- दो स्वदेशी गायों की इकाई हेतु अधिकतम ₹80,000 तक अनुदान।
- गिर, साहीवाल, थारपारकर एवं हरियाणा नस्ल की गायें शामिल।
- महिलाओं के लिए 50% लक्ष्य निर्धारित।
- नन्द बाबा दुग्ध मिशन संपर्क नंबर: 0522-4251709
- पशुपालन विभाग टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800 180 5141
- मोबाइल पशु चिकित्सा हेल्पलाइन नंबर: 1962
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना |
| शुरू होने का वर्ष | 2023 |
| लाभ | दो स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने हेतु 40% अनुदान (अधिकतम ₹80,000) |
| लाभार्थी | उत्तर प्रदेश के पात्र पशुपालक, दुग्ध उत्पादक एवं किसान |
| नोडल विभाग | दुग्धशाला विकास विभाग, उत्तर प्रदेश |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे। |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन आवेदन पत्र के माध्यम से |
योजना के बारे में
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना राज्य के पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों, किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए संचालित एक महत्वपूर्ण डेयरी सहायता योजना है। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को गिर, साहीवाल, थारपारकर एवं हरियाणा जैसी स्वदेशी नस्लों की दो गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। योजना के तहत स्वीकृत परियोजना लागत का 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम ₹80,000 तक दिया जाता है, जिससे पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने या उसका विस्तार करने में आर्थिक सहायता मिलती है।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत संचालित प्रमुख योजनाओं में से एक है। उत्तर प्रदेश सरकार इस मिशन के माध्यम से डेयरी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। मिशन के तहत नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना, मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना तथा मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना जैसी योजनाएं भी लागू की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से स्वदेशी गौवंश को बढ़ावा देने, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने, आधुनिक डेयरी इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने तथा पशुपालकों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है।
यह योजना उन किसानों और पशुपालकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो नियमित आय के स्रोत के रूप में डेयरी व्यवसाय अपनाना चाहते हैं। पात्र लाभार्थी योजना के माध्यम से उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली स्वदेशी गायों की खरीद कर सकते हैं तथा दूध उत्पादन बढ़ाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। योजना के अंतर्गत एक लाभार्थी केवल एक इकाई अर्थात दो स्वदेशी गायों की इकाई स्थापित कर सकता है। महिला पशुपालकों को प्राथमिकता प्रदान की जाती है तथा कुल लक्ष्यों का 50 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए तथा वह उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए। आवेदक के पास योजना में शामिल पात्र नस्लों की दो या अधिक स्वदेशी गायें पहले से नहीं होनी चाहिए। योजना के अंतर्गत स्थापित गायों की पहचान इयर टैगिंग अथवा विभाग द्वारा अनुमोदित पहचान प्रणाली के माध्यम से की जाती है। चयनित लाभार्थियों को प्रथम वर्ष का पशु बीमा कराना अनिवार्य है तथा उसके बाद अगले दो वर्षों तक पशु बीमा का नवीनीकरण कराना आवश्यक होगा।
यदि किसी जनपद में प्राप्त पात्र आवेदनों की संख्या निर्धारित लक्ष्य से अधिक होती है, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया जा सकता है। चयन के बाद लाभार्थी को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार डेयरी इकाई स्थापित करनी होती है और आवश्यक अभिलेख विभाग को उपलब्ध कराने होते हैं। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है।
प्रारंभ में मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन माध्यम से संचालित की जाती थी, जिसके तहत इच्छुक पशुपालकों को निर्धारित आवेदन पत्र भरकर संबंधित विभागीय कार्यालय में जमा करना होता था। अब दुग्धशाला विकास विभाग द्वारा नन्द बाबा दुग्ध मिशन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। इच्छुक आवेदक पोर्टल पर पंजीकरण करने के बाद लॉगिन कर मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का चयन कर सकते हैं, ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं तथा आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। आवेदन एवं दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पात्र लाभार्थियों का चयन किया जाता है और स्वीकृति मिलने पर योजना के तहत निर्धारित अनुदान का लाभ प्रदान किया जाता है।
योजना के लाभ
- योजना के तहत दो स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए कुल स्वीकृत लागत का 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम ₹80,000 तक प्रदान किया जाता है।
- गिर, साहीवाल, थारपारकर एवं हरियाणा जैसी उन्नत स्वदेशी नस्लों की गायों के पालन को बढ़ावा मिलता है।
- राज्य में दूध उत्पादन एवं प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
- पशुपालकों और किसानों को डेयरी व्यवसाय के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं।
- महिला पशुपालकों एवं किसानों को प्राथमिकता प्रदान की जाती है तथा योजना के 50 प्रतिशत लक्ष्य महिलाओं के लिए निर्धारित हैं।
- लाभार्थियों को प्रथम वर्ष के अनिवार्य पशु बीमा का लाभ मिलता है, जिससे पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- योजना स्वदेशी गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान देती है।
- डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में सहायता करती है।
पात्रताएं
- आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- आवेदक दुग्ध उत्पादन, पशुपालन या कृषि कार्य से जुड़ा हो अथवा योजना के तहत डेयरी इकाई स्थापित करने का इच्छुक हो।
- आवेदक के पास स्वदेशी गायों के पालन-पोषण हेतु पर्याप्त स्थान एवं आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
- आवेदक के पास पहले से योजना में निर्धारित पात्र नस्लों की दो या अधिक स्वदेशी गायें नहीं होनी चाहिए।
- योजना के तहत गिर, साहीवाल, थारपारकर एवं हरियाणा जैसी पात्र स्वदेशी नस्लों की गायों से डेयरी इकाई स्थापित की जानी चाहिए।
- एक लाभार्थी को योजना के अंतर्गत केवल एक इकाई (दो स्वदेशी गाय) स्थापित करने की अनुमति होगी।
- महिला पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी तथा योजना के 50 प्रतिशत लक्ष्य महिलाओं के लिए निर्धारित हैं।
- लाभार्थी को गायों की पहचान हेतु इयर टैगिंग अथवा विभाग द्वारा अनुमोदित अन्य पहचान प्रणाली का पालन करना होगा।
- लाभार्थी को प्रथम वर्ष का अनिवार्य पशु बीमा कराना होगा तथा अगले दो वर्षों तक बीमा नवीनीकरण कराने संबंधी शपथ पत्र देना होगा।
आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड।
- उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र।
- पासपोर्ट आकार का नवीनतम फोटो।
- मोबाइल नंबर।
- बैंक पासबुक की प्रति।
- गाय खरीद से संबंधित बिल / रसीद।
- गायों का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र एवं नस्ल संबंधी विवरण।
- इयर टैगिंग अथवा मान्यता प्राप्त पहचान प्रणाली का प्रमाण।
- प्रथम वर्ष के पशु बीमा से संबंधित अभिलेख।
- अगले दो वर्षों तक बीमा नवीनीकरण कराने संबंधी शपथ पत्र।
- विभाग द्वारा मांगे गए अन्य आवश्यक दस्तावेज।
आवेदन प्रक्रिया
- सबसे पहले नन्द बाबा दुग्ध मिशन पोर्टल पर जाएं।
- यदि आप नए उपयोगकर्ता हैं, तो "पंजीकरण" विकल्प पर क्लिक करें।
- मांगी गई जानकारी भरकर अपना पंजीकरण पूरा करें और लॉगिन आईडी प्राप्त करें।
- पंजीकरण के बाद अपने यूजर आईडी एवं पासवर्ड की सहायता से पोर्टल में लॉगिन करें।
- लॉगिन करने के बाद उपलब्ध योजनाओं की सूची में से मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का चयन करें।
- ऑनलाइन आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जानकारी जैसे नाम, पता, आधार संख्या, भूमि विवरण, पशुधन संबंधी जानकारी एवं बैंक खाते का विवरण सावधानीपूर्वक भरें।
- आवश्यक दस्तावेजों को निर्धारित प्रारूप में अपलोड करें।
- आवेदन पत्र में दर्ज सभी जानकारियों की जांच करने के बाद आवेदन ऑनलाइन जमा करें।
- आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने के बाद आवेदन संख्या या रसीद को सुरक्षित रखें।
- संबंधित विभाग द्वारा आवेदन पत्र एवं दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।
- यदि प्राप्त आवेदनों की संख्या निर्धारित लक्ष्य से अधिक होती है, तो पात्र आवेदकों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
- चयनित आवेदकों को विभाग द्वारा सूचना प्रदान की जाएगी।
- चयन के बाद लाभार्थी को योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र स्वदेशी नस्ल की गायों की खरीद कर डेयरी इकाई स्थापित करनी होगी।
- डेयरी इकाई स्थापित करने के बाद लाभार्थी को अनुदान प्राप्त करने हेतु आवश्यक अभिलेख एवं दावा पत्र निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा करना होगा।
- सत्यापन एवं स्वीकृति के उपरांत अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित कर दी जाएगी।
महत्वपूर्ण बिंदु
- योजना के अंतर्गत एक लाभार्थी को केवल एक डेयरी इकाई (दो स्वदेशी गाय) स्थापित करने की अनुमति है।
- योजना का लाभ केवल पात्र स्वदेशी नस्लों जैसे गिर, साहीवाल, थारपारकर एवं हरियाणा गायों की खरीद पर ही दिया जाएगा।
- खरीदी गई गायें स्वस्थ होनी चाहिए तथा उनके पास नस्ल एवं स्वास्थ्य संबंधी प्रमाण पत्र होना चाहिए।
- लाभार्थी को खरीदी गई गायों की पहचान हेतु इयर टैगिंग अथवा विभाग द्वारा अनुमोदित पहचान प्रणाली अपनानी होगी।
- यदि किसी जनपद में प्राप्त पात्र आवेदनों की संख्या निर्धारित लक्ष्य से अधिक होती है, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जा सकता है।
- योजना के कुल लक्ष्य का 50 प्रतिशत हिस्सा महिला पशुपालकों एवं महिला किसानों के लिए निर्धारित किया गया है।
- खरीदी गई गायों का प्रथम वर्ष का पशु बीमा कराना अनिवार्य है।
- प्रथम वर्ष की बीमा अवधि समाप्त होने के बाद अगले दो वर्षों तक प्रत्येक वर्ष बीमा का नवीनीकरण कराना आवश्यक होगा।
- अनुदान जारी होने से पूर्व लाभार्थी को आगामी दो वर्षों तक पशु बीमा नवीनीकरण कराने संबंधी शपथ पत्र देना पड़ सकता है।
- अनुदान राशि जारी करने से पहले विभाग द्वारा डेयरी इकाई एवं संबंधित अभिलेखों का सत्यापन किया जाता है।
- स्वीकृत अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है।
- आवेदन करते समय आधार संख्या, बैंक खाता विवरण एवं मोबाइल नंबर सही और अद्यतन होना चाहिए।
महत्वपूर्ण लिंक
- उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना पंजीकरण
- मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना आवेदन लॉगिन
- नन्द बाबा दुग्ध मिशन पोर्टल
- मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना दिशानिर्देश।
- उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-सवंर्धन योजना का ऑफलाइन आवेदन पत्र।
- उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-सवंर्धन योजना का अनुदान आवेदन पत्र।
संपर्क जानकारी
- नन्द बाबा दुग्ध मिशन संपर्क नंबर: 0522-4251709
- नन्द बाबा दुग्ध मिशन ईमेल हेल्पडेस्क: [email protected]
- पशुपालन विभाग टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800 180 5141
- मोबाइल पशु चिकित्सा हेल्पलाइन नंबर: 1962
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक डेयरी विकास योजना है, जिसके तहत पात्र पशुपालकों को दो स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए अनुदान प्रदान किया जाता है।
योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजना लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। अधिकतम अनुदान राशि ₹80,000 निर्धारित है।
योजना के अंतर्गत गिर, साहीवाल, थारपारकर एवं हरियाणा नस्ल की स्वदेशी गायों की खरीद पर लाभ प्रदान किया जाता है।
हाँ, महिला पशुपालक एवं किसान योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। योजना के कुल लक्ष्य का 50 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए निर्धारित किया गया है।
इच्छुक आवेदक नन्द बाबा दुग्ध मिशन पोर्टल पर पंजीकरण कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद पोर्टल में लॉगिन करके योजना का चयन कर आवेदन पत्र भरना होता है।
हाँ, खरीदी गई गायों का प्रथम वर्ष का पशु बीमा कराना अनिवार्य है। इसके बाद अगले दो वर्षों तक बीमा का नवीनीकरण कराना आवश्यक है।
योजना के अंतर्गत एक लाभार्थी केवल एक इकाई स्थापित कर सकता है, जिसमें दो स्वदेशी गायें शामिल होती हैं।
आवेदन एवं डेयरी इकाई के सत्यापन के बाद स्वीकृत अनुदान राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है।
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टिप्पणियाँ
(कोई विषय नहीं)
गो संवर्धन योजना
महोदय सादर प्रणाम
गो संवर्धन योजना के बारे में जनता को पूर्ण जानकारी ही नहीं दी जाती जिसके कारण जनता इसका लाभ ही नहीं उठा पा रही,,। सरकार की नीतियां तो अच्छी है पर धरातल पर इसका कुछ भी अता _पता नहीं है कुछ योजनाओं का लाभ चंद लोगों को ही मिल पाता है अगर ग्राम पंचायत स्तर पर, चौपालों के माध्यम से लोगों को इस योजना की जानकारी मिलती तो बहुत अच्छा रहता,,।
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