- 2021 में राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई योजना।
- सरकार द्वारा स्वीकृत सामूहिक विवाह समारोह में शामिल प्रत्येक पात्र जोड़े को ₹25,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- सहायता राशि में ₹21,000 सीधे दुल्हन को तथा ₹4,000 आयोजन करने वाली संस्था को IFMS के माध्यम से दिए जाते हैं।
- योजना का उद्देश्य सामूहिक विवाहों को बढ़ावा देना, विवाह का खर्च कम करना तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता करना है।
- महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार संपर्क नंबर: 01412716452
- ईमेल: [email protected]
योजना का सारांश | |
|---|---|
| योजना का नाम | राजस्थान मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह एवं अनुदान योजना |
| नोडल विभाग | महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार |
| लाभ | प्रत्येक पात्र जोड़े को ₹25,000 की वित्तीय सहायता। |
| लाभार्थी | सरकार द्वारा स्वीकृत सामूहिक विवाह समारोहों में भाग लेने वाले पात्र जोड़े |
| सब्सक्रिप्शन | योजना से जुड़ी अपडेट प्राप्त करने के लिए यहाँ सब्सक्राइब करें . |
| आवेदन का माध्यम | ऑफलाइन |
योजना के बारे में
विवाह किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, लेकिन कई परिवारों के लिए शादी का बढ़ता खर्च एक बड़ा आर्थिक बोझ बन जाता है। जागरूकता बढ़ने के बावजूद दहेज प्रथा, बाल विवाह और शादियों में जरूरत से ज्यादा खर्च जैसी सामाजिक समस्याएं आज भी कई समाजों में देखने को मिलती हैं। इन समस्याओं को कम करने, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता करने तथा सादगीपूर्ण, सम्मानजनक और कानूनी रूप से पंजीकृत विवाहों को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार ने वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह एवं अनुदान योजना शुरू की।
इस योजना के तहत सरकार द्वारा स्वीकृत सामूहिक विवाह समारोहों को बढ़ावा दिया जाता है, जिनमें एक ही स्थान पर कई पात्र जोड़ों का विवाह कराया जाता है। अलग-अलग विवाह समारोहों पर अधिक खर्च करने के बजाय सरकार प्रत्येक पात्र जोड़े को ₹25,000 की वित्तीय सहायता देती है। इस राशि में से ₹21,000 सीधे नवविवाहिता (दुल्हन) को दिए जाते हैं, जबकि ₹4,000 सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करने वाली संस्था को इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के माध्यम से प्रदान किए जाते हैं, ताकि समारोह के आयोजन में सहायता मिल सके।
यह योजना केवल परिवारों पर शादी का आर्थिक बोझ कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बाल विवाह को हतोत्साहित करना, दहेज प्रथा को कम करना, शादियों में होने वाले अनावश्यक खर्च को रोकना और प्रत्येक विवाह का कानूनी पंजीकरण सुनिश्चित करना भी है। पूरे राजस्थान में सामूहिक विवाहों को बढ़ावा देकर सरकार सामाजिक समानता, जिम्मेदार खर्च और कानूनी विवाह पंजीकरण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना चाहती है।
इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा स्वीकृत सामूहिक विवाह समारोहों में भाग लेने वाले पात्र जोड़ों को वित्तीय सहायता मिलती है। साथ ही वे एक ऐसे सामाजिक सुधार अभियान का हिस्सा बनते हैं, जो सस्ती और सम्मानजनक शादियों, महिलाओं के कल्याण तथा कानूनी विवाह पंजीकरण को बढ़ावा देता है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह एवं अनुदान योजना, महिलाओं और परिवारों के सामाजिक कल्याण को मजबूत करने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रमुख योजनाओं में से एक है। पात्र लाभार्थी अपनी आवश्यकता के अनुसार मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, सुखद दाम्पत्य जीवन योजना तथा लाड़ो प्रोत्साहन योजना जैसी अन्य योजनाओं की भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ये योजनाएं विवाह सहायता, विवाहित दंपतियों के सहयोग तथा बेटियों की शिक्षा, सशक्तिकरण और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करती हैं।
योजना के उद्देश्य
इस योजना का उद्देश्य:
- विवाह में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करना।
- पूरे राजस्थान में सामूहिक विवाह समारोहों को बढ़ावा देना।
- बाल विवाह को हतोत्साहित करना।
- दहेज प्रथा को समाप्त करने में सहायता करना।
- पात्र नवविवाहित जोड़ों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- विवाह का कानूनी पंजीकरण बढ़ावा देना।
योजना के लाभ
इस योजना के तहत पात्र जोड़ों को ₹25,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
सहायता राशि का वितरण इस प्रकार किया जाता है:
- ₹21,000 सीधे दुल्हन के खाते में दिए जाते हैं।
- ₹4,000 सामूहिक विवाह आयोजित करने वाली संस्था को IFMS (इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) के माध्यम से दिए जाते हैं।
पात्रताएँ
योजना का लाभ लेने के लिए निम्नलिखित पात्रता पूरी करनी होगी:
- दूल्हा या दुल्हन राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए।
- दुल्हन की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
- दूल्हे की आयु 21 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
- विवाह से पहले दूल्हा और दुल्हन दोनों अविवाहित होने चाहिए।
- विवाह का कानूनी रूप से पंजीकरण होना अनिवार्य है।
- विवाह सरकार द्वारा स्वीकृत संस्था के माध्यम से आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में होना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज
- योजना के लिए आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:
- दूल्हा और दुल्हन का पासपोर्ट आकार का फोटो।
- दूल्हा और दुल्हन का आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र।
- दूल्हा और दुल्हन का जन्म प्रमाण पत्र।
- दुल्हन की बैंक पासबुक।
- विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र।
आवेदन प्रक्रिया
चरण 1: स्वीकृत सामूहिक विवाह समारोह में भाग लें
- दूल्हा और दुल्हन को योजना के तहत स्वीकृत संस्था द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह (Samuhik Vivah) में भाग लेना होगा।
- विवाह समारोह में शामिल होने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आयोजन करने वाली संस्था राजस्थान सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार मान्यता प्राप्त है।
चरण 2: विवाह का पंजीकरण कराएं
- विवाह समारोह पूरा होने के बाद अपने विवाह का आधिकारिक पंजीकरण राजस्थान के विवाह पंजीकरण नियमों के अनुसार कराएं।
- विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र को सुरक्षित रखें, क्योंकि वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए इसकी आवश्यकता होगी।
चरण 3: लाभार्थियों की जानकारी जमा करना
- विवाह का पंजीकरण होने के बाद आयोजन करने वाली संस्था सभी पात्र जोड़ों की जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करेगी।
- अनुदान स्वीकृति के लिए संस्था लाभार्थियों की ओर से यह जानकारी जमा करती है।
चरण 4: आवश्यक दस्तावेज जमा करें
- आयोजन करने वाली संस्था सभी आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करेगी।
- इसके साथ ही सत्यापन के लिए दस्तावेजों की हार्ड कॉपी संबंधित जिला महिला अधिकारिता कार्यालय में भी जमा करेगी।
चरण 5: आवेदन का सत्यापन
- अधिकृत अधिकारी आवेदन में दी गई जानकारी और अपलोड किए गए दस्तावेजों की जांच करेंगे।
- यदि किसी दस्तावेज या जानकारी में कोई कमी पाई जाती है, तो आयोजन करने वाली संस्था से आवश्यक स्पष्टीकरण या अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
चरण 6: स्वीकृति और वित्तीय सहायता जारी होना
- आवेदन का सफलतापूर्वक सत्यापन होने और सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद योजना के तहत वित्तीय सहायता जारी की जाती है।
- पात्र दुल्हन को ₹21,000 की सहायता राशि दी जाती है, जबकि ₹4,000 की राशि IFMS के माध्यम से आयोजन करने वाली संस्था को प्रदान की जाती है।
विवाह के बाद आवेदन प्रक्रिया
सामूहिक विवाह समारोह पूरा होने के बाद:
- आयोजन करने वाली संस्था लाभार्थियों की जानकारी ऑनलाइन अपलोड करती है।
- सामूहिक विवाह में शामिल सभी जोड़ों की प्रमाणित सूची जमा करती है।
- विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्रों की सत्यापित प्रतियां अपलोड करती है।
- अपलोड किए गए सभी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी संबंधित जिला महिला अधिकारिता कार्यालयमें जमा करती है।
विवाह समारोह के दौरान सत्यापन प्रक्रिया
योजना में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए:
- विवाह समारोह के दौरान सक्षम अधिकारी या उनके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि उपस्थित रहते हैं।
- प्रतिनिधि निर्धारित प्रारूप में विवाह समारोह से संबंधित अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।
- आवश्यकता होने पर तहसीलदार या अन्य सक्षम अधिकारी भी रिपोर्ट का सत्यापन करते हैं।
- महिला एवं बाल विकास विभाग के शिक्षा अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी या किसी अन्य ब्लॉक स्तर के अधिकारी/पर्यवेक्षक को भी इस कार्य के लिए नामित किया जा सकता है।
- विवाह स्थल पर विवाह पंजीकरण अधिकारी की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाती है।
- आयोजन करने वाली संस्था यह सुनिश्चित करती है कि राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2009 के अनुसार विवाह पंजीकरण के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज जमा किए जाएं।
- विवाह समारोह के बाद 60 दिनों के भीतर विवाह का पंजीकरण पूरा करना आवश्यक है।
आवेदन की जांच प्रक्रिया
- सामूहिक विवाह समारोह के लिए प्राप्त प्रस्तावों की जांच अधिकृत अधिकारी द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर की जाती है।
- यदि आवेदन या दस्तावेजों में किसी प्रकार की कमी या आपत्ति पाई जाती है, तो आयोजन करने वाली संस्था को उसे दूर करने के लिए कहा जाता है।
- सभी कमियों और आपत्तियों का समाधान सामूहिक विवाह समारोह की निर्धारित तिथि से कम से कम 7 दिन पहले करना अनिवार्य होता है।
- यदि आवेदन सभी निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार सही पाया जाता है, तो अधिकृत अधिकारी अपनी अनुशंसा के साथ उसे आगे भेज देता है।
- इसके बाद पात्र मामलों को अंतिम स्वीकृति और अनुदान मंजूरी के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
महत्वपूर्ण शर्तें
- वित्तीय सहायता केवल उन पात्र जोड़ों को दी जाती है जो सरकार द्वारा स्वीकृत सामूहिक विवाह समारोह में विवाह करते हैं।
- योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विवाह का पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
- सभी आवश्यक दस्तावेज निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा करने होंगे।
- लाभार्थियों की जानकारी अपलोड करने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने की जिम्मेदारी आयोजन करने वाली संस्था की होगी।
- विवाह समारोह के बाद 60 दिनों के भीतर विवाह का पंजीकरण पूरा किया जाना चाहिए।
- आवेदन का लाभ तभी मिलेगा जब सक्षम प्राधिकारी द्वारा सफल सत्यापन के बाद उसे स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
महत्वपूर्ण लिंक
- राजस्थान सिंगल साइन ऑन (SSO) का आधिकारिक पोर्टल
- महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट
- संस्था पंजीकरण (Organisation Registration) पेज
संपर्क विवरण
महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार
- संपर्क नंबर: 01412716452
- ईमेल: [email protected]
- कार्यालय का पता: निदेशालय महिला अधिकारिता, जे-7, झालाना संस्थानिक क्षेत्र, झालाना डूंगरी, जयपुर, राजस्थान – 302004।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह राजस्थान सरकार की एक योजना है, जिसके तहत सरकार द्वारा स्वीकृत सामूहिक विवाह समारोह में भाग लेने वाले पात्र जोड़ों को ₹25,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र जोड़े को कुल ₹25,000 की सहायता दी जाती है। इसमें ₹21,000 दुल्हन को और ₹4,000 आयोजन करने वाली संस्था को IFMS के माध्यम से दिए जाते हैं।
राजस्थान के मूल निवासी पात्र दूल्हा-दुल्हन, जो सरकार द्वारा स्वीकृत सामूहिक विवाह समारोह में विवाह करते हैं और योजना की सभी पात्रता शर्तें पूरी करते हैं, इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
हाँ। इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विवाह का कानूनी रूप से पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
योजना के लिए अलग से व्यक्तिगत आवेदन नहीं करना होता। सामूहिक विवाह आयोजित करने वाली स्वीकृत संस्था लाभार्थियों की जानकारी और आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करती है।
आवेदन के लिए दूल्हा-दुल्हन का फोटो, आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, दुल्हन की बैंक पासबुक और विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।
नहीं। केवल राजस्थान सरकार द्वारा स्वीकृत और पात्र संस्था ही इस योजना के तहत सामूहिक विवाह समारोह आयोजित कर सकती है।
इस योजना का उद्देश्य सामूहिक विवाहों को बढ़ावा देना, विवाह में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करना, दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को हतोत्साहित करना तथा पात्र नवविवाहित जोड़ों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
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| लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | योजना का प्रकार | सरकार |
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