- PMEGP के अंतर्गत स्थापित पात्र ग्रामीण इकाइयों को योजना का लाभ।
- अधिकतम 3 वर्षों तक 13% तक ब्याज में राहत।
- उत्तर प्रदेश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू।
- ब्याज सहायता का भुगतान प्रत्येक 6 माह में किया जाता है।
- उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड फोन : 2208321/2208310/2208313/2207004
- ग्रामोद्योग समाधान सेल: 18001207699
योजना का सारांश | |
|---|---|
| योजना का नाम | उत्तर प्रदेश पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना |
| नोडल विभाग | खादी एवं ग्रामोद्योग अनुभाग, उत्तर प्रदेश शासन |
| लाभ | पात्र ग्रामीण उद्यमियों को PMEGP के अंतर्गत प्राप्त ऋण पर अधिकतम तीन वर्षों तक 13% तक ब्याज में राहत प्रदान की जाती है। |
| लाभार्थी | प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत वित्तपोषित एवं स्थापित ग्रामीण इकाइयाँ |
| सब्सक्रिप्शन | योजना से जुड़ी अपडेट प्राप्त करने के लिए यहाँ सब्सक्राइब करें . |
| आवेदन का माध्यम | निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बैंक एवं जिला ग्रामोद्योग अधिकारी के माध्यम से |
योजना के बारे में
पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित एक ब्याज उपादान (Interest Subsidy) योजना है, जिसे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत वित्तपोषित एवं स्थापित ग्रामीण इकाइयों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए लागू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत केवल वही ग्रामीण उद्यमी लाभ प्राप्त कर सकते हैं जिनकी PMEGP ऋण परियोजना स्वीकृत हो चुकी है तथा ऋण का वितरण हो चुका है। योजना का लाभ वर्तमान वित्तीय वर्ष में स्वीकृत परियोजनाओं पर देय है।
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी को कम करना, शिक्षित बेरोजगार युवाओं के शहरों की ओर पलायन को हतोत्साहित करना, गांवों में ही अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना तथा 'एक जनपद एक उत्पाद (ODOP)' के अंतर्गत स्थापित उद्योगों को नई तकनीक अपनाने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने में सहायता प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि परियोजना लागत अधिक होने के कारण कई PMEGP इकाइयों पर ऋण का वित्तीय भार बढ़ जाता है, जिससे उनके कमजोर होने या बंद होने की संभावना रहती है। इस समस्या को दूर करने के लिए योजना के तहत मार्जिन मनी अनुदान एवं उद्यमी अंशदान घटाने के बाद बची हुई ऋण राशि पर अधिकतम 13% तक ब्याज उपादान प्रथम ऋण वितरण की तिथि से तीन वर्ष तक उपलब्ध कराया जाता है।
यह योजना उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है और इसके अंतर्गत जिला उद्योग केन्द्र (DIC), खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) तथा उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (UPKVIB) द्वारा प्रायोजित PMEGP की सभी पात्र ग्रामीण इकाइयाँ शामिल हैं। हालांकि, जो व्यक्ति भारत सरकार या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वरोजगार योजना के अंतर्गत पहले से ब्याज उपादान का लाभ प्राप्त कर रहा है, वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित करती है। इनमें उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (CM-YUVA) और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना नए उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं, जबकि पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना PMEGP के अंतर्गत स्थापित पात्र ग्रामीण इकाइयों को ऋण पर ब्याज में राहत देकर उनके व्यवसाय को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने में सहायता करती है।
योजना के लाभ
- पात्र ग्रामीण उद्यमियों को PMEGP के अंतर्गत प्राप्त ऋण पर अधिकतम तीन वर्षों तक 13% तक ब्याज में राहतप्रदान की जाती है।
- ऋण पर ब्याज का वित्तीय बोझ कम होने से उद्यमियों को उद्योग का संचालन सुचारु रूप से करने में सहायता मिलती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित PMEGP इकाइयों को आर्थिक रूप से अधिक सुदृढ़ बनाने में मदद मिलती है।
- उद्योगों के बंद होने की संभावना कम होती है तथा उनके निरंतर संचालन को प्रोत्साहन मिलता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायता मिलती है।
- 'एक जनपद एक उत्पाद (ODOP)' के अंतर्गत स्थापित उद्योगों को वित्तीय मजबूती प्रदान करने में सहयोग मिलता है।
- ब्याज सहायता का भुगतान प्रत्येक छह माह में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है।
- ब्याज सहायता की राशि सीधे बैंक के माध्यम से लाभार्थी के पक्ष में हस्तांतरित की जाती है।
वित्तीय सहायता / ब्याज उपादान
पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत पात्र ग्रामीण इकाइयों को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत प्राप्त ऋण पर ब्याज उपादान की सुविधा प्रदान की जाती है।
- मार्जिन मनी अनुदान एवं उद्यमी अंशदान घटाने के बाद बची हुई ऋण राशि पर देय ब्याज के लिए अधिकतम 13% तक ब्याज उपादान दिया जाता है।
- ब्याज उपादान की सुविधा ऋण की प्रथम किस्त के वितरण की तिथि से अधिकतम तीन वर्षों तक उपलब्ध रहती है।
- ब्याज उपादान का भुगतान प्रत्येक छह माह में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है।
- ब्याज उपादान की राशि सीधे लाभार्थी के पक्ष में संबंधित बैंक को NEFT/RTGS के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है।
पात्रता मानदंड
पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक को निम्नलिखित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा:
- आवेदक की इकाई प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)के अंतर्गत वित्तपोषित एवं स्थापित होनी चाहिए।
- PMEGP के अंतर्गत ऋण आवेदन स्वीकृत होने के बाद ऋण का वितरण (Loan Disbursement)हो चुका होना चाहिए। इसके बाद ही इकाई ब्याज उपादान के लिए पात्र होगी।
- योजना के अंतर्गत केवल पात्र ग्रामीण इकाइयाँही लाभ प्राप्त कर सकती हैं।
- PMEGP के अंतर्गत DIC, KVIC अथवा UPKVIBद्वारा प्रायोजित ग्रामीण इकाइयाँ इस योजना के लिए पात्र हैं।
- भारत सरकार या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वरोजगार योजनाके अंतर्गत ब्याज उपादान का लाभ प्राप्त कर रहे व्यक्ति इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।
आवश्यक दस्तावेज
पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत ब्याज उपादान का दावा करने के लिए वित्तपोषक बैंक के माध्यम से निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे:
- प्रायोजक एजेंसी (DIC/KVIC/UPKVIB) का फॉरवर्डिंग लेटर।
- वित्तपोषक बैंक द्वारा जारी ऋण स्वीकृति पत्र।
- इकाई के ऋण खाते का अद्यतन बैंक स्टेटमेंट।
- टर्म डिपॉजिट रसीद (TDR) से संबंधित दस्तावेज।
- निर्धारित प्रारूप में ब्याज उपादान दावा पत्र।
- बैंक शाखा प्रबंधक द्वारा जारी इकाई की निरीक्षण रिपोर्ट।
- लाभार्थी के साथ उद्यम कार्यस्थल का फोटोग्राफ।
महत्वपूर्ण: सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच एवं सत्यापन पूर्ण होने के बाद जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा ब्याज उपादान के भुगतान की कार्यवाही 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित की जाती है।
आवेदन करने की प्रक्रिया
पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत सबसे पहले प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत पात्र इकाई की स्थापना एवं ऋण स्वीकृत होना आवश्यक है। इसके बाद ब्याज उपादान (Interest Subsidy) की प्रक्रिया वित्तपोषक बैंक एवं संबंधित जिला ग्रामोद्योग अधिकारी के माध्यम से पूरी की जाती है।
- चरण 1: सबसे पहले उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- चरण 2: होम पेज पर "ऑनलाइन सेवाएँ (Online Services)" अनुभाग में जाकर "पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना" के लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर पहुंच जाएंगे।
- चरण 3: पोर्टल पर उपलब्ध "आवश्यक प्रारूप डाउनलोड करें" विकल्प पर क्लिक करके आवेदन पत्र, डीपीआर (Detailed Project Report) प्रारूप तथा कार्यस्थल प्रमाणपत्र डाउनलोड करें।
- चरण 4: आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें, आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें तथा कार्यस्थल प्रमाणपत्र सहित आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा करें।
- चरण 5: यदि आपकी PMEGP इकाई का ऋण स्वीकृत एवं वितरित हो जाता है, तो प्रायोजक एजेंसी (DIC/KVIC/UPKVIB) का फॉरवर्डिंग लेटर, ऋण स्वीकृति पत्र, बैंक स्टेटमेंट, TDR संबंधी दस्तावेज, निरीक्षण रिपोर्ट एवं अन्य आवश्यक अभिलेख वित्तपोषक बैंक द्वारा ब्याज उपादान के दावे के लिए उपयोग किए जाते हैं।
- चरण 6: मार्जिन मनी प्राप्त होने के बाद वित्तपोषक बैंक प्रत्येक छह माह का ब्याज उपादान दावा तैयार कर संबंधित जिला ग्रामोद्योग अधिकारी को भेजता है।
- चरण 7: जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा दावा एवं दस्तावेजों का परीक्षण, आवश्यक सत्यापन तथा लेखा परीक्षण के बाद ब्याज उपादान स्वीकृत किया जाता है।
- चरण 8: स्वीकृत ब्याज उपादान की राशि NEFT/RTGS के माध्यम से लाभार्थी के पक्ष में संबंधित बैंक को हस्तांतरित कर दी जाती है।
ब्याज उपादान भुगतान प्रक्रिया
पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत ब्याज उपादान का भुगतान निम्नलिखित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है:
- चरण 1: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत उद्यमी के ऋण खाते में मार्जिन मनी (अनुदान) प्राप्त होने के बाद बैंक परियोजना लागत में से मार्जिन मनी तथा उद्यमी के अंशदान को घटाकर शेष ऋण राशि का निर्धारण करता है।
- चरण 2: इसके बाद बैंक शेष ऋण राशि पर देय ब्याज के आधार पर प्रत्येक छह माह का ब्याज उपादान दावा तैयार कर संबंधित जिला ग्रामोद्योग अधिकारी को भेजता है।
- चरण 3: जिला ग्रामोद्योग अधिकारी दावा पत्र एवं अन्य आवश्यक अभिलेखों की जांच कराते हैं तथा लेखा परीक्षक से सत्यापन के बाद भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
- चरण 4: स्वीकृत ब्याज उपादान की राशि NEFT/RTGS के माध्यम से सीधे लाभार्थी के पक्ष में संबंधित बैंक को हस्तांतरित कर दी जाती है।
- चरण 5: ब्याज उपादान का भुगतान प्रत्येक छह माह में किया जाता है तथा भुगतान की सूचना जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा लाभार्थी एवं संबंधित बैंक को 7 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाती है।
आवेदन के बाद की प्रक्रिया
आवेदन से संबंधित दस्तावेज प्राप्त होने के बाद जिला ग्रामोद्योग अधिकारी उनकी जांच करते हैं। आवश्यकता होने पर इकाई का स्थलीय निरीक्षण भी किया जाता है तथा ब्याज उपादान के दावे का लेखा परीक्षक से सत्यापन कराया जाता है।
- सभी अभिलेख सही पाए जाने पर ब्याज उपादान का भुगतान स्वीकृत किया जाता है और राशि NEFT/RTGS के माध्यम से संबंधित बैंक को लाभार्थी के पक्ष में हस्तांतरित कर दी जाती है।
- इसके बाद जिला ग्रामोद्योग अधिकारी भुगतान की सूचना 7 दिनों के भीतर लाभार्थी एवं संबंधित बैंक को उपलब्ध कराते हैं।
- शासनादेश के अनुसार, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा प्राप्त दावा पत्रक पर आवश्यक कार्यवाही कर 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाता है।
योजना की शर्तें एवं नियम
पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत ब्याज उपादान का लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थी को निम्नलिखित शर्तों का पालन करना आवश्यक है:
- लाभ केवल प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत वित्तपोषित एवं स्थापित पात्र ग्रामीण इकाइयों को ही दिया जाएगा।
- उद्यमी को स्वीकृत परियोजना के अनुसार उद्योग की स्थापना एवं संचालन करना होगा।
- यदि उद्यमी ऋण राशि का दुरुपयोग करता है, तो उसे ब्याज उपादान का लाभ नहीं मिलेगा।
- यदि उद्यमी परियोजना का कार्य पूरा नहीं करता है तथा जानबूझकर चूक करता है, तो वह योजना के लाभ का पात्र नहीं होगा।
- यदि इकाई उत्पादन या सेवा कार्य बंद कर देती है अथवा संचालित नहीं हो रही है, तो ब्याज उपादान देय नहीं होगा।
- यदि किसी दैवी आपदा या असामयिक दुर्घटना के कारण उद्यमी की मृत्यु हो जाती है और उद्योग प्रभावित होता है, तो ऐसे मामलों में संबंधित जिलाधिकारी की संस्तुति तथा निर्धारित समिति की सिफारिश के आधार पर उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
- यदि उद्यमी तीन वर्षों के भीतर उद्योग बंद कर देता है, ऋण राशि का दुरुपयोग करता है अथवा परियोजना के अनुसार इकाई की स्थापना एवं संचालन नहीं करता है, तो बैंक द्वारा ऋण एवं प्रदान किए गए ब्याज उपादान की वसूली नियमानुसार की जाएगी।
किन परिस्थितियों में ब्याज उपादान का लाभ नहीं मिलेगा?
पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत स्थापित एवं वित्तपोषित इकाइयों को निम्नलिखित परिस्थितियों में ब्याज उपादान का लाभ प्रदान नहीं किया जाएगा:
- यदि उद्यमी ने ऋण राशि का दुरुपयोग किया हो।
- यदि उद्यमी ने परियोजना का कार्य पूरा नहीं किया हो तथा जानबूझकर चूक कर रहा हो।
- यदि इकाई उत्पादन या सेवा कार्य नहीं कर रही हो अथवा बंद हो गई हो।
विशेष प्रावधान:
यदि किसी दैवी आपदा या असामयिक दुर्घटना के कारण उद्यमी की मृत्यु हो जाती है और उसका उद्योग प्रभावित होता है, तो ऐसे मामले का परीक्षण संबंधित जिलाधिकारी द्वारा किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति (District Level Task Force Committee – DLTFC) की संस्तुति के आधार पर उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियमानुसार अंतिम निर्णय लेंगे।
इकाई कार्यरत न रहने पर ब्याज उपादान की वापसी
यदि उद्यमी तीन वर्षों के भीतर अपना उद्योग बंद कर देता है, ऋण राशि का जानबूझकर दुरुपयोग करता है या परियोजना के अनुसार इकाई की स्थापना एवं संचालन नहीं करता है, तो ऐसी स्थिति में बैंक द्वारा ऋण राशि तथा प्रदान किए गए ब्याज उपादान की वसूली की जाएगी।
शासनादेश के अनुसार, इस प्रकार के मामलों में ऋण एवं ब्याज उपादान की वसूली प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत जनपद स्तर पर गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति (District Level Task Force Committee – DLTFC) के माध्यम से डिफॉल्टर उद्यमी से की जाएगी।
महत्वपूर्ण लिंक
- उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट
- पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना लिंक
- पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के दिशा-निर्देश
- पं० दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना का आवेदन पत्र
संपर्क विवरण
उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड
- पता: 8, तिलक मार्ग, लखनऊ -226001
- फोन : 2208321/2208310/2208313/2207004
- ग्रामोद्योग समाधान सेल: 18001207699
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक योजना है, जिसके तहत प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के लाभार्थियों को ऋण पर ब्याज उपादान (Interest Subsidy) प्रदान किया जाता है ताकि ग्रामीण उद्योगों को मजबूत बनाया जा सके।
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में PMEGP के तहत स्वीकृत और वितरित ऋण प्राप्त करने वाले उद्यमी इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
योजना के तहत परियोजना लागत से मार्जिन मनी और उद्यमी अंशदान घटाने के बाद शेष ऋण राशि पर अधिकतम 13% तक ब्याज उपादान दिया जाता है।
ऋण की पहली किस्त जारी होने की तिथि से 3 वर्ष तक ब्याज उपादान की सुविधा उपलब्ध होती है।
नहीं। यदि किसी लाभार्थी ने भारत सरकार या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वरोजगार योजना में ब्याज उपादान का लाभ लिया है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगा।
ब्याज उपादान का भुगतान प्रत्येक 6 माह में किया जाता है और राशि NEFT/RTGS के माध्यम से सीधे संबंधित बैंक में भेजी जाती है।
ऋण स्वीकृति पत्र, बैंक स्टेटमेंट, प्रायोजक एजेंसी का फॉरवर्डिंग लेटर, टीडीआर से संबंधित दस्तावेज, दावा पत्र, बैंक निरीक्षण रिपोर्ट और उद्यम कार्यस्थल का फोटो सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं।
हाँ। योजना के अंतर्गत सभी संबंधित प्रक्रियाओं को चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन किया गया है।
नहीं। यह योजना केवल उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित PMEGP इकाइयों के लिए लागू है।
लाभार्थी उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी या संबंधित बैंक शाखा से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
अगर योजनाओं के बारे में आपका कोई सवाल है, तो उसे योजना के फोरम में सबमिट करें और जवाब पाएँ:
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यह फोरम निम्न कामों के लिए एक बेहतरीन जगह है:
- सवाल पूछें: अगर आपके मन में योजना से जुड़ा कोई सवाल है या आप इस विषय के किसी पहलू के बारे में और जानकारी चाहते हैं।
- योजना से जुडी अपनी बातें साझा करें: अपनी जानकारी और अनुभव शेयर करें।
- दूसरों से जुड़ें: कम्युनिटी से जुड़ें और दूसरों से सीखें।
हम आपको इस फ़ोरम में सक्रिय रूप से भाग लेने और इस बेहतरीन रिसोर्स का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते है।
| लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | योजना का प्रकार | सरकार |
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