- डेयरी, बकरी एवं भेड़ पालन, मुर्गी पालन, सूकर पालन और चारा विकास में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सहायता दी जाती है।
- लागू घटकों के तहत पात्र लाभार्थियों को 50% तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति लाभार्थियों को 75% तक सहायता दी जाती है।
- पात्र पशुधन एवं संबंधित व्यवसायों के लिए लिए गए ऋण पर 4% ब्याज रियायत दी जाती है।
- मुख्यमंत्री योजना टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1962
- MahaDBT पोर्टल हेल्पलाइन नंबर: 022-61316429
योजना का अवलोकन | |
|---|---|
| योजना का नाम | महाराष्ट्र मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्योजकता योजना |
| लाभ | पशुधन उद्यमिता के लिए वित्तीय सहायता |
| लाभार्थी | किसान एवं पात्र पशुधन उद्यमी |
| नोडल विभाग | महाराष्ट्र पशुपालन विभाग |
| सब्सक्रिप्शन | योजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे। |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन |
मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्योजकता योजना महाराष्ट्र सरकार की एक राज्य स्तरीय पहल है, जिसका क्रियान्वयन महाराष्ट्र सरकार के कृषि, पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत डेयरी, बकरी एवं भेड़ पालन, मुर्गी पालन, चारा विकास, पशुधन प्रबंधन और इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पशुधन एवं संबद्ध कृषि गतिविधियों को एक व्यापक ढांचे के तहत शामिल किया गया है।
यह योजना मार्च 2026 की शुरुआत में शुरू की गई थी। इसके बाद महाराष्ट्र पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग ने अप्रैल 2026 के मध्य में एक पूरक अधिसूचना जारी की। इसके माध्यम से साइलेज प्लांट घटक में पात्र किसान संगठनों को शामिल किया गया और सूकर पालन के समूह वितरण के लिए एक अलग घटक शुरू किया गया। इस पूरक अधिसूचना के माध्यम से सूकर पालन के लिए पहले से उपलब्ध 4% ब्याज रियायत का दायरा भी बढ़ाया गया।
मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्योजकता योजना विकसित महाराष्ट्र 2047 के तहत पशुधन से संबंधित पहलों का हिस्सा है। मूल दिशानिर्देशों का उद्देश्य डेयरी, मुर्गी पालन और पशुपालन जैसी संबद्ध कृषि गतिविधियों को उद्यमिता का स्वरूप देते हुए एक एकीकृत व्यवस्था विकसित करना है। योजना के अंतर्गत डेयरी, बकरी एवं भेड़ पालन, मुर्गी पालन उद्यम, चारा विकास, पात्र पशुधन संबंधी ऋणों पर ब्याज रियायत तथा पशुधन प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित तकनीकों के उपयोग जैसे विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं।
योजना के सभी घटकों में वित्तीय सहायता समान नहीं है। कई व्यक्तिगत लाभ वाले घटकों में सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को 50% और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को 75% सहायता दी जाती है। वहीं, कुछ घटकों के लिए अलग-अलग सहायता सीमा, परियोजना लागत और अन्य शर्तें निर्धारित हैं। इसलिए मिलने वाली सब्सिडी संबंधित घटक, परियोजना और लाभार्थी की श्रेणी पर निर्भर करती है।
पशुधन उद्यमिता से संबंधित पहलों के अलावा महाराष्ट्र सरकार किसानों के कल्याण एवं सहायता के लिए अन्य योजनाएं भी संचालित कर रही है। महाराष्ट्र बिरसा मुंडा कृषि क्रांति योजना आदिवासी एवं अन्य पात्र किसानों को कृषि सुधार और संबंधित गतिविधियों के लिए वित्तीय एवं विकासात्मक सहायता प्रदान करती है। वहीं, महाराष्ट्र मागेल त्याला सौर कृषि पंप योजना मांग के आधार पर किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंप उपलब्ध कराती है, जिससे टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलता है।
योजना के प्रमुख लाभ
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्योजकता योजना के तहत लाभार्थी द्वारा चुने गए घटक के आधार पर अलग-अलग प्रकार की सहायता प्रदान की जाती है।
- गाय या भैंस से संबंधित डेयरी परियोजनाओं के लिए सहायता।
- बकरी एवं भेड़ पालन परियोजनाओं के लिए सहायता।
- पात्र मुर्गी पालन परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता।
- चारा विकास घटक के तहत साइलेज हार्वेस्टर और बेलर उपकरण के लिए सहायता।
- निर्धारित पशुधन एवं संबद्ध व्यवसायों के लिए लिए गए पात्र ऋण पर 4% ब्याज रियायत।
- गाय एवं भैंस के पशुधन प्रबंधन के लिए सेंसर या स्मार्ट कॉलर बेल्ट जैसी तकनीकों हेतु सहायता।
- अप्रैल 2026 के पूरक सरकारी संकल्प (GR) के तहत बीमा सहित नए 5+1 सूकर पालन समूह के लिए सहायता।
- संबंधित घटकों के तहत वितरित पशुओं का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भारत पशुधन पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक है।
डेयरी फार्मिंग घटक
इस घटक के तहत पांच गाय/भैंस की डेयरी परियोजना के लिए पशु, बीमा, शेड और आवश्यक उपकरणों की सहायता प्रदान की जाती है।
- कुल परियोजना लागत: ₹11,35,180
- पशुधन: ₹5,00,000
- बीमा: ₹5,60,180
- शेड: ₹3,00,000
- उपकरण: ₹2,75,000
- सब्सिडी: सामान्य श्रेणी के लिए 50% (₹5,67,590) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए 75% (₹8,51,385)
- सब्सिडी दो चरणों में जारी की जाती है।
- दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 5% और महिलाओं के लिए 30% आरक्षण।
डेयरी घटक के लिए पात्रता
- कम से कम 1 एकड़ स्वयं की भूमि या कम से कम 5 वर्ष की पंजीकृत लीज वाली भूमि आवश्यक है। वन अधिकार धारकों के लिए यह शर्त लागू नहीं है।
- सरकारी/गैर-सरकारी संस्थान से प्रशिक्षण या डेयरी फार्मिंग में 2 वर्ष का अनुभव।
- चयन के बाद, लेकिन सब्सिडी प्राप्त करने से पहले प्रशिक्षण पूरा किया जा सकता है।
बकरी एवं भेड़ पालन घटक
इस घटक के तहत 50+5 बकरी/भेड़ समूह के लिए बीमा, शेड और उपकरण सहित सहायता प्रदान की जाती है।
- कुल परियोजना लागत: ₹11,38,554
- सब्सिडी: सामान्य श्रेणी के लिए 50% (₹5,69,277) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए 75% (₹8,53,915)
- सब्सिडी चरणबद्ध तरीके से जारी की जाती है।
- दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 5% और महिलाओं के लिए 30% आरक्षण।
बकरी एवं भेड़ पालन के लिए पात्रता
- कम से कम 1 एकड़ स्वयं की भूमि या कम से कम 5 वर्ष की पंजीकृत लीज वाली भूमि आवश्यक है। वन अधिकार धारकों के लिए यह शर्त लागू नहीं है।
- सरकारी/गैर-सरकारी संस्थान से प्रशिक्षण या बकरी/भेड़ पालन में 2 वर्ष का अनुभव।
- पशुओं की खरीद निर्धारित खरीद समिति के माध्यम से की जानी होगी।
मुर्गी पालन घटक
इस योजना के तहत निर्धारित परियोजनाओं के माध्यम से मुर्गी पालन उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाता है। इनमें 3,000 से 5,000 देशी/उन्नत मांस प्रजाति के पक्षियों के पालन की परियोजनाएं शामिल हैं। परियोजना लागत और सब्सिडी सरकारी संकल्प में निर्धारित की गई है। सामान्य श्रेणी के लिए 50% और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए 75% सब्सिडी का प्रावधान है। लाभार्थी के पास कम से कम 20 गुंठा भूमि या 5 वर्ष की पंजीकृत लीज वाली भूमि तथा मुर्गी पालन व्यवसाय में 2 वर्ष का अनुभव या मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण होना आवश्यक है।
पोल्ट्री इन्क्यूबेशन घटक
इस घटक के तहत प्रति सप्ताह 1,000 अंडों की क्षमता वाले इन्क्यूबेटर और हैचर के साथ सोलर यूनिट के लिए सहायता दी जाती है।
- कुल परियोजना लागत: ₹3,40,000
- सब्सिडी: सामान्य श्रेणी के लिए 50% और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए 75%
चारा विकास एवं साइलेज प्लांट घटक
इस घटक के तहत चार-पंक्ति वाले साइलेज हार्वेस्टर और साइलेज बेलर के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
- उपकरण की लागत: ₹26 लाख तक
- सब्सिडी: सामान्य श्रेणी के लिए 50% और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए 75%
- आवेदक के पास कम से कम 10 बड़े पशु या 100 बकरी/भेड़ होनी चाहिए और उसके पास कम से कम 50 HP का ट्रैक्टर होना चाहिए।
पशुधन उद्यमों के लिए 4% ब्याज रियायत
बकरी/भेड़ पालन, गाय/भैंस पालन, मुर्गी पालन, चारा प्रसंस्करण और पशु आहार निर्माण परियोजनाओं के लिए लिए गए पात्र ऋण पर 4% ब्याज रियायत का प्रावधान है।
- अधिकतम लाभ: ₹4 लाख
- यह लाभ पूरे ऋण के पुनर्भुगतान के बाद DBT के माध्यम से बैक-एंडेड सब्सिडी के रूप में दिया जाता है।
पशुधन प्रबंधन के लिए AI एवं स्मार्ट कॉलर सहायता
गाय और भैंस के लिए प्रति पशु ₹5,000 की लागत वाले सेंसर/स्मार्ट कॉलर बेल्ट तथा एक पशु शेड के लिए ₹10,000 की लागत वाला गेटवे उपलब्ध कराया जाता है।
- यह सुविधा 5 से 40 गाय/भैंस रखने वाले किसानों के लिए लागू है।
- सहायता: 50%, अधिकतम ₹1 लाख प्रति लाभार्थी।
- पशुओं का भारत पशुधन पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक है।
पात्रता आवश्यकताएं
योजना के तहत पात्रता लाभार्थी की श्रेणी और संबंधित घटक के लिए निर्धारित शर्तों पर निर्भर करती है।
- आवेदक का चयनित घटक के लिए निर्धारित लाभार्थी श्रेणी में होना आवश्यक है।
- भूमि: डेयरी तथा बकरी/भेड़ पालन घटकों के लिए कम से कम 1 एकड़ स्वयं की भूमि या 5 वर्ष की पंजीकृत लीज वाली भूमि आवश्यक है। वन अधिकार धारकों के लिए यह शर्त लागू नहीं है।
- लाभार्थी चयन में प्राथमिकता क्रम:
- अत्यंत सीमांत किसान (1 हेक्टेयर तक भूमि वाले)
- सीमांत किसान (1 से 2 हेक्टेयर भूमि वाले)
- वन अधिकार धारक
- महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य
- संबंधित गतिविधि में प्रशिक्षण या कम से कम 2 वर्ष का व्यावहारिक अनुभव।
- दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 5% आरक्षण।
- डेयरी एवं बकरी/भेड़ घटकों में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण।
- एक परिवार से केवल एक व्यक्ति योजना का लाभ प्राप्त कर सकता है।
- पिछले 3 वर्षों में केंद्र या राज्य सरकार की समान योजना का लाभ नहीं लिया होना चाहिए।
- यह योजना महाराष्ट्र के सभी जिलों में लागू है, लेकिन मुंबई और मुंबई उपनगरीय जिले इसके दायरे से बाहर हैं।
आवश्यक दस्तावेज
आवश्यक दस्तावेज चयनित घटक के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। सामान्यतः निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक हैं:
- भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड या निर्धारित पंजीकृत लीज दस्तावेज।
- वन अधिकार से संबंधित दस्तावेज।
- प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र या निर्धारित अनुभव प्रमाण-पत्र।
- पात्र दिव्यांग व्यक्तियों के लिए UDID प्रमाण-पत्र।
- जहां लागू हो, स्वयं सहायता समूह की सदस्यता प्रमाण-पत्र।
- जहां निर्धारित हो, स्थानीय पशु चिकित्सा/पशुधन विकास अधिकारी का प्रमाण-पत्र।
- ऋण से जुड़े घटकों के लिए बैंक परियोजना स्वीकृति या ऋण स्वीकृति दस्तावेज।
- निर्धारित साइलेज उपकरण घटक के लिए ट्रैक्टर पंजीकरण प्रमाण-पत्र।
- शेड की उपलब्धता और अन्य घटक-विशिष्ट शर्तों से संबंधित स्व-घोषणा।
- DBT के लिए बैंक खाते का विवरण।
आवेदन करने की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्योजकता योजना के लिए आवेदन करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:
- सबसे पहले MahaDBT पोर्टल पर जाएं।
- यदि आप नए उपयोगकर्ता हैं, तो New User Registration पर क्लिक करें और अपने आधार से लिंक मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण पूरा करें।
- पंजीकरण के बाद अपने लॉगिन विवरण का उपयोग करके पोर्टल पर लॉगिन करें।
- Apply for Scheme पर जाएं या महाराष्ट्र मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्योजकता योजना खोजें। आप संबंधित घटक, जैसे बकरी/भेड़ या मुर्गी पालन, भी चुन सकते हैं।
- ऑनलाइन आवेदन पत्र में सभी जानकारी सही तरीके से भरें।
- सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन जमा करें और आगे आवेदन की स्थिति ट्रैक करने के लिए आवेदन/संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
आवेदन प्रक्रिया कैसे काम करती है?
- पशुपालन एवं डेयरी विकास आयुक्त द्वारा हर वर्ष आवेदन के लिए वार्षिक कार्यक्रम निर्धारित किया जाता है।
- निर्धारित अवधि के भीतर ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं।
- प्राप्त आवेदनों की ऑनलाइन जांच की जाती है।
- पात्र लाभार्थियों का चयन निर्धारित समिति द्वारा लॉटरी/यादृच्छिक चयन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।
- भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय व्यावसायिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए जिलेवार लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं।
- अपर्याप्त धनराशि के कारण जिन आवेदकों को तत्काल लाभ नहीं दिया जा सकता, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रतीक्षा सूची में रखा जा सकता है।
- संबंधित योजनाओं के लिए हर वर्ष आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं।
- पिछले वर्ष की प्रतीक्षा सूची में शामिल आवेदकों को निर्धारित नियमों के अनुसार प्राथमिकता दी जाती है।
- चयनित लाभार्थियों की सूची निर्धारित आधिकारिक प्रणाली के माध्यम से प्रकाशित की जाती है।
- चयनित लाभार्थियों को संबंधित सहायक आयुक्त/पशुपालन एवं डेयरी विकास अधिकारियों द्वारा सूचित किया जाता है।
सब्सिडी भुगतान और DBT
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्योजकता योजना में पात्र सब्सिडी के भुगतान के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली अपनाई जाती है।
- व्यक्तिगत लाभ वाली योजनाओं में पशुओं की खरीद या परियोजना पूरी होने के बाद सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT के माध्यम से जमा की जाती है।
- परियोजना आधारित योजनाओं में निर्धारित चरण पूरे होने के बाद सब्सिडी चरणबद्ध तरीके से जारी की जा सकती है।
- 4% ब्याज रियायत पात्र ऋण के पुनर्भुगतान और आवश्यक बैंक प्रमाण-पत्र जमा करने के बाद बैक-एंडेड सब्सिडी के रूप में प्रदान की जाती है।
- निर्धारित परियोजना लागत से अधिक होने वाला कोई भी अतिरिक्त खर्च लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा।
महत्वपूर्ण लिंक
- महाराष्ट्र मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्योजकता योजना दिशा-निर्देश
- महाराष्ट्र पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग
- MahaDBT महाराष्ट्र पोर्टल
संपर्क जानकारी
- मुख्यमंत्री योजना टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1962
- MahaDBT पोर्टल हेल्पलाइन नंबर: 022-61316429
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह महाराष्ट्र सरकार की एक राज्य स्तरीय व्यापक योजना है, जिसका उद्देश्य डेयरी, बकरी एवं भेड़ पालन, मुर्गी पालन और चारा संबंधी गतिविधियों में उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
इस योजना का क्रियान्वयन महाराष्ट्र सरकार के कृषि, पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन विभाग द्वारा किया जाता है।
अधिकांश व्यक्तिगत लाभ वाले घटकों में सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को 50% और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को 75% सब्सिडी दी जाती है।
5 गाय/भैंस की डेयरी इकाई की कुल परियोजना लागत ₹11,38,554 है।
आवेदक के पास पशुपालन संबंधी संस्थागत प्रशिक्षण या संबंधित गतिविधि में कम से कम 2 वर्ष का व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।
हां। डेयरी तथा बकरी-भेड़ पालन घटकों में महिलाओं के लिए 30% और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 5% आरक्षण का प्रावधान है।
निर्धारित परियोजना चरण पूरे होने के बाद सब्सिडी की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाती है।
नहीं। यह योजना महाराष्ट्र के सभी जिलों में लागू है, लेकिन मुंबई और मुंबई उपनगरीय जिले इसके दायरे में शामिल नहीं हैं।
हां। योजना के तहत वितरित पशुओं का भारत पशुधन पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य है।
नहीं। जिन परिवारों ने पिछले तीन वर्षों में केंद्र या राज्य सरकार की किसी समान योजना का लाभ लिया है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
पशुपालन एवं डेयरी विकास आयुक्त द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हर वर्ष ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं।
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- सवाल पूछें: अगर आपके मन में योजना से जुड़ा कोई सवाल है या आप इस विषय के किसी पहलू के बारे में और जानकारी चाहते हैं।
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हम आपको इस फ़ोरम में सक्रिय रूप से भाग लेने और इस बेहतरीन रिसोर्स का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते है।
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