उत्तराखंड मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना

द्वारा प्रस्तुत shivanibanduni… on Sat, 31/10/2026 - 13:46
Pushkar Singh Dhami CM Uttarakhand
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हाइलाइट
  • मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत पात्र बच्चों को ₹3,000 की मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
  • इस योजना में जन्म से लेकर 21 वर्ष तक के बच्चों को शामिल किया गया है।
  • कोविड-19 या अन्य बीमारियों के कारण अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को सहायता प्रदान की जाती है।
योजना का अवलोकन
योजना का नामउत्तराखंड मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना
लाभ₹3,000 मासिक आर्थिक सहायता
लाभार्थीकोविड प्रभावित बच्चे (0–21 वर्ष)
नोडल विभागमहिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखंड
सब्सक्रिप्शनयोजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे।
आवेदन का तरीकाऑफलाइन

योजना के बारे में

उत्तराखंड मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना राज्य सरकार द्वारा संचालित एक कल्याणकारी योजना है। इस योजना के अंतर्गत उन बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिन्होंने 1 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 के बीच कोविड-19 या अन्य बीमारियों के कारण अपने पिता, माता या अभिभावक को खो दिया है। इस योजना का क्रियान्वयन राज्य के महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया जाता है। योजना को 11 जून 2021 को मंजूरी प्रदान की गई थी।

कोविड-19 महामारी और अन्य बीमारियों के कारण बड़ी संख्या में बच्चों ने अपने माता-पिता या अभिभावक को खो दिया था। ऐसे बच्चों की देखभाल, पुनर्वास और उनकी संपत्ति, विरासत तथा कानूनी अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने इस योजना की शुरुआत की। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का उद्देश्य जन्म से लेकर 21 वर्ष तक के प्रभावित बच्चों को देखभाल, पुनर्वास, आर्थिक सहायता तथा उनकी चल-अचल संपत्ति, विरासत और कानूनी अधिकारों की सुरक्षा प्रदान करना है।

इस योजना का सबसे प्रमुख लाभ प्रत्येक चयनित बच्चे को 21 वर्ष की आयु पूरी होने तक ₹3,000 की मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करना है। सरकार यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से भेजती है। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे के लिए राशि बच्चे और उसके फिट पर्सन/अभिभावक के संयुक्त बैंक खाते में जमा की जाती है। वहीं, 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सहायता राशि लाभार्थी के स्वयं के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना के सभी लाभ 1 जुलाई 2021 से लागू हैं। आर्थिक सहायता के साथ-साथ इस योजना में अभिभावक नियुक्त करने, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करवाने तथा जिलाधिकारी द्वारा बच्चे की पैतृक संपत्ति की नियमित निगरानी करने की व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदारियों की एक निर्धारित व्यवस्था बनाई गई है। प्रत्येक तहसील में नायब तहसीलदार/प्रभारी नायब तहसीलदार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनका कार्य प्रभावित बच्चों की पहचान करना और उनके आवेदन तैयार करवाना है। इसके बाद जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) प्रत्येक बच्चे की परिस्थितियों का आकलन करती है। बाल कल्याण समिति या जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति बच्चे की देखभाल और संरक्षण से संबंधित व्यवस्था तय करती है। आर्थिक सहायता के लिए लाभार्थियों का अंतिम चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा किया जाता है। जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में आवेदन ऑफलाइन स्वीकार किए जाते हैं, योजना में आवेदन की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है।

इस योजना का लाभ केवल उत्तराखंड के स्थायी/मूल निवासी बच्चे ही प्राप्त कर सकते हैं। जिन बच्चों के जीवित माता-पिता में से कोई सरकारी सेवा में कार्यरत है, वृद्धावस्था पेंशन या पारिवारिक पेंशन प्राप्त करता है अथवा आयकर के दायरे में आता है, वे आर्थिक सहायता के पात्र नहीं हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए लगभग ₹2 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

जहां उत्तराखंड की मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना माता-पिता या अभिभावक को खोने वाले बच्चों को मासिक आर्थिक सहायता, देखभाल और कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है, वहीं केंद्र सरकार की एक अलग योजना NPS वात्सल्य योजना है। इसके तहत माता-पिता या अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के लिए उनके नाम पर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) खाता खोल सकते हैं। आप इस योजना की पूरी जानकारी यहां देख सकते हैं।

योजना के लाभ

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत चयनित बच्चों को मासिक आर्थिक सहायता के साथ-साथ व्यापक देखभाल, पुनर्वास और कानूनी सुरक्षा से संबंधित सहायता भी प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को निम्नलिखित सुविधाएं मिलती हैं:

  • मासिक आर्थिक सहायता: लाभार्थी को 21 वर्ष की आयु पूरी होने तक ₹3,000 प्रतिमाह भरण-पोषण भत्ता दिया जाता है।
  • DBT के माध्यम से भुगतान: 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे की सहायता राशि उसके और फिट पर्सन/अभिभावक के संयुक्त बैंक खाते में जमा की जाती है। 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद यह राशि लाभार्थी के व्यक्तिगत बैंक खाते में भेजी जाती है।
  • राशि के उपयोग पर प्रतिबंध: इस बैंक खाते में किसी अन्य प्रकार का लेन-देन नहीं किया जाता है। खाते में जमा राशि का उपयोग केवल बच्चे के भरण-पोषण के लिए किया जाता है।
  • परिवार के साथ देखभाल की व्यवस्था: बाल कल्याण समिति प्राथमिकता के आधार पर बच्चे को उसके परिवार या विस्तारित परिवार के साथ रखने का प्रयास करती है। ऐसा संभव न होने पर बच्चे के लिए वैकल्पिक देखभाल की व्यवस्था की जाती है।
  • अभिभावक की नियुक्ति: जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) देखभाल करने वाले व्यक्ति को 15 दिनों के भीतर सक्षम न्यायालय/प्राधिकरण से अभिभावक नियुक्त करवाने के लिए आवेदन करने में सहायता करती है।
  • निःशुल्क कानूनी सहायता: DCPU बच्चे की पैतृक संपत्ति, विरासत और कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने में मदद करती है।
  • उत्तराधिकार प्रमाण पत्र: DCPU सक्षम न्यायालय के माध्यम से बच्चे का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करवाने की व्यवस्था करती है।
  • संपत्ति की सुरक्षा: जिलाधिकारी बच्चे की चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड रखते हैं तथा उसकी मासिक और वार्षिक समीक्षा करते हैं। बच्चे की संपत्ति को बिक्री, गिरवी रखने या अतिक्रमण से सुरक्षित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक वर्ष जनवरी और जुलाई के पहले पखवाड़े में तहसील स्तर पर संपत्ति का भौतिक सत्यापन किया जाता है।
  • नियमित निगरानी: जिला बाल संरक्षण इकाई प्रत्येक 15 दिनों में बच्चे की स्थिति और कुशलक्षेम की समीक्षा करती है। वहीं, जिलाधिकारी/DCPU के अध्यक्ष द्वारा प्रत्येक महीने मामलों की समीक्षा की जाती है।

संस्थागत देखभाल की व्यवस्था

यदि किसी बच्चे की देखभाल करने वाला कोई व्यक्ति नहीं है या उसका अभिभावक उसकी देखभाल करने के लिए इच्छुक नहीं है, तो बाल कल्याण समिति उस बच्चे को 'देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाला बच्चा' घोषित करती है। इसके बाद बच्चे को किसी सरकारी या पंजीकृत बाल देखभाल संस्थान में प्रवेश दिलाया जाता है। ऐसे बच्चे को ₹3,000 की मासिक आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है, लेकिन मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के अंतर्गत मिलने वाली अन्य सभी सहायता और सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

पात्रताएं

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए बच्चे को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • बच्चा उत्तराखंड का स्थायी निवासी/मूल निवासी होना चाहिए।
  • लाभार्थी की आयु जन्म से लेकर 21 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • माता-पिता या अभिभावक की मृत्यु 1 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 के बीच कोविड-19 या अन्य बीमारियों के कारण हुई होनी चाहिए।
  • निम्नलिखित में से किसी एक परिस्थिति में आने वाले बच्चे इस योजना के पात्र हैं:
    • इस अवधि के दौरान बच्चे के एक माता-पिता की मृत्यु हो गई हो और दूसरे माता-पिता की मृत्यु पहले ही हो चुकी हो।
    • परिवार के कमाने वाले सदस्य (पिता या माता) की इस अवधि के दौरान मृत्यु हो गई हो।
    • बच्चे के माता-पिता की मृत्यु पहले ही हो चुकी हो और इस अवधि के दौरान उसके अभिभावक की भी मृत्यु हो गई हो।

आवश्यक दस्तावेज

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए आवेदन करते समय आवेदन फॉर्म के साथ निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:

  • बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र या आयु से संबंधित अन्य प्रमाण पत्र
  • बच्चे का स्थायी निवास प्रमाण पत्र
  • बच्चे का आधार कार्ड नंबर (यदि उपलब्ध हो)
  • पिता और/या माता का मृत्यु प्रमाण पत्र (यदि उनकी मृत्यु हो चुकी है)
  • पिता, माता और अभिभावक के आधार कार्ड नंबर
  • उस व्यक्ति/अभिभावक का स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जिसके साथ बच्चा रहता है
  • बैंक पासबुक

आवेदन कैसे करें?

आवेदक अपने संबंधित जिले के जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है। आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

  • अपने जिले के जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) कार्यालय जाएं या अपनी तहसील के नायब तहसीलदार से संपर्क करें।
  • मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदन फॉर्म प्राप्त करें।
  • आवेदन फॉर्म में बच्चे का विवरण भरें, जैसे नाम, जन्मतिथि, धर्म, जाति, आधार नंबर, पता, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी।
  • माता-पिता का विवरण भरें, जैसे जन्मतिथि, जीवित/मृत होने की स्थिति, मृत्यु की तारीख और कारण, व्यवसाय, आय तथा आधार नंबर।
  • बच्चे के वर्तमान देखभालकर्ता का नाम, बच्चे के साथ उसका संबंध, पता और मोबाइल नंबर दर्ज करें।
  • यदि बच्चे के माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है, तो अभिभावक का नाम, बच्चे के साथ संबंध, आयु, लिंग, आधार नंबर, व्यवसाय और पता भरें।
  • बच्चे के बैंक खाते का विवरण दर्ज करें, जैसे खाता संख्या, बैंक का नाम, IFSC कोड और शाखा का नाम।
  • माता-पिता की चल-अचल संपत्ति से संबंधित जानकारी भरें।
  • सभी आवश्यक दस्तावेज आवेदन फॉर्म के साथ संलग्न करें, फॉर्म पर हस्ताक्षर करें और इसे जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में जमा करें।

पहचान एवं सत्यापन प्रक्रिया

  • नोडल अधिकारी पंचायती राज संस्थाओं, ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, ANM/आशा कार्यकर्ताओं, स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों (NGO), चाइल्डलाइन 1098, ब्लॉक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सहायता से प्रभावित बच्चों की पहचान करते हैं।
  • नोडल अधिकारी स्वयं यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकारी सहायता के लिए आवेदन और उससे संबंधित सभी दस्तावेज तैयार किए जाएं।
  • नोडल अधिकारी पहचाने गए बच्चे की जानकारी तुरंत जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को भेजते हैं। इसके साथ ही तहसील स्तर पर बच्चों का अद्यतन रिकॉर्ड रखा जाता है।
  • जानकारी प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर DCPU बच्चे से वर्चुअल या व्यक्तिगत रूप से संपर्क करती है।
  • DCPU बच्चे के माता-पिता या अभिभावक की मृत्यु के कारण, परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति, आय के स्रोत, बच्चे की शिक्षा, संपत्ति, बैंक और बीमा संबंधी जानकारी, दिव्यांगता (यदि कोई हो) तथा देखभालकर्ता के विवरण का आकलन करती है।
  • DCPU अपनी मूल्यांकन रिपोर्ट बाल कल्याण समिति को सौंपती है और जहां तक संभव हो, 24 घंटे के भीतर बच्चे को समिति के समक्ष प्रस्तुत करती है। इसके बाद समिति किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत जांच करती है।
  • DCPU मूल्यांकन रिपोर्ट जिलाधिकारी को भी सौंपती है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति रिपोर्ट की समीक्षा करती है और बच्चे की देखभाल एवं संरक्षण से संबंधित आवश्यकताओं के आधार पर निर्णय लेती है।

चयन प्रक्रिया

  • मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लाभार्थियों का चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है।
  • इस समिति में मुख्य विकास अधिकारी (CDO), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी सदस्य होते हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करते हैं।
  • चयनित लाभार्थी को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से ₹3,000 की मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

महत्वपूर्ण लिंक

संपर्क जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह राज्य सरकार की योजना है, जिसके तहत 1 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 के बीच कोविड-19 या अन्य बीमारियों से माता-पिता/अभिभावक खोने वाले बच्चों को ₹3,000 मासिक सहायता, देखभाल और कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाती है।

जिन बच्चों के जीवित माता-पिता में से कोई सरकारी सेवा में कार्यरत है, वृद्धावस्था पेंशन या पारिवारिक पेंशन प्राप्त करता है अथवा आयकर के दायरे में आता है, वे इस योजना के तहत मासिक आर्थिक सहायता के पात्र नहीं हैं।

नहीं। सरकारी या पंजीकृत बाल देखभाल संस्थान में रहने वाले बच्चों को ₹3,000 की मासिक आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है। हालांकि, उन्हें मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत मिलने वाली अन्य सभी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

सहायता राशि DBT के माध्यम से दी जाती है। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को राशि अभिभावक के साथ संयुक्त खाते में और 18 वर्ष के बाद उनके स्वयं के बैंक खाते में भेजी जाती है।

नहीं। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है।

इस योजना के सभी लाभ 1 जुलाई 2021 से लागू हैं। लाभार्थी को 21 वर्ष की आयु पूरी होने तक निर्धारित पात्रता के अनुसार सहायता प्रदान की जाती है।

संबंधित विभाग द्वारा आवेदन की अंतिम तिथि की जानकारी अभी तक आधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई है। हालांकि, योजना के अंतर्गत 1 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 के बीच हुई मृत्यु के मामलों को शामिल किया गया है।

योजना के लाभार्थियों का चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है। जिला प्रोबेशन अधिकारी इस समिति के सदस्य सचिव होते हैं।

हां। इस योजना के तहत जिलाधिकारी बच्चे की संपत्ति की निगरानी करते हैं, जबकि DCPU अभिभावक नियुक्ति, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और निःशुल्क कानूनी सहायता में मदद करती है।

इस योजना के लिए आवेदन संबंधित जिले के जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) कार्यालय में ऑफलाइन जमा किए जाते हैं।

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