्थाएं कृषि मशीनें किसानों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करा सकती हैं। संशोधित SMAM दिशा-निर्देशों में FMB की परियोजना सीमा बढ़ाई गई है। इससे उन गांवों के लिए यह सुविधा अधिक उपयोगी हो गई है जहां हर किसान के लिए अलग से मशीन खरीदना आसान नहीं है।

  • पात्र FMB परियोजनाओं को परियोजना लागत का 80% तक सहायता मिल सकती है।
  • सहायता के लिए अधिकतम परियोजना लागत ₹30 लाख मानी जाती है और अधिकतम सहायता सामान्य तौर पर ₹24 लाख तक सीमित होती है।
  • FRA पट्टा धारकों से जुड़े पात्र SHG और FPO को 90% सहायता मिल सकती है, जिसकी अधिकतम सहायता ₹27 लाख तक है।
  • उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में FMB को 95% तक सहायता मिल सकती है, जिसकी अधिकतम सहायता ₹28.50 लाख तक है।
  • पात्र आवेदकों में FPO, SHG, सहकारी समितियां, पंजीकृत किसान समितियां और पंचायतें शामिल हैं, जो योजना की शर्तों को पूरा करती हों।
  • ₹10 लाख से अधिक की परियोजनाओं के लिए क्रेडिट लिंक की जरूरत होती है।
  • सामान्य तौर पर एक FMB परियोजना में अधिकतम एक ट्रैक्टर की अनुमति होती है।
  • FMB के बजट का कम से कम 25% हिस्सा DAY-NRLM के तहत पात्र महिला SHG द्वारा चलाए जाने वाले प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन वाले FMB के लिए रखा जाता है।
  • कम मशीनीकरण वाले गांवों, वर्षा आधारित क्षेत्रों और आकांक्षी जिलों को प्राथमिकता दी जाती है।

फार्म मशीनरी बैंक के माध्यम से कई किसान एक ही मशीन सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे हर किसान को अलग-अलग महंगी मशीन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। यह सुविधा उन क्षेत्रों में खास तौर पर उपयोगी है जहां महंगी कृषि मशीनों की जरूरत केवल खेती के किसी खास समय या काम के दौरान होती है।

पात्रताएं

उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) का उद्देश्य किसानों और खेती से जुड़े समूहों तक कृषि मशीनें पहुंचाना है। आवेदक व्यक्तिगत मशीन के लिए आवेदन कर रहा है, कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करना चाहता है, फार्म मशीनरी बैंक बनाना चाहता है या किसी दूसरी सहायता के लिए आवेदन कर रहा है, इसके अनुसार पात्रता की शर्तें अलग हो सकती हैं।

  • जिन व्यक्तिगत किसानों के पास वैध भूमि रिकॉर्ड हैं, वे योजना के तहत पात्र कृषि मशीन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • छोटे और सीमांत किसान, SC/ST किसान और महिला किसान लागू नियमों के अनुसार अधिक सहायता के लिए पात्र हैं।
  • उत्तर-पूर्वी और हिमालयी क्षेत्रों के किसान इन क्षेत्रों के लिए लागू विशेष प्रावधानों के तहत लाभ ले सकते हैं।
  • पात्र FRA पट्टा धारक योजना के तहत मिलने वाली अधिक सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • कस्टम हायरिंग सेंटर पात्र व्यक्तिगत किसानों, ग्रामीण उद्यमियों, सहकारी समितियों, पंजीकृत सोसायटी, FPO, SHG, पंचायत और अन्य पात्र समूहों द्वारा स्थापित किए जा सकते हैं।
  • फार्म मशीनरी बैंक पात्र सहकारी समितियों, FPO, SHG, पंजीकृत किसान समितियों और पंचायतों द्वारा स्थापित किए जा सकते हैं।
  • पात्र संस्थाएं, FPO और कृषि स्नातक किसान ड्रोन से जुड़े प्रावधानों के तहत आवेदन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए लागू शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
  • आवेदक को आवेदन के अनुसार जरूरी भूमि, पहचान, बैंक और श्रेणी से जुड़े दस्तावेज देने होते हैं।
  • कस्टम हायरिंग सेंटर या फार्म मशीनरी बैंक के लिए सहायता लेने वाले आवेदकों को लागू परियोजना की शर्तें पूरी करनी होती हैं। इसमें जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण और परियोजना से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हो सकते हैं।
  • कृषि स्नातकों को मिलने वाली ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर सहायता के लिए आवेदक को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण की शर्तें पूरी करनी होती हैं।
  • योजना की सटीक पात्रता, मशीनों की सूची और लाभार्थी चयन की शर्तें राज्य में योजना को लागू करने के तरीके और उस वर्ष उपलब्ध लक्ष्य के अनुसार अलग हो सकती हैं।

आवश्यक दस्तावेज

उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) के तहत आवेदन करने से पहले आवेदक को कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। किस मशीन या सुविधा के लिए आवेदन किया जा रहा है और राज्य की क्या जरूरतें हैं, इसके अनुसार दस्तावेजों की सूची अलग हो सकती है।

  • आधार कार्ड या निर्धारित अन्य पहचान पत्र।
  • वैध भूमि रिकॉर्ड या आवेदक की खेती और जमीन से जुड़ी जानकारी दिखाने वाले दस्तावेज।
  • सब्सिडी DBT के माध्यम से पाने के लिए बैंक पासबुक या बैंक खाते की जानकारी।
  • हाल की पासपोर्ट साइज फोटो।
  • आवेदन और OTP सत्यापन के लिए मोबाइल नंबर।
  • जहां लागू हो, श्रेणी के आधार पर सहायता लेने के लिए जाति प्रमाण पत्र।
  • जहां जरूरी हो, मृदा स्वास्थ्य कार्ड।
  • कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक के लिए समूह या संस्था के पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज।
  • जहां जरूरी हो, परियोजना रिपोर्ट या विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR)।
  • जहां क्रेडिट लिंक जरूरी हो, वहां बैंक से मिले ऋण स्वीकृति पत्र या उससे जुड़े वित्तीय दस्तावेज।
  • जहां किसी खास गतिविधि के लिए प्रशिक्षण जरूरी हो, वहां प्रशिक्षण या प्रमाण पत्र से जुड़े दस्तावेज।
  • पात्र किसान ड्रोन से जुड़े आवेदन के लिए जरूरी शैक्षणिक और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण या प्रमाण पत्र के दस्तावेज।

आवेदन जमा करने से पहले आवेदक को संबंधित राज्य के कृषि पोर्टल पर दिखाए गए दस्तावेजों की सूची जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि किसी खास मशीन या परियोजना के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

आवेदन प्रक्रिया

कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन के तहत सहायता लेने के लिए पहले पंजीकरण करना होता है, फिर जरूरी मशीन का चयन करना होता है और मशीन खरीदने से पहले आवेदन की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। आवेदन की प्रक्रिया मुख्य रूप से ऑनलाइन है, लेकिन किस राज्य में कौन-सा पोर्टल इस्तेमाल होगा और आवेदन कैसे किया जाएगा, यह राज्य के अनुसार अलग हो सकता है।

  • सबसे पहले अपने राज्य के कृषि विभाग से यह पता करें कि उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) के आवेदन फार्म मशीनरी DBT पोर्टल से लिए जा रहे हैं या राज्य के अपने कृषि पोर्टल के माध्यम से।
  • अगर आपका राज्य फार्म मशीनरी DBT पोर्टल का इस्तेमाल करता है, तो पोर्टल खोलकर किसान पंजीकरण का विकल्प चुनें। पोर्टल पर किसान, सोसायटी, उद्यमी और निर्माता जैसी अलग-अलग श्रेणियों के लिए भी पंजीकरण की सुविधा दी गई है।
  • किसान के रूप में पंजीकरण करते समय अपना नाम बिल्कुल उसी तरह लिखें जैसा आधार कार्ड में दर्ज है। इसके बाद पोर्टल पर दिए गए विकल्पों में से अपना राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गांव चुनें।
  • किसान का प्रकार, श्रेणी और लिंग जैसी जरूरी जानकारी दर्ज करें। ये जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सब्सिडी की दर लाभार्थी की श्रेणी पर निर्भर करती है और सत्यापन के समय इन विवरणों का रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है।
  • अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और OTP के जरिए उसका सत्यापन पूरा करें। यह मोबाइल नंबर चालू रखें क्योंकि आवेदन और लेन-देन से जुड़े अपडेट और सूचनाएं इसी नंबर पर भेजी जा सकती हैं।
  • पंजीकरण के बाद अपनी प्रोफाइल में जरूरी भूमि की जानकारी और बैंक खाते की जानकारी दर्ज करें। इन जानकारी को भरते समय अपना भूमि रिकॉर्ड और बैंक पासबुक या बैंक खाते का विवरण अपने पास रखें।
  • प्रोफाइल पूरी होने के बाद मशीन या कृषि उपकरण के आवेदन वाले हिस्से में जाएं और उस मशीन का चयन करें जिसके लिए आप SMAM के तहत सहायता लेना चाहते हैं। अपनी खेती की जरूरत और अपने राज्य के स्वीकृत लक्ष्य में उपलब्ध मशीन के अनुसार ही मशीन का चयन करें।
  • आवेदन जमा करने से पहले लागू सब्सिडी प्रतिशत और उस मशीन के लिए तय अधिकतम सीमा को जरूर जांच लें। योजना में हर महंगी मशीन की पूरी कीमत पर तय प्रतिशत के अनुसार सब्सिडी मिलना जरूरी नहीं है, क्योंकि मशीन के लिए निर्धारित अधिकतम सीमा भी लागू होती है।
  • पोर्टल पर मशीन के लिए आवेदन जमा करें और राज्य या जिला स्तर के संबंधित विभाग द्वारा जांच और मंजूरी का इंतजार करें। जहां अनुमति या मंजूरी जरूरी है, वहां यह मंजूरी मिलने से पहले मशीन न खरीदें।
  • अगर उपलब्ध लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आते हैं, तो लाभार्थियों का चयन ऑनलाइन लॉटरी या राज्य द्वारा तय किसी अन्य चयन प्रक्रिया से किया जा सकता है। इसलिए केवल पहले आवेदन करने वाले व्यक्ति को ही लाभ मिलेगा, ऐसा जरूरी नहीं है।
  • आवश्यक मंजूरी या परमिट मिलने के बाद ही चुनी गई मशीन किसी ऐसे निर्माता या डीलर से खरीदें जो राज्य की व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध या अधिकृत हो। मशीन खरीदने से पहले पोर्टल पर दिखाई गई कीमत और लागू सब्सिडी की अधिकतम सीमा जरूर जांच लें। मशीन की कीमत को लेकर किसान डीलर से बातचीत कर सकता है, लेकिन पोर्टल पर लागू निर्धारित कीमत और सब्सिडी की सीमा ही मान्य रहेगी।
  • मशीन खरीदने के बाद डीलर पोर्टल पर खरीद का बिल और लेन-देन से जुड़ी जरूरी जानकारी अपलोड करता है। इसके बाद लागू नियमों के अनुसार संबंधित विभाग मशीन और दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करता है।
  • ₹1 लाख या उससे अधिक कीमत वाली मशीनों के लिए जहां जरूरी हो, जियो-रेफरेंसिंग और मशीन की पहचान से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। संशोधित दिशा-निर्देशों में पात्र मशीनों की अलग पहचान और निर्धारित डिजिटल सिस्टम पर उनका रिकॉर्ड रखने का भी प्रावधान है।
  • खरीद और सत्यापन से जुड़ी सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद पात्र सब्सिडी निर्धारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रक्रिया के माध्यम से जारी की जाती है। राज्य और आवेदन की व्यवस्था के अनुसार यह राशि लाभार्थी के बैंक खाते या डीलर के खाते में भेजी जा सकती है।
  • अगर आप कस्टम हायरिंग सेंटर, फार्म मशीनरी बैंक या किसी अन्य समूह आधारित सुविधा के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो इसके लिए अतिरिक्त परियोजना दस्तावेज देने पड़ सकते हैं। इसमें प्रशिक्षण, वित्तीय व्यवस्था और परियोजना की मंजूरी से जुड़ी शर्तें भी हो सकती हैं। ऐसे आवेदकों को मशीन खरीदने से पहले अपने राज्य के कृषि विभाग द्वारा बताई गई प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

महत्वपूर्ण लिंक

संपर्क जानकारी

कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन के आवेदन, फार्म मशीनरी DBT पोर्टल, तकनीकी समस्या या सामान्य जानकारी के लिए आवेदक नीचे दिए गए आधिकारिक हेल्पडेस्क विवरण पर संपर्क कर सकते हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार

  • फोन: 011-23604908
  • मोबाइल: 8076258719
  • ईमेल: [email protected]
  • पता: मशीनीकरण एवं प्रशिक्षण प्रभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कृषि भवन, नई दिल्ली

राज्य से जुड़ी किसी खास समस्या या जानकारी के लिए आवेदक फार्म मशीनरी DBT पोर्टल पर दिए गए राज्य नोडल अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं। पोर्टल पर हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए योजना लागू करने वाले संबंधित अधिकारियों की अलग-अलग संपर्क जानकारी दी गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SMAM यानी Sub-Mission on Agricultural Mechanization (उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन) कृषि में मशीनों और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजना है। इसके तहत पात्र किसानों और अन्य लाभार्थियों को कृषि मशीनरी खरीदने या मशीनरी से जुड़ी सुविधाएं स्थापित करने के लिए सहायता दी जाती है।
 

SMAM को 2014-15 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य किसानों तक आधुनिक कृषि मशीनों की पहुंच बढ़ाना और खेती का काम आसान बनाना है।
 

सब्सिडी मशीन और लाभार्थी की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग होती है। सामान्य तौर पर पात्र विशेष श्रेणियों के किसानों को 50% तक और अन्य किसानों को 40% तक सहायता मिल सकती है। वास्तविक राशि संबंधित मशीन की लागत सीमा और लागू नियमों पर निर्भर करती है।
 

किसान, किसान समूह, FPO, SHG, सहकारी संस्थाएं और पात्र ग्रामीण उद्यमी SMAM के अलग-अलग घटकों के तहत लाभ ले सकते हैं। पात्रता संबंधित घटक और राज्य के नियमों के अनुसार तय होती है।
 

SC/ST किसान, छोटे और सीमांत किसान, महिला किसान तथा उत्तर-पूर्व और हिमालयी क्षेत्र के लाभार्थियों के लिए अधिक सहायता का प्रावधान है।
 

फार्म मशीनरी बैंक  किसानों के समूहों और पात्र संस्थाओं के लिए कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक मशीनों की पहुंच बढ़ाना है।
 

इस योजना के तहत खेती की जुताई, बुवाई, रोपाई, निराई-गुड़ाई, कटाई, फसल अवशेष प्रबंधन और अन्य कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न मशीनों और उपकरणों पर सहायता दी जा सकती है। उपलब्ध मशीनें राज्य और लागू लागत मानकों के अनुसार अलग हो सकती हैं।
 

कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) ऐसी सुविधा है जहां कृषि मशीनें किसानों को किराये पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे किसानों को महंगी मशीन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और वे जरूरत के समय मशीन किराये पर लेकर खेती का काम कर सकते हैं।
 

हां। उप-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (एसएमएएम) के तहत कृषि क्षेत्र में ड्रोन के प्रदर्शन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पात्र लाभार्थियों को सहायता दी जाती है। सहायता की राशि लाभार्थी की श्रेणी और गतिविधि के अनुसार अलग हो सकती है।
 

किसान Farm Machinery DBT Portal पर पंजीकरण करके आवेदन कर सकते हैं। किसान को आधार, भूमि और बैंक से जुड़ी जानकारी सहित आवश्यक दस्तावेज देने होते हैं। आवेदन की प्रक्रिया राज्य के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। Agrimachinery
 

आमतौर पर आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक पासबुक और पहचान संबंधी दस्तावेजों की जरूरत होती है। SC/ST/OBC श्रेणी के लाभार्थियों से संबंधित प्रमाण पत्र भी मांगा जा सकता है। राज्य या योजना के घटक के अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज लग सकते हैं। Agrimachinery
 

हां। Farm Machinery DBT Portal पर किसान का मोबाइल नंबर जरूरी होता है। पंजीकरण और आवेदन से जुड़ी कई जानकारी SMS के जरिए भी दी जाती है। Agrimachinery
 

अगर योजनाओं के बारे में आपका कोई सवाल है, तो उसे योजना के फोरम में सबमिट करें और जवाब पाएँ:

बेझिझक लिंक पर क्लिक करें और चर्चा में शामिल हों!

यह फोरम निम्न कामों के लिए एक बेहतरीन जगह है:

  • सवाल पूछें: अगर आपके मन में योजना से जुड़ा कोई सवाल है या आप इस विषय के किसी पहलू के बारे में और जानकारी चाहते हैं।
  • योजना से जुडी अपनी बातें साझा करें: अपनी जानकारी और अनुभव शेयर करें।
  • दूसरों से जुड़ें: कम्युनिटी से जुड़ें और दूसरों से सीखें।

हम आपको इस फ़ोरम में सक्रिय रूप से भाग लेने और इस बेहतरीन रिसोर्स का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते है।

नई टिप्पणी जोड़ें

सादा टेक्स्ट

  • No HTML tags allowed.
  • लाइन और पैराग्राफ स्वतः भंजन