- योजना के अंतर्गत 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए अधिकतम ₹11.80 लाख तक का अनुदान प्रदान किया जाता है।
- यह योजना पशुपालकों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायता करती है।
- योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।
- पशुपालक स्वदेशी गायों के दूध का उत्पादन कर उसे उचित मूल्य पर बेचकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
- नन्द बाबा दुग्ध मिशन संपर्क नंबर: 0522-4251709
- नन्द बाबा दुग्ध मिशन ईमेल हेल्पडेस्क: [email protected]
- पशुपालन विभाग टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800 180 5141
- मोबाइल पशु चिकित्सा हेल्पलाइन नंबर: 1962
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | उत्तर प्रदेश मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना |
| शुरू होने का वर्ष | 2023 |
| लाभ | 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने हेतु अधिकतम ₹11.80 लाख तक का अनुदान। |
| लाभार्थी | उत्तर प्रदेश के पात्र पशुपालक एवं डेयरी किसान। |
| नोडल विभाग | डेयरी विकास विभाग, उत्तर प्रदेश। |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे। |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन आवेदन पत्र के माध्यम से। |
योजना के बारे में
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना संचालित की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में स्वदेशी गौवंश के पालन को बढ़ावा देना, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है। योजना के माध्यम से पात्र पशुपालकों को 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे वैज्ञानिक डेयरी पालन अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए ₹23.60 लाख की परियोजना लागत निर्धारित की गई है। इस लागत का 50 प्रतिशत अर्थात अधिकतम ₹11.80 लाख तक अनुदान के रूप में प्रदान किया जाता है। शेष राशि में लाभार्थी को 15 प्रतिशत अंशदान स्वयं वहन करना होता है, जबकि परियोजना लागत के 35 प्रतिशत तक बैंक ऋण प्राप्त किया जा सकता है। योजना के तहत साहीवाल, गिर तथा थारपारकर नस्ल की गायें अथवा इन नस्लों के मिश्रित समूह की खरीद की जा सकती है। खरीदी जाने वाली गायें स्वस्थ एवं रोगमुक्त होनी चाहिए तथा वे प्रथम या द्वितीय ब्यांत की हों। साथ ही, गाय को ब्याए हुए 45 दिन से अधिक नहीं होने चाहिए।
मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत संचालित प्रमुख योजनाओं में से एक है। मिशन के अंतर्गत मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना तथा नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना भी संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य प्रदेश में डेयरी अवसंरचना को मजबूत करना, स्वदेशी गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देना तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है।
योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासियों को दिया जाता है, जिन्हें गो-पालन अथवा महिष पालन का कम से कम 3 वर्ष का अनुभव हो। आवेदक के पास डेयरी इकाई एवं पशु शेड की स्थापना के लिए न्यूनतम 0.20 एकड़ भूमि तथा चारा उत्पादन के लिए अतिरिक्त 0.80 एकड़ भूमि उपलब्ध होना आवश्यक है। भूमि स्वयं की, पैतृक अथवा कम से कम 7 वर्ष की पंजीकृत लीज/पट्टे पर हो सकती है। हालांकि, कामधेनु योजना, मिनी कामधेनु योजना, माइक्रो कामधेनु योजना, नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना अथवा मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के लाभार्थी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लिए आवेदन नन्द बाबा दुग्ध मिशन के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आमंत्रित किए जाते हैं। प्राप्त आवेदनों की जांच एवं सत्यापन जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है। यदि किसी जनपद में प्राप्त पात्र आवेदनों की संख्या निर्धारित लक्ष्य से अधिक होती है, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाता है। योजना के अंतर्गत अनुदान दो समान किश्तों में जारी किया जाता है। पहली किश्त डेयरी अवसंरचना एवं पशु शेड के निर्माण के सत्यापन के बाद तथा दूसरी किश्त 10 पात्र स्वदेशी गायों की खरीद एवं सत्यापन के बाद प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त खरीदी गई सभी गायों का टीकाकरण, ईयर टैगिंग तथा 3 वर्ष का बीमा कराना अनिवार्य है।
योजना के लाभ
- योजना के तहत 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए अधिकतम ₹11.80 लाख का अनुदान प्रदान किया जाता है।
- स्वीकृत ₹23.60 लाख की परियोजना लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा अनुदान के रूप में दिया जाता है।
- लाभार्थी परियोजना लागत के 35 प्रतिशत तक बैंक ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
- यह योजना साहीवाल, गिर एवं थारपारकर जैसी स्वदेशी गौ नस्लों के पालन को बढ़ावा देती है।
- लाभार्थियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ वैज्ञानिक डेयरी इकाई स्थापित करने में सहायता मिलती है।
- योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आजीविका के अवसर सृजित करने में सहायक है।
- यह योजना स्वदेशी गौवंश के संवर्धन तथा प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में योगदान देती है।
- व्यावसायिक डेयरी पालन के माध्यम से पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायता मिलती है।
पात्रताएं
- आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- आवेदक के पास आधार कार्ड अथवा अन्य वैध पहचान पत्र होना चाहिए।
- आवेदक को गो-पालन अथवा महिष पालन का कम से कम 3 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
- अनुभव प्रमाण पत्र मुख्य पशु चिकित्साधिकारी/उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं ग्राम प्रधान द्वारा संयुक्त रूप से प्रमाणित होना चाहिए।
- डेयरी इकाई एवं पशु शेड की स्थापना के लिए कम से कम 0.20 एकड़ भूमि उपलब्ध होनी चाहिए।
- हरे चारे के उत्पादन के लिए अतिरिक्त 0.80 एकड़ भूमि उपलब्ध होना अनिवार्य है।
- आवश्यक भूमि आवेदक के स्वामित्व की, पैतृक अथवा कम से कम 7 वर्ष की पंजीकृत लीज/पट्टे पर होनी चाहिए।
- चारा उत्पादन के लिए उपलब्ध भूमि कृषि योग्य होनी चाहिए। जलभराव वाली अथवा चारा उत्पादन के लिए अनुपयुक्त भूमि स्वीकार नहीं की जाएगी।
अपात्रता की शर्तें
- निम्नलिखित योजनाओं के लाभार्थी मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लिए पात्र नहीं होंगे:
- कामधेनु योजना।
- मिनी कामधेनु योजना।
- माइक्रो कामधेनु योजना।
- नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना।
- मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना।
- जिन आवेदकों के पास डेयरी इकाई स्थापना एवं चारा उत्पादन के लिए निर्धारित न्यूनतम भूमि उपलब्ध नहीं है, वे पात्र नहीं होंगे।
- जिन आवेदकों के पास गो-पालन अथवा महिष पालन का कम से कम 3 वर्ष का अनुभव नहीं है, वे पात्र नहीं होंगे।
आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड अथवा अन्य वैध पहचान पत्र।
- निवास प्रमाण पत्र।
- बैंक पासबुक की प्रति।
- भूमि संबंधी दस्तावेज (खसरा/खतौनी आदि)।
- यदि भूमि स्वयं की नहीं है तो कम से कम 7 वर्ष के लिए पंजीकृत पट्टा/लीज/रजिस्टर्ड अनुबंध की प्रति।
- गो-पालन अथवा महिष पालन के कम से कम 3 वर्ष के अनुभव का प्रमाण पत्र।
- अनुभव प्रमाण पत्र संबंधित क्षेत्र के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी तथा ग्राम प्रधान के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी।
- पासपोर्ट आकार का नवीनतम फोटो।
- मोबाइल नंबर एवं अन्य विवरण जो आवेदन पत्र में मांगे जाएं।
आवेदन प्रक्रिया
- पात्र आवेदक 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने हेतु मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
- नन्द बाबा दुग्ध मिशन के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं।
- पोर्टल पर उपलब्ध पंजीकरण विकल्प का चयन कर अपना पंजीकरण पूरा करें।
- पंजीकरण के बाद प्राप्त लॉगिन विवरण की सहायता से पोर्टल में लॉगिन करें।
- उपलब्ध योजनाओं की सूची में से "मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना" का चयन करें।
- आवेदन पत्र में व्यक्तिगत जानकारी, पता, भूमि संबंधी विवरण, पशुपालन अनुभव तथा बैंक खाते की जानकारी दर्ज करें।
- आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करें।
- आवेदन पत्र में दर्ज सभी जानकारी को ध्यानपूर्वक जांच लें।
- आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा करें तथा भविष्य के लिए आवेदन संख्या सुरक्षित रखें।
- प्राप्त आवेदनों एवं दस्तावेजों का सत्यापन जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा।
- यदि पात्र आवेदनों की संख्या निर्धारित लक्ष्य से अधिक होती है, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
- चयनित आवेदकों को योजना की निर्धारित शर्तें पूरी करने एवं डेयरी इकाई स्थापित करने के बाद अनुदान का लाभ प्रदान किया जाएगा।
महत्वपूर्ण बिंदु
- 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए परियोजना लागत ₹23.60 लाख निर्धारित की गई है।
- योजना के अंतर्गत परियोजना लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम ₹11.80 लाख तक अनुदान प्रदान किया जाता है।
- लाभार्थी को परियोजना लागत का 15 प्रतिशत अंश स्वयं वहन करना होगा।
- परियोजना लागत के 35 प्रतिशत तक बैंक ऋण प्राप्त किया जा सकता है।
- स्वीकृत लागत से अधिक होने वाला अतिरिक्त व्यय लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा।
- अनुदान दो समान किश्तों में भौतिक सत्यापन के बाद जारी किया जाता है।
- पहली किश्त डेयरी इकाई एवं पशु शेड के निर्माण और सत्यापन के बाद जारी की जाती है।
- दूसरी किश्त 10 पात्र स्वदेशी गायों की खरीद एवं सत्यापन के बाद जारी की जाती है।
- लाभार्थी साहीवाल, गिर, थारपारकर अथवा इन नस्लों के मिश्रित समूह की गायें खरीद सकते हैं।
- खरीदी जाने वाली गायें प्रथम या द्वितीय ब्यांत की होनी चाहिए तथा उन्हें ब्याए हुए 45 दिन से अधिक नहीं होने चाहिए।
- योजना के अंतर्गत खरीदी गई सभी गायें स्वस्थ एवं रोगमुक्त होनी चाहिए।
- सभी गायों का टीकाकरण, ईयर टैगिंग तथा 3 वर्ष का बीमा कराना अनिवार्य है।
- डेयरी इकाई एवं पशु शेड का निर्माण योजना में निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए।
- चयनित लाभार्थी को योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार डेयरी इकाई एवं पशुओं का रखरखाव करना होगा।
महत्वपूर्ण लिंक
- उत्तर प्रदेश मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना पंजीकरण लिंक
- मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना दिशा-निर्देश
- उत्तर प्रदेश नन्द बाबा दुग्ध मिशन पोर्टल
संपर्क जानकारी
- नन्द बाबा दुग्ध मिशन संपर्क नंबर: 0522-4251709
- नन्द बाबा दुग्ध मिशन ईमेल हेल्पडेस्क: [email protected]
- पशुपालन विभाग टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800 180 5141
- मोबाइल पशु चिकित्सा हेल्पलाइन नंबर: 1962
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर प्रदेश मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत संचालित एक डेयरी विकास योजना है। इसके तहत 10 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए पात्र पशुपालकों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
पात्र लाभार्थियों को ₹23.60 लाख की स्वीकृत परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस प्रकार योजना के तहत अधिकतम ₹11.80 लाख तक का अनुदान प्राप्त किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासी, जिन्हें गो-पालन अथवा महिष पालन का कम से कम 3 वर्ष का अनुभव हो तथा जिनके पास डेयरी इकाई एवं चारा उत्पादन के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध हो, वे इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
योजना के अंतर्गत साहीवाल, गिर, थारपारकर अथवा इन स्वदेशी नस्लों के मिश्रित समूह की गायें खरीदी जा सकती हैं।
आवेदक के पास डेयरी इकाई एवं पशु शेड की स्थापना के लिए कम से कम 0.20 एकड़ भूमि तथा चारा उत्पादन के लिए अतिरिक्त 0.80 एकड़ भूमि उपलब्ध होना आवश्यक है।
नहीं। कामधेनु योजना, मिनी कामधेनु योजना, माइक्रो कामधेनु योजना, नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना अथवा मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के लाभार्थी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
पात्र आवेदक नन्द बाबा दुग्ध मिशन के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्राप्त आवेदनों का सत्यापन जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है। यदि पात्र आवेदनों की संख्या निर्धारित लक्ष्य से अधिक होती है, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाता है।
योजना का अनुदान दो समान किश्तों में जारी किया जाता है। पहली किश्त डेयरी अवसंरचना एवं पशु शेड के सत्यापन के बाद तथा दूसरी किश्त 10 पात्र स्वदेशी गायों की खरीद एवं सत्यापन के बाद जारी की जाती है।
हाँ। योजना के अंतर्गत खरीदी गई सभी गायों का टीकाकरण, ईयर टैगिंग तथा 3 वर्ष का बीमा कराना अनिवार्य है।
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