- बीपीएल परिवारों के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने पेंशन दी जाती है।
- 60 से 79 वर्ष आयु वर्ग को ₹200 प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु वालों को ₹500 प्रति माह केंद्रीय सहायता मिलती है।
- लाभार्थी के 80 वर्ष पूरे होते ही पेंशन राशि अपने आप बढ़ जाती है, इसके लिए नया आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती।
- पेंशन सीधे लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते में भेजी जाती है, और अधिकतर राज्य सरकारें इसमें अपनी ओर से अतिरिक्त राशि जोड़ती हैं।
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के संपर्क विवरण
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का ईमेल: [email protected]
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना |
| शुरू होने का वर्ष | 1995 (पूर्ववर्ती राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत) |
| लाभ |
|
| लाभार्थी | गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वाले परिवारों के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र वरिष्ठ नागरिक। |
| नोडल विभाग | भारत सरकार का ग्रामीण विकास मंत्रालय |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करें। |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन और ऑफलाइन |
योजना के बारे में
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना केंद्र सरकार की एक पेंशन योजना है, जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन बिताने वाले परिवारों के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य सीमित आर्थिक संसाधनों वाले बुजुर्गों को रोजमर्रा के जरूरी खर्च पूरे करने में मदद देना है। पेंशन के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 60 से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को केंद्र सरकार की ओर से हर महीने ₹200 की सहायता मिलती है, जबकि 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को हर महीने ₹500 दिए जाते हैं। राज्य सरकारें अपनी ओर से अतिरिक्त सहायता भी दे सकती हैं, इसलिए कुल पेंशन की राशि अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकती है।
यह योजना राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के अंतर्गत आती है, जिसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया गया है। 15 अगस्त 1995 को शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य जरूरतमंद पात्र लोगों को सामाजिक सहायता देना है। यह संविधान के अनुच्छेद 41 में दिए गए उस उद्देश्य को भी पूरा करने में मदद करता है, जिसके तहत वृद्धावस्था, बीमारी और दिव्यांगता जैसी स्थितियों में लोगों को सार्वजनिक सहायता देने की बात कही गई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस कार्यक्रम को 2026–27 से 2030–31 तक 5 वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल ₹53,428 करोड़ का बजट रखा गया है।
14 अक्टूबर 2026 को भारत सरकार ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (आईजीएनओएपीएस) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कर दिया। सरकार ने पुरानी वृद्धावस्था पेंशन योजना के मौजूदा प्रावधानों को बरकरार रखा है। इसलिए, नए नाम वाली योजना को समझने के लिए पुरानी योजना की पात्रता शर्तों, केंद्र सरकार की पेंशन सहायता और लागू करने की व्यवस्था को ही आधार माना जाता है।
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु कम से कम 60 वर्ष होनी चाहिए और उसका परिवार भारत सरकार के गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के तय मानदंडों को पूरा करता हो। पात्र वरिष्ठ नागरिक अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के निर्धारित पेंशन विभाग या स्थानीय प्राधिकरण के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। राज्य के अनुसार, आवेदन आधिकारिक ऑनलाइन पेंशन पोर्टल या निर्धारित स्थानीय कार्यालय में जमा किया जा सकता है। आवेदकों को अपनी आयु, पहचान और परिवार की पात्रता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज देने होंगे।
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों के पात्र लाभार्थियों को सहायता दी जाती है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी लाभार्थियों की पहचान करते हैं, आवेदनों का सत्यापन करते हैं और पेंशन का भुगतान करवाते हैं। आमतौर पर पेंशन हर महीने दी जाती है और जहां संभव हो, राशि लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते में जमा की जाती है। आवेदकों को आवेदन की नई प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेजों और सत्यापन के नियमों की जानकारी के लिए अपने राज्य के आधिकारिक पेंशन पोर्टल पर जाना चाहिए या संबंधित पेंशन विभाग से संपर्क करना चाहिए। पात्र वरिष्ठ नागरिक राष्ट्रीय वयोश्री योजना जैसी अन्य सहायता योजनाओं के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। इस योजना के तहत पात्र वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण दिए जाते हैं।
योजना के लाभ
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन बिताने वाले परिवारों के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। यह योजना पहले की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (आईजीएनओएपीएस) के पेंशन संबंधी प्रावधानों को जारी रखती है।
- केंद्र सरकार की ओर से 60 से 79 वर्ष की आयु के लाभार्थियों को हर महीने ₹200 की पेंशन दी जाती है।
- 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को हर महीने ₹500 की पेंशन दी जाती है।
- लाभार्थी के 80 वर्ष का होने पर पेंशन की राशि अपने आप बढ़ जाती है। इसके लिए नया आवेदन करने की जरूरत नहीं होती।
- अधिकांश राज्य सरकारें अपने बजट से अतिरिक्त राशि भी देती हैं। इसलिए लाभार्थियों को आमतौर पर केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली राशि से अधिक पेंशन मिलती है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के तहत पेंशन की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते में जमा की जाती है।
- इस योजना में एक परिवार से केवल एक व्यक्ति को पेंशन देने की सीमा नहीं है। इसलिए गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार का 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का हर सदस्य पेंशन प्राप्त कर सकता है।
- लाभार्थी का हर साल सत्यापन होने की शर्त पर उसे जीवनभर पेंशन मिलती रहती है।
- इस योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है। इसलिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में न्यूनतम आर्थिक सहायता की राशि समान रहती है।
पात्रताएं
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत पेंशन का लाभ पाने के लिए आवेदकों को निम्नलिखित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।
- आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए।
- आवेदक की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। यह शर्त महिला और पुरुष, दोनों पर लागू होती है।
- आवेदक का परिवार भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिताने वाला होना चाहिए।
- आवेदन करने के लिए अधिकतम आयु सीमा तय नहीं है। लाभार्थी के 80 वर्ष का होने पर पेंशन की राशि बढ़ जाती है।
- ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों के पात्र व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं।
- आवेदन करने की कोई अंतिम तिथि नहीं है। लाभार्थियों की पहचान करने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।
- यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की सूची में नहीं है, तो उसे योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, उसकी पात्रता की अलग से जांच की जानी चाहिए और उसका नाम चयन सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए आवेदन करते समय आवेदकों को निम्नलिखित दस्तावेज और जानकारी तैयार रखनी चाहिए। जरूरी दस्तावेजों की सूची राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए आवेदकों को अपने स्थानीय पेंशन विभाग से अंतिम सूची की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
- हाल ही में खींची गई फोटो के साथ पूरी तरह भरा हुआ और हस्ताक्षर किया गया आवेदन पत्र।
- आयु का प्रमाण, जैसे जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल प्रमाण पत्र।
- आधार कार्ड।
- राशन कार्ड।
- मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी)।
- गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार से जुड़ी जानकारी, जिसमें सर्वेक्षण का वर्ष, स्थान, परिवार पहचान संख्या और सदस्य पहचान संख्या शामिल हैं।
- आवेदक के बैंक या डाकघर खाते का विवरण।
- आवेदन पत्र पर आवेदक के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान।
आवेदन प्रक्रिया
पात्र वरिष्ठ नागरिक प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए उमंग ऐप या पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, वे अपनी ग्राम पंचायत या नगर पालिका के माध्यम से ऑफलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। आवेदन करने के दोनों तरीके मान्य हैं। हालांकि, योजना के दिशा-निर्देशों में ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।
उमंग ऐप या पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन
- उमंग पोर्टल पर जाएं या अपने मोबाइल फोन में उमंग ऐप डाउनलोड करके खोलें।
- अपने मोबाइल नंबर और उस पर भेजे गए ओटीपी का उपयोग करके पंजीकरण करें या लॉग इन करें।
- लॉग इन करने के बाद सेवा अनुभाग में जाएं।
- "एनएसएपी" खोजें और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की सेवा चुनें।
- आवेदन शुरू करने के लिए "ऑनलाइन आवेदन करें" पर क्लिक करें।
- दिखाई गई पेंशन योजनाओं की सूची में से वृद्धावस्था पेंशन योजना चुनें।
- सभी जरूरी जानकारी ध्यान से भरें और जांच लें कि दी गई जानकारी सही है।
- आवेदन जमा करें। इसके बाद सत्यापन और आगे की प्रक्रिया के लिए आपका आवेदन दर्ज कर लिया जाएगा।
ध्यान दें: उमंग पर यह सेवा अभी भी अपने पुराने नाम, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी), के तहत दिखाई देती है। आवेदन पत्र में पेंशन के विकल्प का नाम भी अभी "वृद्धावस्था पेंशन" ही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए नाम परिवर्तन को अभी तक आवेदन पोर्टलों पर लागू नहीं किया गया है। फिलहाल, आवेदकों को "एनएसएपी" खोजकर "वृद्धावस्था पेंशन" का विकल्प चुनना चाहिए। पोर्टलों के अपडेट होने के बाद यही सेवा नए नाम, प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना, के तहत दिखाई देने की उम्मीद है। इसमें वृद्धावस्था पेंशन का विकल्प प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के नाम से दिख सकता है। आवेदन करते समय आवेदकों को इनमें से किसी भी नाम को देखना चाहिए, क्योंकि दोनों एक ही योजना और समान लाभ को दर्शाते हैं।
ग्राम पंचायत या नगर पालिका के माध्यम से ऑफलाइन आवेदन
- प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना का आवेदन पत्र ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या नगर पालिका कार्यालय से निःशुल्क प्राप्त करें।
- आवेदन पत्र संबंधित राज्य की वेबसाइट से भी डाउनलोड किया जा सकता है।
- आवेदन पत्र भरें और इसके साथ जरूरी दस्तावेज संलग्न करें।
- ग्रामीण क्षेत्रों में भरा हुआ आवेदन पत्र ग्राम पंचायत में जमा करें। शहरी क्षेत्रों में इसे वार्ड कार्यालय या नगर पालिका कार्यालय में जमा करें।
- सत्यापन अधिकारी या सत्यापन दल पात्रता की शर्तों के अनुसार आवेदन की जांच करता है और अपनी सिफारिश दर्ज करता है।
- आवेदकों की सूची और सत्यापन संबंधी सिफारिशें पहले ग्राम सभा, वार्ड सभा या क्षेत्र सभा के सामने रखी जाती हैं। इसके बाद इन्हें ग्राम पंचायत या नगर पालिका के सामने प्रस्तुत किया जाता है।
- प्रखंड या नगर पालिका स्तर पर नियुक्त स्वीकृति अधिकारी मुहर लगाकर स्वीकृति आदेश जारी करता है। इसकी एक प्रति ग्राम पंचायत या नगर पालिका को भी भेजी जाती है।
- लाभार्थी को एक पेंशन पासबुक दी जाती है, जिसमें स्वीकृति आदेश, उसकी व्यक्तिगत जानकारी और पेंशन भुगतान का विवरण दर्ज होता है।
आवेदकों के लिए हर बार स्वयं आवेदन करने के लिए आगे आना जरूरी नहीं है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, नए लाभार्थियों की पहचान करने में ग्राम पंचायत और नगर पालिका की मुख्य भूमिका है। उनसे गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की सूची के आधार पर पात्र परिवारों की पहचान करने और उनसे सीधे संपर्क करने की अपेक्षा की जाती है। कई राज्य अपने पेंशन पोर्टल और साझा सेवा केंद्र भी चलाते हैं, जहां से आवेदन जमा किए जा सकते हैं।
महत्वपूर्ण लिंक
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट
- प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के आवेदन की स्थिति जांचें
- उमंग की आधिकारिक वेबसाइट
- प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना (पुरानी वृद्धावस्था पेंशन योजना के दिशा-निर्देश)
- योजना का नाम बदलने से संबंधित मंत्रिमंडल की प्रेस विज्ञप्ति
- ग्रामीण विकास मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट
- उमंग मोबाइल ऐप डाउनलोड करें (एंड्रॉइड)
- उमंग मोबाइल ऐप डाउनलोड करें (आईओएस)
संपर्क जानकारी
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के संपर्क विवरण
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का ईमेल: [email protected]
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना केंद्र सरकार की एक पेंशन योजना है, जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन बिताने वाले परिवारों के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। यह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (आईजीएनओएपीएस) का नया नाम है।
भारत सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को इस योजना के नए नाम को मंजूरी दी। इससे पहले, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत 19 नवंबर 2007 को औपचारिक रूप से शुरू किया गया था।
आवेदक की आयु कम से कम 60 वर्ष होनी चाहिए और उसका परिवार भारत सरकार द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वाले परिवारों के मानदंडों को पूरा करता हो। आवेदकों को अपने राज्य में लागू सत्यापन संबंधी शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
मौजूदा केंद्रीय सहायता प्रावधानों के अनुसार, 60 से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को हर महीने ₹200 मिलते हैं, जबकि 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को हर महीने ₹500 मिलते हैं। राज्य सरकारें अपनी ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी दे सकती हैं।
हां। पुरानी योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार का 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक पात्र सदस्य वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर सकता है। यह लाभ परिवार के केवल एक सदस्य तक सीमित नहीं है।
हां। 14 अक्टूबर 2026 को भारत सरकार ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (आईजीएनओएपीएस) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कर दिया। यह योजना नए नाम वाले राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत जारी है, जिसे अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कहा जाता है।
पात्र वरिष्ठ नागरिक अपने राज्य के आधिकारिक वृद्धावस्था पेंशन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, यदि वहां यह सुविधा उपलब्ध है। वे निर्धारित स्थानीय पेंशन प्राधिकरण के पास आवेदन पत्र भी जमा कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
नहीं। 14 अक्टूबर 2026 को मंत्रिमंडल के फैसले में वृद्धावस्था पेंशन के मौजूदा प्रावधानों को बरकरार रखा गया। केंद्र सरकार की ओर से 60 से 79 वर्ष की आयु के लाभार्थियों को हर महीने ₹200 और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को हर महीने ₹500 की पेंशन मिलती रहेगी।
मौजूदा लाभार्थियों के लिए दोबारा आवेदन करना अनिवार्य करने वाला कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। यह वही योजना है, जिसका नाम बदला गया है। इसलिए पेंशन का लाभ बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा।
नहीं। इस योजना के तहत किसी व्यक्ति को नामित करने की सुविधा नहीं है। लाभार्थी की मृत्यु होने पर पेंशन बंद हो जाती है और किसी भी नामित व्यक्ति को यह पेंशन नहीं मिलती है।
अगर योजनाओं के बारे में आपका कोई सवाल है, तो उसे योजना के फोरम में सबमिट करें और जवाब पाएँ:
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हम आपको इस फ़ोरम में सक्रिय रूप से भाग लेने और इस बेहतरीन रिसोर्स का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते है।
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