राजस्थान सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना

द्वारा प्रस्तुत shivanibanduni… on Fri, 09/10/2026 - 15:10
राजस्थान CM
Scheme Open
Rajasthan Samajik Suraksha Nivesh Protsahan Yojana Image
हाइलाइट
  • योजना के अंतर्गत राजस्थान में वंचित वर्गों के लिए कार्यरत पात्र गैर-लाभकारी संस्थाओं को सहायता दी  जाती है।
  • भूमि, लीज, नियामक शुल्क, भवन स्वीकृति शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी जाती है।
  • अन्य लाभों में SGST की प्रतिपूर्ति, ब्याज सब्सिडी और मोटर वाहन कर से छूट शामिल हैं।  
ग्राहक देखभाल फ़ोन नंबर
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800 180 6127
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान हेल्पडेस्क ईमेल: [email protected]
योजना का अवलोकन
योजना का नामराजस्थान सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना
लाभकर छूट एवं वित्तीय रियायतें
लाभार्थीपात्र गैर-लाभकारी सामाजिक कल्याण संस्थाएँ
नोडल विभागराजस्थान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
सब्सक्रिप्शनयोजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे।
आवेदन का तरीकाराजस्थान SSO पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन

योजना के बारे में

राजस्थान सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना (Social Security Investment Promotion Scheme -SSIPS) राजस्थान सरकार की एक योजना है, जिसके अंतर्गत समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के लिए कार्य करने वाली पात्र गैर-लाभकारी संस्थाओं को विभिन्न शुल्कों में छूट, कर संबंधी राहत और अन्य रियायतें प्रदान की जाती हैं। इस योजना के तहत सीधे व्यक्तियों को आर्थिक सहायता देने के बजाय उन NGOs, सोसायटियों, ट्रस्टों और गैर-लाभकारी कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाता है, जो राजस्थान में आश्रय गृह, डे-केयर सेंटर, नशामुक्ति केंद्र, विशेष विद्यालय, हेल्पलाइन और अन्य सामाजिक कल्याण सेवाएँ संचालित करती हैं। वित्त (राजस्व) विभाग ने मूल सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना, 2021 (SSIPS-2021) को 22 अप्रैल 2021 को जारी किया था। इस योजना का प्रशासनिक विभाग सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग है।

राज्य सरकार औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए लंबे समय से निवेश प्रोत्साहन योजनाएँ संचालित करती रही है। SSIPS की शुरुआत इस विचार के साथ की गई कि सामाजिक क्षेत्र में निवेश भी औद्योगिक निवेश जितना ही महत्त्वपूर्ण है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों, महिलाओं, दिव्यांगजनों, भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों, निराश्रितों, बेघर व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, नशे की लत से प्रभावित लोगों तथा HIV/AIDS के साथ जीवन जी रहे व्यक्तियों के कल्याण में मान्यता प्राप्त गैर-लाभकारी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना है। इसके अतिरिक्त, संस्थाओं को सुविधाएँ, रियायतें और छूट देकर उनके लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना भी योजना का उद्देश्य है, ताकि वे अपनी सेवाएँ अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकें।

SSIPS के अंतर्गत पात्र संस्थाओं को भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क, आवंटित भूमि के लीज प्रीमियम, नियामक शुल्क, भवन निर्माण योजना की स्वीकृति फीस और स्टाम्प ड्यूटी में 100% छूट मिल सकती है। गैर-लाभकारी संस्था को अचल संपत्ति दान में मिलने पर स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में भी छूट का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, गैर-उपभोज्य वस्तुओं और पूँजीगत मदों की खरीद पर 100% SGST प्रतिपूर्ति, तीन वर्षों तक अधिकतम 6% ब्याज सब्सिडी और मोटर वाहन कर में 100% छूट का प्रावधान बताया गया है। बड़ी संस्थाएँ अतिरिक्त लाभों के लिए कस्टमाइज्ड पैकेज के अंतर्गत भी आवेदन कर सकती हैं।

SSIPS के तहत आवेदन राजस्थान SSO पोर्टल के माध्यम से किए जाते हैं। आवेदनों की जाँच सशक्त समिति द्वारा की जाती है, जिसकी बैठक प्रत्येक तिमाही में होती है। पात्र संस्थाओं को स्वीकृत रियायतों के लिए पात्रता प्रमाणपत्र (Entitlement Certificate-Form-B) जारी किया जाता है। कस्टमाइज्ड पैकेज से संबंधित आवेदन उच्चाधिकार प्राप्त समिति को भेजे जाते हैं। यह योजना संस्थाओं को लाभ प्रदान करती है, न कि सीधे नकद हस्तांतरण के माध्यम से व्यक्तियों को भुगतान करती है।

राजस्थान का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग राजस्थान सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना और वृद्धावस्था पेंशन योजना का भी संचालन करता है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत 91 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रतिमाह अधिकतम ₹1,450 तक पेंशन मिलती है। मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना के तहत 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। वहीं, वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत 55 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं और 58 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुषों को आर्थिक सहायता दी जाती है।

योजना के लाभ

राजस्थान सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत पात्र संस्थाओं को विभिन्न रियायतें प्रदान की जाती हैं। इनका उद्देश्य सामाजिक कल्याण सेवाओं को स्थापित करने और संचालित करने की लागत को कम करना है। संस्था की पात्रता और लागू प्रावधानों के अनुसार निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:

  • भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क: 100% छूट।
  • आवंटित भूमि का लीज प्रीमियम: 100% छूट।
  • नियामक शुल्क: 100% छूट।
  • भवन निर्माण योजना की स्वीकृति फीस: 100% छूट।
  • स्टाम्प ड्यूटी: 100% छूट।
  • दान में प्राप्त संपत्ति: किसी निजी व्यक्ति या संस्था द्वारा गैर-लाभकारी संस्था को अचल संपत्ति दान करने पर स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में छूट।
  • ब्याज सब्सिडी: अधिकतम 8% की दर से 5 वर्षों तक।
  • मोटर वाहन कर: संस्था के नाम पर पंजीकृत वाहनों पर 100% छूट।
  • कस्टमाइज्ड पैकेज: ₹3 करोड़ का पूँजी निवेश करने वाली या कम-से-कम 50 लाभार्थियों के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं को अतिरिक्त लाभ।
  • पूँजीगत एवं राजस्व अनुदान: कस्टमाइज्ड पैकेज के अंतर्गत प्रस्तावित।
  • लीज का निःशुल्क नवीनीकरण: SSIPS-2021 से पहले सामाजिक कार्यों के लिए निःशुल्क लीज पर भूमि प्राप्त करने वाली और पहले से कार्यरत संस्थाओं के लिए इसका प्रस्ताव है।
  • SSIPS फंड: राज्य सरकार ने योजना के लिए ₹100 करोड़ का फंड घोषित किया है।
  • एक से अधिक सामाजिक क्षेत्र: एक से अधिक कल्याणकारी क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाएँ प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग लाभ प्राप्त कर सकती हैं।
  • अन्य अनुदान प्राप्त करने की अनुमति: संस्थाएँ केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य स्रोतों से अनुदान तथा वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
  • शिकायत निवारण: संस्थाओं की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभाग शिकायत निवारण अधिकारियों की नियुक्ति करेंगे।

पात्रताएं

राजस्थान सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना का लाभ केवल उन्हीं गैर-लाभकारी संस्थाओं को मिल सकता है, जो योजना की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं।

  • संस्था का प्रकार: राजस्थान में वंचित वर्गों या अन्य सामाजिक उद्देश्यों के लिए कार्य करने वाली गैर-लाभकारी स्वैच्छिक संस्था।
  • पंजीकरण: सोसायटी, ट्रस्ट या कंपनी (सामाजिक क्षेत्र) के रूप में कम-से-कम 3 वर्षों से पंजीकृत होना आवश्यक है।
  • आकार एवं कार्यक्षेत्र: न्यूनतम ₹50 लाख का पूँजी निवेश या कम-से-कम 25 लाभार्थियों के लिए सेवाएँ संचालित करना आवश्यक है।
  • गतिविधि: नीचे उल्लिखित अनुमत गतिविधियों में से कम-से-कम एक क्षेत्र में कार्यरत होना चाहिए।

अनिवार्य शर्तें

उपरोक्त शर्तों के अतिरिक्त संस्था को निम्नलिखित आवश्यकताएँ भी पूरी करनी होगी:

  • आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12A के अंतर्गत पंजीकरण।
  • नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण।
  • विदेशी अंशदान प्राप्त करने की स्थिति में FCRA पंजीकरण।
  • पिछले तीन वित्तीय वर्षों के खातों का चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से ऑडिट।
  • पिछले तीन वित्तीय वर्षों की बैलेंस शीट।
  • पिछले तीन वर्षों की वार्षिक रिपोर्ट।
  • यह घोषणा कि संस्था को केंद्र या राज्य सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया है और न ही डिफॉल्टर घोषित किया गया है।

छूट: सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने के लिए संबंधित अधिनियमों या नियमों के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा पहले से पंजीकृत या अधिकृत संस्थाओं को आवेदन के साथ उपर्युक्त दस्तावेज जमा करने से छूट दी गई है।

किन संस्थाओं को लाभ नहीं मिलेगा?

योजना के आदेश के अनुसार, निम्नलिखित परिस्थितियों में संस्थाओं को लाभ से वंचित किया जा सकता है या उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है:

  • ऐसी संस्थाएँ जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट किया गया हो या डिफॉल्टर घोषित किया गया हो।
  • ऐसी संस्थाएँ जो लागू कानूनों, नियमों या राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करती हैं।
  • गलत जानकारी देने या गंभीर अनियमितताओं में लिप्त पाई जाने वाली संस्थाएँ। ऐसी संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और भविष्य में मिलने वाले लाभों से वंचित किया जा सकता है।

आवश्यक दस्तावेज

राजस्थान सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना (SSIPS) के लिए आवेदन करते समय आवेदक संस्थाओं को आवश्यक दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इनमें निम्नलिखित दस्तावेज शामिल हैं:

  • संस्था का पंजीकरण प्रमाणपत्र और नवीनतम नवीनीकरण प्रमाणपत्र
  • पिछले तीन वित्तीय वर्षों के CA द्वारा ऑडिट किए गए खाते
  • आयकर अधिनियम की धारा 12A के अंतर्गत पंजीकरण प्रमाणपत्र
  • नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण का प्रमाण
  • पिछले तीन वित्तीय वर्षों की वार्षिक रिपोर्ट
  • संस्था का PAN कार्ड
  • संस्था के शासी निकाय का विवरण और उपनियम
  • FCRA पंजीकरण प्रमाणपत्र, यदि लागू हो
  • यह घोषणा कि संस्था को भारत सरकार या राजस्थान सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट, प्रतिबंधित या डिफॉल्टर घोषित नहीं किया गया है
  • क्रेता-विक्रेता समझौता (Buyer-Seller Agreement)
  • संस्था के नाम पर अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज
  • उपकरणों की खरीद के बिल
  • ऋण स्वीकृति पत्र
  • यह घोषणा कि स्वीकृत ऋण के उद्देश्य पूरे किए गए हैं
  • वाहन बुकिंग से संबंधित दस्तावेज
  • वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC), यदि वाहन पहले से पंजीकृत है
  • भूमि से संबंधित दस्तावेज
  • वंचित वर्गों के लिए प्रस्तावित परियोजना से संबंधित दस्तावेज
  • लीज नवीनीकरण से संबंधित दस्तावेज
  • ₹50 लाख से ₹1 करोड़ से कम की पात्रता सीमा से संबंधित दस्तावेज
  • ₹1 करोड़ से ₹3 करोड़ से कम की पात्रता सीमा से संबंधित दस्तावेज
  • न्यूनतम ₹3 करोड़ का पूँजी निवेश करने वाली या 50 लाभार्थियों के लिए कार्य करने वाली पात्र गैर-लाभकारी संस्थाओं के कस्टमाइज्ड पैकेज से संबंधित दस्तावेज

नोट: आवेदन करने से पहले संस्था को उन विशिष्ट छूटों या रियायतों से संबंधित दस्तावेज तैयार रखने चाहिए, जिनका वह लाभ लेना चाहती है। आवश्यक दस्तावेज संस्था की पात्रता और संबंधित छूट की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

आवेदन प्रक्रिया

पात्र गैर-लाभकारी संस्थाएँ राजस्थान SSO पोर्टल के माध्यम से राजस्थान सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना (SSIPS) के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। आवेदन करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाएँ:

  • सबसे पहले राजस्थान SSO पोर्टल पर जाएँ।
  • अपनी राजस्थान SSO ID का उपयोग करके लॉगिन करें। यदि आपने अभी तक पंजीकरण नहीं किया है, तो पहले रजिस्ट्रेशन करें।
  • योजना की सूची में राजस्थान सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना (SSIPS) खोजें।
  • योजना का आवेदन फॉर्म आपकी स्क्रीन पर खुल जाएगा।
  • आवश्यक व्यक्तिगत विवरण, संपर्क जानकारी, सामाजिक एवं आर्थिक श्रेणी, जिला और पदनाम दर्ज करें।
  • संस्था का नाम, संस्था का प्रकार (कंपनी, सोसायटी या ट्रस्ट) और पंजीकरण से संबंधित विवरण भरें।
  • पोर्टल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार आवश्यक पंजीकरण प्रमाणपत्र और अन्य सहायक दस्तावेज अपलोड करें।
  • भरे गए विवरणों की जाँच करें और उपलब्ध सबमिट विकल्प के माध्यम से आवेदन जमा करें। यदि पावती जारी होती है, तो उसे सुरक्षित रखें।
  • सशक्त समिति योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन की जाँच करती है। इसकी बैठक प्रत्येक तिमाही में होती है।
  • पात्र संस्थाओं को स्वीकृत रियायतों के लिए पात्रता प्रमाणपत्र (Entitlement Certificate-Form-B) जारी किया जाता है।
  • कस्टमाइज्ड पैकेज के लिए किए गए आवेदनों को विचारार्थ उच्चाधिकार प्राप्त समिति के पास भेजा जाता है।

आवेदन के बाद क्या होता है?

आवेदन जमा करने के बाद संबंधित विभाग निम्नलिखित चरणों में उसकी प्रक्रिया पूरी करता है:

  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रमुख सचिव/सचिव की अध्यक्षता वाली सशक्त समिति आवेदन की जाँच करती है। इसकी बैठक हर तिमाही में होती है।
  • यदि संस्था पात्र पाई जाती है, तो समिति फॉर्म-B में पात्रता प्रमाणपत्र जारी करती है और पोर्टल के माध्यम से संस्था तथा सक्षम प्राधिकारी को इसकी सूचना देती है।
  • यदि संस्था पात्र नहीं पाई जाती है, तो पोर्टल के माध्यम से इसकी सूचना और अपात्रता के कारण बताए जाते हैं।
  • संबंधित विभाग का सक्षम प्राधिकारी पात्रता प्रमाणपत्र के आधार पर संस्था को स्वीकृत रियायत प्रदान करता है।
  • कस्टमाइज्ड पैकेज के आवेदनों की जाँच के बाद सशक्त समिति उन्हें अंतिम निर्णय के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति के पास भेजती है।
  • यदि संस्था सशक्त समिति के निर्णय से सहमत नहीं है, तो वह उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष अपील कर सकती है।

महत्त्वपूर्ण नियम एवं शर्तें

योजना के लाभ जारी रखने के लिए संस्थाओं को निम्नलिखित नियमों का पालन करना होगा:

  • सभी लागू कानूनों, नियमों और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर सरकार लाभ वापस ले सकती है।
  • आवेदन में सही और पूर्ण जानकारी देना आवश्यक है।
  • यदि कोई संस्था गलत जानकारी देती है या गंभीर अनियमितताओं में लिप्त पाई जाती है, तो सशक्त समिति उसके लाभ रद्द कर सकती है।
  • पहले दिए गए लाभों की राशि 12% वार्षिक ब्याज सहित वसूल की जा सकती है।
  • अनियमितताओं के मामले में सरकार संस्था को ब्लैकलिस्ट कर सकती है और भविष्य में योजना के लाभ प्राप्त करने से रोक सकती है।
  • योजना की व्याख्या से संबंधित किसी भी विवाद या प्रश्न पर वित्त विभाग का निर्णय अंतिम होगा।

महत्त्वपूर्ण लिंक

संपर्क जानकारी

  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800 180 6127
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान हेल्पडेस्क ईमेल: [email protected]

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह राजस्थान सरकार की एक योजना है, जिसके तहत वंचित वर्गों के लिए कार्यरत गैर-लाभकारी संस्थाओं को शुल्क में छूट, कर राहत, SGST प्रतिपूर्ति और ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है।

राजस्थान में वंचित वर्गों के लिए कार्यरत और कम-से-कम 3 वर्षों से पंजीकृत गैर-लाभकारी सोसायटी, ट्रस्ट और कंपनियाँ आवेदन कर सकती हैं।

नहीं। यह योजना केवल गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए है, व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए नहीं।

संस्था का न्यूनतम पूँजी निवेश ₹50 लाख होना चाहिए या उसे कम-से-कम 25 लाभार्थियों को सेवाएँ प्रदान करनी चाहिए।

SSIPS के तहत 3 वर्षों तक अधिकतम 6% ब्याज सब्सिडी मिलती है।

यह बड़ी संस्थाओं को अतिरिक्त लाभ प्रदान करने की व्यवस्था है। SSIPS के तहत ₹3 करोड़ का निवेश करने वाली या 50 लाभार्थियों के लिए कार्य करने वाली संस्थाएँ इसके लिए आवेदन कर सकती हैं।

राजस्थान SSO पोर्टल पर फॉर्म भरकर और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करके ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। 

हाँ। सशक्त समिति के निर्णय के विरुद्ध उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष अपील की जा सकती है।

नहीं। इस योजना के तहत संस्थाओं को शुल्क में छूट और अन्य रियायतें दी जाती हैं। व्यक्तियों के खातों में सीधे नकद राशि हस्तांतरित नहीं की जाती।

सरकार योजना के लाभ रद्द कर सकती है, पहले दिए गए लाभों की राशि 12% वार्षिक ब्याज सहित वसूल सकती है और संस्था को ब्लैकलिस्ट कर सकती है।

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