- बिहार सरकार द्वारा देशी गाय आधारित डेयरी यूनिट स्थापित करने पर 75% तक सब्सिडी प्रदान की जाती है।
- यह योजना सात निश्चय-2 के अंतर्गत संचालित की जा रही है।
- लाभार्थी 2 गाय या 4 गाय वाली डेयरी यूनिट स्थापित कर सकते हैं।
- योजना के अंतर्गत केवल साहीवाल, गिर और थारपारकर नस्ल की देशी गायें मान्य हैं।
- EBC, SC एवं ST वर्ग के लाभार्थियों को 75% सब्सिडी, जबकि अन्य वर्गों को 50% सब्सिडी मिलती है।
- गव्य विकास निदेशालय पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार
- फोन नंबर: 94710 07445
- टोल फ्री हेल्पलाइन: 1800 345 6681
योजना का सारांश | |
|---|---|
| योजना का नाम | बिहार देसी गौपालन प्रोत्साहन योजना |
| किसके अंतर्गत शुरू की गई | सात निश्चय-2 |
| लाभ | देशी गाय आधारित डेयरी यूनिट स्थापित करने पर 75% तक सब्सिडी |
| लाभार्थी | बिहार के किसान, भूमिहीन श्रमिक एवं बेरोजगार युवा |
| सब्सक्रिप्शन | योजना से जुड़ी अपडेट प्राप्त करने के लिए यहाँ सब्सक्राइब करें . |
| आवेदन का माध्यम | ऑनलाइन |
योजना के बारे में
डेयरी व्यवसाय बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और ग्रामीण परिवारों के लिए प्रतिदिन आय का सबसे विश्वसनीय स्रोत माना जाता है। लेकिन कई ग्रामीण परिवार और बेरोजगार युवा गाय खरीदने, पशुशाला (शेड) बनाने, चारे की व्यवस्था करने तथा पशुओं का बीमा कराने में आने वाले अधिक खर्च के कारण डेयरी व्यवसाय शुरू नहीं कर पाते।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा देशी नस्ल की गायों के पालन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने सात निश्चय-2 के अंतर्गत बिहार देसी गौपालन प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इस योजना का संचालन गव्य विकास निदेशालय, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार द्वारा किया जाता है।
इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को साहीवाल, गिर और थारपारकर जैसी स्वीकृत देशी नस्लों की 2 गाय या 4 गाय वाली डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लाभार्थियों को स्वीकृत परियोजना लागत पर 75% सब्सिडी, जबकि अन्य सभी वर्गों के लाभार्थियों को 50% सब्सिडी दी जाती है।
देशी गायों की नस्लें स्थानीय जलवायु के अनुसार बेहतर अनुकूल होती हैं, इनके रखरखाव का खर्च अपेक्षाकृत कम होता है तथा ये दुग्ध उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक स्थिर आय का अवसर प्रदान करती हैं। यह योजना राज्य में देशी गायों की संख्या बढ़ाने और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने का भी लक्ष्य रखती है।
यह योजना बिहार के सभी जिलों के केवल ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है। योजना के अंतर्गत सब्सिडी तभी जारी की जाती है जब डेयरी यूनिट का पूर्ण रूप से निर्माण हो जाए तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार उसका सत्यापन पूरा हो जाए।
पशुपालन एवं कृषि से संबंधित अन्य योजनाओं में रुचि रखने वाले आवेदक बिहार दुग्धारू पशु बीमा योजना, बिहार शताब्दी निजी नलकूप योजना तथा बिहार मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना की भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
योजना के लाभ
2 गाय डेयरी यूनिट के लिए सब्सिडी संरचना
विवरण | EBC / SC / ST t | अन्य श्रेणियाँ |
कुल परियोजना लागत | ₹2,42,000 | ₹2,42,000 |
लाभार्थी का अंशदान | ₹12,100 (5%) | ₹24,200 (10%) |
बैंक ऋण | ₹2,29,900 (95%) | ₹2,17,800 (90%) |
सरकारी सब्सिडी | ₹1,81,500 (75%) | ₹1,21,000 (50%) |
4 गाय डेयरी यूनिट के लिए सब्सिडी संरचना
विवरण | EBC / SC / ST | अन्य श्रेणियाँ |
कुल परियोजना लागत | ₹5,20,000 | ₹5,20,000 |
लाभार्थी का अंशदान | ₹26,000 (5%) | ₹52,000 (10%) |
बैंक ऋण | ₹4,94,000 (95%) | ₹4,68,000 (90%) |
सरकारी सब्सिडी | ₹3,90,000 (75%) | ₹2,60,000 (50%) |
अतिरिक्त लाभ
- गाय खरीदने, पशुशाला (शेड) निर्माण तथा पशु बीमा के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
- योजना के अंतर्गत स्वयं के धन (सेल्फ फाइनेंस) तथा बैंक ऋण, दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।
- लाभार्थी एक चरण या दो चरणों में गाय खरीद सकते हैं।
- पिछले वर्षों के पात्र आवेदकों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
- देशी गाय आधारित डेयरी व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराता है।
यह योजना किनके लिए है?
यह योजना बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो कम निवेश में सरकारी सहायता के साथ देशी गाय आधारित डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो स्वरोजगार प्राप्त करना चाहते हैं और ग्रामीण क्षेत्र में लंबे समय तक स्थिर आय का स्रोत बनाना चाहते हैं।
यह योजना विशेष रूप से निम्नलिखित लोगों के लिए लाभकारी है:
- किसान एवं डेयरी उद्यमी
- भूमिहीन कृषि श्रमिक
- लघु एवं सीमांत किसान
- शिक्षित बेरोजगार युवा
- डेयरी व्यवसाय में रुचि रखने वाली महिलाएँ
- डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य
- जीविका स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्य
- आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवार
पात्रता
- आवेदक बिहार का निवासी होना चाहिए।
- आवेदक की आयु 55 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- यह योजना सभी सामाजिक वर्गों के लिए उपलब्ध है।
- आवेदक बिहार के ग्रामीण क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।
- किसान, भूमिहीन श्रमिक, बीपीएल परिवार तथा बेरोजगार युवा पात्र हैं।
- डेयरी सहकारी समितियों तथा जीविका स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के सदस्य भी पात्र हैं।
- आवेदक ने पिछले 3 वर्षों के दौरान गव्य विकास निदेशालय की संबंधित योजनाओं के अंतर्गत सब्सिडी प्राप्त नहीं की हो।
- 4 गाय वाली डेयरी यूनिट के लिए हरे चारे की खेती हेतु न्यूनतम 15 डिसमिल भूमि (स्वामित्व अथवा लीज पर) होना आवश्यक है।
योजना के अंतर्गत अनुमत देशी गायों की नस्लें
योजना के अंतर्गत केवल निम्नलिखित देशी गायों की नस्लें ही मान्य हैं:
नस्ल | विवरण |
साहीवाल | अधिक दूध उत्पादन, गर्म जलवायु सहन करने की क्षमता तथा भारतीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्त नस्ल। |
गिर | भारत की सबसे लोकप्रिय देशी दुग्ध नस्लों में से एक, जो अच्छे दूध उत्पादन और अनुकूलन क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। |
थारपारकर | कठिन ग्रामीण परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन करने वाली मजबूत देशी नस्ल। |
चयन में प्राथमिकता
यदि किसी जिले में पात्र आवेदनों की संख्या अधिक होती है, तो निम्नलिखित प्राथमिकता क्रम के अनुसार चयन किया जा सकता है:
- विभाग द्वारा प्रशिक्षित आवेदक
- डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य
- जीविका स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्य
महत्वपूर्ण शर्तें
- सब्सिडी बैक-एंडेड (Back-Ended) होगी और केवल डेयरी यूनिट के पूर्ण निर्माण एवं सत्यापन के बाद ही जारी की जाएगी।
- लाभ पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिए जाएंगे।
- योजना केवल बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है।
- गायों की खरीद खरीद समिति की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए।
- खरीद समिति में बैंक अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, बीमा अधिकारी तथा जिला स्तरीय अधिकारी शामिल होते हैं।
- प्रत्येक पशु पर डेटा ईयर टैग (Data Ear Tag) लगाना अनिवार्य है।
- गाय खरीदते समय लाभार्थी एवं खरीद समिति के सदस्यों का संयुक्त फोटो लेना अनिवार्य है।
- खरीदी गई गायों को खरीद की तिथि से 3 वर्ष के भीतर बेचा नहीं जा सकता।
- योजना की शर्तों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
- स्वीकृत परियोजना लागत से अधिक होने वाला अतिरिक्त खर्च लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा।
- लाभार्थी बिहार के भीतर या बाहर किसी भी अधिकृत विक्रेता से गाय खरीद सकते हैं।
आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र
- निवास प्रमाण पत्र
- जाति प्रमाण पत्र (EBC/SC/ST आवेदकों के लिए)
- 4 गाय डेयरी यूनिट हेतु भूमि से संबंधित दस्तावेज
- बैंक खाते का विवरण
- पासपोर्ट आकार का फोटो
- सक्रिय मोबाइल नंबर
- डेयरी यूनिट स्थापित होने के बाद जमा किए जाने वाले दस्तावेज:
- गाय खरीद रिपोर्ट
- गायों का फोटो
- विक्रेता की रसीद
- पशु स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
- ईयर टैग नंबर सहित बीमा रसीद
- परिवहन/परिवहन बिल
- शेड का फोटो एवं निर्माण बिल
- बैंक पासबुक की प्रति
आवेदन प्रक्रिया
- चरण 1 - आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ एवं पंजीकरण करें
- गव्य विकास निदेशालय, बिहार के आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ।
- होमपेज पर आपको संबंधित आवेदन लिंक दिखाई देगा। आगे बढ़ने के लिए उस पर क्लिक करें।
- क्लिक करने के बाद पंजीकरण (Registration) पेज खुल जाएगा।
- पहले से पंजीकृत उपयोगकर्ता अपने लॉगिन विवरण का उपयोग करके लॉगिन कर सकते हैं, जबकि नए आवेदकों को पहले अपनी मूल जानकारी दर्ज करके पंजीकरण करना होगा।
- पंजीकरण एवं लॉगिन पूरा होने के बाद पोर्टल पर उपलब्ध बिहार देसी गौपालन प्रोत्साहन योजना के आवेदन अनुभाग को खोलें।
- चरण 2 - ऑनलाइन आवेदन पत्र भरें
- अपनी व्यक्तिगत जानकारी, श्रेणी संबंधी विवरण, बैंक विवरण तथा डेयरी यूनिट से संबंधित जानकारी सावधानीपूर्वक भरें।
- निर्धारित प्रारूप में सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- चरण 3 - जिला स्तरीय जांच
- आवेदन की समीक्षा जिला स्तरीय स्क्रीनिंग समिति द्वारा की जाती है, जिसकी अध्यक्षता लीड बैंक जिला अधिकारी करते हैं। समिति में संबंधित विभाग के अधिकारी भी शामिल होते हैं।
- चरण 4 - ऋण स्वीकृति प्रक्रिया
- स्वीकृत आवेदनों को ऋण स्वीकृति एवं आगे की बैंकिंग प्रक्रिया के लिए संबंधित बैंक को भेजा जाता है।
- बैंकों से अपेक्षा की जाती है कि वे एक माह के भीतर ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करें।
- चरण 5 - देशी गायों की खरीद
- स्वीकृति मिलने के बाद लाभार्थी को खरीद समिति की उपस्थिति में पात्र देशी गायों की खरीद करनी होगी।
- इस चरण में ईयर टैगिंग, बीमा सत्यापन तथा पशुओं का निरीक्षण किया जाता है।
- चरण 6 - सत्यापन संबंधी दस्तावेज जमा करें
- गाय खरीद रिपोर्ट, बीमा दस्तावेज, फोटो, शेड संबंधी प्रमाण, पशु चिकित्सा प्रमाण पत्र तथा अन्य आवश्यक अभिलेख जिला कार्यालय में जमा करें।
- चरण 7 - सब्सिडी जारी होना
- जिला कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा सफल सत्यापन एवं प्रमाणन के बाद योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार बैक-एंडेड सब्सिडी जारी की जाती है।
आवेदन के बाद की प्रक्रिया
- ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद आवेदक के दस्तावेजों एवं पात्रता की जांच जिला स्तरीय स्क्रीनिंग समिति द्वारा की जाती है।
- स्वीकृत आवेदनों को ऋण स्वीकृति एवं वित्तीय प्रक्रिया के लिए संबंधित बैंक को भेजा जाता है।
- ऋण अथवा सेल्फ फाइनेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थी देशी गायों की खरीद, पशुओं का बीमा, शेड निर्माण तथा ईयर टैगिंग जैसी सभी आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करके डेयरी यूनिट स्थापित करता है।
- इसके बाद जिला स्तरीय अधिकारी डेयरी यूनिट एवं संबंधित दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करते हैं।
- संपत्ति (डेयरी यूनिट) का सफल निर्माण एवं सत्यापन पूरा होने के बाद योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्वीकृत सब्सिडी राशि जारी की जाती है।
- लाभ सामान्यतः पहले आओ, पहले पाओ (First Come, First Served) के आधार पर प्रदान किए जाते हैं।
महत्वपूर्ण लिंक
संपर्क विवरण
गव्य विकास निदेशालय पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार
- वेबसाइट: https://dairy.bihar.gov.in
- ईमेल: [email protected]
- फोन नंबर: 94710 07445
- टोल फ्री हेल्पलाइन: 1800 345 6681
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिहार देसी गौपालन प्रोत्साहन योजना बिहार सरकार की एक योजना है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में देशी गाय आधारित डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए 75% तक सब्सिडी प्रदान की जाती है।
बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों के किसान, भूमिहीन श्रमिक, बेरोजगार युवा, महिलाएं, डेयरी सहकारी समिति के सदस्य, जीविका स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्य तथा अन्य पात्र आवेदक इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
EBC, SC एवं ST वर्ग के लाभार्थियों को स्वीकृत परियोजना लागत पर 75% सब्सिडी तथा अन्य सभी वर्गों के लाभार्थियों को 50% सब्सिडी प्रदान की जाती है।
योजना के अंतर्गत केवल साहीवाल, गिर और थारपारकर नस्ल की देशी गायें ही मान्य हैं।
हाँ। पात्र आवेदक योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार 2 गाय या 4 गाय वाली डेयरी यूनिट स्थापित कर सकते हैं।
नहीं। इस योजना में बैंक ऋण तथा सेल्फ फाइनेंस, दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।
हाँ। लाभार्थी योजना के अंतर्गत एक चरण या दो चरणों में गाय खरीद सकते हैं।
4 गाय वाली डेयरी यूनिट के लिए हरे चारे की खेती हेतु कम से कम 15 डिसमिल भूमि (स्वयं की या लीज पर) होना आवश्यक है।
डेयरी यूनिट का निर्माण पूरा होने और जिला स्तर पर सफल सत्यापन के बाद ही योजना की सब्सिडी जारी की जाती है।
पात्र आवेदक गव्य विकास निदेशालय, बिहार के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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