- दुर्घटना में मृत्यु या पात्र स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में ₹5 लाख तक की आर्थिक सहायता।
- उत्तर प्रदेश के पात्र कृषकों एवं उनके परिवारों के लिए लागू।
- ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन की सुविधा।
- स्वीकृत सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है।
- उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद् संपर्क विवरण
- उत्तर प्रदेश ई-डिस्ट्रिक्ट हेल्पलाइन नंबर: 0522-2304706
- उत्तर प्रदेश ई-डिस्ट्रिक्ट सहायता ईमेल: [email protected]
| योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना |
| लाभ | दुर्घटना में मृत्यु या पात्र स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में ₹5 लाख तक की आर्थिक सहायता। |
| लाभार्थी | उत्तर प्रदेश के पात्र कृषक एवं उनके परिवार। |
| नोडल एजेंसी | राजस्व परिषद्, उत्तर प्रदेश |
| सदस्यता | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे। |
| आवेदन का माध्यम | ऑनलाइन / ऑफलाइन |
योजना के बारे में
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसके अंतर्गत दुर्घटना के कारण मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता होने पर पात्र कृषकों एवं उनके परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना का उद्देश्य आकस्मिक दुर्घटनाओं के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे कृषक परिवारों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। योजना का संचालन उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद् द्वारा किया जाता है तथा इसका लाभ केवल भूमिधर कृषकों तक सीमित नहीं है। निर्धारित शर्तों के अनुसार सहखातेदार, पंजीकृत पट्टेदार, बटाईदार तथा कृषक परिवार के पात्र कमाऊ सदस्य भी इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु अथवा पूर्ण शारीरिक अक्षमता की स्थिति में पात्र लाभार्थियों को अधिकतम ₹5 लाख तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा अधिसूचना में निर्धारित अन्य श्रेणियों की स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित सहायता राशि प्रदान की जाती है। यह आर्थिक सहायता दुर्घटना से प्रभावित परिवार को तत्काल आवश्यक खर्चों को पूरा करने तथा कठिन परिस्थितियों में वित्तीय सहयोग प्रदान करने में सहायक होती है। सहायता राशि का निर्धारण शासनादेश में निर्धारित मुआवजा संरचना के अनुसार किया जाता है।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत शासन द्वारा अधिसूचित विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाओं को शामिल किया गया है। हालांकि, केवल वही दुर्घटनाएं योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता के लिए पात्र होंगी जो निर्धारित पात्रता एवं अन्य शर्तों को पूरा करती हैं। योजना में शामिल दुर्घटनाओं, सहायता राशि तथा अपात्रता से संबंधित विस्तृत जानकारी इस लेख के आगामी अनुभागों में दी गई है।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक दुर्घटना के समय उत्तर प्रदेश का निवासी तथा योजना की पात्र श्रेणियों में शामिल होना आवश्यक है। सामान्यतः योजना का लाभ 18 से 70 वर्ष आयु वर्ग के पात्र व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। दुर्घटना की तिथि से सामान्यतः 45 दिनों के भीतर आवेदन करना आवश्यक है, हालांकि विशेष परिस्थितियों में जिलाधिकारी अतिरिक्त समय प्रदान कर सकते हैं। पात्र आवेदक या विधिक उत्तराधिकारी उत्तर प्रदेश ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल, उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद् पोर्टल अथवा संबंधित तहसील कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। सक्षम अधिकारियों द्वारा सत्यापन एवं स्वीकृति के बाद स्वीकृत सहायता राशि सीधे लाभार्थी या विधिक उत्तराधिकारी के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाती है।
यदि किसी पात्र व्यक्ति को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) या प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के अंतर्गत पहले से सहायता प्राप्त हो चुकी है, तो शासनादेश के अनुसार मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत केवल देय अंतर की राशि ही प्रदान की जाती है।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना राज्य के कृषक परिवारों को दुर्घटना के बाद समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है। आवेदन करने से पहले लाभार्थियों को पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, सहायता राशि, आवेदन प्रक्रिया, समय-सीमा तथा अन्य महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए, ताकि आवेदन बिना किसी अनावश्यक विलंब के सफलतापूर्वक निस्तारित किया जा सके।
योजना के लाभ
- मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत दुर्घटनावश मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में पात्र कृषक अथवा उसके विधिक वारिसों को अधिकतम ₹5,00,000 तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
- आर्थिक सहायता की राशि मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की प्रकृति एवं गंभीरता के अनुसार निर्धारित की जाती है।
- योजना के अंतर्गत देय सहायता राशि का विवरण निम्नानुसार है:
| मृत्यु / स्थायी दिव्यांगता की स्थिति | देय सहायता राशि |
|---|---|
| मृत्यु अथवा पूर्ण शारीरिक अक्षमता | ₹5,00,000 |
| दोनों हाथ, दोनों पैर अथवा दोनों आँखों की क्षति | ₹5,00,000 |
| एक हाथ एवं एक पैर की क्षति | ₹5,00,000 |
| एक हाथ, एक पैर अथवा एक आँख की क्षति | ₹2,50,000 |
| 50% से अधिक लेकिन 100% से कम स्थायी दिव्यांगता | ₹2,50,000 |
| 25% से अधिक लेकिन 50% से कम स्थायी दिव्यांगता | ₹1,25,000 |
योजना के अंतर्गत मृत्यु या दिव्यांगता के कारण
निम्नलिखित कारणों से होने वाली मृत्यु या दिव्यांगता की दशा में ही आर्थिक सहायता देय होगी :-
- आग लगने के कारण।
- बाढ़ के कारण हुई मृत्यु या दिव्यांगता।
- बिजली गिरने के कारण।
- करेन्ट लगने के कारण।
- सांप के काटने पर।
- जीव-जन्तु, जानवर द्वारा काटने/मारने/ आक्रमण से।
- समुन्द्र, नदी, तालाब, झील, कुँए, व पोखर आदि में डूबने के कारण।
- आंधी तूफ़ान, वृक्ष से गिरने या दबने के कारण।
- मकान के गिर जाने के कारण।
- रेल/रोड/वायुयान/अन्य वाहन आदि से दुर्घटना के कारण।
- भू-स्खलन के कारण।
- भूकंप, गैस रिसाव, विस्फोट के कारण।
- सीवर चैम्बर में गिरने के कारण।
- या अन्य किसी भी कारण से मृत्यु या दिव्यांगता होने की दशा में।
पात्रताएं
- आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- दुर्घटना की तिथि पर मृतक अथवा स्थायी रूप से दिव्यांग हुए कृषक की आयु 18 वर्ष से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- योजना का लाभ निम्नलिखित श्रेणियों के पात्र कृषकों को दिया जाता है:
- उत्तर प्रदेश के राजस्व अभिलेखों में दर्ज खातेदार या सह-खातेदार।
- खातेदार/सहखातेदार के परिवार का वह सदस्य जिसकी आजीविका का मुख्य स्रोत उनके नाम दर्ज कृषि भूमि से होने वाली आय हो।
- सरकारी, असामी या निजी पट्टे पर प्राप्त भूमि पर कृषि कार्य करने वाला पट्टेदार कृषक।
- बटाई पर कृषि कार्य करने वाला कृषक (बटाईदार)।
- कृषक की मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता योजना में शामिल दुर्घटनाओं के कारण हुई होनी चाहिए।
- आवेदन निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेजों सहित निर्धारित प्रपत्र में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत आवेदन करते समय निर्धारित आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न करने होंगे:
- कृषक होने का प्रमाण (निम्न में से कोई एक):
- खातेदार/सहखातेदार होने की स्थिति में खतौनी की प्रमाणित प्रति।
- पंजीकृत निजी पट्टेदार होने की स्थिति में पंजीकृत पट्टे की प्रमाणित प्रति।
- बटाईदार होने की स्थिति में योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित प्रमाण-पत्र।
- आयु प्रमाण-पत्र (निम्न में से कोई एक):
- परिवार रजिस्टर की प्रति।
- हाईस्कूल प्रमाण-पत्र।
- पासपोर्ट।
- मतदाता पहचान पत्र।
- ड्राइविंग लाइसेंस।
- आधार कार्ड।
- पैन कार्ड।
- निवास प्रमाण-पत्र (निम्न में से कोई एक):
- उपजिलाधिकारी (SDM) द्वारा जारी निवास प्रमाण-पत्र।
- पासपोर्ट।
- ड्राइविंग लाइसेंस।
- आधार कार्ड।
- मतदाता पहचान पत्र।
- राशन कार्ड।
- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट (यदि लागू हो)।
- पंचनामा (यदि पोस्टमॉर्टम कराना संभव न हो)।
- मृत्यु प्रमाण-पत्र (मृत्यु के मामले में)।
- मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र (स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में)।
- उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र (केवल विवादित उत्तराधिकार की स्थिति में)।
- बैंक पासबुक की प्रति, जिसमें निम्नलिखित विवरण स्पष्ट रूप से अंकित हों:
- बैंक का नाम।
- शाखा का नाम।
- बैंक खाता संख्या।
- आईएफएससी (IFSC) कोड।
- मोबाइल नंबर।
- आधार नंबर।
आवेदन करने की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत पात्र कृषक अथवा उनके विधिक वारिस ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन उत्तर प्रदेश e-District पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है, जबकि ऑफलाइन आवेदन निर्धारित प्रपत्र भरकर संबंधित तहसील कार्यालय में जमा किया जाता है। आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य है।
ऑनलाइन e-District Portal के माध्यम से
- उत्तर प्रदेश e-District Portal पर जाएं।
- यदि आपका पंजीकरण नहीं है, तो पहले नया पंजीकरण करें और फिर लॉगिन करें।
- सेवा सूची में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का चयन करें।
- ऑनलाइन आवेदन पत्र में मृतक अथवा दिव्यांग कृषक एवं आवेदक/विधिक वारिस से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी भरें।
- निर्धारित प्रारूप में सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन की जानकारी सत्यापित कर अंतिम रूप से सबमिट करें।
- भविष्य में आवेदन की स्थिति देखने के लिए आवेदन संख्या या रसीद सुरक्षित रखें।
ऑनलाइन राजस्व परिषद् पोर्टल के माध्यम से
- सबसे पहले उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद् पोर्टल पर जाएं।
- मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत उपलब्ध "आवेदन करें" विकल्प पर क्लिक करें।

- इसके बाद आप आवेदक लॉगिन पेज पर पहुंच जाएंगे। यहां "आवेदक लॉगिन" विकल्प का चयन करें।

- अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और "ओटीपी भेजें" बटन पर क्लिक करें।

- पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और "प्रवेश करें" बटन पर क्लिक करें।
- प्रवेश करने के बाद डैशबोर्ड में "ऑनलाइन आवेदन" विकल्प का चयन करें।
- अब आवेदन का कारण चुनें, जैसे मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता।
- आवेदन पत्र में कृषक, आवेदक, दुर्घटना तथा बैंक खाते से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी दर्ज करें।
- निर्धारित प्रारूप में सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- दर्ज की गई सभी जानकारी की सावधानीपूर्वक जांच करने के बाद आवेदन पत्र जमा करें।
- आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने के बाद भविष्य में आवेदन की स्थिति देखने के लिए आवेदन संख्या या पावती सुरक्षित रखें।
ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया
- मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का निर्धारित आवेदन पत्र प्राप्त करें या डाउनलोड करें।
- आवेदन पत्र में मृतक अथवा दिव्यांग कृषक, दुर्घटना का विवरण तथा आवेदक/विधिक वारिस से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी भरें।
- आवेदन पत्र के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें।
- यदि मृतक कृषक के एक से अधिक विधिक वारिस हों, तो सभी पात्र वारिसों को संयुक्त रूप से आवेदन करना होगा।
- भरा हुआ आवेदन पत्र मूल प्रति एवं एक छायाप्रति सहित संबंधित तहसील कार्यालय में जमा करें।
- आवेदन जमा होने के बाद प्राप्ति रसीद प्राप्त करें और भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।
- संबंधित तहसीलदार आवेदन एवं संलग्न दस्तावेजों की जांच कर आवेदन को उपजिलाधिकारी के पास भेजेंगे।
- उपजिलाधिकारी द्वारा आवश्यक सत्यापन के बाद आवेदन अंतिम स्वीकृति के लिए जिलाधिकारी को भेजा जाएगा।
- आवेदन स्वीकृत होने पर सहायता राशि पात्र कृषक अथवा उनके विधिक वारिसों के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित कर दी जाएगी।
योजना के महत्वपूर्ण बिंदु
- कृषक की मृत्यु या दुर्घटना के कारण स्थायी दिव्यांगता होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर आवेदन जमा करना अनिवार्य है।
- विशेष परिस्थितियों में जिलाधिकारी आवेदन जमा करने की अवधि अधिकतम 1 माह तक बढ़ा सकते हैं। हालांकि, दुर्घटना की तिथि से 75 दिनों के बाद प्राप्त आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
- ऑफलाइन आवेदन दो प्रतियों (एक मूल प्रति एवं एक छायाप्रति) में संबंधित तहसील कार्यालय में जमा करना होगा।
- आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित तहसीलदार द्वारा आवेदन एवं दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।
- सत्यापन पूर्ण होने के बाद पात्र आवेदन जिलाधिकारी की स्वीकृति के लिए भेजे जाते हैं।
- आवेदन स्वीकृत होने पर सहायता राशि सीधे पात्र कृषक अथवा उनके विधिक वारिसों के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है।
- योजना के प्रावधानों के अनुसार आवेदन का निस्तारण अधिकतम 45 दिनों के भीतर किया जाता है।
- स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में केवल संबंधित जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र ही मान्य होगा।
- यदि मृतक कृषक के एक से अधिक विधिक वारिस हों, तो सभी पात्र वारिसों को संयुक्त रूप से आवेदन करना होगा।
- यदि कृषक को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना या प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी पात्र बीमा योजनाओं का लाभ मिलता है, तो इस योजना के अंतर्गत केवल अंतर की राशि ही प्रदान की जाएगी।
- सांप या अन्य विषैले जीव-जंतुओं के काटने से मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट या स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक का प्रमाण पत्र मान्य होगा।
- आत्महत्या या किसी आपराधिक कृत्य के दौरान हुई मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।
- बटाईदार कृषकों को अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए निर्धारित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
महत्वपूर्ण आवेदन पत्र
महत्वपूर्ण लिंक
- मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना ऑनलाइन आवेदन (ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल)
- मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना ऑनलाइन आवेदन (राजस्व परिषद् पोर्टल)
- मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना दिशा-निर्देश
- मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना आवेदन की स्थिति
संपर्क करने का विवरण
- उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद् संपर्क विवरण
- उत्तर प्रदेश ई-डिस्ट्रिक्ट हेल्पलाइन नंबर: 0522-2304706
- उत्तर प्रदेश ई-डिस्ट्रिक्ट सहायता ईमेल: [email protected]
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के पात्र कृषकों, सहखातेदारों, पंजीकृत पट्टेदारों, बटाईदारों तथा पात्र कृषक परिवार के कमाऊ सदस्यों को शासनादेश में निर्धारित शर्तों के अनुसार दिया जाता है।
दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण शारीरिक अक्षमता की स्थिति में अधिकतम ₹5 लाख तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। अन्य पात्र स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में निर्धारित सहायता राशि देय होती है।
दुर्घटना की तिथि से सामान्यतः 45 दिनों के भीतर आवेदन करना आवश्यक है। विशेष परिस्थितियों में जिलाधिकारी अधिकतम एक माह की अतिरिक्त अवधि प्रदान कर सकते हैं।
दुर्घटना में मृत्यु होने पर विधिक उत्तराधिकारी आवेदन कर सकते हैं। स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में पात्र कृषक स्वयं आवेदन कर सकता है।
आवेदन उत्तर प्रदेश ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल, उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद् पोर्टल या संबंधित तहसील कार्यालय के माध्यम से किया जा सकता है।
हाँ। पात्र आवेदक उत्तर प्रदेश ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल या उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद् पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
योजना का लाभ सामान्यतः 18 से 70 वर्ष आयु के पात्र व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है।
हाँ। यदि पात्र व्यक्ति को PMJJBY या PMSBY के अंतर्गत सहायता प्राप्त हुई है, तो शासनादेश के अनुसार मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत केवल देय अंतर की राशि प्रदान की जाती है।
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| जाति | लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | योजना का प्रकार | सरकार |
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