- फर्टिलाइज़र सब्सिडी स्कीम के तहत किसानों को खाद कम कीमत पर उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
- यूरिया की 45 किलो की बोरी की तय कीमत ₹242 है, जबकि लागू शुल्क और टैक्स अलग हो सकते हैं।
- सरकार यूरिया के साथ DAP, MOP, SSP और NPK जैसी पात्र खादों पर भी सब्सिडी देती है।
- किसानों को आमतौर पर सब्सिडी वाली खाद खरीदने के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होती।
- खाद की बिक्री का रिकॉर्ड PoS मशीनों के जरिए रखा जाता है और सब्सिडी पात्र खाद कंपनियों को दी जाती है।
- किसान कॉल सेंटर (KCC) का नंबर 1800-180-1551
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | फर्टिलाइज़र सब्सिडी स्कीम |
| शुरू होने का साल | 2010 (पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना; यूरिया पर सब्सिडी की व्यवस्था इससे पहले से है) |
| फायदे | यूरिया की 45 किलो की बोरी ₹242 में और पात्र फॉस्फेट व पोटाश वाली खादों पर सब्सिडी मिलती है। |
| लाभार्थी | सब्सिडी वाली खाद खरीदने वाले किसान। |
| संबंधित विभाग | उर्वरक विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय |
| सब्सक्रिप्शन | योजना से जुड़ी जानकारी पाने के लिए यहां सदस्यता लें |
| लाभ लेने का तरीका | आमतौर पर अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होती। किसान PoS मशीन के जरिए अधिकृत दुकानदारों से सब्सिडी वाली खाद खरीद सकते हैं। |
योजना के बारे में
फसलों की अच्छी बढ़त और बेहतर पैदावार के लिए खाद का सही मात्रा में इस्तेमाल करना जरूरी है। लेकिन खाद खरीदने पर किसानों को काफी पैसा खर्च करना पड़ता है, जिससे खेती की कुल लागत बढ़ जाती है और उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्चों में चला जाता है। जरूरी खाद किसानों को कम दाम पर मिल सके, इसलिए भारत सरकार फर्टिलाइज़र सब्सिडी स्कीम के जरिए मदद देती है। इस योजना के तहत यूरिया की 45 किलो की बोरी ₹242 की तय कीमत पर मिलती है। इसमें नीम की परत लगाने का लागू शुल्क और टैक्स शामिल नहीं हैं। सरकार DAP, MOP, SSP और NPK जैसी दूसरी खादों पर भी सब्सिडी देती है। सब्सिडी की रकम किसानों के बैंक खाते में सीधे भेजने के बजाय, सरकार बिक्री का रिकॉर्ड मिलने पर पात्र खाद कंपनियों को भुगतान करती है। इससे किसानों को अधिकृत दुकानों पर खाद कम कीमत में मिल पाती है।
इस योजना को भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत उर्वरक विभाग चलाता है। इसके तहत मुख्य रूप से दो व्यवस्थाएं हैं—यूरिया सब्सिडी योजना और पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना, जो 1 अप्रैल 2010 को शुरू हुई थी। सरकार यूरिया की खुदरा कीमत तय करती है, जबकि पात्र फॉस्फेट और पोटाश (P&K) वाली खादों पर सब्सिडी उनकी पोषक तत्वों की मात्रा के आधार पर तय होती है। सब्सिडी की दरें समय-समय पर बदल सकती हैं। खाद की बिक्री का रिकॉर्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था के तहत PoS मशीनों से रखा जाता है। इससे सरकार बिक्री और सब्सिडी के भुगतान पर नजर रख सकती है और देशभर में खाद की सही समय पर उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है।
सब्सिडी वाली खाद खरीदने के लिए किसानों को आमतौर पर अलग से आवेदन भरने की जरूरत नहीं होती। वे अधिकृत खाद की दुकान पर जाकर पहचान की जरूरी जांच पूरी कर सकते हैं और लागू कीमत पर खाद खरीद सकते हैं। अलग-अलग जोत वाले किसान भी तय खरीद और पहचान के नियमों के अनुसार इसका लाभ ले सकते हैं। खाद की उपलब्धता, ज्यादा पैसे वसूलने या खेती से जुड़े दूसरे सवालों के लिए किसान अपने स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं या किसान कॉल सेंटर (KCC) के नंबर 1800-180-1551 पर फोन कर सकते हैं।
किसान खेती से जुड़ी मदद के लिए सरकार की दूसरी योजनाओं के बारे में भी जान सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के तहत पात्र किसान परिवारों को आर्थिक मदद दी जाती है। वहीं, किसान कॉल सेंटर खेती से जुड़े सवालों के जवाब देता है। इन योजनाओं का काम अलग-अलग है, लेकिन इनसे किसानों को अतिरिक्त मदद और जरूरी जानकारी मिल सकती है।
भारत में खाद पर मिलने वाली सब्सिडी के प्रकार
फसल की अच्छी बढ़त के लिए खाद जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत से किसानों का खर्च बढ़ सकता है। खाद को सस्ता रखने के लिए भारत सरकार दो मुख्य योजनाओं के तहत सब्सिडी देती है—यूरिया सब्सिडी योजना और पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना। जरूरत पड़ने पर सरकार कुछ खादों पर अतिरिक्त मदद भी दे सकती है।
- यूरिया सब्सिडी योजना: इस योजना के तहत सरकार यूरिया की कीमत तय रखती है, ताकि किसान इसे कम दाम पर खरीद सकें। अभी बताई गई कीमत 45 किलो की बोरी के लिए ₹242 है। इसमें नीम की परत लगाने का लागू शुल्क और टैक्स शामिल नहीं हैं। सरकार पात्र खाद कंपनियों को सब्सिडी देती है, जिससे खाद की लागू लागत और बिक्री से मिली रकम के बीच का अंतर पूरा हो सके। इस योजना में देश में बनी और विदेश से मंगाई गई यूरिया, दोनों के साथ लागू परिवहन खर्च भी शामिल हैं।
- पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना: यह योजना 1 अप्रैल 2010 को शुरू हुई थी। इसके तहत DAP, MOP, SSP और NPK जैसी मंजूरशुदा फॉस्फेट और पोटाश (P&K) वाली खादों पर सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की रकम खाद में मौजूद नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और सल्फर की मात्रा पर निर्भर करती है। सरकार इन दरों में समय-समय पर बदलाव करती है।
- अतिरिक्त सब्सिडी सहायता: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने या दूसरे खर्च बढ़ने पर सरकार कुछ खादों के लिए अतिरिक्त आर्थिक मदद दे सकती है। उदाहरण के लिए, खरीफ 2026 के दौरान अतिरिक्त मदद से DAP की 50 किलो की बोरी की कीमत ₹1,350 बनाए रखने में सहायता मिली। नई सरकारी पुष्टि के बिना यह नहीं मानना चाहिए कि यही कीमत रबी 2026–27 में भी लागू होगी।
आमतौर पर यह सब्सिडी किसानों के बैंक खाते में सीधे नहीं आती। सरकार तय नियमों के अनुसार पात्र खाद कंपनियों को भुगतान करती है, जिससे किसान खाद कम कीमत पर खरीद पाते हैं। खाद से जुड़े नियमों और नई घोषणाओं की जानकारी के लिए उर्वरक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

योजना के लाभ
फर्टिलाइज़र सब्सिडी स्कीम से किसानों को खाद पर होने वाला खर्च कम करने और फसल की अच्छी बढ़त के लिए जरूरी पोषक तत्व पाने में मदद मिलती है। इसके मुख्य फायदे हैं:
- किसान यूरिया की 45 किलो की बोरी ₹242 की तय कीमत पर खरीद सकते हैं। इसमें नीम की परत लगाने का लागू शुल्क और टैक्स शामिल नहीं हैं।
- DAP, MOP, SSP और NPK जैसी खादों पर सब्सिडी मिलने से जरूरी पोषक तत्व कम कीमत पर मिलते हैं।
- सरकार पात्र खाद कंपनियों को सब्सिडी देती है, जिससे किसानों को खाद कम कीमत पर मिल पाती है।
- अलग-अलग जोत वाले किसान सब्सिडी वाली खाद खरीद सकते हैं। सामान्य खरीद के लिए आम तौर पर आय या जमीन की कोई तय सीमा नहीं है।
- सरकार खरीफ और रबी के मौसम में जरूरत के हिसाब से खाद की उपलब्धता बनाए रखने की योजना बनाती है।
- डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था में PoS मशीनों से खाद की बिक्री का रिकॉर्ड रखा जाता है, जिससे सब्सिडी की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है।
- नीम-लेपित यूरिया से खाद का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलती है और यूरिया का गैर-कृषि कामों में गलत इस्तेमाल रोकने में सहायता मिलती है।
- पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना से अलग-अलग फॉस्फेट और पोटाश वाली खादों की उपलब्धता में मदद मिलती है, ताकि किसान फसलों की पोषक जरूरतें पूरी कर सकें।
- सरकार की निगरानी और कार्रवाई से खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी, ज्यादा कीमत वसूलने और घटिया खाद बेचने जैसी समस्याओं पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
पात्रताएं
फर्टिलाइज़र सब्सिडी स्कीम के तहत किसान बिना अलग आवेदन किए खाद कम कीमत पर खरीद सकते हैं। आम तौर पर किसान इन शर्तों को पूरा करके इसका लाभ ले सकते हैं:
- खाद खरीदने वाला व्यक्ति किसान हो या खेती के काम के लिए पात्र खाद खरीद रहा हो।
- छोटे, सीमांत, मध्यम और बड़े जोत वाले किसान सब्सिडी वाली खाद खरीद सकते हैं।
- सामान्य तौर पर सब्सिडी वाली खाद खरीदने के लिए आय या जमीन की कोई तय सीमा नहीं है।
- खरीदार को दुकानदार की PoS मशीन पर जरूरी पहचान जांच पूरी करनी होती है। आम तौर पर आधार से पहचान की जाती है। सरकारी नियमों के अनुसार कुछ दूसरी पहचान भी मान्य हो सकती हैं।
- खाद खरीदते समय बिक्री से जुड़े नियमों और PoS सिस्टम में तय खरीद सीमा का पालन करना जरूरी है।
- खाद अधिकृत दुकान या प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (PMKSK) से खरीदनी चाहिए।
सब्सिडी वाली खाद खरीदने के लिए आम तौर पर अलग पंजीकरण, आय प्रमाण पत्र या जमीन के कागजात देने की जरूरत नहीं होती। फिर भी, खरीद के समय लागू पहचान और खरीद प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज
फर्टिलाइज़र सब्सिडी स्कीम के तहत खाद खरीदने के लिए आम तौर पर अलग आवेदन या दस्तावेजों का सेट जमा नहीं करना होता। लेकिन दुकानदार की PoS मशीन पर पहचान की जांच करानी पड़ सकती है। खरीद के समय ये चीजें मांगी जा सकती हैं:
- PoS सिस्टम के अनुसार आधार कार्ड या आधार से पहचान की पुष्टि।
- सरकारी नियमों के तहत मान्य होने पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या वोटर आईडी जैसे दूसरे पहचान पत्र।
- खाद खरीदने के लिए भुगतान की जानकारी।
- आगे जरूरत पड़ने पर काम आने वाली खरीद की रसीद या SMS, अगर मिले।
सामान्य तौर पर सब्सिडी वाली खाद खरीदने के लिए आय प्रमाण पत्र, जमीन के कागजात या बैंक पासबुक की जरूरत नहीं होती। अगर आधार से पहचान नहीं हो पा रही है, तो किसान अधिकृत दुकानदार से पूछें कि अभी कौन-से दूसरे पहचान पत्र मान्य हैं।
आवेदन प्रक्रिया
फर्टिलाइज़र सब्सिडी स्कीम के तहत खाद खरीदने के लिए किसानों को अलग आवेदन भरने की जरूरत नहीं है। वे पहचान की आसान प्रक्रिया पूरी करके अधिकृत दुकानदार से जरूरी खाद खरीद सकते हैं।
- अपनी फसल के लिए खाद खरीदने के लिए पास की अधिकृत खाद की दुकान या प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (PMKSK) पर जाएं।
- दुकानदार को बताएं कि आपको यूरिया, DAP, MOP या NPK में से कौन-सी खाद चाहिए। खरीदने से पहले बोरी का वजन और उस पर छपी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) देख लें।
- दुकानदार की PoS मशीन पर जरूरी पहचान जांच पूरी करें। आम तौर पर आधार से पहचान की जाती है। अगर आधार का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, तो दुकानदार से पूछें कि मौजूदा नियमों के तहत पहचान के दूसरे कौन-से विकल्प मान्य हैं।
- PoS मशीन पर खरीद का रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद लागू कीमत चुकाएं और खाद ले लें।
- खरीद की रसीद और मिला हुआ SMS संभालकर रखें। बाद में खरीद की जानकारी देखने या कोई परेशानी सुलझाने में ये काम आ सकते हैं।
- अगर दुकानदार छपी हुई MRP से ज्यादा पैसे लेता है या नियमों का पालन नहीं करता, तो मदद के लिए स्थानीय कृषि विभाग या खाद निरीक्षक से संपर्क करें।
बिक्री के रिकॉर्ड के आधार पर पात्र खाद कंपनियों को सब्सिडी दी जाती है। किसानों को इसका फायदा खाद कम कीमत पर खरीदने के रूप में मिलता है, सीधे बैंक खाते में पैसे आने के रूप में नहीं। सरकारी जानकारी और नई घोषणाओं के लिए उर्वरक विभाग की वेबसाइट देखें।
खाद की नई सब्सिडी दरें और कीमतें (2026–27)
खाद की कीमत और सब्सिडी की दर इस बात पर निर्भर करती है कि खाद कौन-सी है, उसमें कितने पोषक तत्व हैं और सरकार की कौन-सी मूल्य नीति लागू है। यूरिया की अधिकतम खुदरा कीमत सरकार तय करती है, जबकि NBS योजना वाली खादों की खुदरा कीमत कंपनियां सरकार की निगरानी में तय करती हैं। नीचे दी गई तालिका में उपलब्ध सरकारी जानकारी के आंकड़े और उनकी लागू अवधि बताई गई है।
खाद की खुदरा कीमतें
खाद | बताई गई खुदरा कीमत | लागू अवधि या जानकारी |
|---|---|---|
यूरिया (Urea) | 45 किलो की बोरी ₹242 | नीम की परत लगाने के लागू शुल्क और टैक्स अलग हैं; कीमत में बाद में हुए बदलाव की पुष्टि कर लें। |
DAP | 50 किलो की बोरी ₹1,350 | खरीफ 2026 यानी 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के लिए पुष्टि की गई थी। रबी 2026–27 के लिए नई पुष्टि जरूरी है। |
NPK 10-26-26 | 50 किलो की बोरी ₹1,814.82 | 2025–26 के लिए बताई गई औसत खुदरा कीमत। |
NPK 12-32-16 | 50 किलो की बोरी ₹1,711.87 | 2025–26 के लिए बताई गई औसत खुदरा कीमत। |
MOP | 50 किलो की बोरी ₹1,710.54 | 2025–26 के लिए बताई गई औसत खुदरा कीमत। |
स्रोत: PIB की खाद कीमतों से जुड़ी जानकारी, 10 मार्च 2026 और खाद सब्सिडी और कीमतों से जुड़ी सरकारी जानकारी। 2025–26 और खरीफ 2026 की कीमतों को पूरे 2026–27 वित्त वर्ष की पक्की कीमतें नहीं मानना चाहिए।
पोषक तत्व आधारित सब्सिडी की दरें

NBS योजना के तहत सरकार अधिसूचित फॉस्फेट और पोटाश वाली खादों में मौजूद पोषक तत्व के हर किलो पर सब्सिडी की दर तय करती है। ये दरें फसल के मौसम के हिसाब से बदल सकती हैं। नीचे दिए गए आंकड़े रबी 2025–26 की अधिसूचना के हैं। इन्हें केवल पुराने संदर्भ के लिए दिया गया है, रबी 2026–27 की पक्की दरें न मानें।
पोषक तत्व | रबी 2025–26 की सब्सिडी दर |
|---|---|
नाइट्रोजन (N) | ₹43.02 प्रति किलो |
फॉस्फोरस (P) | ₹47.96 प्रति किलो |
पोटैशियम (K) | ₹2.38 प्रति किलो |
सल्फर (S) | ₹2.87 प्रति किलो |
सरकार ने खरीफ 2026 के लिए पोषक तत्वों के हिसाब से नीचे दी गई दरें भी मंजूर की थीं। ये दरें 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक लागू थीं।
पोषक तत्व | खरीफ 2026 की सब्सिडी दर |
|---|---|
नाइट्रोजन (N) | ₹47.32 प्रति किलो |
फॉस्फोरस (P) | ₹52.76 प्रति किलो |
पोटैशियम (K) | ₹2.38 प्रति किलो |
सल्फर (S) | ₹3.16 प्रति किलो |
जरूरी बात: हर किलो पोषक तत्व पर मिलने वाली सब्सिडी की दर, खाद की बोरी की खुदरा कीमत नहीं होती। एक बोरी पर सब्सिडी कितनी होगी, यह उसमें मौजूद पोषक तत्वों और लागू सरकारी दरों पर निर्भर करता है। नए मौसम की दरें प्रकाशित करने से पहले रबी 2026–27 की ताजा सरकारी अधिसूचना जरूर देखें।
खाद सब्सिडी के नियम और शिकायत करने का तरीका
खाद सब्सिडी पर सरकार के कीमत, वितरण और बिक्री से जुड़े नियम लागू होते हैं। किसान बोरी पर छपी कीमत देखें, अधिकृत दुकानदार से खाद खरीदें और नियमों के उल्लंघन का शक होने पर संबंधित अधिकारी को बताएं।
- खाद की बिक्री लागू कीमत और वितरण नियमों के अनुसार होनी चाहिए। बोरी के पैसे देने से पहले उस पर छपी MRP जरूर देखें।
- NBS योजना के तहत अधिसूचित फॉस्फेट और पोटाश वाली खादों के निर्माता या आयातक को लागू MRP और सब्सिडी की जानकारी देने से जुड़े नियम मानने होते हैं।
- सरकार ने PoS निगरानी व्यवस्था के तहत एक खरीदार के लिए हर महीने 50 बोरी और एक मौसम में 300 बोरी तक की खरीद सीमा बताई है। किसी खरीद के लिए इन सीमाओं पर भरोसा करने से पहले मौजूदा नियमों से उनकी पुष्टि कर लें।
- किसानों को अधिकृत दुकानदारों से खाद खरीदनी चाहिए और खरीद के सबूत के तौर पर रसीद या SMS संभालकर रखना चाहिए।
- ज्यादा कीमत वसूलने, जमाखोरी, कालाबाजारी, सब्सिडी वाली खाद को दूसरे कामों में भेजने या घटिया खाद बेचने की शिकायत स्थानीय कृषि विभाग या खाद निरीक्षक से की जा सकती है।
- खाद की बिक्री, गुणवत्ता और वितरण से जुड़े नियमों का उल्लंघन होने पर राज्य के अधिकारी आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हैं।
खाद की शिकायत कहां करें
- अपने जिले या ब्लॉक के कृषि अधिकारी या खाद निरीक्षक से संपर्क करें।
- दुकानदार का नाम और पता, खाद का ब्रांड और ग्रेड, वसूली गई रकम और बिल या खरीद का दूसरा सबूत दें।
- नीति से जुड़ी जानकारी के लिए उर्वरक विभाग की वेबसाइट देखें।
- खेती से जुड़ी सलाह के लिए किसान कॉल सेंटर के नंबर 1800-180-1551 पर फोन कर सकते हैं। ज्यादा कीमत वसूलने या गैर-कानूनी बिक्री की औपचारिक शिकायत के लिए संबंधित राज्य अधिकारी से संपर्क करें।
महत्वपूर्ण लिंक
- उर्वरक विभाग – आधिकारिक वेबसाइट
- पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) की दरें – रबी 2025–26
- खाद में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)
- खरीफ 2026 के लिए NBS की मंजूरी
संपर्क जानकारी
फर्टिलाइज़र सब्सिडी स्कीम, खाद की उपलब्धता, सब्सिडी के नियम या खाद वितरण से जुड़े सवालों के लिए किसान रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत उर्वरक विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
- किसान कॉल सेंटर (KCC) का नंबर 1800-180-1551 है।
उर्वरक विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय
- फोन: मौजूदा संपर्क नंबर के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई संपर्क सूची देखें। उपलब्ध सरकारी स्रोतों से आम जनता के लिए कोई अलग हेल्पलाइन नंबर पक्का नहीं हो सका।
- पता: उर्वरक विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय, शास्त्री भवन, नई दिल्ली, भारत।
- खाद से जुड़ी शिकायत के लिए: अपने जिले के स्थानीय कृषि विभाग या खाद निरीक्षक से संपर्क करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फर्टिलाइज़र सब्सिडी स्कीम के तहत भारत सरकार किसानों को यूरिया और दूसरी पात्र खादें कम कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी देती है।
खेती के लिए सब्सिडी वाली खाद खरीदने वाले किसान इसका लाभ ले सकते हैं। आमतौर पर इसके लिए आय या जमीन की कोई तय सीमा नहीं है।
यूरिया की 45 किलो की बोरी की तय कीमत ₹242 है। नीम की परत लगाने का लागू शुल्क और टैक्स अलग हो सकते हैं।
सरकार यूरिया के अलावा DAP, MOP, SSP और NPK जैसी पात्र खादों पर भी सब्सिडी देती है। सब्सिडी की दर खाद के प्रकार और सरकारी नियमों पर निर्भर करती है।
नहीं, आमतौर पर अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होती। किसान अधिकृत खाद की दुकान या प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (PMKSK) से जरूरी पहचान जांच पूरी करके खाद खरीद सकते हैं।
नहीं, आमतौर पर सब्सिडी का पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में नहीं आता। सरकार बिक्री के रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर पात्र खाद कंपनियों को सब्सिडी देती है।
आमतौर पर अलग से दस्तावेज जमा नहीं करने होते। हालांकि, PoS मशीन पर पहचान की जांच के लिए आधार या नियमों के तहत मान्य दूसरे पहचान पत्र की जरूरत पड़ सकती है।
किसान अपने जिले के कृषि अधिकारी या खाद निरीक्षक से शिकायत कर सकते हैं। खेती से जुड़ी सलाह के लिए किसान कॉल सेंटर के नंबर 1800-180-1551 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
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