- NLM पात्र पशुधन और चारा संबंधी व्यवसायों के लिए 50% तक पूंजीगत सब्सिडी देता है।
- पात्र परियोजनाओं के लिए गतिविधि के अनुसार ₹50 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है।
- इसमें ग्रामीण मुर्गी पालन, भेड़-बकरी पालन, सुअर पालन, घोड़ा, गधा, ऊंट और चारा संबंधी गतिविधियाँ शामिल हैं।
- योजना के तहत नस्ल सुधार, पशुधन बीमा, शोध, प्रशिक्षण और विस्तार गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाता है।
- पशुपालन और डेयरी विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार
- फोन: 23382354
- ईमेल: [email protected]
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) |
| शुरुआत का वर्ष | 2014-15 |
| लाभ | पात्र पशुधन और चारा परियोजनाओं के लिए 50% पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹50 लाख तक |
| लाभार्थी | व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO), संयुक्त देयता समूह (JLG), किसान सहकारी संगठन (FCO) और धारा 8 कंपनियाँ |
| नोडल विभाग | पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की जानकारी पाने के लिए यहाँ सब्सक्राइब करें |
| आवेदन का तरीका | NLM पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन |
योजना के बारे में
पशुपालन और पशुधन से जुड़े व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार का महत्वपूर्ण साधन हैं। इस क्षेत्र को मजबूत करने और पशुधन से जुड़े कारोबार के लिए बेहतर अवसर पैदा करने के लिए भारत सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) चलाती है। इस योजना की शुरुआत 2014-15 में हुई थी और 2021-22 से इसमें बदलाव करके इसे नए रूप में लागू किया गया। योजना का मुख्य उद्देश्य पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना, रोजगार के अवसर पैदा करना और भेड़-बकरी पालन, ग्रामीण मुर्गी पालन, सुअर पालन, घोड़ा, गधा और ऊंट पालन तथा पशु आहार और चारा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में व्यवसाय को बढ़ावा देना है। पात्र पशुपालन व्यवसाय गतिविधियों के तहत लाभार्थियों को परियोजना लागत की 50% पूंजीगत सब्सिडी, गतिविधि के अनुसार अधिकतम ₹50 लाख तक मिल सकती है।
यह योजना पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) द्वारा लागू की जाती है, जो मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत आता है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर काम करता है: पशुधन और मुर्गी पालन का नस्ल विकास, पशु आहार और चारा विकास तथा नवाचार और विस्तार। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है। इसके तहत नस्ल सुधार, अच्छी गुणवत्ता वाले चारे की उपलब्धता और प्रसंस्करण, पशुधन बीमा, शोध, प्रशिक्षण, विस्तार गतिविधियों और कौशल विकास को भी बढ़ावा दिया जाता है, ताकि पशुपालन को अधिक उत्पादक और टिकाऊ व्यवसाय बनाया जा सके।
पशुपालन व्यवसाय के तहत मुख्य लाभार्थियों में व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO), संयुक्त देयता समूह (JLG), किसान सहकारी संगठन (FCO) और पात्र धारा 8 कंपनियाँ शामिल हैं। गतिविधि के अनुसार ग्रामीण मुर्गी पालन इकाई, भेड़ और बकरी प्रजनन फार्म, सुअर पालन फार्म, घोड़ा, गधा और ऊंट प्रजनन इकाई तथा चारे से जुड़े व्यवसायों के लिए सहायता मिल सकती है। हर परियोजना के लिए सब्सिडी की राशि समान नहीं है। उदाहरण के लिए, पात्र ग्रामीण मुर्गी पालन परियोजना के लिए अधिकतम ₹25 लाख, भेड़ और बकरी परियोजना के लिए ₹50 लाख तक और सुअर पालन परियोजना के लिए ₹30 लाख तक सब्सिडी मिल सकती है। घोड़ा, गधा, ऊंट और चारे से जुड़ी पात्र परियोजनाओं में भी अधिकतम ₹50 लाख तक सहायता मिल सकती है।
आवेदक के पास सामान्य रूप से उपयुक्त जमीन होनी चाहिए। लागू नियमों के अनुसार अपनी या लीज पर ली गई जमीन स्वीकार की जा सकती है। आवेदक के पास संबंधित काम का प्रशिक्षण, प्रशिक्षित कर्मचारी या पर्याप्त अनुभव होना चाहिए और उसे परियोजना में जरूरी अपनी हिस्सेदारी की राशि लगाने में सक्षम होना चाहिए। बैंक से लिया गया ऋण या, जहाँ नियमों के तहत अनुमति हो, खुद से वित्त पोषित परियोजना के लिए बैंक गारंटी भी परियोजना की वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है। आवेदक को जरूरी KYC और परियोजना से जुड़े दस्तावेज भी जमा करने होते हैं और तय अवधि तक परियोजना चलाने की सहमति देनी होती है। जरूरी परियोजना और सत्यापन की शर्तें पूरी होने के बाद सब्सिडी किस्तों में जारी की जाती है।
NLM के लिए आवेदन मुख्य रूप से ऑनलाइन किया जाता है। इच्छुक आवेदक NLM पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं, संबंधित गतिविधि चुन सकते हैं, परियोजना प्रस्ताव जमा कर सकते हैं और जरूरी दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। आवेदन की जांच राज्य की कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा की जाती है और इसके बाद यह तय प्रक्रिया के अनुसार राज्य और केंद्र स्तर की मंजूरी से गुजरता है। मंजूर उद्यमिता परियोजनाओं की सब्सिडी लागू नियमों के अनुसार SIDBI के माध्यम से जारी की जाती है। पात्रता, परियोजना तैयार करने, दस्तावेज या आवेदन की स्थिति से जुड़ी सहायता के लिए आवेदक अपने राज्य के पशुपालन विभाग या संबंधित राज्य कार्यान्वयन एजेंसी से संपर्क कर सकते हैं।
पशुधन पालकों के लिए राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना भी उपयोगी हो सकती है। यह राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत पशुधन बीमा से जुड़ी सहायता देती है और पशु की मृत्यु होने पर होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा देने में मदद करती है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) कैसे काम करता है?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) पात्र पशुधन और चारा आधारित परियोजनाओं को पूंजीगत सब्सिडी, क्षमता निर्माण, बीमा और अन्य स्वीकृत गतिविधियों के माध्यम से सहायता देता है। योजना की प्रक्रिया में आवेदक, राज्य कार्यान्वयन एजेंसी, बैंक या वित्तीय संस्था, राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति, DAHD और SIDBI की भूमिका होती है।
उद्यमिता परियोजना के लिए आवेदक सबसे पहले पात्र गतिविधि चुनता है और NLM के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से परियोजना प्रस्ताव जमा करता है। इसके बाद राज्य स्तर पर परियोजना की जांच की जाती है और जहाँ जरूरी हो, वहाँ संबंधित बैंक द्वारा परियोजना का वित्तीय मूल्यांकन किया जाता है।
जरूरी मंजूरी मिलने के बाद आवेदक परियोजना शुरू करता है और जरूरी धनराशि की व्यवस्था करते हुए तय शर्तों को पूरा करता है। सब्सिडी एक साथ पूरी राशि के रूप में नहीं दी जाती। निर्धारित परियोजना चरण पूरे होने के बाद इसे दो किस्तों में जारी किया जाता है।
पहली सब्सिडी किस्त आवेदक द्वारा लिए गए ऋण की आवश्यक राशि जारी होने या उसके द्वारा किए गए खर्च से जुड़ी होती है। परियोजना पूरी होने के बाद राज्य कार्यान्वयन एजेंसी भौतिक सत्यापन करती है। जरूरी शर्तें पूरी होने पर बची हुई सब्सिडी SIDBI के माध्यम से लाभार्थी के ऋण खाते में जारी की जाती है।
परियोजना पूरी होने के बाद भी उसकी निगरानी की जाती है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि योजना के तहत बनाई गई संपत्तियों का इस्तेमाल स्वीकृत उद्देश्य के लिए हो रहा है और परियोजना तय नियमों के अनुसार चल रही है।
पात्र आवेदक → NLM गतिविधि चुनें → ऑनलाइन आवेदन और DPR जमा करें → राज्य स्तर पर जांच → बैंक मूल्यांकन/वित्त व्यवस्था → परियोजना की मंजूरी → परियोजना शुरू करें → भौतिक सत्यापन → दो किस्तों में सब्सिडी जारी → परियोजना की निगरानी
योजना के लाभ
राष्ट्रीय पशुधन मिशन पशुधन और चारे से जुड़ी कई गतिविधियों में सहायता देता है। इसके मुख्य लाभ पात्र इकाई शुरू करने की लागत को कम करना, पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना, चारे की उपलब्धता बेहतर करना और बीमा के माध्यम से आर्थिक जोखिम को कम करना हैं।
- पात्र उद्यमियों को स्वीकृत पशुधन और चारा परियोजनाओं के लिए 50% पूंजीगत सब्सिडी मिल सकती है, जो गतिविधि के अनुसार तय अधिकतम सीमा तक होती है।
- ग्रामीण मुर्गी पालन परियोजनाओं के लिए पात्र पैरेंट फार्म, हैचरी और ब्रूडर-कम-मदर यूनिट पर ₹25 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है।
- भेड़ और बकरी प्रजनन परियोजनाओं के लिए इकाई के आकार के अनुसार ₹10 लाख से ₹50 लाख तक सब्सिडी मिल सकती है।
- सुअर प्रजनन परियोजनाओं के लिए ₹30 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है।
- पात्र घोड़ा और गधा प्रजनन परियोजनाओं के लिए ₹50 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है, जबकि ऊंट परियोजनाओं में सहायता स्वीकृत इकाई के आकार के अनुसार मिलती है।
- पात्र घास, साइलेज, TMR और चारा ब्लॉक बनाने और रखने वाली इकाइयों के लिए ₹50 लाख तक की पूंजीगत सब्सिडी मिल सकती है।
- चारा बीज प्रसंस्करण और ग्रेडिंग से जुड़ी सुविधाओं के लिए भी ₹50 लाख तक 50% सब्सिडी मिल सकती है।
- योजना पशुधन की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार को बढ़ावा देती है।
- यह पशुपालकों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले चारे और चारा बीज की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करती है।
- पात्र पशुधन मालिकों को पशुधन बीमा के तहत सहायता मिल सकती है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार लाभार्थी को प्रीमियम का 15% हिस्सा देना होता है।
- योजना पशुधन और चारे से जुड़े शोध, नवाचार, किसान प्रशिक्षण, कौशल विकास और विस्तार गतिविधियों को भी सहायता देती है।
- पशुधन आधारित व्यवसायों को बढ़ावा देकर NLM ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने में मदद करता है।
- पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पात्र बंजर भूमि, चरागाह और खराब हो चुकी भूमि पर चारा उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
वास्तविक सब्सिडी परियोजना के प्रकार और आकार पर निर्भर करती है। इसलिए परियोजना तैयार करने से पहले आवेदक को लागू राष्ट्रीय पशुधन मिशन दिशानिर्देशों की जांच करनी चाहिए।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत उप-मिशन
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) तीन मुख्य उप-मिशनों के माध्यम से काम करता है। हर उप-मिशन पशुधन विकास के एक अलग क्षेत्र पर ध्यान देता है। इनमें पशुओं की नस्ल सुधारने, व्यवसाय शुरू करने, चारे की उपलब्धता बढ़ाने और नए प्रयोगों को बढ़ावा देने जैसे काम शामिल हैं।
1. पशुधन और मुर्गी पालन का नस्ल विकास
- इस उप-मिशन का उद्देश्य बेहतर प्रजनन तरीकों और उद्यमिता के माध्यम से पशुधन और मुर्गी पालन का उत्पादन बढ़ाना है। पात्र आवेदक ग्रामीण मुर्गी पालन, भेड़ और बकरी प्रजनन, सुअर पालन तथा देशी घोड़े, गधे और ऊंट के प्रजनन के लिए व्यावसायिक इकाइयाँ स्थापित कर सकते हैं।
- इसमें भेड़, बकरी और सुअर की नस्ल सुधार गतिविधियों के लिए सीमेन स्टेशन, सीमेन बैंक, कृत्रिम गर्भाधान और जर्मप्लाज्म से जुड़ी सुविधाओं जैसी गतिविधियों को भी सहायता दी जाती है।
2. पशु आहार और चारा विकास
- इस उप-मिशन का उद्देश्य अच्छी गुणवत्ता वाले पशु आहार और चारे की उपलब्धता, उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण को बेहतर बनाना है। इसके तहत चारा बीज उत्पादन, चारा बीज प्रसंस्करण और ग्रेडिंग तथा घास, साइलेज, कुल मिश्रित आहार (TMR) और चारा ब्लॉक बनाने और रखने वाली इकाइयों को सहायता दी जाती है।
- पात्र बंजर भूमि, चरागाह और वन भूमि पर चारा विकसित करने के लिए भी सहायता दी जा सकती है, ताकि पशुपालकों को पूरे साल चारा उपलब्ध हो सके।
3. नवाचार और विस्तार
- यह उप-मिशन पशुधन क्षेत्र में शोध, नए प्रयोग, जागरूकता और क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देता है। इसके तहत शोध और विकास गतिविधियों, प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रमों और किसान प्रशिक्षण स्कूलों को सहायता दी जाती है।
- पशुधन बीमा भी इस उप-मिशन का हिस्सा है। इसके माध्यम से पात्र पशुपालकों को बीमित पशुओं के नुकसान से होने वाले आर्थिक जोखिम से सुरक्षा मिलती है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन सब्सिडी राशि: गतिविधि के अनुसार
राष्ट्रीय पशुधन मिशन पात्र उद्यमिता परियोजनाओं के लिए 50% पूंजीगत सब्सिडी देता है। अधिकतम सब्सिडी परियोजना के प्रकार और आकार पर निर्भर करती है। पात्र उद्यमिता गतिविधियों के लिए सब्सिडी आमतौर पर निर्धारित परियोजना चरण पूरे होने के बाद दो बराबर किस्तों में जारी की जाती है।
गतिविधि | अधिकतम सब्सिडी |
|---|---|
ग्रामीण मुर्गी पालन | ₹25 लाख तक |
भेड़ और बकरी प्रजनन | ₹10 लाख से ₹50 लाख |
सुअर प्रजनन | ₹15 लाख से ₹30 लाख |
घोड़ा प्रजनन | ₹50 लाख तक |
गधा प्रजनन | ₹50 लाख तक |
ऊंट प्रजनन | ₹3 लाख से ₹50 लाख |
घास, साइलेज, TMR और चारा ब्लॉक इकाइयाँ | ₹50 लाख तक |
चारा बीज प्रसंस्करण और ग्रेडिंग | ₹50 लाख तक |
1. ग्रामीण मुर्गी पालन सब्सिडी
ग्रामीण मुर्गी पालन के तहत कम से कम 1,000 पैरेंट लेयर वाले पैरेंट फार्म के साथ हैचरी और ब्रूडर-कम-मदर यूनिट वाली पात्र परियोजनाओं को ₹25 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है।
2. भेड़ और बकरी सब्सिडी
सब्सिडी प्रजनन इकाई के आकार पर निर्भर करती है। 100 मादा और 5 नर वाली इकाई को ₹10 लाख तक, जबकि 500 मादा और 25 नर वाली इकाई को ₹50 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है।
इकाई का आकार | अधिकतम सब्सिडी |
|---|---|
100 मादा + 5 नर | ₹10 लाख |
200 मादा + 10 नर | ₹20 लाख |
300 मादा + 15 नर | ₹30 लाख |
400 मादा + 20 नर | ₹40 लाख |
500 मादा + 25 नर | ₹50 लाख |
3. सुअर पालन सब्सिडी
सुअर प्रजनन फार्म के लिए स्वीकृत इकाई के आकार के अनुसार अधिकतम सब्सिडी ₹15 लाख से ₹30 लाख तक हो सकती है।
इकाई का आकार | अधिकतम सब्सिडी |
|---|---|
50 मादा सुअर + 5 नर सुअर | ₹15 लाख |
100 मादा सुअर + 10 नर सुअर | ₹30 लाख |
4. घोड़ा, गधा और ऊंट सब्सिडी
NLM के तहत देशी घोड़े, गधे और ऊंट की प्रजनन गतिविधियों को भी सहायता दी जाती है। इन गतिविधियों को फरवरी 2024 में योजना के तहत शामिल किया गया था।
पशु / इकाई | अधिकतम सब्सिडी |
|---|---|
घोड़ा: 10 मादा घोड़े + 2 नर घोड़े | ₹50 लाख |
गधा: 50 मादा + 5 नर | ₹50 लाख |
ऊंट: 10 मादा + 1 नर, चरागाह आधारित | ₹3 लाख |
ऊंट: 10 मादा + 1 नर, स्थायी रूप से पाले जाने वाली इकाई | ₹5 लाख |
ऊंट: 50 मादा + 5 नर | ₹25 लाख |
ऊंट: 100 मादा + 10 नर | ₹50 लाख |
इन घोड़ा, गधा और ऊंट से जुड़ी गतिविधियों के लिए लागू दिशानिर्देशों में देशी नस्लों के इस्तेमाल की शर्त दी गई है।
5. चारा सब्सिडी
घास, साइलेज, कुल मिश्रित आहार (TMR) और चारा ब्लॉक बनाने तथा भंडारण जैसी पात्र चारा परियोजनाओं को ₹50 लाख तक की पूंजीगत सब्सिडी मिल सकती है। चारा बीज की सफाई और ग्रेडिंग से जुड़ी सुविधाओं के लिए भी ₹50 लाख तक की सहायता मिल सकती है।
पात्रताएं
राष्ट्रीय पशुधन मिशन पात्र पशुधन और चारा गतिविधियों से जुड़े अलग-अलग प्रकार के व्यक्तियों और संगठनों के लिए खुला है। हालांकि, आवेदन करने से पहले आवेदक को परियोजना, वित्तीय व्यवस्था और संचालन से जुड़ी कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं।
कौन आवेदन कर सकता है?
- व्यक्ति
- स्वयं सहायता समूह (SHG)
- किसान उत्पादक संगठन (FPO)
- संयुक्त देयता समूह (JLG)
- किसान सहकारी संगठन (FCO)
- पात्र धारा 8 कंपनियाँ
मुख्य पात्रता शर्तें
- अनुभव या प्रशिक्षण: आवेदक के पास जिस पशुपालन या चारा गतिविधि के लिए आवेदन किया जा रहा है, उससे जुड़ा अनुभव या प्रशिक्षण होना चाहिए। प्रशिक्षित कर्मचारी भी रखे जा सकते हैं।
- उपयुक्त जमीन: परियोजना शुरू करने के लिए उपयुक्त जमीन जरूरी है। नियमों के अनुसार अपनी या लीज पर ली गई जमीन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- वित्तीय व्यवस्था: आवेदक के पास बैंक या वित्तीय संस्था से स्वीकृत ऋण होना चाहिए। अगर परियोजना खुद के पैसे से शुरू की जा रही है, तो जरूरी बैंक गारंटी की शर्त पूरी करनी होगी।
- अपना योगदान: आवेदक को परियोजना की कुल लागत का कम से कम 10% हिस्सा खुद लगाने में सक्षम होना चाहिए।
- जरूरी दस्तावेज: आवेदन के लिए आवश्यक KYC और परियोजना से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए।
- परियोजना चलाने की क्षमता: आवेदक को परियोजना पूरी होने के बाद कम से कम 3 साल तक उसे सही तरीके से चलाने और संभालने में सक्षम होना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज
आवेदक को अपनी पहचान, प्रस्तावित परियोजना, जमीन, वित्तीय व्यवस्था और अनुभव से जुड़े दस्तावेज जमा करने होते हैं। दस्तावेजों की सही सूची चुनी गई राष्ट्रीय पशुधन मिशन गतिविधि और आवेदक के प्रकार के अनुसार अलग हो सकती है।
परियोजना और जमीन से जुड़े दस्तावेज
- विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR): इसमें प्रस्तावित काम, परियोजना की कुल लागत, पैसे की व्यवस्था और अनुमानित आय की जानकारी होनी चाहिए।
- जमीन का दस्तावेज: परियोजना के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन के मालिकाना हक या वैध लीज का प्रमाण देना होगा।
- स्थल की तस्वीरें: जरूरत पड़ने पर परियोजना स्थल की हाल की तस्वीरें भी देनी पड़ सकती हैं।
- मार्जिन मनी का प्रमाण: ऐसे दस्तावेज देने होंगे, जिनसे यह पता चले कि परियोजना की लागत में आवेदक अपनी हिस्सेदारी लगाने के लिए तैयार है।
पहचान और आवेदक से जुड़े दस्तावेज
- पैन कार्ड
- आधार कार्ड
- पते का प्रमाण
- हाल की फोटो
- जहाँ लागू हो, जाति प्रमाण पत्र
बैंक और वित्तीय दस्तावेज
- बैंक खाते की जानकारी
- रद्द किया हुआ चेक और बैंक मैंडेट फॉर्म
- जहाँ जरूरी हो, हाल का बैंक स्टेटमेंट
- जहाँ लागू हो, आयकर रिटर्न और ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण
- वित्तीय व्यवस्था के अनुसार स्वीकृत बैंक ऋण या बैंक गारंटी से जुड़े दस्तावेज
संगठनों के लिए जरूरी दस्तावेज
यदि कोई पात्र संगठन के माध्यम से आवेदन करता है, तो उसे संगठन की कानूनी स्थिति साबित करने वाले दस्तावेज देने पड़ सकते हैं, जैसे:
- कंपनी पंजीकरण प्रमाण पत्र
- जहाँ लागू हो, साझेदारी फर्म का समझौता
- पंजीकरण प्रमाण पत्र या संगठन से जुड़े अन्य जरूरी दस्तावेज
प्रशिक्षण और अनुभव से जुड़े दस्तावेज
- प्रस्तावित गतिविधि से जुड़े प्रशिक्षण प्रमाण पत्र
- संबंधित शैक्षणिक प्रमाण पत्र
- पशुपालन या प्रस्तावित गतिविधि में अनुभव दिखाने वाला अनुभव प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज
अन्य दस्तावेज
परियोजना की जांच, सत्यापन या मंजूरी के लिए आवेदक से अन्य दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं। ये दस्तावेज चुनी गई गतिविधि के अनुसार अलग हो सकते हैं, जैसे मुर्गी पालन, भेड़ और बकरी पालन, सुअर पालन, घोड़ा, गधा, ऊंट प्रजनन या चारा आधारित परियोजनाएँ।
जरूरी जानकारी: आवेदन जमा करने से पहले आवेदक को अपनी चुनी हुई राष्ट्रीय पशुधन मिशन गतिविधि के अनुसार जरूरी दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए। परियोजना और आवेदक की श्रेणी के आधार पर अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।
आवेदन प्रक्रिया
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत सहायता पाने के लिए केवल ऑनलाइन फॉर्म भरना ही पर्याप्त नहीं है। सबसे पहले आवेदक को सही गतिविधि चुननी होती है, उचित परियोजना प्रस्ताव तैयार करना होता है और फिर आवेदन तथा वित्तीय प्रक्रिया पूरी करनी होती है। आवेदन NLM पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा किया जाता है। पोर्टल पर आवेदन, दस्तावेजों के प्रारूप और योजना से जुड़ी अन्य जानकारी उपलब्ध होती है।
- सबसे पहले राष्ट्रीय पशुधन मिशन पोर्टल खोलें और आवेदन शुरू करने से पहले उपलब्ध योजना की जानकारी, संचालन दिशानिर्देश और आवेदन से जुड़े निर्देश पढ़ें।
- वह पशुधन या चारा गतिविधि चुनें जिसके लिए आप सहायता लेना चाहते हैं, जैसे ग्रामीण मुर्गी पालन, भेड़ और बकरी पालन, सुअर पालन या पात्र पशु आहार और चारा परियोजना।
- जरूरी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करें। इसमें प्रस्तावित इकाई, परियोजना लागत, वित्तीय व्यवस्था, जमीन और अन्य जरूरी जानकारी शामिल होनी चाहिए। पोर्टल पर मुर्गी पालन, सुअर पालन, भेड़-बकरी और पशु आहार तथा चारा परियोजनाओं के लिए मॉडल DPR भी उपलब्ध हैं।
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन आवेदन प्रणाली पर मांगी गई जानकारी के साथ पंजीकरण करें और चुनी गई गतिविधि के लिए आवेदन फॉर्म पूरा करें।
- DPR, जमीन के दस्तावेज, KYC दस्तावेज, वित्तीय जानकारी और प्रशिक्षण या अनुभव प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज परियोजना के अनुसार अपलोड करें।
- प्रस्तावित वित्तीय व्यवस्था की जानकारी दें और जहाँ बैंक ऋण जरूरी हो, वहाँ उपयुक्त बैंक या वित्तीय संस्था चुनें।
- आवेदन जमा होने के बाद राज्य कार्यान्वयन एजेंसी इसकी जांच करती है। इसके बाद परियोजना तय राज्य और केंद्र स्तर की मंजूरी प्रक्रिया से गुजरती है।
- जरूरी मंजूरी और वित्तीय शर्तें पूरी होने के बाद स्वीकृत सब्सिडी परियोजना की प्रगति के अनुसार तय व्यवस्था के तहत किस्तों में जारी की जाती है।
- परियोजना तैयार करने या ऑनलाइन आवेदन पूरा करने में परेशानी होने पर आवेदक अपने राज्य के पशुपालन विभाग या संबंधित राज्य कार्यान्वयन एजेंसी से सहायता ले सकते हैं।
आवेदन जमा करने से पहले NLM पोर्टल पर दिए गए नवीनतम निर्देशों की जांच करना उचित है, क्योंकि विभाग समय-समय पर बदलाव, अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत या गतिविधि के अनुसार नए निर्देश जारी कर सकता है। पोर्टल पर आवेदन के चरण, संचालन दिशानिर्देश और दस्तावेजों के प्रारूप के लिए अलग-अलग जानकारी उपलब्ध है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन सब्सिडी कैसे जारी की जाती है?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) की सब्सिडी दो किस्तों में जारी की जाती है। भुगतान स्वीकृत परियोजना की प्रगति और जरूरी सत्यापन पूरा होने पर निर्भर करता है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन सब्सिडी की प्रक्रिया: परियोजना की मंजूरी → परियोजना शुरू करना → पहली किस्त → परियोजना पूरी करना → भौतिक सत्यापन → दूसरी किस्त
पहली किस्त
पहली किस्त स्वीकृत सब्सिडी की 50% होती है।
- बैंक से वित्त पोषित परियोजनाओं में बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण की कम से कम 25% राशि जारी की जानी चाहिए।
- पात्र खुद से वित्त पोषित परियोजनाओं में आवेदक को अपनी ओर से परियोजना लागत का कम से कम 25% खर्च करना चाहिए।
- राज्य कार्यान्वयन एजेंसी जरूरी खर्च या ऋण जारी होने की स्थिति का सत्यापन करती है।
दूसरी किस्त
परियोजना पूरी होने के बाद स्वीकृत सब्सिडी की बची हुई 50% राशि जारी की जाती है।
- राज्य कार्यान्वयन एजेंसी परियोजना का भौतिक सत्यापन करती है।
- परियोजना स्थल, जमीन और GIS स्थान की जांच की जा सकती है।
- एजेंसी यह जांचती है कि स्वीकृत परियोजना के लिए जरूरी संपत्तियाँ बनाई गई हैं या नहीं।
खुद से वित्त पोषित परियोजनाओं के लिए
- पात्र परियोजना के लिए खुद से वित्त पोषण का विकल्प चुनने वाले आवेदकों को तीन साल के लिए वैध बैंक गारंटी पशुपालन और डेयरी विभाग के पक्ष में देनी होती है।
- सब्सिडी जारी होने से पहले तय ईमानदारी संबंधी घोषणा और जमानत बांड भी देना होता है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन की सब्सिडी कब वापस ली जा सकती है?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन की सब्सिडी स्वीकृत परियोजना को सही तरीके से पूरा करने और चलाने से जुड़ी होती है। यदि परियोजना स्वीकृत शर्तों के अनुसार नहीं चलती है, तो सरकार सब्सिडी की राशि वापस ले सकती है।
- परियोजना को स्वीकृत योजना के अनुसार पूरा नहीं किया जाता है।
- सब्सिडी मिलने के बाद परियोजना चलना बंद हो जाती है।
- व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के 3 साल के भीतर परियोजना बंद या छोड़ दी जाती है।
हालांकि, दिशानिर्देशों में दी गई अप्रत्याशित गंभीर परिस्थितियों (फोर्स मेज्योर) के मामलों में सब्सिडी वापस लेने के प्रावधान लागू नहीं होते हैं।
परियोजना पूरी होने के बाद राज्य कार्यान्वयन एजेंसी 2 साल तक उसकी निगरानी करती है। यह सुनिश्चित करने के लिए परियोजना की संपत्तियों की जियो-टैगिंग भी की जाती है कि स्वीकृत परियोजना तय स्थान पर ही लागू की गई है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत कौन-से खर्च शामिल नहीं हैं?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन की सब्सिडी स्वीकृत गतिविधियों के तहत आने वाली पात्र पूंजीगत लागत के लिए दी जाती है। निम्नलिखित खर्च इसमें शामिल नहीं हैं:
खर्च | राष्ट्रीय पशुधन मिशन सब्सिडी में शामिल? |
|---|---|
जमीन खरीदना | नहीं |
जमीन का किराया या लीज | नहीं |
कार्यशील पूंजी | नहीं |
निजी वाहन | नहीं |
कार्यालय के लिए जगह | नहीं |
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करते समय और पात्र परियोजना लागत की गणना करते समय आवेदकों को इन खर्चों को ध्यान में रखना चाहिए।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत पशुधन बीमा
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत पशुधन बीमा पात्र बीमित पशुओं के नुकसान के खिलाफ पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देता है। इसमें दूध देने वाले पशु, सामान ढोने वाले पशु और पशुओं की कई अन्य श्रेणियाँ शामिल हैं, जबकि मुर्गी पालन इसमें शामिल नहीं है।
आमतौर पर एक परिवार के लिए 10 पशु इकाइयों तक बीमा उपलब्ध होता है। एक पशु इकाई में भेड़, बकरी, सुअर या खरगोश जैसे 10 छोटे पशु शामिल होते हैं। बीमा की राशि पशु के बाजार मूल्य के आधार पर तय होती है। सामान्य क्षेत्रों में प्रीमियम की अधिकतम सीमा 4.5% और उत्तर-पूर्वी तथा हिमालयी क्षेत्रों में 5.5% है।
पशुपालक लागू प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं और बीमा से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया अपने राज्य की कार्यान्वयन एजेंसी या राष्ट्रीय पशुधन बीमा पोर्टल के माध्यम से पूरी कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण लिंक
- पशुपालन और डेयरी विभाग – राष्ट्रीय पशुधन मिशन
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन आवेदन पोर्टल
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन – व्यापक संचालन दिशानिर्देश
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन – संशोधित कार्यान्वयन दिशानिर्देश
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन – EDP डैशबोर्ड
- राष्ट्रीय पशुधन बीमा पोर्टल
संपर्क जानकारी
राष्ट्रीय पशुधन मिशन से जुड़े सवालों के लिए आवेदक पशुपालन और डेयरी विभाग के NLM प्रभाग से संपर्क कर सकते हैं। राज्य स्तर पर आवेदन से जुड़ी सहायता के लिए आवेदक अपने संबंधित राज्य के पशुपालन विभाग या राज्य कार्यान्वयन एजेंसी से भी संपर्क कर सकते हैं।
विभाग: पशुपालन और डेयरी विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार
- फोन: 23382354
- ईमेल: [email protected]
- पता: पशुपालन और डेयरी विभाग, चंद्रलोक बिल्डिंग, जनपथ, नई दिल्ली
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राष्ट्रीय पशुधन मिशन भारत सरकार की योजना है, जिसका उद्देश्य पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना, पशुपालन से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा देना और चारा विकास को मजबूत करना है।
पात्र परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत की 50% पूंजीगत सब्सिडी मिल सकती है। गतिविधि के अनुसार अधिकतम सब्सिडी ₹50 लाख तक हो सकती है।
व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO), संयुक्त देयता समूह (JLG), किसान सहकारी संगठन (FCO) और पात्र धारा 8 कंपनियाँ आवेदन कर सकती हैं।
ग्रामीण मुर्गी पालन, भेड़ और बकरी प्रजनन, सुअर पालन, घोड़ा, गधा और ऊंट प्रजनन तथा चारा आधारित परियोजनाओं को सहायता मिल सकती है।
पात्र ग्रामीण मुर्गी पालन परियोजना के लिए ₹25 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है।
इकाई के आकार के आधार पर ₹10 लाख से ₹50 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है।
हाँ। पात्र सुअर प्रजनन परियोजनाओं के लिए ₹15 लाख से ₹30 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है।
हाँ। घास, साइलेज, TMR, चारा ब्लॉक तथा चारा बीज की सफाई और ग्रेडिंग से जुड़ी पात्र परियोजनाओं के लिए ₹50 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है।
सब्सिडी दो किस्तों में जारी की जाती है। दूसरी किस्त परियोजना पूरी होने और जरूरी भौतिक सत्यापन के बाद जारी की जाती है।
आवेदन राष्ट्रीय पशुधन मिशन के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। आवेदक को गतिविधि चुनकर परियोजना रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं।
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