- कृषि कार्य या कृषि उपज के विपणन से जुड़े काम के दौरान दुर्घटना होने पर ₹5,000 से ₹2,00,000 तक की एक बार आर्थिक सहायता।
- जमीन के मालिक, किसान, भूमिहीन कृषि मजदूर और लाइसेंस प्राप्त मंडी श्रमिक भी शामिल हैं।
- खेत के साथ घर, खेत और मंडी के बीच आने-जाने के दौरान हुई दुर्घटनाएं भी कवर होती हैं।
- लाभ लेने के लिए किसी भी तरह का प्रीमियम या योगदान नहीं देना होता है।
- राज किसान पोर्टल के संपर्क नंबर
- 0141-2927047
- 0141-2922613
- राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सहायता नंबर
- 0141-2227914
- 0141-2227336
- राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड का ईमेल: [email protected]
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | राजस्थान मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना |
| शुरू होने का वर्ष | 1994 |
| लाभ | दुर्घटना होने पर ₹2,00,000 तक की आर्थिक सहायता |
| लाभार्थी | राजस्थान के पात्र किसान, कृषि मजदूर और कृषि मंडी में काम करने वाले श्रमिक |
| नोडल विभाग | राजस्थान कृषि विपणन निदेशालय |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करें। |
| आवेदन का तरीका | राज किसान पोर्टल या ई-मित्र सेवा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन |
योजना के बारे में
राजस्थान मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना किसानों, खेतों में काम करने वाले मजदूरों और कृषि मंडियों में काम करने वाले पात्र श्रमिकों को एक बार आर्थिक सहायता देती है। यह योजना कृषि या कृषि उपज के विपणन से जुड़े काम के दौरान दुर्घटना में घायल होने या मृत्यु होने पर आर्थिक मदद देती है। दुर्घटना की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर ₹5,000 से ₹2,00,000 तक की सहायता दी जाती है। दुर्घटना में मृत्यु होने पर यह राशि मृतक के पात्र आश्रित को दी जाती है, जबकि चोट लगने पर सहायता प्रभावित व्यक्ति को मिलती है।
मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के तहत खेतों में काम करने, कृषि उपज मंडी परिसर, उपमंडी और अधिसूचित खरीद केंद्रों में होने वाली पात्र दुर्घटनाओं को शामिल किया गया है। कृषि कार्य के लिए घर से खेत आने-जाने और कृषि उपज लेकर मंडी जाते या लौटते समय होने वाली कुछ निर्धारित दुर्घटनाओं पर भी सहायता मिल सकती है। इस योजना का लाभ केवल पात्र लोगों को मिलता है। इनमें जमीन के मालिक किसान, कृषि मजदूर और लाइसेंस प्राप्त हमाल, पल्लेदार तथा मंडी में काम करने वाले अन्य पात्र श्रमिक शामिल हैं। इसी विभाग द्वारा चलाई जा रही राजस्थान महात्मा ज्योतिबा फुले मंडी श्रमिक कल्याण योजना भी मंडी श्रमिकों के लिए है।
इस योजना के तहत आर्थिक सहायता पाने के लिए लाभार्थियों को कोई प्रीमियम या योगदान नहीं देना होता है। यदि एक ही दुर्घटना में कई तरह की पात्र चोटें आती हैं, तो योजना के लागू नियमों के अनुसार लाभार्थी उन चोटों के लिए एक साथ दावा कर सकता है। सहायता संबंधित मंडी समिति के कोष से खाता-धारक के नाम के चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से दी जाती है।
यह योजना नई नहीं है, बल्कि इसका नाम बदला गया है। इसकी शुरुआत 1994 में कृषक साथी योजना के रूप में हुई थी। 2004 में इसका नाम बदलकर किसान जीवन कल्याण योजना किया गया और 2009 में इसे राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना नाम दिया गया। वर्तमान राज्य सरकार ने इसका नाम बदलकर मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना कर दिया है। सहायता राशि और नियम पहले की योजना से काफी हद तक समान हैं। इसलिए पुराने नाम से योजना को जानने वाले किसानों को नए नाम के तहत भी पहले जैसी सुरक्षा मिलती है।
पात्र आवेदक राज किसान पोर्टल या ई-मित्र सेवा केंद्र के माध्यम से मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन में दुर्घटना का विवरण, प्रभावित व्यक्ति की जानकारी, बैंक खाते का विवरण, गवाहों की जानकारी और दावे से जुड़े जरूरी दस्तावेज देने होंगे। आवेदन संबंधी निर्देशों के अनुसार, जरूरी दस्तावेज दुर्घटना के प्रकार और प्रभावित व्यक्ति की श्रेणी पर निर्भर करते हैं। आवेदन और सभी जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया के लिए 15 दिन की समय-सीमा निर्धारित है।
योजना के लाभ
- कृषि या कृषि उपज के विपणन से जुड़े काम के दौरान दुर्घटना होने पर एक बार आर्थिक सहायता का लाभ।
- योजना के तहत ₹5,000 से ₹2,00,000 तक की आर्थिक सहायता मिलती है।
- दुर्घटना में मृत्यु और शरीर का कोई अंग कटने या अलग होने की स्थिति में भी सहायता दी जाती है।
- मृत्यु होने पर सहायता मृतक के पात्र आश्रित को और चोट लगने पर प्रभावित व्यक्ति को दी जाती है।
- आर्थिक सहायता पाने के लिए लाभार्थियों को कोई प्रीमियम या योगदान नहीं देना होता है।
- भूमिहीन खेतिहर मजदूर, कृषि मजदूर और जमीन के मालिक किसान इस योजना के पात्र हैं।
- लाइसेंस प्राप्त हमाल, पल्लेदार और मंडी में काम करने वाले अन्य पात्र श्रमिक भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
- खेतों, मंडी परिसर, उपमंडी और अधिसूचित खरीद केंद्रों में होने वाली पात्र दुर्घटनाओं को योजना में शामिल किया गया है।
- कृषि कार्य के लिए घर से खेत आने-जाने और कृषि उपज लेकर मंडी जाते या लौटते समय होने वाली पात्र दुर्घटनाओं पर भी सहायता मिलती है।
- एक ही दुर्घटना में कई चोटें लगने पर लाभार्थी उन सभी पात्र चोटों के लिए एक साथ सहायता का दावा कर सकता है।
- सहायता मंडी समिति के कोष से खाता-धारक के नाम के चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से दी जाती है।
- आवेदन और सभी जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बाद 15 दिनों के भीतर भुगतान किया जाना आवश्यक है।
- दावे की प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक की जिम्मेदारी मंडी सचिव की होती है।
दुर्घटनाओं के लिए आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के तहत हर प्रकार की दुर्घटना और चोट के लिए सहायता राशि तय की गई है। नीचे दी गई तालिका में कृषक साथी सहायता योजना के तहत मिलने वाली सभी सहायता राशियों की जानकारी दी गई है।
| दुर्घटना या चोट का प्रकार | सहायता राशि |
|---|---|
| दुर्घटना में मृत्यु होने पर मृतक के आश्रित को सहायता | ₹2,00,000 |
| दोनों हाथ, दोनों पैर, दोनों आंखें या कोई एक अंग अलग-अलग कटने पर | ₹50,000 |
| रीढ़ की हड्डी टूटने पर, जिसे दो अंगों के नुकसान के बराबर माना जाता है | ₹50,000 |
| सिर में चोट लगने से कोमा में जाने पर, जिसे दो अंगों के नुकसान के बराबर माना जाता है | ₹50,000 |
| पुरुष या महिला के सिर की त्वचा सहित बाल पूरी तरह उखड़ जाने पर | ₹40,000 |
| सिर के छोटे हिस्से की त्वचा सहित बाल आंशिक रूप से उखड़ जाने पर | ₹25,000 |
| एक हाथ, पैर, आंख, हथेली या बांह का अंग कटने या अलग होने पर | ₹25,000 |
| चार उंगलियां पूरी तरह या आंशिक रूप से कटने पर | ₹20,000 |
| तीन उंगलियां कटने पर | ₹15,000 |
| दो उंगलियां कटने पर | ₹10,000 |
| एक उंगली कटने पर | ₹5,000 |
| मंडी परिसर में काम करते समय हमाल, पल्लेदार या मजदूर की हड्डी टूटने पर | ₹10,000 |
| एक अंडकोष नष्ट होने पर | ₹25,000 |
| दोनों अंडकोष नष्ट होने पर | ₹40,000 |
ध्यान दें: ऊपर दी गई सहायता राशियां साझा की गई योजना की जानकारी के आधार पर लिखी गई हैं। कृषि विभाग की एक पोस्ट में स्थायी दिव्यांगता और कुछ निर्धारित चोटों के लिए ₹5,000 से ₹50,000 तक की सहायता राशि भी बताई गई है। इसलिए प्रत्येक राशि और चोट की श्रेणी को अंतिम मानने से पहले सरकार के नवीनतम लागू दिशा-निर्देशों की जांच करें।
पात्रताएं
राजस्थान मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के लिए केवल राज्य के पात्र किसान और कृषि मजदूर आवेदन कर सकते हैं। नीचे बताया गया है कि कौन इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है और इसके लिए कौन-सी शर्तें पूरी करनी होंगी।
- आवेदक राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए।
- राज्य के किसान इस योजना के पात्र हैं।
- राज्य के कृषि मजदूर इस योजना के पात्र हैं।
- कृषि उपज मंडी समिति द्वारा जारी लाइसेंस रखने वाले मंडी श्रमिक इस योजना के पात्र हैं।
- व्यक्ति की आयु 14 से 75 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- मृत्यु या शरीर का कोई अंग कटने की घटना कृषि कार्य या कृषि उपज के विपणन से जुड़े काम के दौरान हुई दुर्घटना में होनी चाहिए।
- दुर्घटना का स्पष्ट प्रमाण होना चाहिए, क्योंकि सहायता केवल प्रमाण मिलने पर ही दी जाती है।
- यह योजना केवल दुर्घटनाओं को कवर करती है। इसलिए प्राकृतिक मृत्यु और आत्महत्या के मामलों में सहायता नहीं मिलती है।
- एक ही घटना के लिए केवल एक सरकारी योजना के तहत सहायता ली जा सकती है। इसलिए राजस्थान मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना के तहत दावा करने वाला परिवार इस योजना के तहत भी दावा नहीं कर सकता।
आवश्यक दस्तावेज
मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के लिए जरूरी दस्तावेज दुर्घटना के प्रकार और प्रभावित व्यक्ति की श्रेणी पर निर्भर करते हैं। आवेदन में दुर्घटना से जुड़ी जानकारी भरने के बाद पोर्टल पर लागू दस्तावेजों की सूची दिखाई देती है।
- जन आधार कार्ड, जिसकी जरूरत ऑनलाइन आवेदन शुरू करने के लिए होती है।
- आधार कार्ड।
- बैंक की पासबुक की प्रति।
- निवास प्रमाण पत्र।
- मतदाता पहचान पत्र।
- जमीन की जमाबंदी की प्रति।
- बिजली का बिल।
- सरपंच द्वारा जारी प्रमाण पत्र।
- ₹50 के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र, जिसमें यह घोषित किया गया हो कि उसी घटना के लिए किसी अन्य योजना के तहत सहायता नहीं ली गई है।
- मृत्यु होने की स्थिति में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर)।
- मृत्यु होने की स्थिति में पोस्टमार्टम रिपोर्ट।
- शरीर का कोई अंग कटने या चोट लगने की स्थिति में चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र।
- इलाज करने वाले डॉक्टर की पर्ची और दवाइयों के बिल।
- जहां जरूरी हो, वहां कमीशन एजेंट की गारंटी।
- जहां जरूरी हो, वहां साझेदारी का समझौता।
- सांप के काटने, जहरीले कीड़े के काटने या ऊंट के काटने के मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट देना जरूरी नहीं है। इन मामलों में सरकारी चिकित्सा अधिकारी का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। सरकारी डॉक्टर के हस्ताक्षर वाला पंचनामा भी स्वीकार किया जाता है।
आवेदन प्रक्रिया
आवेदक मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के लिए राज किसान साथी पोर्टल या ई-मित्र केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें
- राजस्थान कृषि विभाग के राज किसान साथी पोर्टल पर जाएं।
- किसान या नागरिक लॉगिन पृष्ठ खोलें।
- सेवा अनुरोध की सूची में से कृषक साथी सहायता योजना चुनें।
- अपना जन आधार नंबर दर्ज करें और जमा करें पर क्लिक करें।
- दिखाई गई सूची में से परिवार के सदस्य का नाम चुनें।
- ओटीपी भेजें पर क्लिक करें और अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को दर्ज करके सत्यापन करें।
- निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और घोषणा वाले बॉक्स पर सही का निशान लगाएं।
- अगला पर क्लिक करके आवेदन फॉर्म खोलें।
- सूची में से मंडी का नाम चुनें।
- व्यक्तिगत जानकारी और पते का विवरण भरने के लिए मूल जानकारी वाला भाग पूरा करें।
- दिए गए 3 विकल्पों में से दुर्घटना का प्रकार चुनें।
- सूची में से दुर्घटना का कारण चुनें।
- दुर्घटना की तारीख, समय, स्थान और उसका संक्षिप्त विवरण दर्ज करें।
- प्रभावित व्यक्ति की जानकारी भरने के लिए प्रभावित व्यक्ति का विवरण वाला भाग पूरा करें।
- शरीर को हुए नुकसान का विवरण और प्रभावित व्यक्ति के साथ अपना संबंध दर्ज करें।
- दावे के नियम चुनने वाली सूची में से सहायता राशि का विकल्प चुनें।
- यदि एक से अधिक चोटों के लिए सहायता का दावा कर रहे हैं, तो एक और दावा जोड़ें पर क्लिक करें।
- बैंक का नाम, शाखा, आईएफएससी कोड और खाता संख्या दर्ज करके बैंक का विवरण वाला भाग पूरा करें।
- 2 गवाहों की जानकारी भरकर गवाहों का विवरण वाला भाग पूरा करें।
- दस्तावेज अपलोड करने वाले भाग में मांगे गए सभी दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन फॉर्म जमा करें।
- अपने रिकॉर्ड के लिए जमा किए गए आवेदन की एक प्रति प्रिंट कर लें।
ई-मित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन कैसे करें
- अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाएं।
- अपना जन आधार नंबर और दुर्घटना से जुड़े सभी दस्तावेज साथ लेकर जाएं।
- केंद्र के संचालक से उपयोगिता सेवाएं वाला भाग खोलने के लिए कहें।
- संचालक से कृषक साथी सहायता योजना की सेवा चुनने के लिए कहें।
- संचालक को आवेदक, प्रभावित व्यक्ति, बैंक और गवाहों की जानकारी दें।
- दस्तावेज अपलोड करने के लिए संचालक को दें।
- केंद्र से जाने से पहले आवेदन जमा करने की रसीद ले लें।
योजना के तहत शामिल दुर्घटनाएं
इस योजना के तहत केवल उन्हीं दुर्घटनाओं के लिए सहायता दी जाती है, जो आधिकारिक आवेदन निर्देशों में बताई गई परिस्थितियों में होती हैं।
- खेत में काम करते समय कृषि उपकरणों और मशीनों का इस्तेमाल करने के दौरान होने वाली दुर्घटनाएं। इसमें खेती से जुड़े सिंचाई के काम भी शामिल हैं।
- सिंचाई के लिए कुआं खोदते या नलकूप लगाते समय बिजली का करंट लगना।
- खेत के ऊपर से गुजरने वाली बिजली की तार से करंट लगना।
- खेत में सिंचाई के पानी में बिजली का करंट आने से दुर्घटना होना।
- फसलों, फलों या सब्जियों पर रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव करते समय दुर्घटना होना।
- मुख्य मंडी परिसर, उपमंडी या अधिसूचित खरीद केंद्र में कृषि मशीनों का इस्तेमाल करते समय दुर्घटना होना।
- मंडी में बोरियां एक के ऊपर एक रखते समय दुर्घटना होना।
- मंडी परिसर में ट्रैक्टर-ट्रॉली, ऊंटगाड़ी, बैलगाड़ी या भैंसगाड़ी पलटने से दुर्घटना होना।
- मंडी परिसर में कृषि उपज के कारोबार से जुड़े काम के दौरान पल्लेदार, हमाल या मजदूर की हड्डी टूटना, मृत्यु होना या शरीर का कोई अंग कटना।
- अपनी गाड़ी या किराए के वाहन से कृषि उपज लेकर मंडी जाते समय दुर्घटना होना।
- कृषि उपज बेचने के बाद गांव लौटते समय दुर्घटना होना। ऐसी दुर्घटना अगले दिन तक की अवधि में शामिल है।
- खेती के काम से घर और खेत के बीच आते-जाते समय दुर्घटना होना। इसमें मोटरसाइकिल या किसी अन्य वाहन से यात्रा करते समय होने वाली दुर्घटनाएं भी शामिल हैं।
- चारा काटने वाली मशीन या किसी अन्य कृषि मशीन में बाल फंसने से सिर की त्वचा सहित बाल उखड़ जाना।
- खेत में काम करते समय सांप, ऊंट या किसी जहरीले जीव के काटने से दुर्घटना होना।
- खेती के काम के दौरान गोह, मधुमक्खी, बिच्छू या किसी अन्य जहरीले जीव या कीड़े के काटने से दुर्घटना होना।
- खेती के काम के दौरान जंगली, पालतू या आवारा जानवर के काटने या हमला करने से दुर्घटना होना।
- कृषि कार्य करते समय बिजली गिरने से दुर्घटना होना।
- कृषि कार्य या कृषि उपज के कारोबार से जुड़े काम के दौरान रीढ़ की हड्डी टूटना।
- कृषि कार्य या कृषि उपज के कारोबार से जुड़े काम के दौरान सिर में चोट लगने से कोमा में जाना।
- फसल की सुरक्षा या पशुओं को चराने के लिए पेड़ों की छंटाई करते समय या खेत की रखवाली करते समय दुर्घटना होना।
- किसी सरकारी योजना के तहत खेत में बने डिग्गी में डूबने से मृत्यु होना।
- सिंचाई के काम के दौरान फिसलकर डिग्गी, खेत के तालाब, टांके, कुएं या पानी जमा करने के किसी अन्य ढांचे में गिरना।
- बुवाई के लिए खेत तैयार करते समय दुर्घटना होना। इसमें जमीन समतल करना और झाड़ियों को काटना भी शामिल है।
- खेत में मेड़ बनाते समय दुर्घटना होना।
- फसल काटने, इकट्ठा करने या अनाज की मड़ाई करते समय दुर्घटना होना।
- खेत में काम करते समय आंधी, तूफान या बारिश के दौरान पेड़ के नीचे दबने से मृत्यु होना या शरीर का कोई अंग कटना।
- कृषि कार्य करते समय अंडकोष नष्ट होना।
योजना के तहत शामिल नहीं होने वाली दुर्घटनाएं
यदि मृत्यु या चोट नीचे दी गई किसी भी स्थिति में होती है, तो इस योजना के तहत आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है।
- बीमारी या रोग के कारण मृत्यु होने या शरीर का कोई अंग कटने के मामले।
- आत्महत्या, मानसिक अस्वस्थता या नशीले पदार्थों के सेवन के कारण हुई मृत्यु।
- इलाज या शल्य चिकित्सा के दौरान हुई मृत्यु।
- मोटर वाहन अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करने से जुड़े मामले।
- गर्भावस्था या बच्चे के जन्म के कारण हुई मृत्यु।
- ऐसे मामले जिनमें दुर्घटना की तारीख और मृत्यु की तारीख के बीच 90 दिनों से अधिक का अंतर हो।
- हालांकि, यदि इलाज लगातार चलता रहा हो और मृत्यु उसी दुर्घटना के कारण हुई हो, तो ऐसे मामले में सहायता मिल सकती है। इसके लिए जरूरी है कि इस बीच व्यक्ति को अस्पताल से छुट्टी न दी गई हो और छुट्टी देने के बाद दोबारा अस्पताल में भर्ती न किया गया हो।
- परमाणु विकिरण या परमाणु हथियारों के कारण हुई मृत्यु।
- युद्ध, विदेशी आक्रमण, विदेशी शत्रु की कार्रवाई, गृहयुद्ध, राजद्रोह या देश-विरोधी गतिविधियों के कारण हुई मृत्यु।
- आपराधिक उद्देश्य से कानून का उल्लंघन करते समय हुई मृत्यु।
- राज्य द्वारा बनाए गए किसी कानून का उल्लंघन करने के कारण लगी चोट या हुई मृत्यु।
- खेती के काम या कृषि उपज बेचने के लिए मंडी आने-जाने के अलावा किसी अन्य कारण से हुई दुर्घटना।
आवेदन करने की समय-सीमा
योजना के नियमों के अनुसार, सहायता के लिए दावा निर्धारित समय के भीतर मंडी समिति तक पहुंचना चाहिए।
- आमतौर पर दुर्घटना या मृत्यु की तारीख से 6 महीने के भीतर आवेदन जमा करना चाहिए।
- यदि आवेदन 6 महीने के बाद जमा किया जाता है, तो उसमें देरी का कारण बताना जरूरी है।
- दुर्घटना या मृत्यु की तारीख से 15 महीने बीत जाने के बाद किसी भी स्थिति में आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता है।
- सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन पूरा होने के बाद, मंडी सचिव की जिम्मेदारी है कि वह 15 दिनों के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करवाएं।
महत्वपूर्ण लिंक
- राजस्थान मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन
- मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के आवेदन की स्थिति
- मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना की जानकारी
- मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना में आवेदन करने की मार्गदर्शिका
- राजस्थान कृषि विभाग
- राजस्थान ई-मित्र पोर्टल
संपर्क जानकारी
- राज किसान पोर्टल के संपर्क नंबर
- 0141-2927047
- 0141-2922613
- राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सहायता नंबर
- 0141-2227914
- 0141-2227336
- राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड का ईमेल: [email protected]
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के तहत पात्र किसानों, कृषि मजदूरों और कृषि मंडी में काम करने वाले श्रमिकों को खेती या कृषि उपज के विपणन से जुड़े काम के दौरान दुर्घटना में चोट लगने या मृत्यु होने पर एक बार आर्थिक सहायता दी जाती है।
इस योजना के तहत दुर्घटना के प्रकार, उसकी गंभीरता और लागू नियमों के आधार पर ₹5,000 से ₹2,00,000 तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।
राजस्थान के किसान, कृषि मजदूर और लाइसेंस प्राप्त मंडी श्रमिक इस योजना के पात्र हैं। आवेदक राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए और उसकी आयु 14 से 75 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
हां। यह इसी योजना का पुराना नाम है। पहले की योजना में दी जाने वाली सहायता राशि और नियमों को काफी हद तक जारी रखा गया है।
इस योजना में खेती और कृषि उपज के विपणन से जुड़ी निर्धारित दुर्घटनाएं शामिल हैं। इनमें कृषि मशीनों से होने वाली दुर्घटनाएं, बिजली का करंट लगना, जहरीले जीवों के काटने, बिजली गिरने, फसल काटने के दौरान होने वाली दुर्घटनाएं और कृषि उपज लेकर मंडी आते-जाते समय होने वाली पात्र दुर्घटनाएं शामिल हैं।
हां। दुर्घटना में मृत्यु होने पर मृतक के पात्र आश्रित को ₹2,00,000 की निश्चित आर्थिक सहायता दी जाती है।
Yes. Landless agricultural workers and eligible agricultural labourers are included among the covered beneficiary categories, subject to the scheme's eligibility conditions.
हां। लाइसेंस प्राप्त हमाल, पल्लेदार और कृषि मंडी में काम करने वाले अन्य पात्र श्रमिक योजना के तहत शामिल काम के दौरान दुर्घटना होने पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
आवेदक जन आधार की जानकारी का उपयोग करके राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या ई-मित्र सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
योजना के नियमों के अनुसार, दुर्घटना की तारीख से 6 महीने के भीतर आवेदन करना चाहिए। देरी होने पर उसका कारण बताकर आवेदन जमा किया जा सकता है, लेकिन दुर्घटना की तारीख से 15 महीने बीतने के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता है। ये समय-सीमाएं वर्तमान ऑनलाइन जानकारी में दोबारा नहीं दी गई हैं, इसलिए संबंधित मंडी समिति से इनकी पुष्टि कर लें।
आवेदन और सभी जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बाद 15 दिनों के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसकी जिम्मेदारी मंडी सचिव की होती है।
नहीं। उपलब्ध योजना की जानकारी के अनुसार, पात्र लाभार्थियों को आर्थिक सहायता पाने के लिए किसी तरह का प्रीमियम या योगदान नहीं देना होता है।
उपलब्ध योजना की जानकारी के अनुसार, संबंधित मंडी समिति के कोष से खाता-धारक के नाम का चेक या डिमांड ड्राफ्ट जारी करके आर्थिक सहायता दी जाती है।
हां। योजना की जानकारी के अनुसार, एक ही दुर्घटना में लगी कई पात्र चोटों के लिए सहायता का दावा किया जा सकता है। इसके लिए योजना के लागू नियमों का पालन करना जरूरी है।
अगर योजनाओं के बारे में आपका कोई सवाल है, तो उसे योजना के फोरम में सबमिट करें और जवाब पाएँ:
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यह फोरम निम्न कामों के लिए एक बेहतरीन जगह है:
- सवाल पूछें: अगर आपके मन में योजना से जुड़ा कोई सवाल है या आप इस विषय के किसी पहलू के बारे में और जानकारी चाहते हैं।
- योजना से जुडी अपनी बातें साझा करें: अपनी जानकारी और अनुभव शेयर करें।
- दूसरों से जुड़ें: कम्युनिटी से जुड़ें और दूसरों से सीखें।
हम आपको इस फ़ोरम में सक्रिय रूप से भाग लेने और इस बेहतरीन रिसोर्स का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते है।
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