- 25 दुधारू पशुओं की डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए ₹36 लाख से ₹42 लाख तक की वित्तीय सहायता।
- डेयरी व्यवसाय को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने के लिए 18 महीनों में 4 किस्तों में ऋण राशि जारी की जाती है।
- योजना के तहत पशु शेड निर्माण, पशुओं की खरीद, बीमा और परिवहन व्यय के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
- मध्य प्रदेश शासन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग फोन: 0755-2772262
- मध्य प्रदेश शासन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग ईमेल: [email protected]
योजना का संक्षिप्त विवरण | |
|---|---|
योजना का नाम | मध्य प्रदेश डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना |
लाभ | प्रत्येक यूनिट के लिए ₹36 लाख से ₹42 लाख तक की आर्थिक सहायता |
लाभार्थी | मध्य प्रदेश के पशुपालक किसान और बेरोजगार युवा। |
सदस्यता | |
आवेदन का माध्यम | ऑनलाइन |
योजना का परिचय: एक संक्षिप्त जानकारी
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और डेयरी व्यवसाय आय के प्रमुख स्रोत हैं, लेकिन बड़े स्तर पर डेयरी यूनिट शुरू करने के लिए भारी निवेश और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की जरूरत होती है। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के कारण कई किसान और बेरोजगार युवा इस क्षेत्र में कदम नहीं रख पाते हैं।
इसी समस्या को दूर करने और ग्रामीण लोगों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शुरू की है।
इस योजना के तहत लाभार्थियों को प्रत्येक यूनिट के लिए ₹36 लाख से ₹42 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे 25 उच्च उत्पादकता वाले दुधारू पशुओं के साथ डेयरी यूनिट स्थापित कर सकें। यह सहायता 18 महीनों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से जारी की जाती है, ताकि धनराशि का सही इस्तेमाल हो और व्यवसाय धीरे-धीरे मजबूत आधार पर विकसित हो सके।
आर्थिक सहायता के साथ-साथ बुनियादी ढांचा, बीमा और पशु प्रबंधन जैसी सुविधाओं को जोड़कर यह योजना किसानों को स्थायी और भरोसेमंद आय का स्रोत बनाने में मदद करती है, जिससे वे कठिन परिस्थितियों में भी अपनी आजीविका सुरक्षित रख सकें।
इस पहल के अलावा, मध्य प्रदेश सरकार ने डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई दूसरी योजनाएं भी शुरू की हैं। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना डेयरी उत्पादों की पूरी श्रृंखला और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने पर काम करती है, जबकि मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना किसानों को अच्छी नस्ल के दुधारू पशु उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। वहीं, गौसेवक प्रशिक्षण योजना वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन का प्रशिक्षण देकर कुशल मानव संसाधन तैयार करने का काम करती है। ये सभी योजनाएं मिलकर किसानों और उद्यमियों के लिए ऐसा सहयोगी माहौल तैयार करती हैं, जहां उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि जरूरी संसाधन, प्रशिक्षण और डेयरी क्षेत्र में लंबे समय तक आगे बढ़ने के अवसर भी मिल सकें।
योजना के लाभ
इस योजना के तहत चरणबद्ध ऋण व्यवस्था के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जाती है:
- प्रत्येक यूनिट के लिए ₹36,00,000 से ₹42,00,000 तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
ऋण राशि 18 महीनों में चार चरणों में जारी की जाती है।
भुगतान का चरणराशि जारी होने का समयकिस्त का उद्देश्यदेशी नस्लक्रॉसब्रीड / हाइब्रिड / भैंसपहली किस्तपहला महीनापशु शेड के निर्माण के लिए11,00,00011,40,000दूसरी किस्तचौथा महीनापशुओं की खरीद, बीमा और परिवहन के लिए9,00,00011,00,000तीसरी किस्तदसवां महीनाअतिरिक्त पशुओं की खरीद, बीमा और परिवहन के लिए8,00,0009,80,000अंतिम किस्तअठारहवां महीनाशेष पशुओं की खरीद, बीमा और परिवहन के लिए8,00,0009,80,000कुल राशि36,00,00042,00,000- अन्य लाभ:
- योजना के तहत पशु शेड निर्माण, उच्च उत्पादकता वाले दुधारू पशुओं की खरीद, पशुओं का बीमा और परिवहन खर्च के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।
- प्रत्येक यूनिट में 25 पशु शामिल होंगे, जिनमें एक ही प्रकार की नस्ल की क्रॉसब्रीड गायें, देशी गायें या भैंसें रखी जा सकती हैं।
- लाभार्थी अपनी भूमि क्षमता और ऋण चुकाने के रिकॉर्ड के आधार पर अधिकतम 8 यूनिट यानी 200 पशुओं तक का लाभ ले सकता है।
- देशी नस्ल की यूनिट के लिए ऋण राशि ₹36,00,000 और क्रॉसब्रीड गाय या भैंस वाली यूनिट के लिए ₹42,00,000 तक उपलब्ध कराई जाती है।
- प्रति पशु यूनिट लागत का विवरण योजना के तहत ऋण राशि किस आधार पर तय की गई है, इसे समझने के लिए प्रति पशु लागत इस प्रकार है:
- देशी नस्ल की गायों (साहीवाल, गिर आदि) की कीमत ₹80,000 प्रति पशु मानी गई है।
- क्रॉसब्रीड गायों (HF, जर्सी) और भैंसों की कीमत ₹1,00,000 प्रति पशु निर्धारित की गई है।
- ऋण में परिवहन खर्च भी शामिल किया गया है:
- देशी नस्ल के पशुओं के लिए ₹6,600 प्रति पशु परिवहन सहायता दी जाती है।
- क्रॉसब्रीड गायों और भैंसों के लिए ₹5,680 प्रति पशु परिवहन खर्च शामिल किया गया है।
- योजना के तहत पशुओं, पशु शेड और परिवहन से जुड़े जोखिमों के लिए बीमा सुरक्षा भी दी जाती है।
- खरीदें गए सभी पशुओं की टैगिंग करवाना अनिवार्य है और उनका पंजीकरण Bharat Pashudhan App पर करना होगा।
- उन किसानों को प्राथमिकता दी जाती है जो पहले से दुग्ध संघों को दूध बेच रहे हैं या दूध संग्रहण मार्गों के आसपास स्थित हैं।
- ऋण राशि 18 महीनों की अवधि में चरणबद्ध किस्तों के रूप में जारी की जाती है।
- यदि लाभार्थी पहले लिए गए ऋण का नियमित भुगतान करता है, तो दो वर्ष बाद वह अतिरिक्त यूनिट के लिए पात्र हो जाता है।
यह योजना किन लोगों के लिए है?
यह योजना मध्य प्रदेश के उन पशुपालक किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए शुरू की गई है जो डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं या अपने मौजूदा डेयरी कारोबार को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो:
- कृषि भूमि रखते हैं।
- व्यवस्थित और आधुनिक डेयरी यूनिट स्थापित करना चाहते हैं।
- वैज्ञानिक पशुपालन और डेयरी प्रबंधन की तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार हैं।
- SC, ST और अन्य सभी वर्गों से आते हैं, क्योंकि इस योजना में सभी श्रेणियों के लोगों को समान अवसर दिया गया है।

पात्रता मानदंड
- आवेदक मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- आवेदक की न्यूनतम आयु 21 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
- आवेदक पशुपालन कार्य से जुड़ा होना चाहिए या पशुपालन व्यवसाय शुरू करने की इच्छा रखता हो।
- SC, ST और अन्य सभी वर्गों के व्यक्ति इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- प्रत्येक यूनिट (25 पशु) के लिए आवेदक के पास कम से कम 3.5 एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी है।
- अधिकतम 8 यूनिट के लिए आवेदन किया जा सकता है, जिसके अनुसार भूमि की आवश्यकता भी बढ़ेगी।
- परिवार की संयुक्त स्वामित्व वाली भूमि को भी मान्य माना जाएगा, लेकिन ऐसी स्थिति में सह-उधारकर्ताओं को शामिल किया जाएगा।
- यदि भूमि अलग-अलग स्थानों पर है, तो कम से कम 0.5 एकड़ भूमि एक ही स्थान पर उपलब्ध होना जरूरी है।
- आवेदक के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या संगठन से डेयरी या पशुपालन प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र होना चाहिए।
अनुमति प्राप्त पशुओं की नस्लें
- देशी नस्लें: साहीवाल, गिर, थारपारकर, रेड सिंधी और कांकरेज।
- क्रॉसब्रीड गायें: HF और Jersey।
- भैंस की नस्लें: मुर्रा, भदावरी, नीली-रावी, जाफराबादी, सूरती और मेहसाना।
नोट: पशु खरीदते समय उसके बछड़े की उम्र 1 महीने से अधिक नहीं होनी चाहिए।
न्यूनतम दूध उत्पादन मानक
गुणवत्ता और बेहतर उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए योजना के तहत खरीदे जाने वाले पशुओं को प्रतिदिन निम्नलिखित न्यूनतम दूध उत्पादन मानकों को पूरा करना होगा:
- भैंस: प्रतिदिन कम से कम 8 लीटर दूध।
- क्रॉसब्रीड गायें (HF/जर्सी): प्रतिदिन कम से कम 10 लीटर दूध।
- देशी नस्ल की गायें: प्रतिदिन कम से कम 7 लीटर दूध।
नोट: जो पशु इन दूध उत्पादन मानकों को पूरा नहीं करते हैं, उन्हें योजना के तहत खरीदने की अनुमति नहीं होगी।
जरूरी दस्तावेज
योजना के लिए आवेदन करते समय आपको निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:
- पहचान पत्र
- निवास प्रमाण पत्र
- भूमि संबंधी दस्तावेज
- प्रशिक्षण प्रमाण पत्र
- बैंक खाते का विवरण
- पासपोर्ट साइज फोटो
- सक्रिय मोबाइल नंबर
- अन्य आवश्यक दस्तावेज (यदि मांगे जाएं)
आवेदन करने की प्रक्रिया
चरण 1 - पंजीकरण
- आवेदन शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा।
- यहां योजना के नीचे आपको "योजना के बारे में जानें" और "पात्रता जांचें" के दो विकल्प दिखाई देंगे। योजना को अच्छी तरह समझने और अपनी पात्रता की पुष्टि करने के लिए आप इनमें से किसी भी विकल्प का चयन कर सकते हैं।
- यदि आप पहले से योजना की पूरी जानकारी रखते हैं, तो पेज के ऊपर दाईं ओर मौजूद "पंजीकरण करें" विकल्प पर क्लिक करके सीधे पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
- इसके बाद पंजीकरण पृष्ठ खुल जाएगा। आगे बढ़ने के लिए आपको अपना आधार नंबर दर्ज करना होगा।
- इसके बाद आपसे मोबाइल नंबर और ईमेल पता जैसी सामान्य जानकारी मांगी जाएगी।
- अब अपनी पसंद का पासवर्ड बनाएं और उसे दोबारा दर्ज करके पुष्टि करें।
- सभी जानकारी जमा करने के बाद आपकी यूज़र आईडी और पासवर्ड तैयार हो जाएंगे, जिनकी मदद से आप आगे प्रवेश कर सकेंगे।
चरण 2 - आवेदन फॉर्म भरना
- पंजीकरण पूरा होने के बाद पोर्टल पर प्रवेश करें और अपनी यूज़र आईडी, पासवर्ड तथा सुरक्षा कोड दर्ज करें।
- अब आवेदन फॉर्म खोलें और मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरें।
- जानकारी दर्ज करते समय जल्दबाजी न करें, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके।
- आपको आवश्यक दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे, इसलिए पहले से सुनिश्चित कर लें कि वे स्पष्ट और सही प्रारूप में हैं।
- आवेदन जमा करने से पहले पूरे फॉर्म की एक बार फिर जांच कर लें, ताकि सभी विवरण सही हों।
- संतुष्ट होने के बाद आवेदन फॉर्म जमा कर दें।
- आवेदन जमा होने के बाद एक आवेदन संख्या जारी की जाएगी। इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।
- बेहतर होगा कि आप अपने आवेदन पत्र की एक मुद्रित प्रति भी अपने पास सुरक्षित रखें।
आवेदन के बाद की प्रक्रिया
- आवेदन जमा करने के बाद संबंधित विभाग आपके फॉर्म और दस्तावेजों की जांच करेगा।
- कई मामलों में ऋण मंजूर करने से पहले अधिकारी आपकी प्रस्तावित डेयरी यूनिट का निरीक्षण भी कर सकते हैं, ताकि यह देखा जा सके कि परियोजना व्यवहारिक है या नहीं।
- अगर सभी जानकारी और दस्तावेज सही मिलते हैं, तो आपका ऋण स्वीकृत हो जाएगा।
- इसके बाद परियोजना की प्रगति के अनुसार किस्तों में राशि मिलेगी। उदाहरण के लिए, पशु शेड बनने और पशुओं की खरीद पूरी होने पर अगली किस्त जारी होगी।
- ऋण स्वीकृति से पहले होने वाला निरीक्षण अनिवार्य रहेगा।
- आपकी जमीन के स्वामित्व और उससे जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन होना जरूरी है।
- जिन पशुओं की खरीद करेंगे, उन्हें योजना में तय किए गए दूध उत्पादन मानकों को पूरा करना होगा।
- पशुओं के परिवहन से जुड़े बिल और अन्य जरूरी प्रमाण अपने पास सुरक्षित रखें, क्योंकि जरूरत पड़ने पर इन्हें जमा करना होगा।
महत्वपूर्ण लिंक
- डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की आधिकारिक वेबसाइट
- आधिकारिक पोर्टल पर योजना की जानकारी
- आधिकारिक पोर्टल पर पात्रता मानदंड
संपर्क विवरण
- मध्य प्रदेश शासन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग फोन: 0755-2772262
- मध्य प्रदेश शासन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग ईमेल: [email protected]
- पता: पशुपालन एवं डेयरी संचालनालय,
कामधेनु भवन, वैशाली नगर, कोटरा सुल्तानाबाद,
भोपाल – 462003, मध्य प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हां, अगर परिवार के अन्य सदस्यों की जमीन को जोड़कर तय मानक पूरा हो जाता है, तो आप आवेदन कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में परिवार के संबंधित सदस्यों को ऋण में सह-उधारकर्ता के रूप में शामिल किया जाएगा।
हां, आप केवल 1 यूनिट (25 पशुओं) के साथ शुरुआत कर सकते हैं और बाद में जरूरत और क्षमता के अनुसार इसका विस्तार कर सकते हैं। एक साथ कई यूनिट के लिए आवेदन करना जरूरी नहीं है।
हां, लेकिन आवेदन करने से पहले आपको डेयरी या पशुपालन प्रबंधन से जुड़ा प्रशिक्षण पूरा करना होगा। इस योजना में प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है, इसलिए बिना प्रशिक्षण के आवेदन नहीं कर सकेंगे।
यह योजना पूरी तरह अनुदान आधारित नहीं है, बल्कि इसके तहत बैंक ऋण मिलता है। इसलिए कुछ मामलों में आपको अपनी तरफ से भी तैयारी रखनी पड़ सकती है।
- बैंक की शर्तों के अनुसार मार्जिन मनी की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
- ऋण मिलने के बाद उसकी किस्तों का नियमित भुगतान करने के लिए भी तैयार रहना होगा।
ऋण की पूरी राशि एक साथ नहीं मिलेगी। पशु शेड के निर्माण और पशुओं की खरीद जैसे कार्यों में हुई प्रगति के आधार पर 18 महीनों के दौरान 4 चरणों में राशि मिलेगी।
हां, लेकिन केवल तभी जब वह योजना की शर्तों को पूरा करता हो। आमतौर पर पशुओं की खरीद स्वीकृत बाजारों, प्रजनन क्षेत्रों या भरोसेमंद किसानों से करनी होगी, जो कई बार राज्य के बाहर भी हो सकते हैं।
इस योजना में पशुओं का बीमा करवाना अनिवार्य है, इसलिए बीमा की शर्तों के अनुसार आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सकेगी।
नहीं। एक यूनिट में केवल एक ही प्रकार के पशु रखने की अनुमति है। यानी सभी पशु एक जैसी नस्ल की गायें होंगी या फिर सभी भैंसें होंगी।
अगर योजनाओं के बारे में आपका कोई सवाल है, तो उसे योजना के फोरम में सबमिट करें और जवाब पाएँ:
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हम आपको इस फ़ोरम में सक्रिय रूप से भाग लेने और इस बेहतरीन रिसोर्स का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते है।
| लाभार्थी व्यक्ति का प्रकार | योजना का प्रकार | सरकार |
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डेरी फार्म
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