- रेशम उत्पादन (सेरिकल्चर) से जुड़ी गतिविधियों के लिए 75% से 90% तक वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
- अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लाभार्थियों को योजना के तहत 90% तक अनुदान दिया जाता है।
- योजना में रेशम उत्पादन से संबंधित 23 विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया गया है।
- रेशम संचालनालय विभाग संपर्क नंबर: 07552552118
Summary of Scheme | |
|---|---|
| योजना का नाम | मध्य प्रदेश रेशम समृद्धि योजना |
| लाभ | रेशम (सेरिकल्चर) से जुड़ी गतिविधियों के लिए 75% से 90% तक आर्थिक सहायता। |
| लाभार्थी | वे किसान और इच्छुक व्यक्ति जो शहतूत (Mulberry) आधारित रेशम उत्पादन का काम शुरू करना चाहते हैं। |
| Subscription | Subscribe Here to Get Update Regarding Scheme. |
| आवेदन का माध्यम | ऑनलाइन |
योजना के बारे में
खेती के साथ अतिरिक्त आय कमाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए रेशम उत्पादन (सेरिकल्चर) को एक लाभदायक व्यवसाय माना जाता है। शहतूत की खेती और रेशम कीट पालन के माध्यम से किसान अपेक्षाकृत कम भूमि में भी अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए "मध्य प्रदेश रेशम समृद्धि योजना" शुरू की है।
14 अक्टूबर 2025 को मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने भारत सरकार की सिल्क समग्र-2 योजना को राज्य में लागू करने के लिए सिद्धांततः मंजूरी प्रदान की। इसके बाद इस योजना को राज्य में "रेशम समृद्धि योजना" के नाम से लागू किया गया। योजना का उद्देश्य किसानों और अन्य इच्छुक लाभार्थियों को रेशम उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना तथा उन्हें आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है।
इस योजना के तहत शहतूत आधारित रेशम उत्पादन, वन्य रेशम (वान्या सिल्क) तथा पोस्ट कोकून गतिविधियों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लाभार्थियों को विभिन्न रेशम संबंधी गतिविधियों के लिए 75% से 90% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए कम निवेश करना पड़ेगा। इसके अलावा रेशम संचालनालय द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि किसान आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से रेशम उत्पादन कर सकें।
मध्य प्रदेश रेशम समृद्धि योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। जो किसान अपनी आय के नए स्रोत विकसित करना चाहते हैं और कृषि के साथ रेशम उत्पादन को अपनाने के इच्छुक हैं, उनके लिए यह योजना एक अच्छा अवसर साबित हो सकती है।
इसके अलावा किसान अपनी आय बढ़ाने और कृषि आधारित गतिविधियों का विस्तार करने के लिए मध्य प्रदेश रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना, मध्य प्रदेश डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना तथा मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना जैसी अन्य सरकारी योजनाओं की भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इन योजनाओं के माध्यम से किसान कृषि, पशुपालन और कृषि आधारित उद्यमों से जुड़े अतिरिक्त अवसरों का लाभ लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बना सकते हैं।
योजना के लाभ
इस योजना के अंतर्गत रेशम उत्पादन से जुड़ी 23 गतिविधियों के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।
सामान्य वर्ग के लाभार्थियों के लिए
- कुल परियोजना लागत: ₹5,00,000
- केंद्र सरकार का हिस्सा: ₹2,50,000
- राज्य सरकार का हिस्सा: ₹1,25,000
- लाभार्थी का योगदान: ₹1,25,000
इस प्रकार सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को कुल लागत का 75% अनुदान मिलेगा और उन्हें केवल 25% राशि स्वयं लगानी होगी।
अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए
- कुल परियोजना लागत: ₹5,00,000
- केंद्र सरकार का हिस्सा: ₹3,25,000
- राज्य सरकार का हिस्सा: ₹1,25,000
- लाभार्थी का योगदान: ₹50,000
इस श्रेणी के लाभार्थियों को 90% तक अनुदान मिलेगा और केवल 10% राशि स्वयं देनी होगी।
पहले की तुलना में अधिक सहायता
- पहले इस क्षेत्र में कुल परियोजना लागत ₹3.65 लाख थी, जिसमें सरकारी सहायता ₹2.08 लाख मिलती थी।
- अब रेशम समृद्धि योजना के तहत परियोजना लागत बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है, जिससे लाभार्थियों को अधिक आर्थिक सहायता मिलेगी।
योजना के मुख्य फोकस क्षेत्र
- योजना के तहत निम्न क्षेत्रों का विकास किया जाएगा:
- शहतूत (Mulberry) रेशम क्षेत्र
- वन्य रेशम (Vanya Silk) क्षेत्र
- पोस्ट कोकून (Post Cocoon) क्षेत्र
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा।
पात्रताएँ
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
- आवेदक शहतूत आधारित रेशम उत्पादन गतिविधियां अपनाने का इच्छुक होना चाहिए।
- आवेदक के पास कम से कम 1 एकड़ निजी भूमि होना आवश्यक है।
- शहतूत की खेती और रेशम कीट पालन में रुचि रखने वाले किसान योजना का लाभ ले सकते हैं।
तकनीकी सहायता
- चयनित लाभार्थियों को रेशम संचालनालय (Directorate of Sericulture) द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाएगा।
- विभाग आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से रेशम उत्पादन करने में सहायता करेगा।
- अधिक जानकारी के लिए किसान अपने जिले के रेशम कार्यालय या रेशम केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
पंजीकरण से पहले जरूरी बातें
- योजना में आवेदन के लिए समग्र आईडी (Samagra ID) होना अनिवार्य है।
- समग्र पोर्टल में दर्ज नाम, जन्म तिथि, वर्ग आदि की जानकारी सही और अपडेट होनी चाहिए।
- e-KYC करवाना अनिवार्य है।
- सफल पंजीकरण के बाद आवेदक को Registration ID और Verification Code मिलेगा, जिसे सुरक्षित रखना होगा।
- आवेदन के दौरान आधार से लिंक बैंक खाते की जानकारी देनी होगी।
- भूमि और कृषि उपकरणों की जानकारी भरनी होगी।
- रेशम गतिविधि के लिए प्रस्तावित भूमि आवेदक के नाम पर होना जरूरी है।
- खसरा नंबर सही भरना आवश्यक है क्योंकि विभाग इसकी जांच करेगा।
आवेदन प्रक्रिया
- चरण 1: प्रारंभिक पंजीकरण
- आधिकारिक e-Resham पोर्टल पर जाएं।
- आवश्यक जानकारी भरकर पंजीकरण करें।
- पंजीकरण के बाद Registration ID और Verification Code प्राप्त होगा।
- चरण 2: आवेदन पूरा कर
- Registration ID और Verification Code की सहायता से:
- आधार से लिंक बैंक खाते की जानकारी भरें।
- भूमि संबंधी जानकारी दें।
- कृषि उपकरणों की जानकारी भरें।
- अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज करें।
- चरण 3: भूमि सत्यापन
- भूमि आवेदक के नाम पर होना चाहिए।
- विभाग खसरा नंबर के आधार पर भूमि का सत्यापन करेगा।
- इसलिए सही खसरा नंबर दर्ज करें।
- चरण 4: अंतिम सबमिशन
- सभी जानकारी भरने के बाद आवेदन को Final Submit/Lock करें।
- इसके बाद आवेदन विभाग द्वारा जांच के लिए भेज दिया जाएगा।
पंजीकरण सहायता
- वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 29 मई 2026 से शुरू हो चुका है।
- किसान स्वयं या नजदीकी कियोस्क/इंटरनेट सेंटर की मदद से आवेदन कर सकते हैं।
- बैतूल जिले के किसान झगड़िया, चिचांदा, लक्कड़ाजाम और हीरापुर रेशम केंद्रों से भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण सूचना
- राज्य सरकार ने योजना को मंजूरी दे दी है और सहायता राशि की घोषणा कर दी है।
- हालांकि लाभार्थी चयन, आवश्यक दस्तावेज, आवेदन प्रक्रिया और 23 पात्र गतिविधियों की पूरी सूची से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश अभी जारी नहीं किए गए हैं।
- इसलिए आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम जानकारी के लिए e-Resham पोर्टल और रेशम संचालनालय द्वारा जारी अधिसूचनाओं पर नजर रखें।
महत्वपूर्ण लिंक
संपर्क विवरण
- रेशम संचालनालय, मध्य प्रदेश शासन, लोअर बेसमेंट, सतपुड़ा भवन, भोपाल – 462004
- फोन: 07552552118
- फैक्स: 07552550748
- ईमेल: [email protected], [email protected]
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह रेशम उत्पादन (सेरिकल्चर) को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई एक सरकारी योजना है।
शहतूत आधारित रेशम उत्पादन शुरू करने के इच्छुक किसान और अन्य पात्र व्यक्ति लाभ ले सकते हैं।
योजना के तहत 75% से 90% तक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को 90% तक अनुदान मिल सकता है।
सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को कुल परियोजना लागत का 75% तक अनुदान मिलता है।
रेशम उत्पादन से जुड़ी 23 गतिविधियां योजना के अंतर्गत शामिल हैं।
आवेदक के पास कम से कम 1 एकड़ निजी भूमि होना आवश्यक है।
हाँ, योजना में आवेदन करने के लिए समग्र आईडी अनिवार्य है।
आवेदन e-रेशम (https://eresham.mp.gov.in/)पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जा सकता है।
हाँ, रेशम संचालनालय द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।
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| लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | योजना का प्रकार | सरकार |
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टिप्पणियाँ
Setut
Seth palan ki Yojana leni hai
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