हरियाणा पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना

द्वारा प्रस्तुत vishaka on Sat, 19/09/2026 - 11:42
Nayab Singh Saini CM Haryana
Scheme Open
हरियाणा पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना इमेज
हाइलाइट
  • योजना के तहत पशुधन की मृत्यु होने पर पशुपालक को बीमा सुरक्षा मिलती है।
  • 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के हरियाणा के पशुपालक इस योजना में आवेदन हेतु पात्र हैं।
  • अनुसूचित जाति और BPL श्रेणी के पशुपालकों को योजना में प्राथमिकता दी जाती है।
  • बीमा के लिए पशु की उचित पहचान और Ear Tagging आवश्यक होती है।
ग्राहक देखभाल फ़ोन नंबर
  • पशुपालन और डेयरी विभाग, हरियाणा हेल्पलाइन नंबर :-
    • 0172-2574663
    • 0172-2574664
    • 0172-2586837
  • पशुपालन और डेयरी विभाग, हरियाणा हेल्पडेस्क ईमेल :- [email protected]
योजना का अवलोकन
योजना का नामहरियाणा पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना
लाभपशुओं को बीमा सुरक्षा कवच प्रदान करना
लाभार्थीराज्य के सभी पशुपालक
नोडल विभागपशुपालन और डेयरी विभाग, हरियाणा सरकार
सब्सक्रिप्शनयोजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे।
आवेदन का तरीकाऑनलाइन

योजना के बारे में

हरियाणा सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने पशुपालकों को पशुओं की मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा प्रदान करने के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना शुरू की है। योजना का उद्देश्य पशुपालकों को पशुधन की मृत्यु से होने वाले आर्थिक जोखिम से बचाना और कम अंशदान पर उनके पशुओं को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इस योजना के माध्यम से पशुपालकों को अपने पशुओं का बीमा कराने की सुविधा दी जाती है, ताकि बीमित पशु की मृत्यु होने पर निर्धारित बीमित राशि के माध्यम से आर्थिक नुकसान की भरपाई की जा सके। पशुधन बीमा योजना के तहत पशुओं की पहचान के लिए टैगिंग और स्वास्थ्य जांच जैसी प्रक्रियाओं को भी बीमा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।

इस योजना के अंतर्गत पशुपालकों को बड़े पशुओं के लिए उनकी दूध उत्पादन क्षमता और निर्धारित श्रेणी के अनुसार ₹100, ₹200 या ₹300 प्रति पशु प्रति वर्ष का अंशदान देना होता है, जबकि भेड़, बकरी और सूअर जैसे छोटे पशुओं के लिए ₹25 प्रति पशु प्रति वर्ष का अंशदान निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जाति के पशुपालकों के पशुओं का बीमा निःशुल्क किया जाता है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना का उद्देश्य विशेष रूप से कम लागत पर पशुधन बीमा उपलब्ध कराकर पशुपालकों को पशु की मृत्यु से होने वाले अचानक आर्थिक नुकसान से राहत देना है। बीमित राशि पशु की श्रेणी, आयु, नस्ल और दूध उत्पादन आदि निर्धारित मानकों के आधार पर तय की जाती है।

योजना में गाय, भैंस, बैल, झोटा, घोड़ा, गधा, खच्चर, ऊंट, बछड़ा-बछिया, भेड़, बकरी और सूअर सहित निर्धारित पशुओं को बीमा के दायरे में शामिल किया गया है। पशु के बीमा के लिए निर्धारित आयु, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और पहचान टैग जैसी शर्तों का पालन करना होता है। आवेदन के लिए परिवार पहचान पत्र (PPP) सहित निर्धारित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है और योजना की प्रक्रिया में पशु की पहचान तथा स्वास्थ्य संबंधी सत्यापन किया जाता है। 

इच्छुक पशुपालक Antyodaya-SARAL पोर्टल पर बीमा कवर के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। निकटतम SARAL Kendra, e-Seva केंद्र, CSC या Antyodaya केंद्र के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है। यह योजना पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा द्वारा क्रियान्वित की जाती है। यही विभाग हरियाणा पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना भी संचालित करता है, जिसके अंतर्गत पशुपालकों को चारा, दवाई और पशु स्वास्थ्य जैसे खर्चों के लिए आसान ब्याज दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। दोनों योजनाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं - जहाँ पशुधन बीमा योजना पशु की मृत्यु से होने वाले नुकसान से सुरक्षा देती है, वहीं पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना रोजमर्रा के खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

योजना के लाभ

हरियाणा पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत पात्र व्यक्ति को निमिन्लिखित लाभ प्रदान किये जायेंगे :-

  • पशु की मृत्यु होने पर निर्धारित बीमित राशि का भुगतान सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में (DBT) किया जाता है।
  • बड़े पशु के लिए पशुपालक का वार्षिक अंशदान केवल 100 रुपये, 200 रुपये या 300 रुपये है। छोटे पशु (भेड़, बकरी, सूअर) के लिए अंशदान केवल 25 रुपये प्रति पशु प्रति वर्ष है।
  • अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालकों के लिए बीमा पूरी तरह निःशुल्क है।
  • एक परिवार अधिकतम 5 पशु इकाइयों तक सब्सिडी वाला बीमा करा सकता है।
  • दुर्घटना से होने वाली मृत्यु पर कवर पॉलिसी के पहले दिन से ही प्रभावी हो जाता है।
  • स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और पोस्टमार्टम पर पशु चिकित्सक को दिया जाने वाला मानदेय योजना के तहत ही वहन किया जाता है, पशुपालक को अलग से भुगतान नहीं करना पड़ता।
  • योजना के अंतर्गत पशु की पहचान के लिए unique identification/ear tagging व्यवस्था का उपयोग किया जाता है।
  • दस्तावेज जमा करने के 15 दिन के भीतर क्लेम निपटान अनिवार्य है; देरी पर 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज का प्रावधान है।
पशुधन के प्रकार/
पशु की आयु
बीमा राशि
( प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन
के अनुसार )
लाभार्थी द्वारा देय राशि
(प्रति पशु प्रति वर्ष)
दुधारू गाय
(02-10 वर्ष तक)
साहीवाल/ विदेशी व क्रॉस नस्ल
40,000 रुपए तक
(10 लीटर तक )
100
41,000 - 60,000 रुपए
(10 लीटर से अधिक
व 15 लीटर तक)
200
61,000-83,000 रुपए
(15 लीटर से अधिक)
300
हरयाणा
40,000 ( 12 लीटर तक)100
41,000 - 60,000 रुपए
(12 लीटर से अधिक
व 18 लीटर तक)
200
61,000-83,000 रुपए
(18 लीटर से अधिक)
300
दुधारू भैस
(03-10 वर्ष तक)
60,000 रुपए तक
(10 लीटर तक )
100
61,000-70,000 रुपए
(10 लीटर से अधिक
व 15 लीटर तक)
200
71,000-88,000 रुपए
(15 लीटर से अधिक)
300
भारवाहक पशुधन
(घोड़ा, गधा व खच्चर)
(02-08 वर्ष तक)
50,000 रुपए100
भेड़, बकरी और सूअर
(01-03 वर्ष तक)
मादा- 6,000/- रुपए
नर- 10,000/- रुपए
25
बैल और भैसा
(02-10 वर्ष तक)
30,000 रुपए100
सांड/ झोटा (प्रजनन हेतु)
(02-08 वर्ष तक)
40,000 रुपए100
ऊंट (03-08 वर्ष तक)50,000 रुपए100
बछड़ा/ बछड़ी व कटड़ा/
कटड़ी (गाय व भैस)
(6 माह से 1 वर्ष तक)
10,000 रुपए100
बहेड़ी/ औसर (गाय)
(01-02 वर्ष तक)
20,000 रुपए100
झोटी/ औसर (भैस)
(01-03 वर्ष तक)
20,000 रुपए100

पात्रताएं

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को कुछ बुनियादी शर्तें पूरी करनी होती हैं। ये शर्तें नीचे दी गई हैं।

  • आवेदक हरियाणा का पशुपालक होना चाहिए।
  • आवेदक की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
  • आवेदक के पास हरियाणा सरकार द्वारा जारी परिवार पहचान पत्र (PPP) होना अनिवार्य है।
  • बीमा कराया जाने वाला पशु स्वस्थ होना चाहिए और पशु चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लिया जाना चाहिए।
  • पशु के कान में 12 अंकों का यूनिक ईयर टैग लगा होना अनिवार्य है।
  • अनुसूचित जाति एवं बीपीएल श्रेणी के पशुपालकों को प्राथमिकता दी जाती है।

अपात्रता

कुछ स्थितियों में आवेदन या दावा स्वीकार नहीं किया जाता। इन्हें पहले से जान लेना जरूरी है।

  • जिन पशुपालकों के पास वैध परिवार पहचान पत्र नहीं है, वे योजना के पात्र नहीं हैं।
  • बिना ईयर टैग वाले या अधूरे दस्तावेज वाले पशुओं के दावे स्वीकार नहीं किए जाते।
  • प्राकृतिक/गैर-दुर्घटना मृत्यु की स्थिति में पॉलिसी के पहले 21 दिन की प्रतीक्षा अवधि में दावा देय नहीं होता।
  • प्रति परिवार 5 पशु इकाई से अधिक पशुओं पर सब्सिडी का लाभ नहीं मिलता।
  • दुर्घटना से हुई मृत्यु के दावे के लिए यह वोटिंग पीरियड लागू नहीं होती, बशर्ते निर्धारित claim प्रक्रिया पूरी की जाए।

प्रीमियम एवं लाभार्थी अंशदान

  • APL लाभार्थियों को बड़े पशु के लिए दूध उत्पादन के आधार पर ₹100, ₹200 या ₹300 प्रति पशु प्रति वर्ष तथा छोटे पशु के लिए ₹25 प्रति पशु प्रति वर्ष प्रीमियम देना होता है।
  • BPL लाभार्थियों को प्रीमियम पर अतिरिक्त सरकारी सब्सिडी दी जाती है।
  • अनुसूचित जाति (SC) लाभार्थियों के लिए बीमा का पूरा प्रीमियम सरकार द्वारा वहन किया जाता है और लाभार्थी को कोई प्रीमियम नहीं देना होता है।
  • SC लाभार्थियों के प्रीमियम में केंद्र सरकार का 40% और राज्य सरकार के SCSP का 60% हिस्सा बताया गया है।

आवश्यक दस्तावेज

पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना में आवेदन करते समय पोर्टल पर नीचे दिए गए दस्तावेज अपलोड करने होते हैं।

  • परिवार पहचान पत्र (PPP / फैमिली आईडी)
  • पंजीकृत पशु चिकित्सक द्वारा जारी पशु स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
  • पशु के ईयर टैग सहित स्पष्ट फोटोग्राफ
  • लाभार्थी के हिस्से के प्रीमियम का भुगतान प्रमाण (जहां लागू हो)
  • अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र (अनुसूचित जाति लाभार्थियों के लिए)
  • बीपीएल प्रमाण पत्र (बीपीएल लाभार्थियों के लिए)
  • बैंक खाता विवरण

आवेदन प्रक्रिया

इस योजना में आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन अंत्योदय-सरल पोर्टल के माध्यम से होता है। आधिकारिक दिशा-निर्देशों में पशुपालक द्वारा ई-सेवा केंद के जरिए भी आवेदन जमा करने की व्यवस्था दी गई है। दोनों स्थितियों में आवेदन एक ही पोर्टल पर दर्ज होता है। नीचे आवेदन की पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध रूप में दी गई है।

  • सबसे पहले अंत्योदय-सरल पोर्टल खोलें।
  • यदि आप पहले से पंजीकृत नहीं हैं तो ‘Sign In Here’ के नीचे ‘New User’ पर क्लिक करें।
  • यहाँ अपना नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, पासवर्ड और राज्य जैसी सभी अनिवार्य जानकारी भरें और ‘Submit’ पर क्लिक करें।
  • मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर प्राप्त ओटीपी से सत्यापन कर पंजीकरण पूरा करें।
  • पंजीकरण के बाद उसी ईमेल आईडी से पोर्टल पर लॉगिन करें।
  • पासवर्ड और कैप्चा भरकर ‘Login’ पर क्लिक करें।
  • लॉगिन के बाद ‘Apply for Services’ और फिर ‘View all Available Services’ पर क्लिक करें।
  • सर्च बॉक्स में योजना का नाम खोजें और संबंधित सेवा पर क्लिक करें।
  • अपना परिवार पहचान पत्र नंबर (फैमिली आईडी) दर्ज करें और ‘Click here to Fetch Family Data’ पर क्लिक करें, जिससे परिवार के सदस्यों की सूची दिखाई देगी।
  • लाभार्थी/आवेदक का नाम चुनें और संबंधित सदस्य के मोबाइल पर आए ओटीपी को दर्ज कर ‘Click to Verify’ पर क्लिक करें।
  • सभी अनिवार्य जानकारी भरें और मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें।
  • फॉर्म का प्रिव्यू देखकर ‘Submit’ पर क्लिक करें और आवेदन संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।

विभागीय एवं बीमा कंपनी सत्यापन

  • आवेदन उपमंडल अधिकारी (पशुपालन) के पास सत्यापन के लिए जाता है।
  • इसके बाद उप निदेशक स्तर पर आवेदन की प्रोसेसिंग होती है।
  • बीमा कंपनी का प्रतिनिधि मौके पर जाकर पशु का सत्यापन करता है - फोटोग्राफी, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र की जांच और पशु का मूल्यांकन किया जाता है।
  • पशु के कान में INAPH के अनुरूप 12 अंकों वाला पॉली-यूरेथेन लेजर प्रिंटेड ईयर टैग लगाया जाता है।
  • सत्यापन पूर्ण होने पर बीमा पॉलिसी जारी कर दी जाती है।

आवेदन की स्थिति कैसे देखें?

  • सबसे पहले अंत्योदय-सरल पोर्टल पर जाएं
  • 'Track Application Status' विकल्प चुनें।
  • विभाग का नाम, सेवा/योजना का नाम और आवेदन संदर्भ आईडी दर्ज करें।
  • 'Check Status' पर क्लिक कर आवेदन की मौजूदा स्थिति देखें। 

दावा (क्लेम) प्रक्रिया

बीमित पशु की मृत्यु होने पर तय समय-सीमा में सूचना देना और दस्तावेज प्रस्तुत करना सबसे महत्वपूर्ण है। प्रक्रिया इस प्रकार है।

  • पशु की मृत्यु की सूचना अधिकतम 24 घंटे के भीतर बीमा कंपनी के क्लेम सेंटर को दें।
  • टोल-फ्री नंबर 1800-419-1415 पर सूचना दर्ज कराएं।
  • आवश्यकतानुसार पुलिस को सूचना/एफआईआर दर्ज कराएं (विशेषकर दुर्घटना की स्थिति में)।
  • सूचना मिलने के 4 घंटे के भीतर बीमा कंपनी का सर्वेयर/जांचकर्ता मौके पर पहुंचता है।
  • सरकारी पशु चिकित्सक से पशु का पोस्टमार्टम कराकर रिपोर्ट प्राप्त करें।
  • भरा हुआ क्लेम फॉर्म, बीमा पॉलिसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुरक्षित ईयर टैग और अद्यतन बैंक खाता विवरण जमा करें।
  • पूरे दस्तावेज जमा होने के 15 दिन के भीतर क्लेम राशि का भुगतान किया जाता है; देरी पर बीमा कंपनी 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज देने के लिए उत्तरदायी होती है।

महत्वपूर्ण लिंक

संपर्क जानकारी 

  • पशुपालन और डेयरी विभाग, हरियाणा हेल्पलाइन नंबर :-
    • 0172-2574663
    • 0172-2574664
  • पशुपालन और डेयरी विभाग, हरियाणा हेल्पडेस्क ईमेल :- [email protected]

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह हरियाणा सरकार की पशुधन बीमा योजना है, जिसमें पशुपालक बेहद कम अंशदान देकर अपने पशुओं का बीमा करा सकते हैं और पशु की मृत्यु पर बीमित राशि प्राप्त करते हैं।

बड़े पशु के लिए दूध उत्पादन के अनुसार 100, 200 या 300 रुपये प्रति वर्ष और छोटे पशु के लिए 25 रुपये प्रति वर्ष। अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थियों के लिए बीमा नि:शुल्क है।

सब्सिडी का लाभ प्रति परिवार अधिकतम 5 पशु इकाई तक मिलता है। इससे अधिक पशुओं का बीमा पूरा प्रीमियम देकर कराया जा सकता है।

आवेदन अंत्योदय-सरल पोर्टल (saralharyana.gov.in) से ऑनलाइन किया जाता है। सरल केंद्र या सीएससी से भी आवेदन कराया जा सकता है।

हां, परिवार पहचान पत्र (PPP) अनिवार्य है। इसके बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता।

दुर्घटना से मृत्यु पर कवर पॉलिसी के पहले दिन से लागू होता है। गैर-दुर्घटना मृत्यु पर 21 दिन की प्रतीक्षा अवधि लागू होती है।

पूरे दस्तावेज जमा होने के 15 दिन के भीतर। देरी होने पर बीमा कंपनी को 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज देना होता है।

दावे के समय सुरक्षित ईयर टैग प्रस्तुत करना अनिवार्य है। बिना ईयर टैग वाले पशु का दावा स्वीकार नहीं किया जाता।

50 रुपये शुल्क और क्षेत्रीय पशु चिकित्सक के प्रमाणन के साथ न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को आवेदन देकर पॉलिसी नए मालिक के नाम हस्तांतरित कराई जा सकती है।

आवेदन ऑनलाइन ही होता है, लेकिन पशुपालक नजदीकी ई-सेवा केंद्र, अंत्योदय-सरल केंद्र या सीएससी पर जाकर सहायता से यह आवेदन करा सकते हैं।

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टिप्पणियाँ

bhains marr gayi claim karna…

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bhains marr gayi claim karna hai kese kiya jaaye

Govt s farji subsidi lana

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Ke log dusra ki id par bima yojna ki subsidi ly rha h un par kya Govt k paas kya prvdan h

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