उत्तर प्रदेश ओडीओपी विपणन विकास सहायता (एमडीए) योजना

द्वारा प्रस्तुत shivanibanduni… on Tue, 03/11/2026 - 14:40
Yogi Adityanath CM Uttar Pradesh
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हाइलाइट
  • इस योजना के तहत पात्र विपणन एवं प्रचार संबंधी खर्चों पर 75% तक की प्रतिपूर्ति प्रदान की जाती है।
  • स्टॉल शुल्क, माल परिवहन, यात्रा और ई-कॉमर्स से संबंधित खर्चों पर वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • राज्य के सभी 75 जिलों के पात्र ओडीओपी कारीगर, बुनकर और उद्यमी इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ग्राहक देखभाल फ़ोन नंबर
  • उद्योग निदेशालय, उत्तर प्रदेश के संपर्क नंबर:
    • 0512-2218401
    • 0512-2234956
    • 0512-2219166
  • उद्योग निदेशालय हेल्पलाइन नंबर: 155343
योजना का अवलोकन
योजना का नामउत्तर प्रदेश ओडीओपी विपणन विकास सहायता (एमडीए) योजना
लाभविपणन संबंधी खर्चों पर 75% तक की प्रतिपूर्ति
लाभार्थीउत्तर प्रदेश के ओडीओपी कारीगर एवं उद्यमी
नोडल विभागउद्योग निदेशालय, उत्तर प्रदेश
सब्सक्रिप्शनयोजना की निरंतर जानकारी के लिए यहाँ सब्सक्राइब करे।
आवेदन का तरीकाऑनलाइन

योजना के बारे में

उत्तर प्रदेश ओडीओपी विपणन विकास सहायता (एमडीए) योजना राज्य सरकार की प्रमुख एक जिला एक उत्पाद (One District One Product – ODOP) पहल के अंतर्गत संचालित एक वित्तीय सहायता योजना है। इस योजना का क्रियान्वयन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा किया जाता है। इसके अंतर्गत राज्य सरकार कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों, उद्यमियों और एमएसएमई इकाइयों को उनके जिले के चिन्हित ओडीओपी उत्पादों के प्रचार-प्रसार और विपणन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह सहायता व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, क्रेता-विक्रेता सम्मेलनों तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री और बाजार तक पहुँच बढ़ाने के लिए दी जाती है।

इस योजना की शुरुआत मूल रूप से "एक जिला एक उत्पाद विपणन प्रोत्साहन योजना" के नाम से की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों का निर्माण करने वाले कारीगरों और छोटे उद्यमियों को बड़े बाजारों तक पहुँचने में आने वाली आर्थिक कठिनाइयों को कम करना है। कई बार उत्कृष्ट उत्पाद बनाने के बावजूद कारीगर स्टॉल किराया, माल ढुलाई और यात्रा जैसे खर्चों के कारण बड़े व्यापारिक आयोजनों में भाग नहीं ले पाते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए योजना के माध्यम से ओडीओपी उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों, निर्यात प्रोत्साहन और बाजार संपर्क को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।

इस योजना का प्रमुख लाभ पात्र विपणन एवं प्रचार संबंधी खर्चों पर 75% तक की प्रतिपूर्ति है। इसके अंतर्गत देश के भीतर और विदेशों में आयोजित मेलों एवं प्रदर्शनियों के स्टॉल शुल्क, माल परिवहन, यात्रा तथा हवाई यात्रा से संबंधित निर्धारित खर्चों पर सहायता दी जाती है। इसके अलावा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर व्यवसाय शुरू करने और विज्ञापन से जुड़े कुछ खर्चों पर भी वित्तीय सहायता का प्रावधान है। साथ ही, निर्यात संवर्धन परिषदों और अधिकृत सरकारी संस्थाओं को ओडीओपी उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय प्रचार के लिए विदेशी व्यापार मेलों, शिल्प उत्सवों, सेमिनारों, कार्यशालाओं, क्रेता-विक्रेता सम्मेलनों और बाजार अध्ययन जैसे आयोजनों में भी सहायता प्रदान की जाती है।

यह योजना प्रतिपूर्ति के आधार पर कार्य करती है। पात्र आवेदक को पहले संबंधित मेले या प्रदर्शनी में भाग लेकर निर्धारित खर्चों का भुगतान करना होता है। इसके बाद वह आवश्यक बिलों और भुगतान प्रमाणों के साथ उत्तर प्रदेश एमएसएमई पोर्टल पर ऑनलाइन दावा प्रस्तुत कर सकता है। जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र (DIEPC) द्वारा आवेदन और दस्तावेजों की जाँच की जाती है। यदि आवेदन में कोई जानकारी या दस्तावेज अधूरा होता है, तो उसे सुधार के लिए वापस किया जा सकता है। आवेदक को गतिविधि पूरी होने वाले महीने को छोड़कर 120 दिनों के भीतर दावा प्रस्तुत करना होता है। विभाग द्वारा आवेदनों का निस्तारण पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर और बजट की उपलब्धता के अनुसार किया जाता है। एक आवेदक प्रत्येक निर्धारित उद्देश्य के लिए एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम तीन बार सहायता प्राप्त कर सकता है।

ओडीओपी विपणन विकास सहायता योजना के अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश उद्योग निदेशालय ओडीओपी कार्यक्रम के अंतर्गत कई अन्य योजनाएँ भी संचालित करता है। इनमें उत्तर प्रदेश ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना शामिल है, जिसके तहत कारीगरों को निःशुल्क अल्पकालिक प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) वित्तपोषण सहायता योजना के माध्यम से जिले के विशिष्ट व्यंजन उत्पादों से संबंधित इकाइयाँ स्थापित करने या उनका विस्तार करने वाले उद्यमियों को मार्जिन मनी सहायता प्रदान की जाती है। आप इन दोनों योजनाओं की विस्तृत जानकारी संबंधित लिंक पर देख सकते हैं।

योजना के लाभ

इस योजना के अंतर्गत ओडीओपी उत्पादों के निर्माताओं और उद्यमियों को पात्र विपणन एवं प्रचार संबंधी खर्चों पर 75% तक की प्रतिपूर्ति प्रदान की जाती है। विभिन्न प्रकार के आयोजनों और गतिविधियों के लिए सहायता की अलग-अलग अधिकतम सीमाएँ निर्धारित की गई हैं।

उत्तर प्रदेश में आयोजित मेले एवं प्रदर्शनियाँ

  • स्टॉल शुल्क: घरेलू मेलों के लिए स्टॉल शुल्क का 75%, अधिकतम ₹50,000 तक तथा अंतरराष्ट्रीय मेलों के लिए अधिकतम ₹1.5 लाख तक।
  • माल परिवहन: माल ढुलाई के खर्च का 75%, अधिकतम ₹7,500 तक।
  • यात्रा खर्च: एक व्यक्ति के लिए वास्तविक तृतीय श्रेणी एसी (3AC) रेल किराया या एसी बस किराया।

उत्तर प्रदेश के बाहर भारत में आयोजित मेले एवं प्रदर्शनियाँ

  • स्टॉल शुल्क: स्टॉल शुल्क का 75%, अधिकतम ₹2 लाख तक।
  • माल परिवहन: माल ढुलाई के खर्च का 75%, अधिकतम ₹25,000 (B2B) या ₹50,000 (B2C) तक।
  • यात्रा खर्च: आधिकारिक ओडीओपी पोर्टल पर उल्लिखित अधिकतम ₹7,000 तक का 75% इकोनॉमी क्लास हवाई किराया अथवा तृतीय श्रेणी एसी रेल किराया/एसी बस किराया।

विदेशों में आयोजित प्रदर्शनियाँ

  • स्टॉल शुल्क: स्टॉल शुल्क का 75%, अधिकतम ₹2 लाख तक।
  • माल परिवहन: माल ढुलाई के खर्च का 75%, अधिकतम ₹25,000 (B2B) या ₹50,000 (B2C) तक।
  • हवाई यात्रा: इकोनॉमी क्लास हवाई किराए का 75%, अधिकतम ₹75,000 तक।
  • घरेलू यात्रा: यात्रा के घरेलू हिस्से के लिए तृतीय श्रेणी एसी रेल किराया या एसी बस किराया।

ई-कॉमर्स सहायता

  • किसी एक मान्यता प्राप्त वेबसाइट या ई-कॉमर्स पोर्टल पर व्यवसाय शुरू करने के लिए पात्र खर्चों का 75%, अधिकतम ₹10,000 तक।

निर्यात संवर्धन परिषदों एवं प्राधिकरणों के लिए सहायता

  • उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्धन परिषद अथवा केंद्र या राज्य सरकार की अन्य परिषदों एवं प्राधिकरणों द्वारा आयोजित विदेशी मेलों या अंतरराष्ट्रीय स्तर के मेलों में आयोजन अथवा भागीदारी के लिए कुल खर्च का 75%, अधिकतम ₹75 लाख तक। इन मेलों में कम से कम 20 इकाइयों की भागीदारी आवश्यक है।
  • ओडीओपी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित शिल्प उत्सवों, सेमिनारों, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, क्रेता-विक्रेता सम्मेलनों और बाजार अध्ययन पर किए गए वास्तविक खर्च का 75%, अधिकतम ₹100 लाख तक।
  • शेष 25% खर्च संबंधित प्रतिभागियों, इकाइयों या परिषद द्वारा वहन किया जाएगा।

पात्रताएं

ओडीओपी विपणन विकास सहायता योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदकों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित निम्नलिखित पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक है।

  • आवेदक उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए।
  • आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • आवेदक कारीगर, बुनकर, शिल्पकार, उद्यमी, निर्यातक या एमएसएमई इकाई से संबंधित होना चाहिए, जो अपने जिले के चिन्हित ओडीओपी उत्पाद के उत्पादन या विपणन में संलग्न हो।
  • मेले या प्रदर्शनी में प्रतिभागी को केवल ओडीओपी उत्पादों का ही प्रदर्शन या विक्रय करना होगा।
  • आवेदक ने वास्तव में संबंधित मेले या प्रदर्शनी में भाग लिया हो तथा उसके पास खर्चों के बिल और भुगतान प्रमाण उपलब्ध होने चाहिए।
  • उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के पात्र आवेदक इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • एक आवेदक प्रत्येक निर्धारित उद्देश्य के लिए एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम तीन बार सहायता का दावा कर सकता है।
  • जिन आवेदकों ने पिछले दो वर्षों के दौरान केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य योजना के अंतर्गत इसी प्रकार का लाभ प्राप्त किया है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

आवश्यक दस्तावेज

ओडीओपी विपणन विकास सहायता योजना के अंतर्गत ऑनलाइन दावा प्रस्तुत करते समय आवेदकों को आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे।

  • आधार कार्ड या अन्य पहचान प्रमाण (जैसे मतदाता पहचान पत्र)।
  • आयु प्रमाण पत्र।
  • पासपोर्ट आकार का फोटो।
  • उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र।
  • बैंक पासबुक या रद्द किया हुआ चेक (Cancelled Cheque)।
  • जाति प्रमाण पत्र (यदि आरक्षित श्रेणी के आवेदक पर लागू हो)।
  • दिव्यांगता प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।
  • स्टॉल आवंटन पत्र या स्टॉल शुल्क की रसीद।
  • माल ढुलाई का बिल।
  • यात्रा टिकट।
  • संबंधित दावे के लिए आवश्यक अन्य दस्तावेज।

आवेदन प्रक्रिया

ओडीओपी विपणन विकास सहायता योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन है। पात्र आवेदक उद्योग निदेशालय, उत्तर प्रदेश के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करके आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने में सहायता की आवश्यकता होने पर आवेदक नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की मदद भी ले सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया निम्नलिखित है:

  • सबसे पहले उद्योग निदेशालय, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।
  • अब वेबसाइट पर उपलब्ध Schemes & Apply सेक्शन में जाएँ और सूची में से ओडीओपी विपणन विकास सहायता योजना का चयन करें।
  • योजना के विवरण के नीचे दिए गए पंजीकरण फॉर्म को खोलें। इसमें अपना नाम, जन्मतिथि, पिता/पति का नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी (वैकल्पिक), जिला और कैप्चा कोड दर्ज करें।
  • दी गई जानकारी की सत्यता और उत्तर प्रदेश का निवासी होने संबंधी घोषणा को स्वीकार करें। इसके बाद Submit Registration बटन पर क्लिक करें।
  • पंजीकरण सफल होने के बाद पोर्टल पर यूजर आईडी जनरेट होती है और लॉगिन संबंधी जानकारी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भेजी जाती है।
  • अब पंजीकृत आवेदक लॉगिन पेज पर जाएँ और अपनी यूजर आईडी, पासवर्ड तथा कैप्चा कोड दर्ज करके लॉगिन करें।
  • शेष आवेदन फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरें और निर्धारित प्रारूप एवं फाइल आकार के अनुसार जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। इनमें शपथ पत्र (Affidavit) और परियोजना रिपोर्ट (Project Report) भी शामिल हैं।
  • आवेदन में दर्ज सभी जानकारियों और अपलोड किए गए दस्तावेजों की अच्छी तरह जाँच करें। इसके बाद Final Submit पर क्लिक करके आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

महत्त्वपूर्ण लिंक

संपर्क जानकारी

  • उद्योग निदेशालय, उत्तर प्रदेश के संपर्क नंबर:
    • 0512-2218401
    • 0512-2234956
    • 0512-2219166
  • उद्योग निदेशालय हेल्पलाइन नंबर: 155343

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह योजना ओडीओपी उत्पादों के विपणन के लिए पात्र खर्चों पर 75% तक की प्रतिपूर्ति प्रदान करती है।

उत्तर प्रदेश के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के ओडीओपी कारीगर, बुनकर, शिल्पकार और उद्यमी आवेदन कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के घरेलू मेलों में ₹50,000, अंतरराष्ट्रीय मेलों में ₹1.5 लाख और अन्य मेलों में ₹2 लाख तक सहायता मिल सकती है।

हाँ। एक मान्यता प्राप्त ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर व्यवसाय शुरू करने के लिए 75%, अधिकतम ₹10,000 तक सहायता मिलती है।

प्रत्येक निर्धारित उद्देश्य के लिए एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम तीन बार।

गतिविधि समाप्त होने वाले महीने को छोड़कर 120 दिनों के भीतर दावा जमा करना होता है।

संबंधित जिले का जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र (DIC/DIEPC) आवेदन की जाँच करता है।

पोर्टल पर लॉगिन करके जरूरी सुधार करें और आवेदन दोबारा जमा करें।

नहीं। पहले खर्च करना होता है, फिर बिल और भुगतान प्रमाण के आधार पर प्रतिपूर्ति मिलती है।

आवेदन उत्तर प्रदेश एमएसएमई पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाता है।

अगर योजनाओं के बारे में आपका कोई सवाल है, तो उसे योजना के फोरम में सबमिट करें और जवाब पाएँ:

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