- योजना का उद्देश्य खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
- किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाता है।
- प्राकृतिक खेती के लिए ड्रम और टैंक खरीदने पर 75% तक वित्तीय सहायता दी जाती है।
- देसी/स्वदेशी गाय खरीदने पर 50% सब्सिडी, अधिकतम ₹25,000 तक मिलती है।
- गौशाला में जरूरी सुधार के लिए अधिकतम ₹8,000 तक सहायता दी जाती है।
- हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना नोडल विभाग फोन: +91 177 2830767
- ईमेल: [email protected]
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना |
| शुरुआत का वर्ष | 2018-19 |
| लाभ | देसी गाय खरीदने के लिए ₹25,000 तक की वित्तीय सहायता के साथ प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी आदानों और बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण, प्रमाणन और बाजार से जुड़ी सहायता। |
| लाभार्थी | सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान |
| नोडल विभाग | कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश |
| आधिकारिक पोर्टल | SPNF पोर्टल |
| सब्सक्रिप्शन | योजना से जुड़े अपडेट पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें |
| आवेदन का तरीका | ऑफलाइन, संबंधित कृषि विभाग/ATMA अधिकारियों के माध्यम से |
योजना के बारे में
प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना हिमाचल प्रदेश सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे 2018-19 में किसानों को कम लागत वाली प्राकृतिक खेती अपनाने, रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर उनकी निर्भरता कम करने और खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस योजना के तहत सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती (SPNF) पद्धति को बढ़ावा दिया जाता है। इसमें किसानों को देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और पौधों से तैयार सामग्री जैसे स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करके खेती के लिए जरूरी आदान तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती की शुरुआत 29 जनवरी 2018 को पालमपुर में प्राकृतिक खेती परियोजना के साथ हुई थी, जिसे शुरुआत में जीरो बजट प्राकृतिक खेती परियोजना के नाम से जाना जाता था। बाद में इस कार्यक्रम को सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पद्धति के आधार पर आगे बढ़ाया गया और पूरे राज्य के किसानों व बागवानों तक प्राकृतिक खेती पहुंचाने के उद्देश्य से इसे प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत विस्तार दिया गया।
किसानों के लिए इस योजना की खास बात यह है कि सरकार प्राकृतिक खेती शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी संसाधन तैयार करने में वित्तीय सहायता देती है। पात्र किसानों को ड्रम/टैंक के लिए 75% सहायता, देसी/स्वदेशी गाय खरीदने पर 50% सब्सिडी, अधिकतम ₹25,000 तक, गौशाला में सुधार के लिए ₹8,000 तक और प्राकृतिक खेती संसाधन केंद्र स्थापित करने के लिए ₹10,000 की एकमुश्त सहायता दी जाती है। इसके साथ किसानों को प्राकृतिक खेती को सही तरीके से समझने और अपनाने के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और भ्रमण की सुविधा भी दी जाती है।
यह योजना केवल रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए किसानों को खेत या गांव के स्तर पर प्राकृतिक आदान तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि कृषि सामग्री खरीदने के लिए उनकी बाहरी बाजार पर निर्भरता कम हो। इस तरीके से सरकार का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, मिट्टी की सेहत सुधारना, पर्यावरण की रक्षा करना और किसानों की आय को बेहतर बनाना है। किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रमाणन और अपने उत्पादों की बिक्री से जुड़ी बाजार सहायता भी मिल सकती है।
इसलिए, हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती अपनाने की योजना बना रहे किसानों के लिए यह योजना वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, प्रमाणन और बाजार से जुड़ी सहायता का एक साथ लाभ देती है, जिससे किसानों के लिए कम लागत और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ना आसान हो सके।
प्राकृतिक खेती क्या है?
प्राकृतिक खेती कम लागत वाली खेती की एक ऐसी पद्धति है जिसमें रासायनिक आदानों के इस्तेमाल को हतोत्साहित किया जाता है और स्थानीय रूप से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाता है। SPNF के तहत किसानों को देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और स्थानीय पौधों से तैयार किए गए अपने कृषि आदान खुद बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इस पद्धति में मुख्य रूप से चार तरीके अपनाए जाते हैं:
पद्धति | उद्देश्य |
|---|---|
बीजामृत | प्राकृतिक तरीके से तैयार सामग्री से बीजों का उपचार करना। |
जीवामृत और घनजीवामृत | लाभदायक सूक्ष्म जीवों और फसल की बढ़वार को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक आदानों का इस्तेमाल करना। |
आच्छादन | मिट्टी की रक्षा और नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग करना। |
वाफ्सा | मिट्टी में हवा और नमी का उचित संतुलन बनाए रखना। |
योजना के लाभ
लाभ | वित्तीय सहायता |
|---|---|
ड्रम/टैंक | 75% सहायता, प्रति ड्रम ₹750 तक; प्रति परिवार अधिकतम ₹2,250 |
देसी/स्वदेशी गाय | 50% सब्सिडी, ₹25,000 तक + ₹5,000 परिवहन सहायता |
गौशाला में सुधार | प्रति परिवार अधिकतम ₹8,000 |
प्राकृतिक खेती संसाधन केंद्र | ₹10,000 की एकमुश्त सहायता |
कीट नियंत्रण | स्वीकृत कीट नियंत्रण उपायों के लिए 75% सहायता |
ड्रम के लिए सहायता: कितने ड्रम मिल सकते हैं?
किसान को मिलने वाले ड्रमों की संख्या उसकी जमीन के आकार पर निर्भर करती है:
जमीन का क्षेत्रफल | पात्र ड्रम |
|---|---|
2 बीघा से कम | 200 लीटर क्षमता का 1 ड्रम |
2 से 5 बीघा | 2 ड्रम |
5 बीघा से अधिक | 3 ड्रम |
ड्रम/टैंक खरीदने से पहले किसानों को संबंधित BTT संयोजक से जरूरी अनुमति लेनी होगी। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सहायता जारी करने से पहले BTM/ATM आवेदन और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करता है।
योजना के तहत अन्य सहायता | ||
|---|---|---|
सहायता | वित्तीय सहायता | मुख्य शर्तें |
देसी/स्वदेशी गाय की खरीद | 50% सब्सिडी, ₹25,000 तक | लागू शर्तों और सत्यापन को पूरा करना जरूरी है। |
गौशाला में सुधार | पात्र लागत का 80% तक, अधिकतम ₹8,000 प्रति परिवार | देसी/स्वदेशी गाय रखने वाले पात्र किसानों के लिए। सत्यापन के लिए सामग्री, मजदूरी और अन्य पात्र खर्चों के बिल जमा करने होंगे। |
प्राकृतिक खेती संसाधन केंद्र | ₹10,000 की एकमुश्त सहायता | एक गांव में एक किसान का चयन किया जा सकता है। केंद्र के माध्यम से स्थानीय किसानों को पैकेजिंग सामग्री, ड्रम और अन्य जरूरी प्राकृतिक खेती सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है। |
पात्रताएं
- आवेदक हिमाचल प्रदेश में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती अपनाने वाला किसान होना चाहिए।
- जिस सहायता के लिए आवेदन किया जा रहा है, उसकी निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
- ड्रम की सहायता के लिए जमीन से जुड़ी निर्धारित सीमा का पालन करना होगा।
- गौशाला में सुधार की सहायता के लिए किसान के पास देसी/स्वदेशी नस्ल की गाय होनी चाहिए।
- प्राकृतिक खेती संसाधन केंद्र के लिए संबंधित गांव में चयनित किसान ही सहायता प्राप्त कर सकता है।
आवश्यक दस्तावेज
- निर्धारित आवेदन पत्र
- जहां लागू हो, किसान और जमीन से जुड़े दस्तावेज
- जहां जरूरी हो, सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती अपनाने का प्रमाण
- प्रतिपूर्ति आधारित सहायता के लिए खरीद के बिल और खर्च से जुड़े रिकॉर्ड
- गाय से जुड़ी सहायता के लिए देसी/स्वदेशी गाय से संबंधित दस्तावेज
- संबंधित कृषि विभाग/ATMA कार्यालय द्वारा मांगा गया कोई अन्य दस्तावेज
आवेदन प्रक्रिया
प्राकृतिक खेती अपनाने या योजना के तहत सहायता लेने के इच्छुक किसानों को कृषि विभाग और ATMA व्यवस्था के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। सामान्य तौर पर आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार है:
- सबसे पहले ब्लॉक स्तर पर नजदीकी कृषि विभाग या ATMA (Agricultural Technology Management Agency) कार्यालय जाएं और योजना के तहत मिलने वाली सहायता के बारे में जानकारी लें।
- ड्रम/टैंक, देसी गाय की खरीद, गौशाला में सुधार या प्राकृतिक खेती संसाधन केंद्र जैसी जिस सहायता की जरूरत है, उसके बारे में संबंधित अधिकारी से बात करें और लागू शर्तों की जानकारी प्राप्त करें।
- निर्धारित आवेदन पत्र प्राप्त करें और उसमें मांगी गई जानकारी ध्यान से भरें।
- जरूरी दस्तावेज आवेदन पत्र के साथ लगाकर संबंधित अधिकारी के पास जमा करें।
- ड्रम या टैंक जैसी सहायता के लिए खरीद करने या स्वीकृत कार्य शुरू करने से पहले जरूरी अनुमति प्राप्त करें।
- जहां पात्र खर्च के आधार पर सहायता दी जाती है, वहां खरीद के बिल, मजदूरी से जुड़े रिकॉर्ड और सत्यापन के लिए जरूरी अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखें।
- संबंधित BTM/ATM (Block Technology Manager/Assistant Technology Manager) आवेदन की जांच करेगा और जहां जरूरी हो, दस्तावेजों, खरीद या पूरे किए गए कार्य का सत्यापन करेगा।
- आवेदन और दावा स्वीकृत होने के बाद पात्र वित्तीय सहायता निर्धारित योजना प्रक्रिया के अनुसार जारी की जाएगी।
प्रमाणन, बाजार सहायता और केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ समन्वय
- प्राकृतिक खेती का प्रमाणन: हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती के लिए Self-Assessed Certification System उपलब्ध है। किसान आधिकारिक SPNF पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। यह प्रमाणन प्रणाली प्राकृतिक खेती के उत्पादों में पारदर्शिता और उनकी पहचान को बेहतर बनाने में मदद करती है और प्रमाणन की सुविधा निःशुल्क दी जाती है।

- बाजार सहायता: राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार की सुविधा बेहतर बनाने के लिए चुनिंदा उत्पादों की खरीद और बेहतर एकत्रीकरण व विपणन के लिए Farmer Producer Organisations (FPOs) को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए हैं।
- खरीद: खरीद की दरें और मात्रा सरकार के फैसलों और वित्तीय वर्ष के अनुसार बदल सकती हैं। इसलिए किसानों को किसी भी विशेष खरीद दर या मात्रा पर निर्भर करने से पहले नवीनतम आधिकारिक खरीद संबंधी सूचना जरूर देखनी चाहिए।
- केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ समन्वय: योजना को ATMA परियोजना और केंद्र सरकार के प्राकृतिक खेती से जुड़े कार्यक्रमों के साथ मिलकर लागू किया जा रहा है। भारत सरकार ने देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए National Mission on Natural Farming (NMNF) भी शुरू किया है।
महत्वपूर्ण लिंक
- कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश
- सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती (SPNF) पोर्टल
- किसानों के लिए सरकारी सहायता – SPNF
- हिमाचल प्रदेश सरकार का फॉर्म पोर्टल
- प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के दिशा-निर्देश
- प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के वर्तमान अपडेट
संपर्क जानकारी
कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार
- पता: कृषि निदेशालय, कृषि भवन बोइलियौगंज, शिमला – 171005 हिमाचल प्रदेश
- फोन: 0177-2830162, 2830618, 2830174
- ईमेल: [email protected]
राज्य परियोजना कार्यान्वयन इकाई (SPIU)
- पता: प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना, राज्य परियोजना कार्यान्वयन इकाई (SPIU), कृषि निदेशालय, कृषि भवन, बालूगंज, शिमला – 171005, हिमाचल प्रदेश
- फोन: +91 177 2830767
- ईमेल: [email protected]
आवेदन और योजना के लाभ से जुड़ी जानकारी के लिए किसान ब्लॉक स्तर पर संबंधित कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
किसान आवेदन में सहायता और सत्यापन के लिए संबंधित ATMA के BTM/ATM से संपर्क कर सकते हैं।
प्राकृतिक खेती के पंजीकरण और प्रमाणन के लिए आधिकारिक SPNF हिमाचल प्रदेश पोर्टल पर जाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना हिमाचल प्रदेश सरकार की योजना है, जिसके तहत किसानों को सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती (SPNF) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसका उद्देश्य खेती की लागत कम करना और किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी सहायता देना है।
यह योजना 2018-19 में शुरू की गई थी। इससे पहले 29 जनवरी 2018 को पालमपुर में प्राकृतिक कृषि परियोजना शुरू की गई थी, जिसे शुरुआत में जीरो बजट प्राकृतिक खेती परियोजना कहा गया था।
पात्र किसानों को देसी/स्वदेशी गाय खरीदने पर 50% सब्सिडी, अधिकतम ₹25,000 तक मिल सकती है। यह लाभ निर्धारित शर्तों और सत्यापन के आधार पर दिया जाता है।
प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी आदान तैयार करने हेतु ड्रम/टैंक पर 75% तक वित्तीय सहायता दी जाती है। पात्रता के अनुसार किसान अधिकतम तीन ड्रम के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
पात्र किसानों को गौशाला में जरूरी सुधार और गोमूत्र संग्रह जैसी व्यवस्था के लिए 80% तक सहायता, अधिकतम ₹8,000 प्रति परिवार मिल सकती है।
चयनित किसान को गांव में प्राकृतिक खेती संसाधन केंद्र स्थापित करने के लिए ₹10,000 की एकमुश्त सहायता दी जा सकती है। इसके माध्यम से स्थानीय किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ी जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है।
हिमाचल प्रदेश में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान योजना के तहत लाभ के लिए पात्र हो सकते हैं। अलग-अलग सहायता के लिए अलग शर्तें लागू हो सकती हैं।
किसान अपने ब्लॉक स्तर के कृषि विभाग या ATMA कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। वहां संबंधित अधिकारी उन्हें उपलब्ध सहायता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के बारे में जानकारी देंगे।
हां। किसानों को प्राकृतिक खेती की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और खेतों के भ्रमण आयोजित किए जाते हैं।
हां। हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती के लिए Self-Assessed Certification System उपलब्ध है। किसान आधिकारिक SPNF पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं और प्रमाणन की सुविधा निःशुल्क है।
हां। सरकार ने प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने, चुनिंदा उत्पादों की खरीद और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए हैं।
योजना के तहत सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती (SPNF) को बढ़ावा दिया जाता है। इसमें देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और स्थानीय पौधों से तैयार प्राकृतिक आदानों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है।
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